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भारत के लिए भी मिडिल ईस्ट में संघर्ष चिंताजनक!

युद्ध के माहौल में भारत की कूटनीति प्रभावी समाधान तलाश रही-मोदी

भारतीय संसद से विश्व के सामने रखी एकजुट और सर्वसम्मत आवाज़

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Monday 23 March 2026 06:30:38 PM

pm narendra modi (file photo)

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष केबीच आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा से देशवासियों के समक्ष ‘संप्रभु, सशक्त और आत्मनिर्भर भारत’ की बात रखी। प्रधानमंत्री ने कहाकि जहां डिप्लोमेसी की बात है तो भारत की भूमिका स्पष्ट है शुरुआत से ही हमने इस संघर्ष को लेकर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहाकि मैंने स्वयं भी पश्चिम एशिया के सभी संबंधित नेताओं से बातचीत की है और उन सभी से तनाव को कम करने और इस संघर्ष को खत्म करने का आग्रह किया है। प्रधानमंत्री ने नागरिकों, एनर्जी और ट्रांसपोर्ट से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों का विरोध किया। उन्होंने कहाकि कमर्शियल जहाजों पर हमला और होर्मुज स्ट्रेट जैसे अंतर्राष्ट्रीय जलमार्ग में रुकावट अस्वीकार्य है। उन्होंने कहाकि भारत डिप्लोमेसी के जरिए युद्ध के माहौल में भी भारतीय जहाजों के सुरक्षित आवागमन केलिए निरंतर प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहाकि भारत हमेशा से मानवता के हित में और शांति के पक्ष में अपनी आवाज़ उठाता रहा है। उन्होंने कहाकि बातचीत और कूटनीति ही इस समस्या का समाधान है, हमारे हर प्रयास तनाव को कम करने, इस संघर्ष को समाप्त करने केलिए है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि इस युद्ध में किसीके भी जीवन पर संकट मानवता के हित में नहीं है, इसलिए भारत का प्रयास सभी पक्षों को जल्द से जल्द शांतिपूर्ण समाधान केलिए प्रोत्साहित करने का है। उन्होंने इस अवसर पर यहभी कहाकि जब ऐसे संकट आते हैं तो कुछ तत्व इसका गलत फायदा उठाने की कोशिश भी करते हैं। उन्होंने देशवासियों से कहाकि हमें बहुत सावधान और सतर्क रहना है, हालात का फायदा उठाने वाले झूंठ फैलाने का प्रयास करेंगे, ऐसे लोगों की कोशिशें को सफल नहीं होने देना है। उन्होंने देश की सभी राज्य सरकारों से कहाकि कालाबाजारी, जमाखोरी की कड़ी मॉनिटरिंग जरूरी है, जहांसे भी ऐसी शिकायतें आएं, वहां त्वरित कार्रवाई करें। प्रधानमंत्री ने मानाकि युद्ध के कारण दुनिया में जो कठिन हालात हैं, उनका प्रभाव लंबे समय तक बने रहने की आशंका है, इसलिए हमें तैयार, एकजुट रहना है, हम कोरोना के समयभी एकजुटता से ऐसी चुनौतियों का सामना कर चुके हैं, अब हमें फिरसे उसी तरह तैयार रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहाकि इसलिए कानून व्यवस्था सुनिश्चित करने वाली सभी एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है, कोस्टल सिक्योरिटी, बॉर्डर सिक्योरिटी, साइबर सिक्योरिटी, स्ट्रैटेजिक इंस्टालेशंस सबकी सुरक्षा को और मजबूत किया जा रहा है।
