प्रधानमंत्री ने जल प्रबंधन संरचना अफस्लुइटडिज्क का भ्रमण किया
भारत और नीदरलैंड के जल प्रबंधन मंत्रालय के बीच महत्वपूर्ण करारस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Monday 18 May 2026 12:35:00 PM
एम्स्टर्डम। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब अर्नोल्डस एड्रियानस जेटेन केसाथ नीदरलैंड की प्रतिष्ठित जल प्रबंधन संरचना अफस्लुइटडिज्क का भ्रमण किया। नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर कहाकि नीदरलैंड्स ने वॉटर मैनेजमेंट में बहुत अच्छा काम किया है, इससे पूरी इंटरनेशनल कम्युनिटी बहुत कुछ सीख सकती है। उन्होंने कहाकि उन्हें अफ्स्लुइटडिज्क जाने और वॉटर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट की खास बातों के बारेमें जानने का मौका मिला। नरेंद्र मोदी ने कहाकि हम इंडिया में मॉडर्न टेक्नोलॉजी लाने केलिए कमिटेड हैं, जिसका मकसद सिंचाई, बाढ़ से बचाव और इनलैंड वॉटरवे नेटवर्क को बढ़ाने में मदद करना है। उन्होंने कहाकि उनकी नीदरलैंड यात्रा ने नवोन्मेषी जल प्रबंधन समाधान, जलवायु सहनशीलता और सतत अवसंरचना केप्रति दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को उजागर किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रशंसा करते हुए कहाकि 32 किलोमीटर लंबा अफस्लुइटडिज्क बांध, उससे बना पुल बाढ़ नियंत्रण और भूमि सुधार के क्षेत्र में एक वैश्विक मिसाल है। यह बांध नीदरलैंड के बड़े हिस्से को उत्तरी सागर से बचाता है और साथही मीठे पानी के भंडारण को भी संभव बनाता है। उन्होंने गुजरात में अफस्लुइटडिज्क और भारत की महत्वाकांक्षी कल्पसर परियोजना केबीच समानताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहाकि कल्पसर परियोजना का उद्देश्य खंभात की खाड़ी में एक मीठे पानी का जलाशय बनाना है, जो ज्वारीय बिजली उत्पादन, सिंचाई और परिवहन बुनियादी ढांचे को एकीकृत करता है। इस संबंध में दोनों पक्षों ने कल्पसर परियोजना पर तकनीकी सहयोग केलिए भारत के जल शक्ति मंत्रालय और नीदरलैंड के बुनियादी ढांचा और जल प्रबंधन मंत्रालय केबीच आशय पत्र पर हस्ताक्षर करने का स्वागत किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब अर्नोल्डस एड्रियानस जेटेन ने इस बात का उल्लेख कियाकि जल अभियांत्रिकी में नीदरलैंड की विशेषज्ञता और भारत की व्यापक कार्यांवयन क्षमता परस्पर लाभकारी साझेदारियों केलिए महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करती हैं। दोनों राजनेताओं ने कहाकि यह यात्रा जल क्षेत्रमें भारत-नीदरलैंड सामरिक साझेदारी की पुनर्पुष्टि करती है एवं नवाचार और सतत विकास केप्रति दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करती है।