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फकीर मोहन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के प्रेरणास्रोत!

बालासोर में फकीर मोहन विश्वविद्यालय का 12वां दीक्षांत समारोह

फकीर मोहन विवि की शैक्षिक व सामुदायिक भागीदारी प्रशंसनीय

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Tuesday 3 February 2026 05:55:23 PM

convocation ceremony of fakir mohan university in balasore.

बालासोर (ओडिशा)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज बालासोर में फकीर मोहन विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया और इसके नए सभागार का उद्घाटन किया। राष्ट्रपति ने व्यासकवि फकीर मोहन सेनापति को श्रद्धांजलि अर्पित की और कहाकि वे अपने विद्यार्थी जीवन के दौरान उनकी कालजयी कहानी 'रेवती' से अत्यंत प्रभावित थीं, यह प्रभाव आजभी अमिट है। उन्होंने कहाकि 19वीं शताब्दी में एक लड़की का शिक्षा प्राप्त करने का दृढ़ संकल्प उनकी हिम्मत का अमिट प्रमाण है। द्रौपदी मुर्मू ने बतायाकि उन्होंने एक दूरस्थ आदिवासी गांव में पढ़ाई की और अपने दृढ़ निश्चय के बल पर भुवनेश्वर गईं, जहां उन्होंने अपनी हाईस्कूल और कॉलेज की शिक्षा पूरी की। उन्होंने कहाकि फकीर मोहन उनके प्रेरणास्रोत हैं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहाकि फकीर मोहन को अपनी मातृभाषा से गहरा प्रेम था, उन्होंने लिखा थाकि मेरी मातृभाषा मेरे लिए सर्वोपरि है। राष्ट्रपति ने कहाकि मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करने से विद्यार्थियों को पढ़ाई केसाथ अपने परिवेश, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक परिवेश को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलती है, वे अपनी सभ्यता के मूल्यों और जीवनशैली से भलीभांति परिचित हो जाते हैं। उन्होंने कहाकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 मातृभाषा के महत्व पर बल देती है और विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति से जुड़े रहने केलिए मार्गदर्शन करती है। राष्ट्रपति ने कहाकि भारत की ज्ञान की समृद्ध परंपरा है, हमारे शास्त्र और पांडुलिपियां ज्ञान और बुद्धिमत्ता से परिपूर्ण हैं, कविता और साहित्य के अलावा वे विज्ञान, चिकित्सा, खगोल विज्ञान और वास्तुकला जैसे क्षेत्रों में भी ज्ञान का स्रोत हैं। उन्होंने कहाकि युवा छात्र इस प्राचीन ज्ञान परंपरा में शोध कर सकते हैं, अतीत को समझकर और वर्तमान को आत्मसात करके छात्र अपना और देश का भविष्य संवार सकते हैं।
राष्ट्रपति ने स्नातक छात्रों को बधाई दी और कहाकि ज्ञान, लगन और प्रतिबद्धता के बल पर वे समाज में सम्मान और पहचान हासिल कर सकते हैं। उन्होंने छात्रों को सलाह भी दीकि वे जहां भी जाएं और जोभी करें, हर प्रयास में सफलता की कुंजी समर्पण है। उन्होंने कहाकि सफल जीवन और सार्थक जीवन एक समान नहीं हैं, सफल जीवन अच्छा है, लेकिन जीवन को सार्थक बनाना उससे भी बेहतर है। उन्होंने कहाकि प्रसिद्धि, प्रतिष्ठा और आर्थिक सुरक्षा प्राप्त करना महत्वपूर्ण है, लेकिन दूसरों केलिए भी कुछ करना चाहिए। उन्होंने छात्रों से आग्रह कियाकि वे विकास की राह में पीछे रह गए लोगों की मदद करें। उन्होंने कहा कि समाज का विकास सभीके विकास में निहित है। राष्ट्रपति ने प्रसन्नता व्यक्त कीकि फकीर मोहन विश्वविद्यालय अकादमिक अध्ययन केसाथ-साथ अनुसंधान और आउटरीच कार्यक्रमों को भी महत्व देता है। उन्होंने कहाकि बालासोर भद्रक क्षेत्र धान, पान और मछली केलिए प्रसिद्ध है, इन क्षेत्रोंमें अनुसंधान और प्रशिक्षण कार्यक्रमों केलिए विश्वविद्यालय की सराहना की।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहाकि विश्वविद्यालय के 'बैक टू स्कूल', 'कमाओ और सीखो', 'हर एक सिखाए' जैसे कार्यक्रम और पर्यावरण जागरुकता एवं समुद्र तट सफाई कार्यक्रम प्रशंसनीय हैं। उन्होंने उल्लेख कियाकि बालासोर और भद्रक के समुद्र तटों पर नीले केकड़े बहुतायत में पाए जाते हैं, ऐसे में नीले केकड़ों या हॉर्सशू केकड़ों पर अनुसंधान केंद्र की स्थापना विश्वविद्यालय की दूरदर्शिता को दर्शाती है। राष्ट्रपति ने कहाकि समाज के सभी वर्गों की वृद्धि, सुरक्षा और तकनीकी विकास से देश की प्रगति में तेजी आएगी, इस क्षेत्रमें देश के सभी विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहाकि समावेशी विकास, नवाचार और सामाजिक परिवर्तन के उत्प्रेरक के रूपमें कार्य करने की विश्वविद्यालयों की विशेष जिम्मेदारी है। राष्ट्रपति ने कहाकि आलोचनात्मक सोच, नैतिक नेतृत्व और स्थानीय एवं वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने वाले अनुसंधान को बढ़ावा देकर उच्चशिक्षा संस्थान एक ऐसे भविष्य का निर्माण कर सकते हैं, जो टिकाऊ, न्यायसंगत और मानवीय मूल्यों पर आधारित हो। उन्होंने विश्वास व्यक्त कियाकि फकीर मोहन विश्वविद्यालय अपनी शैक्षणिक दृष्टि और सामुदायिक भागीदारी से इस दिशा में एक परिवर्तनकारी भूमिका निभाएगा।

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