नरेंद्र मोदी ने कहाकि बीते दो-तीन हफ्ते में पश्चिमी एशिया के हालात की भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने सदन को जरूरी जानकारी दी है। नरेंद्र मोदी ने कहाकि अब इस संकट का विश्व की अर्थव्यवस्था, लोगों के जीवन पर बहुत ही विपरीत असर हो रहा है, इसलिए दुनिया इस संकट के जल्द से जल्द समाधान केलिए सभी पक्षोंसे आग्रह भी कर रही है। नरेंद्र मोदी ने कहाकि भारत के सामने भी इस युद्ध ने अप्रत्याशित चुनौतियां खड़ी कर दी हैं, यह आर्थिक भी हैं, नेशनल सिक्योरिटी से जुड़ी भी हैं और मानवीय भी हैं। उन्होंने कहाकि युद्धरत और युद्ध से प्रभावित देशों केसाथ भारत के व्यापक व्यापारिक रिश्ते हैं, जिस क्षेत्रमें युद्ध हो रहा है, वो दुनिया के दूसरे देशों केसाथ हमारे व्यापार का एक महत्वपूर्ण रास्ता है, विशेष रूपसे कच्चे तेल और गैस की हमारी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा यही क्षेत्र पूरा करता है। प्रधानमंत्री ने कहाकि हमारे लिए यह रीजन एक और कारण से भी अहम है, लगभग एक करोड़ भारतीय खाड़ी देशों में रहते हैं, वहां काम करते हैं, वहां समंदर में कमर्शियल शिप में भारतीय क्रू मेंबर की संख्या भी बहुत अधिक है, ऐसे अलग-अलग कारणों के चलते भारत की चिंताएं स्वाभाविक रूपसे अधिक हैं, इसलिए यह आवश्यक हैकि भारत की संसद से इस संकट को लेकर एकमत और एकजुट आवाज़ दुनिया में जाए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि जबसे यह युद्ध शुरू हुआ है, तबसे ही प्रभावित देशों में हर भारतीय को जरूरी मदद दी जा रही है, मैंने खुद पश्चिम एशिया के ज्यादातर देश के राष्ट्राध्यक्षों से दो राउंड फोन पर बात की है, सभी ने भारतीयों की सुरक्षा का पूरा आश्वासन दिया है। उन्होंने कहाकि प्रभावित देशों में हमारे जितने भी मिशन हैं, वो निरंतर भारतीयों की मदद करने में जुटे हैं, नियमित रूपसे एडवाइजरी जारी कर रहे हैं, यहां भारत में और अन्य प्रभावित देशों में 24/7 कंट्रोल रूम और आपातकालीन हेल्पलाइन स्थापित की गई है, इनसे प्रभावितों को त्वरित जानकारी दी जा रही है। उन्होंने कहाकि सरकार संवेदनशील भी है, सतर्क भी है और हर सहायता केलिए तत्पर भी है। नरेंद्र मोदी ने कहाकि भारत में बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, गैस और फर्टिलाइजर जैसी अनेक जरूरी चीजें होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते से आती हैं, युद्ध केबाद से ही होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों का आना-जाना बहुत चुनौतीपूर्ण हो गया है, बावजूद इसके हमारी सरकार का यह प्रयास रहा हैकि पेट्रोल, डीजल और गैस की सप्लाई प्रभावित न हो। उन्होंने कहाकि देश अपनी जरूरत का 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है, इसकी सप्लाई में अनिश्चिता के कारण सरकार ने एलपीजी के डोमेस्टिक उपयोग को प्राथमिकता दी है, साथही देश में ही उत्पादन को भी बढ़ाया जा रहा है, पेट्रोल डीजल की सप्लाई देश में सुचारू रूपसे होती रहे इसपर भी लगातार काम किया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि इन परिस्थितियों में एनर्जी सिक्योरिटी को लेकर बीते एक दशक में उठाए गए कदम औरभी प्रासंगिक हो गए हैं, बीते 11 वर्ष में भारत ने एनर्जी इंपोर्ट का डायवर्सिफिकेशन किया है, पहले क्रूड ऑयल, एलएनजी, एलपीजी, ऐसी एनर्जी जरूरतों के लिए 27 देशों से इंपोर्ट किया जाता था, आज भारत 41 देशों से एनर्जी इंपोर्ट करता है। उन्होंने कहाकि भारत ने कच्चे तेल के भंडारण को भी प्राथमिकता दी है, आज भारत केपास 53 लाख मैट्रिक टन से अधिक का स्ट्रैटेजिक पैट्रोलियम रिज़र्व है और 65 लाख मैट्रिक टन से अधिक के रिज़र्व की व्यवस्था पर देश काम कर रहा है। प्रधानमंत्री ने कहाकि बीते 11 वर्ष में हमारी रिफायनिंग कैपेसिटी में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने कहाकि भारत सरकार गल्फ और आसपास के शिपिंग रूट्स पर निरंतर नज़र बनाए हुए हैं, हमारा प्रयास हैकि तेल हो, गैस हो, फर्टिलाइजर हो, ऐसे हर जरूरी सामान से जुड़े जहाज भारत तक सुरक्षित पहुंचे, हम अपने सभी वैश्विक सहयोगों केसाथ निरंतर संवाद कर रहे हैं, ताकि हमारे मैरिटाइम कॉरिडोर सुरक्षित रहें, ऐसे प्रयासों के कारण बीते दिन होर्मुज स्ट्रेट में फसे हमारे कई जहाज भारत आए भी हैं। उन्होंने कहाकि संकट के समय में देश की एक और तैयारीभी बहुत काम आ रही है, बीते 10-11 साल में एथेनॉल का उत्पादन और उसकी ब्लेंडिंग पर अभूतपूर्व काम हुआ है, एक दशक पहले तक देश में सिर्फ एक डेढ़ परसेंट इथेनॉल ब्लेंडिंग कैपेसिटी थी।
