रक्षामंत्री का घोराखाल सैनिक विद्यालय के स्थापना दिवस पर संबोधन
'सैनिक स्कूलों से उत्तीर्ण लड़कियां नारी शक्ति की पथप्रदर्शक बनेंगी'स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Saturday 21 March 2026 06:51:07 PM
घोराखाल (उत्तराखंड)। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा हैकि आजकल का युद्ध सीमाओं से परे है, राष्ट्रीय सुरक्षा में आर्थिक, डिजिटल, ऊर्जा और यहां तककि खाद्य सुरक्षा भी शामिल है। उन्होंने किसीभी परिस्थिति में देश की रक्षा केलिए कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने में सक्षम तैयार नागरिकों से समर्थित एक सशक्त सेना की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहाकि भारत का इतिहास उसकी समृद्धि का प्रमाण है, लेकिन इसी समृद्धि के कारण भारत पर बाहरी आक्रमण भी हुए, भारत का इतिहास केवल संघर्षों का नहीं, बल्कि लचीलेपन का इतिहास है, हर संकट में भारत ने स्वयं को पुनः स्थापित किया, खुदको पुनः आविष्कार और उन्नत किया। रक्षामंत्री ने आज उत्तराखंड के घोराखाल सैनिक विद्यालय के स्थापना दिवस समारोह और हीरक जयंती को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए ये बातें कहीं। उन्होंने कहाकि संघर्षों का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है, क्योंकि आज किसीभी राष्ट्र को आर्थिक, साइबर, अंतरिक्ष और सूचना युद्ध के माध्यम से कमजोर किया जा सकता है, जिसके लिए प्रत्येक नागरिक को हर समय सतर्क और तैयार रहना आवश्यक है।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहाकि सैनिक स्कूलों की स्थापना का उद्देश्य देश की रक्षा सेवाओं केलिए युवा प्रतिभाओं को तैयार करना था, सैनिक स्कूल घोराखाल ने सफलतापूर्वक इस उद्देश्य को पूरा किया है। उन्होंने कहाकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार सुरक्षा बलों को विशेष हथियारों और प्रौद्योगिकियों से लैस करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। रक्षामंत्री ने इस बातपर जोर दियाकि नागरिकों, विशेषकर युवाओं को अनुशासन और दृढ़ संकल्प केसाथ मानसिक दृढ़ता और बौद्धिक स्पष्टता विकसित करने की आवश्यकता है, ताकि वे राष्ट्र को हर परिस्थिति से निपटने में मदद कर सकें। उन्होंने वूका यानी अस्थिरता, अनिश्चिता, जटिलता और अस्पष्टता की अवधारणा का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों से आग्रह कियाकि वे आधुनिक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने केलिए वूका का अपना संस्करण विकसित करें, जिसमें दूरदर्शिता, समझ, साहस और अनुकूलन क्षमता शामिल है। उन्होंने राष्ट्र निर्माण केलिए आवश्यक मूल्यों को अधिक से अधिक युवाओं तक पहुंचाने केलिए सरकार के कदमों पर प्रकाश डाला। राजनाथ सिंह ने कहाकि सैनिक स्कूलों से निकलने वाले बच्चों का अनुशासन और समर्पण बाकी दूसरे बच्चों केलिए एक उदाहरण होता है, इसलिए सैनिक स्कूल की संख्या बढ़ाने केलिए सरकार ने यह फैसला लियाकि हम पीपीपी यानी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के आधार पर देशभर में 100 नए सैनिक स्कूलों की स्थापना करेंगे।
रक्षामंत्री ने सैनिक विद्यालयों में लड़कियों के प्रवेश के निर्णय को ऐतिहासिक और क्रांतिकारी बताया, जिससे देश की 'नारी शक्ति' को बल मिलेगा। उन्होंने कहाकि सैनिक लड़कियां आनेवाले समय में 'नारी शक्ति' की पथप्रदर्शक बनेंगी और विभिन्न क्षेत्रोंमें नई ऊंचाइयों को छुएंगी। उन्होंने कहाकि लगभग पांच साल पहले जब प्रधानमंत्री ने सैनिक स्कूलों में बच्चियों के प्रवेश की शुरुआत का फैसला लिया तो वह एक ऐतिहासिक फैसला था, वह नारी शक्ति के सशक्तिकरण की दिशामें एक क्रांतिकारी कदम था। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त कीकि इस विद्यालय की होनहार लड़कियों ने इंटर-स्कूल बास्केटबॉल, फुटबॉल, एथलेटिक्स, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करके यह साबित कर दिया हैकि हमारी बेटियां किसीभी क्षेत्रमें हमारे बेटों से कम नहीं हैं। रक्षामंत्री ने कहाकि एक अन्य पहल में राष्ट्रीय कैडेट कोर में रिक्तियों की संख्या बढ़ाना शामिल है, पहले एनसीसी में 17 लाख कैडेटों की भर्ती क्षमता थी, जिसे अब 20 लाख कर दिया गया है। रक्षामंत्री ने सैनिक स्कूल घोराखाल के राष्ट्र की सेवा के 60 वर्ष पूरे करने पर छात्रों, शिक्षकों, पूर्व छात्रों और उनके परिजनों को बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त कियाकि सैन्य सेवा केलिए प्रशिक्षित छात्र अनुशासन और समर्पण के उच्चतम मानकों को बनाए रखते हुए अपने परिवार, संस्थान और राष्ट्र को गौरवांवित करते रहेंगे।
रक्षामंत्री ने सभी विद्यार्थियों से कहाकि वे अनुशासन को अपने जीवन में सर्वोपरि रखें, क्योंकि यही जीवन में उनको आगे बढ़ाएगा। रक्षामंत्री ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहाकि यह तैयारी अनुशासन की है, ताकि आप अपने कर्तव्य केप्रति समर्पित रह सकें और यह तैयारी दृढ़ संकल्प की भी है, ताकि आप किसीभी परिस्थिति में हार न मानें। और जब आप इतना तैयार रहेंगे तो कोई बड़े से बड़ा युद्ध भी आपके लिए कोई बड़ी बात नहीं होगी। उन्होंने कहाकि दशकों से घोराखाल सैनिक विद्यालय ने 800 से अधिक मेधावी विद्यार्थियों को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, संयुक्त रक्षा सेवा परीक्षा और वायु सेना सामान्य प्रवेश परीक्षा जैसी विभिन्न प्रवेश योजनाओं के माध्यम से 2000 से अधिक उम्मीदवारों को सशस्त्र बलों में भेजा है। रक्षामंत्री ने कहाकि एक अन्य पहल में राष्ट्रीय कैडेट कोर में रिक्तियों की संख्या बढ़ाना शामिल है, पहले एनसीसी में 17 लाख कैडेटों की भर्ती क्षमता थी, जिसे अब 20 लाख कर दिया गया है। उन्होंने आशा व्यक्त कीकि घोराखाल सैनिक विद्यालय राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान देने वाले नेताओं का निर्माण जारी रखेगा। उन्होंने इस अवसर पर यह भी जिक्र कियाकि घोराखाल सैनिक विद्यालय के विशिष्ट छात्र रहे पश्चिमी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल एमके कटियार छात्रों केलिए प्रेरणा का स्रोत हैं।