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'लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था में बातचीत श्रेष्ठ माध्‍यम'

पीठासीन अधिकारियों के अखिल भारतीय सम्‍मेलन में बोले राष्ट्रपति

गुजरात में देश की विधानसभा व पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन

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Wednesday 25 November 2020 05:05:37 PM

all india conference of presiding officers in kevadia

केवड़िया (गुजरात)। राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आज केवड़िया में पीठासीन अधिकारियों के 80वें अखिल भारतीय सम्‍मेलन में कहा है कि लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था में बातचीत का माध्‍यम ही वह सर्वश्रेष्‍ठ माध्‍यम है जो विचार-विमर्श को विवाद में परिणत नहीं होने देता। राष्‍ट्रपति ने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में सत्तारूढ़ दल के साथ विपक्ष की भी बहुत महत्‍वपूर्ण भूमिका होती है, इसलिए इन दोनों के बीच सामंजस्‍य, सहयोग और सार्थक विचार-विमर्श बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि पीठासीन अधिकारियों की यह जिम्‍मेदारी है कि वे सदन में जन प्रतिनिधियों को स्‍वस्‍थ बहस के लिए अनुकूल माहौल प्रदान करें और सभ्‍य व्‍यवहार तथा विचार-विमर्श को प्रोत्‍साहित करें।
राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि निष्‍पक्षता और न्‍याय हमारी संसदीय लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था का आधार है, सदन में अध्‍यक्ष का आसन गरिमा और कर्तव्‍य पालन का पर्याय है, इसके लिए पूरी ईमानदारी और न्‍याय की भावना होनी जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह निष्‍पक्षता, न्‍यायपरायणता और सद्व्‍यवहार का भी प्रतीक है और पीठासीन अधिकारियों से यह आशा की जाती है कि वे अपने कर्तव्‍य पालन में इन आदर्शों का ध्‍यान रखेंगे। राष्‍ट्रपति ने कहा कि लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था लोगों के कल्‍याण के लिए सबसे प्रभावी व्‍यवस्‍था साबित हुई है, अत: संसद और विधानसभा का सदस्‍य होना बहुत गर्व की बात है। उन्‍होंने कहा कि लोगों की बेहतरी और देश की प्रगति के लिए सदस्‍यों एवं पीठासीन अधिकारियों को एक-दूसरे की गरिमा का ध्‍यान रखना चाहिए। राष्‍ट्रपति ने कहा कि पीठासीन अधिकारी का पद एक सम्‍मानित पद है, संसद सदस्‍यों और विधानसभा के सदस्‍यों को खुद अपने लिए एवं संसदीय लोकतंत्र के लिए सम्‍मान अर्जित करना होता है।
राष्‍ट्रपति ने कहा कि संसद और विधानसभाएं हमारी संसदीय व्‍यवस्‍था के मुख्‍य अंग हैं, इनपर देशवासियों के बेहतर भविष्‍य के लिए काम करने की महत्‍वपूर्ण जिम्‍मेदारी होती है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दशक में आम जनता की आकांक्षाओं, इच्‍छाओं और जागरुकता में वृद्धि हुई है, इ‍सलिए संसद एवं विधानसभाओं की भूमिका और जिम्‍मेदारियों पर पहले से ज्‍यादा ध्‍यान दिया जाने लगा है। राष्‍ट्रपति ने जन प्रतिनिधियों से कहा कि वे लोकतंत्र के सिद्धांतों के प्रति पूरी तरह ईमानदारी बरतें, लोकतांत्रिक संस्‍थाओं और जन प्रतिनिधियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप आचरण करना है। राष्‍ट्रपति ने इस बात पर प्रसन्‍नता व्यक्त कि इस वर्ष सम्‍मेलन का मुख्‍य विषय ‘कार्यकारिणी, विधायिका और न्‍यायपालिका के बीच सद्भावपूर्ण सामंजस्‍य-एक जीवंत लोकतंत्र के लिए अनिवार्य’ है। रामनाथ कोविंद ने कहा कि राज्‍य के तीनों स्‍तम्‍भ कार्यकारिणी, विधायिका और न्‍यायपालिका सामंजस्‍य के साथ काम कर रहे हैं और इस परंपरा की जड़ें भारत में बहुत गहरी हैं। राष्ट्रपति ने विश्‍वास जताया कि सम्‍मेलन में होने वाले विचार-विमर्श से प्राप्‍त निष्‍कर्षों को आत्‍मसात करने से हमारी लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था और ज्यादा मजबूत होगी।
राष्‍ट्रपति ने कहा कि लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था जन कल्‍याण खासतौर से समाज के गरीब, पिछड़े और वंचित तबकों के उत्‍थान और देश की प्रगति के श्रेष्‍ठ लक्ष्‍य से परिचालित होती है। उन्‍होंने विश्‍वास व्‍यक्‍त किया कि सरकार के तीनों मुख्‍य अंग इस लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने के लिए साथ मिलकर काम करते रहेंगे। सम्मेलन में राज्यसभा के उपसभापति तथा उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री विजय रूपाणी, देश की सभी विधानसभाओं और विधान परिषदों के पीठासीन अधिकारी, राज्य विधानमंडलों के सचिव और उच्च अधिकारी मौजूद थे। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस अवसर पर कहा कि हमारा संविधान एक संपूर्ण दर्शन ग्रंथ है, जिसे आज से 71 वर्ष पूर्व 26 नवंबर 1949 को अंगीकार किया गया था। ओम बिरला ने कहा कि 26 नवम्बर का दिन लोकतांत्रिक इतिहास का महत्वपूर्ण दिन हैं, क्योंकि यह दिन पूरे देश में संविधान दिवस के रूपमें मनाया जाता है एवं इस वर्ष पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन को शताब्दी वर्ष के रूपमें मनाया जा रहा है, अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन की परम्परा वर्ष 1921 में प्रारंभ की गई थी।
ओम बिरला ने कहा कि जनप्रतिनिधि देश की जनता के हितों, चिंताओं, आशाओं और आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं और हमारी लोकतांत्रिक संस्थाएं संविधान से ही अपनी शक्तियां प्राप्त करती हैं, एक सशक्त, किंतु संवेदनशील विधायिका भी इसी संविधान की अनुपम देन है। उन्होंने कहा कि संसद व विधान मंडलों को संविधान, जन भावनाओं के अनुरूप काम करने का आधार प्रदान करता है, जनप्रतिनिधि के रूपमें हमें संवैधानिक मूल्यों के प्रति दृढ़ रहकर कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए समाज के आखिरी व्यक्ति के उत्थान के लिए प्रयत्नशील रहना चाहिए। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि लोकतंत्र की यात्रा में संस्थाओं में मतांतर सामने आए हैं, संवैधानिक प्रावधानों व लोकतांत्रिक प्रणाली के तहत प्रक्रियाओं में सुधार कर उनका समाधान निकालेंगे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के तीनों स्तंभों-विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच आदर्श समन्वय आवश्यक है, तीनों संस्थाओं का मकसद जनता के हितों का संरक्षण है तथा तीनों के पास काम करने के लिए पर्याप्त शक्तियां उपलब्ध हैं। ओम बिरला ने जनप्रतिनिधियों से कहा कि इस अवसर पर नई ऊर्जा के साथ राष्ट्र के नवनिर्माण का संकल्प लें, छोटा सा प्रयास भी नागरिकों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है।

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