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नालंदा विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह

अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थियों को आकर्षित कर रहा नालंदा-राष्ट्रपति

'नालंदा का पतन संपूर्ण विश्व के लिए एक बहुत बड़ी क्षति थी'

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Wednesday 1 April 2026 12:33:42 PM

nalanda university convocation

राजगीर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नालंदा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में स्नातक छात्र-छात्राओं को उपाधियां प्रदान कीं और बधाई दी। राष्ट्रपति ने इस अवसर पर उल्लेख कियाकि नालंदा का पतन न केवल भारत केलिए, बल्कि पूरे विश्व केलिए एक बहुत बड़ी क्षति थी, फिरभी नालंदा की अवधारणा जीवित रही। उन्होंने कहाकि हमारे समय में इसका पुनरुत्थान आधुनिक संदर्भ में उस गौरवशाली विरासत को पुनः स्थापित करने की राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने कहाकि यह पुनरुत्थान दूरदर्शी नेतृत्व, निरंतर संस्थागत प्रयासों और सहयोगी देशों के समन्वय से संभव हुआ है, यह इस बातका उदाहरण हैकि कैसे विविध राष्ट्र साझा मूल्यों से निर्देशित होकर उच्च लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहाकि प्राचीन नालंदा के पुस्तकालय में लाखों पांडुलिपियां होने का दावा किया जाता है, उस उत्कृष्ट मानदंड को ध्यान में रखते हुए हम आज यहां जो निर्माण कर रहे हैं, वह एक चिरस्थायी धरोहर होगी। उन्होंने कहाकि 2047 तक भारत के एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में अग्रसर होने केसाथ नालंदा विश्वविद्यालय जैसी संस्थाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहाकि प्राचीन नालंदा ने विविध विचारधाराओं का स्वागत किया और वाद विवाद एवं संवाद की संस्कृति को बढ़ावा दिया। उन्होंने कहाकि यहां ज्ञान को कभीभी पृथक रूपमें नहीं देखा गया, बल्कि यह नैतिकता, समाज और मानवता के व्यापक कल्याण से अभिन्न रूपसे जुड़ा रहा। द्रौपदी मुर्मु ने कहाकि यह आदर्श आजभी अत्यंत प्रासंगिक है, ऐसे समय में जब विश्व अनेक जटिल चुनौतियों का सामना कर रहा है, करुणा पर आधारित स्वतंत्र और आलोचनात्मक चिंतन की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। राष्ट्रपति ने कहाकि भारत अपनी शैक्षिक यात्रा के महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है, देशभर में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को अपनाने केबाद से पांच वर्ष से अधिक समय में समग्र, बहुविषयक और मूल्य आधारित शिक्षा पर नए सिरे से जोर दिया गया है। उन्होंने जिज्ञासा, संवाद और संश्लेषण को प्रोत्साहित किया। राष्ट्रपति ने कहाकि नालंदा को एकबार फिर इस भावना को मूर्तरूप देना चाहिए, जिसमें विभिन्न विषयों और संस्कृतियों की ज्ञान प्रणालियों को एकसाथ लाया जाए। उन्होंने विश्वास व्यक्त कियाकि नालंदा विश्वविद्यालय एशिया और विश्वभर में एक अग्रणी शैक्षणिक संस्थान के रूपमें उभरेगा, यह न केवल अपनी अकादमिक उत्कृष्टता, बल्कि अपने मूल्यों से भी एक विशिष्ट पहचान बनाएगा।
राष्ट्रपति ने कहाकि भारत का बौद्ध दर्शन और बौद्ध अभ्यास से गहरा और जीवंत संबंध है। उन्होंने जोर देते हुए कहाकि इसको गंभीरतापूर्वक और भारत की शास्त्रीय ज्ञान परंपराओं की व्यापक समझ केसाथ पोषित किया जाना चाहिए, बौद्ध विद्वत्ता को एशियाभर में इसकी विविध अभिव्यक्तियों से जुड़ते हुए भारत की सभ्यतागत नींव में निहित रहना चाहिए। राष्ट्रपति ने कहाकि नालंदा विश्वविद्यालय बौद्ध अध्ययन केलिए एक अग्रणी वैश्विक केंद्र के रूपमें उभर सकता है। द्रौपदी मुर्मु ने विश्वविद्यालय से इस क्षेत्रमें दृढ़ संकल्प, गहनता और खुलेपन केसाथ निवेश करने का आग्रह किया। उन्होंने कहाकि ऐसा करके नालंदा विश्वविद्यालय एकबार फिर सदियों पुरानी भूमिका में आ जाएगा। उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में गांव के सामुदायिक भागीदारों की एक प्रदर्शनी देखी। इसके बाद उन्होंने नालंदा महाविहार के ऐतिहासिक अवशेषों का भ्रमण किया, जो भारत की समृद्ध बौद्धिक और सांस्कृतिक विरासत का एक गहरा प्रतीक है। राष्ट्रपति ने कहाकि प्राचीन नालंदा के पुस्तकालय में लाखों पांडुलिपियां थीं, उस उत्कृष्ट उदाहरण को ध्यान में रखते हुए आज हम यहां जो निर्माण कर रहे हैं, वह एक अमिट विरासत बनेगा। उन्होंने कहाकि भारत 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में अग्रसर है, ऐसे में नालंदा विश्वविद्यालय जैसे संस्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने छात्र-छात्राओं को अपने प्रेरक संबोधन में कहाकि दीक्षांत समारोह एक सभ्यतागत वादे की पुष्टि है, एक वादाकि ज्ञान कायम रहेगा, संवाद प्रबल रहेगा और शिक्षा मानवता की सेवा करती रहेगी। उन्होंने स्नातकों से कहाकि उनकी उपलब्धियां दृढ़ता, अनुशासन और बौद्धिक प्रतिबद्धता का परिणाम हैं। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त कीकि स्नातक छात्र-छात्राओं में से आधे से अधिक 30 से अधिक देशों के अंतर्राष्ट्रीय छात्र हैं। राष्ट्रपति ने कहाकि पांचवीं शताब्दी में स्थापित प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय लगभग आठ शताब्दियों तक ज्ञान के एक प्रतिष्ठित केंद्र के रूपमें स्थापित रहा है। उन्होंने कहाकि नालंदा विश्वविद्यालय विश्व के साथ भारत के जुड़ाव का एक और महत्वपूर्ण आयाम, शैक्षिक कूटनीति का प्रतिनिधित्व करता है। दीक्षांत समारोह में विदेश मंत्री एस जयशंकर भी उपस्थित थे। उन्होंने कहाकि नालंदा विश्वविद्यालय के इस स्नातक बैच में 31 देश के 600 ग्रेजुएट्स का एक साझा सफ़र है। उन्होंने कहाकि नालंदा भारत की बौद्धिक विरासत और सांस्कृतिक भव्यता की यादें ताज़ा करता है और दुनिया को यह याद दिलाता हैकि तकनीक और परंपरा ‘विकास भी विरासत भी’ हमेशा साथ-साथ चलना चाहिए।

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