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भारत-जर्मनी में साझेदारी और ज्यादा समृद्ध हुई

स्वामी विवेकानंद भारत जर्मनी संबंधों के सेतु हैं-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

पीएम नरेंद्र मोदी ने किया जर्मन चांसलर फ्रेडरिक का आत्मीय स्वागत!

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Monday 12 January 2026 06:11:05 PM

german chancellor friedrich merz and pm narendra modi

गांधीनगर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज गांधीनगर में स्वामी विवेकानंद की जयंती पर जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ केसाथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहाकि यह एक सुखद संयोग हैकि स्वामी विवेकानंद ने ही भारत और जर्मनी केबीच दर्शन, ज्ञान और आत्मा का सेतु बनाया था और आज चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की यह भारत यात्रा उसी सेतु को नई ऊर्जा, नया विश्वास और नया विस्तार प्रदान कर रही है। उन्होंने कहाकि गुजरात में हम कहते हैं-‘आवकारो मिठो आपजे रे’ यानी स्नेह और आत्मीयता से स्वागत करना, इसी भावना केसाथ हम चांसलर मर्ज़ का भारत में हार्दिक अभिनंदन करते हैं। नरेंद्र मोदी ने कहाकि फ्रेडरिक मर्ज़ की जर्मनी चांसलर के रूपमें यह भारत ही नहीं, बल्कि एशिया की पहली यात्रा है और यह इस बातका सशक्त प्रमाण हैकि वे भारत केसाथ संबंधों को कितना गहरा महत्व देते हैं। नरेंद्र मोदी ने उनके व्यक्तिगत ध्यान और कमिटमेंट केलिए उनका धन्यवाद किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि भारत, जर्मनी केसाथ अपनी मित्रता और साझेदारी को और सुदृढ़ करने केलिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहाकि चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की ये यात्रा एक विशेष समय पर हो रही है, पिछले वर्ष ही हमने अपनी रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे किए हैं और इस वर्ष हम अपने राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष भी मना रहे हैं, ये केवल समय की उपलब्धियां नहीं हैं, ये हमारी साझा महत्वाकांक्षाओं, परस्पर विश्वास और निरंतर सशक्त होते सहयोग के प्रतीक हैं। नरेंद्र मोदी ने कहाकि भारत और जर्मनी जैसे देशों की अर्थव्यवस्थाओं केबीच करीबी सहयोग पूरी मानवता केलिए जरूरी है, बढ़ते व्यापार और निवेश संबंधों ने हमारी स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को नई ऊर्जा दी है। उन्होंने कहाकि हमारा द्विपक्षीय व्यापार अबतक के अपने सर्वोच्च स्तर पर पहुंच चुका है और 50 बिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है। नरेंद्र मोदी ने जिक्र कियाकि दो हज़ार से अधिक जर्मन कंपनियां लंबे समय से भारत में मौजूद हैं, ये भारत केप्रति उनके अटूट विश्वास और यहां मौजूद अनंत संभावनाओं को दर्शाता है, आज सुबह भारत-जर्मनी सीईओ फोरम में इसकी जीवंत झलक दिखाई दी।
नरेंद्र मोदी ने कहाकि भारत और जर्मनी केबीच टेक्नोलॉजी सहयोग प्रतिवर्ष मजबूत हुआ है और आज इसका प्रभाव ज़मीनी स्तरपर स्पष्ट रूपसे दिखाई देता है। उन्होंने कहाकि नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्रमें भारत और जर्मनी की प्राथमिकताएं समान हैं, इसमें सहयोग को बढ़ाने केलिए हमने भारत-जर्मनी उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया है, ये ज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार का साझा मंच बनेगा। उन्होंने कहाकि हम जलवायु, ऊर्जा, शहरी विकास और शहरी गतिशीलता जैसे क्षेत्रोंमें मिलकर नई परियोजनाओं को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहाकि ग्रीन हाइड्रोजन में दोनों देशों की कंपनियों का नया मेगा प्रोजेक्ट, भविष्य की ऊर्जा केलिए एक गेम चेंजर साबित होगा। उन्होंने कहाकि भारत और जर्मनी सुरक्षित, भरोसेमंद और लचीली सप्लाई चेन के निर्माण केलिए मिलकर काम कर रहे हैं और आशा व्यक्त कीकि इन सभी विषयों पर आज किए जा रहे एमओयू से हमारे सहयोग को नई गति और मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहाकि रक्षा और सुरक्षा में बढ़ता सहयोग हमारे आपसी भरोसे और