गति शक्ति विश्वविद्यालय और डीजीसीए में ऐतिहासिक समझौता
भारत के बढ़ते विमान बेड़े के लिए गुणवत्तापूर्ण कार्यबल की तैयारीस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Tuesday 31 March 2026 12:37:23 PM
नई दिल्ली। भारत में मजबूत विमानन विनिर्माण पर ज़ोर देते हुए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) और गति शक्ति विश्वविद्यालय (जीएसवी) ने विमानन इंजीनियरिंग और विमानन प्रबंधन के व्यापक क्षेत्र में वैज्ञानिक, तकनीकी और प्रबंधन संबंधी पहलुओं से जुड़ी जानकारी और कौशल को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू और रेल, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव की उपस्थिति में डीजीसीए के फैज़ अहमद किदवई और जीएसवी के कुलपति प्रोफेसर मनोज चौधरी ने समझौते ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। किंजरापु राममोहन नायडू ने इस अवसर पर कहाकि गति शक्ति विवि और डीजीसीए केबीच यह ऐतिहासिक समझौता उन सबसे महत्वपूर्ण समझौतों में से एक है, जिनके माध्यम से हम भविष्य केलिए गुणवत्तापूर्ण कार्यबल तैयार करने की ओर प्रयासरत हैं।
नागरिक उड्डयन मंत्री ने कहाकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में बीते 12 वर्ष में हमने जबरदस्त सफलता देखी है, विशेष रूपसे वह मंत्र जो ‘हवाई चप्पल से हवाई जहाज़ का सफ़र’ के रूपमें शुरू हुआ था, जहां विमानन को सिर्फ एक विशेष यात्रा क्षेत्र न बनाकर, बल्कि एक समावेशी क्षेत्र बनाना था। उन्होंने कहाकि इस समझौते का मुख्य उद्देश्य उद्योग-शैक्षणिक साझेदारी को सुदृढ़ बनाकर विमानन और एमआरओ क्षेत्र केलिए गुणवत्तापूर्ण मानव संसाधन तैयार करना है, इसके अंतर्गत एविएशन मेंटेनेंस इंजीनियरिंग में स्नातक डिग्री शुरू की जाएगी। यह पाठ्यक्रम आगामी शैक्षणिक वर्ष 2026-27 (अगस्त 2026) से लागू किया जाएगा। नागरिक उड्डयन मंत्री ने कहाकि जीएसवी और डीजीसीए मिलकर भविष्य केलिए तैयार तीन वर्षीय बीएससी पाठ्यक्रम तैयार करेंगे, जिसमें शैक्षणिक गहराई, नियामकीय अनुपालन और उद्योग उन्मुख कौशल का समन्वय होगा, ताकि भारत के अगली पीढ़ी के एमआरओ क्षेत्र को मजबूती मिल सके। एमओयू में यहभी प्रस्तावित हैकि जीसीवी सतत विमानन ईंधन, विमान रखरखाव, पुर्जों के निर्माण, उनके एकीकरण के क्षेत्रमें डीजीसीए के शोध या जानकारी साझेदार के रूपमें कार्य करेगा। इसके अलावा जीएसवी डीजीसीए के अधिकारियों के क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण में भी सहयोग प्रदान करेगा।
किंजरापु राममोहन नायडू ने कहाकि वर्ष 2047 तक हमारा लक्ष्य विकसित देश बनना है, इसके लिए हमें आत्मनिर्भर होना होगा, हम मेक इन इंडिया और ट्रेन इन इंडिया को बढ़ावा दे रहे हैं और इसीपर केंद्रित यह एमओयू हुआ है। नागरिक उड्डयन मंत्री ने कहाकि विमानन क्षेत्र का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह हैकि हम देशमें एक मजबूत विमानन विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र कितना अच्छी तरह विकसित कर पाते हैं और यही वह क्षेत्र है, जिसपर हमने विशेष ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने कहाकि हमने पिछले 5 वर्ष में उल्लेखनीय सफलता देखी है, विशेष रूपसे एमआरओ के क्षेत्रमें जिनकी संख्या लगभग 160 से बढ़कर 240 से अधिक हो गई है। किंजरापु राममोहन नायडू ने बतायाकि हम भारत विमानन क्षेत्रमें बड़ी मांग पैदा कर रहे हैं, यह एक बहुत बड़ा आंकड़ा है, हमारे पास लगभग 1700 विमानों के ऑर्डर हैं, जो वर्तमान बेड़े का लगभग दोगुना है। उन्होंने कहाकि ये विमान आनेवाले कुछ वर्ष में हमारे हवाई क्षेत्रमें शामिल होंगे, वर्ष 2036 तक हमारे हवाई क्षेत्र में 3000 तक विमान हो सकते हैं। उन्होंने कहाकि तबतक विमानों को सही कार्यबल का सहयोग मिलना आवश्यक होगा। उन्होंने जिक्र कियाकि अगले 10 वर्ष में पायलटों की आवश्यकता लगभग 10000 से 12000 केबीच होने की संभावना है, वर्तमान में कई पायलट प्रशिक्षण केलिए विदेश जाना पसंद करते हैं और बादमें भारत लौट आते हैं।
सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दोहरायाकि जीएसवी पहले ही वैश्विक स्तरपर अपनी प्रतिष्ठा स्थापित कर चुका है और उद्योग केलिए तैयार पेशेवरों को तैयार करने केलिए 62 उद्योग साझेदारों केसाथ सहयोग स्थापित कर चुका है। उन्होंने जीएसवी में प्रिसीजन मैन्युफैक्चरिंग इंजीनियरिंग केलिए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने का भी आह्वान किया, ताकि विकसित भारत पहल को समर्थन मिल सके। उन्होंने कहाकि यह समझौता नियमन, शिक्षा जगत और उद्योग केबीच एक व्यवस्थित सेतु का काम करेगा, जहां डीजीसीए सीएआर-66 और सीएआर-147 ढांचे केतहत लाइसेंसिंग मानकों को निर्धारित करता रहेगा, वहीं जीएसवी पाठ्यक्रम नवाचार, प्रशिक्षक विकास, अनुसंधान एकीकरण और उद्योग से जुड़े अप्रेंटिसशिप मॉडल केलिए एक राष्ट्रीय शैक्षणिक केंद्र के रूपमें कार्य करेगा। यह भारत को न सिर्फ विमान रखरखाव, बल्कि विमान निर्माण के क्षेत्रमें भी एक प्रतिस्पर्धी वैश्विक एमआरओ गंतव्य के रूपमें स्थापित करने में मदद करेगा। इस अवसर पर नागरिक उड्डयन सचिव समीर कुमार सिन्हा, रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष सतीश कुमार, डीजीसीए, रेलवे और जीएसवी के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।