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'सार्वजनिक सेवा जिम्मेदार और उत्तरदायी कार्य'

उपराष्ट्रपति की आईपीएस और आईएफओएस प्रशिक्षुओं को प्रेरणाएं!

'प्रभावी और मानवीय शासन में धैर्य व दूसरों को ध्यान से सुनना जरूरी'

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Monday 15 December 2025 01:16:39 PM

vice president cp radhakrishnan interacted with officer trainees

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन से भारतीय पुलिस सेवा और भारतीय वन सेवा के अधिकारी प्रशिक्षुओं ने उपराष्ट्रपति एनक्लेव दिल्ली में मुलाकात की। ये अधिकारी हरियाणा लोक प्रशासन संस्थान में विशेष फाउंडेशन कोर्स कर रहे हैं। उपराष्ट्रपति ने प्रशिक्षुओं को अपने प्रेरक संबोधन में भारत के लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को याद करते हुए देश रियासतों के एकीकरण और अखिल भारतीय सेवाओं की स्थापना में उनकी अनुकरणीय भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहाकि जहां ओट्टो वॉन बिस्मार्क ने जर्मनी का एकीकरण किया, जहां लोग एक ही भाषा बोलते थे, वहीं सरदार पटेल ने एक ऐसे राष्ट्र के एकीकरण का कहीं अधिक जटिल कार्य किया, जहां भाषाई और सांस्कृतिक विविधता बहुत अधिक थी। उन्होंने कहाकि यह अद्वितीय उपलब्धि दुनिया के अन्य हिस्सों में किए गए ऐसे तुलना योग्य प्रयासों से कहीं आगे है।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने सक्षम अधिकारियों के चयन में संघ लोकसेवा आयोग की भूमिका की सराहना की, साथही उन्होंने ऐसे प्रशिक्षण संस्थानों जैसे एचआईपीए की भी प्रशंसा की, जो सार्वजनिक सेवा केलिए आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान करते हैं। उन्होंने अधिकारियों से श्रीमद्भागवत गीता की भावना में अपने कर्तव्यों का निर्वाह करने का आग्रह किया। उन्होंने उन्हें अपने कर्म पर ध्यान केंद्रित करने और हमेशा धर्म के पक्ष में खड़े रहने को कहा। उपराष्ट्रपति ने सार्वजनिक सेवा को जिम्मेदार और उत्तरदायी कार्य बताते हुए फाइलों और मामलों के समय पर निपटारे की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने दक्षता और सेवा अदायगी में सुधार केलिए प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग पर बल दिया। उपराष्ट्रपति ने सार्वजनिक जीवन में धैर्य के महत्व के बारेमें बताया। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी, एनजी रंगा, एनजी गोरे जैसे सांसदों को याद किया और कहाकि उनका सार्वजनिक समर्थन लंबे समय तक बना रहा, जिसकी शुरुआत उनके बहसों की गुणवत्ता से हुई थी। उन्होंने कहाकि सोशल मीडिया के युग में ऊंचे स्वर में कही गईं बातें अक्सर ध्यान आकर्षित करती हैं, लेकिन ऐसी लोकप्रियता आमतौर पर अस्थायी होती है।
उपराष्ट्रपति ने प्रभावी और मानवीय शासन केलिए धैर्य और दूसरों को ध्यान से सुनने को आवश्यक उपकरण बताया। उन्होंने कहाकि जनता की शिकायतों को सुनना अक्सर समस्या का एक बड़ा हिस्सा हल कर देता है। अधिकारी प्रशिक्षुओं से प्रश्नों का उत्तर देते हुए उपराष्ट्रपति ने निरंतर सीखने, धर्म के पालन और धैर्य के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर उपलब्ध जानकारी के अधिभार, झूंठी जानकारी और नकारात्मक खबरों की चुनौती पर भी बात की। उन्होंने अधिकारियों को सकारात्मक और रचनात्मक गाथाओं को बढ़ावा देने की सलाह दी। उन्होंने ऑनलाइन सामग्री साझा करने से पहले सामाजिक जिम्मेदारी की आवश्यकता पर बल दिया और जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार को प्रोत्साहित करने केलिए उचित कार्य की अपील की। उपराष्ट्रपति के साथ इस महत्वपूर्ण बातचीत में अधिकारियों को नेतृत्व, शासन और नैतिक सार्वजनिक सेवा के बारेमें महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुईं।

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