पहली बार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर प्रणालियों में व्यापक सुधार
वित्तमंत्री ने लॉंच किया देशव्यापी जागरुकता अभियान 'प्रारंभ'स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Saturday 21 March 2026 05:02:56 PM
नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट कार्यमंत्री निर्मला सीतारमण ने नई दिल्ली में एक कार्यक्रम में आयकर विभाग का देशव्यापी जागरुकता अभियान ‘प्रारंभ (PRARAMBH) 2026’ लॉंच किया है। प्रिंट, रेडियो, टेलीविज़न, आउटडोर, डिजिटल और सोशल मीडिया तक फैला यह मल्टीमीडिया अभियान नए आयकर अधिनियम-2025 की मुख्य विशेषताओं के बारेमें जागरुकता पैदा करने केलिए तैयार किया गया है। यह अधिनियम 1 अप्रैल 2026 से लागू हो जाएगा। इसमें रचनात्मक संचार की पहलें, आयकरदाताओं केलिए मार्गदर्शन करने वाली सामग्री जैसे-मार्गदर्शन नोट्स, शैक्षणिक वीडियो, ब्रोशर और डिजिटल व ऑनग्राउंड प्लेटफॉर्म के जरिए बड़े पैमाने पर लोगों से जुड़ने के प्रयास और माईगॉव क्विज पहल भी शामिल है।
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने इस अवसर पर विभाग के डिजिटल बदलाव के प्रयासों केतहत 'इनकम टैक्स वेबसाइट 2.0' का भी उद्घाटन किया। इसे अपग्रेड प्लेटफॉर्म को करदाताओं केलिए बेहतर उपयोगिता, आसान नेविगेशन और ज्यादा कुशल सेवा देने केलिए तैयार किया गया है। निर्मला सीतारमण ने संसद में आयकर अधिनियम-1961 के पारित होने की यात्रा में राजस्व विभाग के अधिकारियों के असाधारण प्रयासों पर प्रकाश डाला। वित्तमंत्री ने बतायाकि प्रारंभ केतहत की गई पहलों सहित सीबीडीटी की सभी पहलें आयकर को सरल बनाने पर केंद्रित हैं, इनमें करदाताओं को दी जानेवाली सेवाओं पर विशेष ज़ोर दिया गया है। उन्होंने कहाकि स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहलीबार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों ही कर प्रणालियों में एकसाथ व्यापक सुधार किए जा रहे हैं, यह बदलाव एक अधिक नागरिक केंद्रित और जन पहुंच उन्मुख प्रशासन की ओर बढ़ते कदम को दर्शाता है।
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहाकि यह अधिनियम, जिसे व्यापक प्रयासों और विस्तृत परामर्श केबाद तैयार किया गया है, विभिन्न प्रावधानों को अधिक स्पष्टता केसाथ पुनर्गठित करता है। उन्होंने कहाकि इसका उद्देश्य विवादों को कम करना, नियमों के पालन में सुधार लाना और लोगों के रवैये को भ्रम, टालमटोल से हटाकर स्वीकार्यता और विश्वास की ओर ले जाना है। वित्तमंत्री ने कहाकि कर अधिकारी करदाताओं के सामने सरकार का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए उन्हें एक सहानुभूतिपूर्ण और विश्वास आधारित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए तथा मानवीय स्पर्श को बनाए रखते हुए मानवीय हस्तक्षेप को कम करने केलिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाना चाहिए। आयकर विभाग की बहुभाषी पहुंच बनाने और डिजिटल मंचों का प्रभावी उपयोग करते हुए सरल भाषा में संवाद करने के प्रयासों की सराहना करते हुए निर्मला सीतारमण ने युवाओं और पेशेवरों केसाथ जुड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया, इसमें एआई समाधानों केलिए विभिन्न संस्थानों केसाथ सहयोग करना भी शामिल है।
वित्तमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन-एमएएनएवी के माध्यम से मानव केंद्रित डिजिटल युग के निर्माण को याद किया, जिसे उन्होंने नई दिल्ली में एआई शिखर सम्मेलन के दौरान प्रस्तुत किया था, एम-नैतिक और आचार-संबंधी प्रणालियां, ए-जवाबदेह शासन, एन-राष्ट्रीय संप्रभुता, ए-सुलभ और समावेशी एआई, वी-वैध और न्यायसंगत प्रणालियां। निर्मला सीतारमण ने दोहरायाकि आयकर अधिनियम-2025 की नींव नैतिक और आचार संबंधी प्रणालियों पर ही आधारित होनी चाहिएं। वित्तमंत्री ने अतीत की तरह बार-बार बहुत ज्यादा संशोधन करने की प्रवृत्ति केप्रति आगाह किया। उन्होंने कहाकि नया कानून स्थिर, सरल और समझने में आसान होना चाहिए, इसमें तकनीक का इस्तेमाल नागरिक केंद्रित तरीके से किया जाना चाहिए, इसका अंतिम लक्ष्य एक ऐसी व्यवस्था बनाना है, जिसमें नियमों का पालन करना एक स्वाभाविक विकल्प बन जाए और जो आसान हो, स्पष्टता और भरोसे पर आधारित हो।