साझी सोच का प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने रक्षा व्यापार से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाने केलिए चांसलर मर्ज़ का हृदय से आभार व्यक्त किया और कहाकि वे रक्षा उद्योगों केबीच सहयोग बढ़ाने केलिए एक रोडमैप पर काम करेंगे, जिससे सह-विकास और सह-उत्पादन के नए अवसर खुलेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि भारत और जर्मनी केबीच ऐतिहासिक और लोगों केबीच गहरे संबंध हैं। उन्होंने उल्लेख कियाकि रवींद्रनाथ टैगोर की रचनाओं ने जर्मनी के बौद्धिक जगत को नई दृष्टि दी, स्वामी विवेकानंद की विचारधारा ने जर्मनी सहित पूरे यूरोप को प्रेरित किया और मैडम कामा ने जर्मनी में पहलीबार भारत की आजादी का ध्वज फहराकर हमारी स्वतंत्रता की आकांक्षा को वैश्विक पहचान दी। नरेंद्र मोदी ने कहाकि आज हम इस ऐतिहासिक जुड़ाव को आधुनिक साझेदारी का रूप दे रहे हैं, प्रवासन, गतिशीलता और कौशल विकास बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया है। उन्होंने कहाकि भारत की प्रतिभाशाली युवाशक्ति जर्मनी की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है, आज ग्लोबल स्किल्स पार्टनरशिप पर जारी जॉइंट डिक्लेरेशन ऑफ इंटेंट इसी भरोसे का प्रतीक है, इससे खासतौर पर स्वास्थ्य देखभाल पेशे की आवाजाही आसान होगी। नरेंद्र मोदी ने कहाकि आज हमने खेलों के क्षेत्रमें भी सहयोग को आगे बढ़ाने केलिए ठोस कदम उठाए हैं, यह युवाओं को जोड़ने का एक प्रभावी माध्यम बनेगा, आज उच्च शिक्षा पर बना व्यापक रोडमैप शिक्षा के क्षेत्रमें हमारी साझेदारी को नई दिशा देगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जर्मन विश्वविद्यालयों को भारत में अपने कैंपस खोलने का आमंत्रण दिया और भारतीय नागरिकों केलिए वीज़ा-फ्री ट्रांजिट की घोषणा केलिए चांसलर मर्ज़ का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहाकि इससे दोनों देशों के लोगों केबीच नज़दीकियां और बढ़ेंगी। उन्होंने खुशी व्यक्त कीकि गुजरात के लोथल में बनाए जा रहे नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स से जर्मन मैरीटाइम म्यूजियम जुड़ रहा है, यह दोनों देशों की समुद्री इतिहास को जोड़ने वाला ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहाकि पारंपरिक दवाएं के क्षेत्र में गुजरात आयुर्वेद यूनिवर्सिटी का जर्मनी केसाथ करीबी सहयोग रहा है, इस महत्वपूर्ण विषय पर आज हुए समझौते से हमारे सहयोग को और अधिक बल मिलेगा। नरेंद्र मोदी ने कहाकि भारत और जर्मनी हमेशा कंधे से कंधा मिलाकर चले हैं, हमारी दोस्ती का प्रभाव ग्लोबल स्टेज पर भी दिखाई देता है, घाना, कैमरून और मलावी जैसे देशों में संयुक्त परियोजनाओं से हमारी त्रिपक्षीय विकास साझेदारी दुनिया केलिए एक सफल मॉडल है, हम ग्लोबल साउथ के देशों के विकास के लिए अपने साझा प्रयासों को आगे भी निरंतर जारी रखेंगे।
नरेंद्र मोदी ने कहाकि इंडो-पैसिफिक दोनों देशों केलिए सर्वोपरि है, इस क्षेत्रमें हमारे तालमेल को बढ़ाने केलिए एक परामर्श तंत्र की शुरुआत करने जा रहे हैं। उन्होंने कहाकि आज हमने यूक्रेन और गाज़ा सहित कई वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की, भारत सभी समस्याओं और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का पक्षधर रहा है और इस दिशा में किए जा रहे सभी प्रयासों का समर्थन करता है। उन्होंने कहाकि हम एकमत हैंकि आतंकवाद पूरी मानवता केलिए एक गंभीर खतरा है, भारत और जर्मनी इसके विरुद्ध एकजुट होकर पूरी दृढ़ता से लड़ाई जारी रखेंगे। नरेंद्र मोदी ने कहाकि भारत जर्मनी सहमत हैंकि वैश्विक चुनौतियों से निपटने केलिए वैश्विक संस्थाओं में सुधार अत्यंत महत्वपूर्ण है, यूएन सुरक्षा परिषद में सुधार केलिए G4 के माध्यम से हमारा संयुक्त प्रयास इसी सोच का प्रमाण है। इससे पहले दोनों राजनेताओं ने अहमदाबाद में इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल में भाग लेकर अहमदाबाद का आसमान रंगों और जोश से भर दिया। जर्मनी चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने पतंग उड़ाई और वे साबरमती आश्रम भी गए।

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