प्रधानमंत्री ने कहाकि आज हम पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग के करीब पहुंच गए हैं, इसके कारण प्रतिवर्ष करीब साढ़े चार करोड़ बैरल कम ऑयल इंपोर्ट करना पड़ रहा है, ऐसेही रेलवे के बिजलीकरण से भी बहुत बड़ा फायदा हो रहा है। उन्होंने कहाकि आज जिस स्केल पर वैकल्पिक ईंधन पर काम हो रहा है, उससे भारत का भविष्य और सुरक्षित होगा। नरेंद्र मोदी ने कहाकि हम जानते हैंकि एनर्जी आज इकोनॉमी की रीढ़ है और ग्लोबल एनर्जी नीड्स को पूरा करने वाला एक बड़ा सोर्स वेस्ट एशिया है। उन्होंने कहाकि सरकार एक रणनीति केसाथ काम कर रही है, आज भारत की इकॉनमी के फंडामेंटल्स मजबूत हैं, इससेभी देश को बहुत मदद मिली है, हम हर सेक्टर के स्टेकहोल्डर्स से चर्चा कर रहे हैं, जहांभी जरूरत है, उस सेक्टर को आवश्यक सपोर्ट दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहाकि सरकार ने एक इंटर मिनिस्टीरियल ग्रुप भी बनाया है, ये ग्रुप हर रोज मिलता है और हमारे इंपोर्ट एक्सपोर्ट में आने वाली हर दिक्कत का आकलन करता है और ये ग्रुप आवश्यक समाधान पर भी निरंतर काम करता है। उन्होंने भरोसा जताया हैकि सरकार और इंडस्ट्री के साझा प्रयासों से हम परिस्थितियों का बेहतर सामना कर पाएंगे। प्रधानमंत्री ने कहाकि एक बड़ा सवाल यह हैकि युद्ध का खेती पर क्या प्रभाव होगा? देश के किसानों ने हमारे अन्न के भंडार भर रखे हैं, इसलिए भारत केपास पर्याप्त खाद्यान्न है। उन्होंने कहाकि अतीत में भी हमारी सरकार ने दुनिया के संकटों का बोझ किसानों पर नहीं पड़ने दिया था, दुनिया के बाजार में यूरिया की एक बोरी 3000 रूपये तक पहुंच गई, लेकिन भारत के किसानों को वही बोरी 300 रूपये से भी कम कीमत पर उपलब्ध कराई गई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि एक दशक में देश में 6 यूरिया प्लांट शुरू किए गए हैं, इससे सालाना 76 लाख मीट्रिक टन से अधिक की यूरिया प्रोडक्शन कैपेसिटी जुड़ी है, इस दौरान डीएपी और एनपीकेएस जैसी खाद का घरेलू उत्पादन भी करीब 50 लाख मीट्रिक टन बढ़ाया गया है, इतना ही नहीं तेल और गैस की तरह खाद के आयात को भी डायवर्सिफाई किया गया है, हमने अपने विकल्पों को विस्तार किया है। प्रधानमंत्री ने कहाकि सरकार ने देश के किसानों को मेड इन इंडिया नैनो यूरिया का विकल्प दिया है, किसानों को प्राकृतिक खेती केलिए भी प्रोत्साहित किया है, पीएम कुसुम योजना केतहत किसानों को 22 लाख से ज्यादा सोलर पंप दिए गए हैं, इससे भी डीजल पर उनकी निर्भरता कम हुई है। उन्होंने देश के किसानों को विश्वास दिलायाकि सरकार किसानों कर हर संभव मदद करती रहेगी। प्रधानमंत्री ने कहाकि युद्ध का एक बहुत बड़ा चैलेंज ये भी हैकि भारत में गर्मी का मौसम शुरू हो रहा है, पावर जेनरेशन से लेकर पावर सप्लाई तकके सभी सिस्टम की निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है, बीते दशक में रिन्यूएबल एनर्जी की तरफ देश ने बड़े कदम उठाए हैं, आज टोटल इंस्टॉल पावर जेनरेशन कैपेसिटी का आधा हिस्सा रिन्यूएबल सोर्स से आता है, ये सारे प्रयास आज देश के बहुत काम आ रहे हैं।

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