कार्यक्रम में वित्त मंत्रालय में राजस्व विभाग के सचिव अरविंद श्रीवास्तव, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के चेयरमैन रवि अग्रवाल, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड के चेयरमैन विवेक चतुर्वेदी, सीबीडीटी एवं सीबीआईसी बोर्डों के सदस्य और विभाग के अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे। राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने कहाकि आयकर अधिनियम-2025 केवल एक नया कानून ही नहीं है, बल्कि यह एक सरल, स्पष्ट और ज़्यादा उपयोगकर्ता अनुकूल कर व्यवस्था की ओर एक सोच-समझकर उठाया गया कदम है। उन्होंने बतायाकि नियमों और प्रपत्रों (फॉर्म) को एकरूप करने केसाथ विभाग ने अधिकारियों की क्षमता निर्माण पर भी विशेष ध्यान दिया है, ऐसा इसलिए किया गया है, ताकि यह सुनिश्चित हो सकेकि पूरे देश में अधिकारी करदाताओं की सहायता करने केलिए पूरी तरह से तैयार हों, क्योंकि जमीनी स्तरपर कानून को लागू करने का बहुत अधिक महत्व है। अरविंद श्रीवास्तव ने कहाकि संचार रणनीतियां अब ज्यादा सहज और समझने लायक हो गई हैं, इनमें डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके छोटे वीडियो के जरिए करदाताओं तक ऐसे तरीकों से पहुंचा जा रहा है, जिनसे वे पहले से परिचित हैं।
अरविंद श्रीवास्तव ने छात्रों केलिए शैक्षिक सामग्री से शुरुआती जागरुकता पैदा करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहाकि देशव्यापी जागरुकता अभियान में 300 से ज्यादा कार्यशाला शामिल हैं, जो न केवल जानकारी का प्रसार करेंगी, बल्कि इसमें हितधारकों से सक्रिय रूपसे फ़ीडबैक भी मांगा जाएगा। इससे यह सुधार एकतरफा संचार के बजाय एक निरंतर संवाद के रूपमें मजबूत होगा। अरविंद श्रीवास्तव ने कहाकि 'प्रारंभ 2026' केवल एक शुरुआतभर नहीं है, बल्कि यह एक अधिक खुली, जवाबदेह और सरल कर व्यवस्था की शुरुआत है। सीबीडीटी के चेयरमैन रवि अग्रवाल ने कहाकि 'प्रारंभ' मिशन विकसित भारत केलिए नीतिगत सुधार और जिम्मेदारी केसाथ काम 'नागरिक देवो भव' की भावना से प्रेरित है। उन्होंने कहाकि आयकर अधिनियम-2025 भारत की कर प्रशासन यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम है और इसे सुचारू तथा करदाता अनुकूल तरीके से लागू किया जाना चाहिए। रवि अग्रवाल ने बतायाकि 'प्रारंभ' का उद्देश्य बहुभाषी अभियानों, शैक्षिक सामग्री, डिजिटल टूल्स, विस्तृत एफएक्यू और मार्गदर्शन सामग्री के जरिए स्पष्ट, सुलभ और भरोसेमंद संचार सुनिश्चित करना है, ताकि नियमों का पालन आसान हो सके और व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सके।
रवि अग्रवाल ने एआई आधारित चैटबॉट 'कर साथी' को लॉन्च करने की भी घोषणा की। यह चैटबॉट उन करदाताओं केलिए एक आसानी से उपलब्ध साथी है, जो नए अधिनियम नियमों, प्रपत्रों और संबंधित सवालों के बारेमें जानकारी चाहते हैं। उन्होंने कहाकि आयकर सेवा केंद्रों के जरिए भी सहायता उपलब्ध रहेगी, जो विभाग की नागरिक केंद्रित, तकनीक सक्षम और संवेदनशील कर प्रशासन केप्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। सीबीडीटी के सदस्य संजय बहादुर ने 'प्रारंभ' का एक संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में सीबीडीटी के सदस्य (विधान) प्रसेनजीत सिंह ने हितधारकों केसाथ विषयगत सत्रों पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत की। कार्यक्रम का समापन सीबीडीटी की सदस्य (करदाता सेवाएं एवं राजस्व) जी अपर्णा राव के धन्यवाद ज्ञापन केसाथ हुआ।