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दिल्ली विस्फोट के षड्यंत्रकारी बख्शे नहीं जाएंगे-मोदी

भारत केसाथ भावपूर्ण एकजुटता प्रदर्शित करते हुए भूटानियों ने की प्रार्थनाएं

भूटान नरेश जिग्मे सिंग्ये वांगचुक के जन्मदिन पर थिम्पू में भव्य कार्यक्रम

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Tuesday 11 November 2025 05:18:48 PM

grand celebrations in thimphu to mark king bhutan's birthday

थिम्पू/ नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूटान के चौथे नरेश जिग्मे सिंग्ये वांगचुक के 70वें जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रम में भारत केसाथ भावपूर्ण एकजुटता प्रदर्शित करने केलिए भूटान की जनता का हार्दिक आभार व्यक्त किया। भूटानवासियों ने भारत की राजधानी दिल्ली में हुई भयावह विस्फोटक दुर्घटना के पीड़ितों और उनके परिजनों केलिए करुणा और एकता की एक अनोखी प्रार्थना सभा का नेतृत्व किया। प्रधानमंत्री ने इस अप्रतिम कार्य की सराहना करते हुए कहाकि मैं इस भाव प्रदर्शन को कभी नहीं भूलूंगा। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि वे भारी मन से भूटान आए हुए हैं, क्योंकि कल शाम दिल्ली में हुई भयावह घटना ने सभीको बहुत व्यथित कर दिया है। उन्होंने कहाकि वे इस घटना से पीड़ित परिवारों के दुःख को समझते हैं और पूरा देश उनके साथ खड़ा है। प्रधानमंत्री ने बतायाकि वे घटना की जांच में शामिल सभी एजेंसियों केसाथ रातभर निरंतर संपर्क में थे, भारतीय सुरक्षा एजेंसियां पूरे षड्यंत्र की तह तक जाएंगी और आश्वासन दियाकि हमले में जिन षड्यंत्रकारियों का हाथ है, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। प्रधानमंत्री ने घोषणा कीकि घटना केलिए ज़िम्मेदार सभी लोगों को कड़ी सज़ा दिलाई जाएगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज भूटान में थिम्पू के चांगलीमेथांग उत्सव मैदान में आयोजित भव्य कार्यक्रम में भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक और चतुर्थ नरेश जिग्मे सिंग्ये वांगचुक का हार्दिक अभिनंदन किया। उन्होंने शाही परिवार के सदस्यों, भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे और गणमान्य नागरिकों केप्रति सम्मानपूर्वक आभार व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कहाकि आजका दिन भूटान, भूटान के शाही परिवार और विश्व शांति में विश्वास रखने वाले सभी लोगों केलिए बहुत अहम है। उन्होंने भारत भूटान केबीच सदियों से गहन आत्मीय और सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख किया और कहाकि इस महत्वपूर्ण अवसर पर भाग लेना भारत की और उनकी अपनी प्रतिबद्धता थी। नरेंद्र मोदी ने कहाकि भूटान में एक तरफ गुरु पद्मसंभव के आशीर्वाद केसाथ वैश्विक शांति प्रार्थना महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है तो दूसरी ओर भगवान बुद्ध के पिपरहवा अवशेषों के पवित्र दर्शन हो रहे हैं। उन्होंने कहाकि यह अवसर चतुर्थ नरेश की 70वीं जयंती के उत्सव का भी अवसर है, जिसमें इतनी बड़ी संख्या में लोगों की गरिमामयी उपस्थिति भारत-भूटान संबंधों की मज़बूती को दर्शाती है।
प्रधानमंत्री ने कहाकि भारत में पुरखों की प्रेरणा है-वसुधैव कुटुम्बकम यानी पूरी दुनिया एक परिवार है। उन्होंने सर्वे भवंतु सुखिनः मंत्र से सभी के सुखी होने की प्रार्थना दोहराई और कहाकि इस वैदिक ऋचा के माध्यम से आकाश, अंतरिक्ष, पृथ्वी, जल, औषधियों, वनस्पतियों और सभी जीवित प्राणियों में शांति व्याप्त हो। उन्होंने कहाकि भारत इन्हीं भावनाओं केसाथ भूटान के विश्व शांति प्रार्थना महोत्सव में शामिल हुआ है, यहां संपूर्ण विश्व के संत एक साथ विश्व शांति के लिए प्रार्थना करने केलिए जुटे हैं और इसमें 140 करोड़ भारतीयों की प्रार्थनाएं भी शामिल हैं। नरेंद्र मोदी ने बतायाकि बहुत कम लोग जानते होंगेकि गुजरात में उनका जन्मस्थान वडनगर बौद्ध परंपरा से जुड़ा पवित्र स्थल है और उत्तर प्रदेश में उनकी कर्मभूमि वाराणसी बौद्ध श्रद्धा का शिखर है। उन्होंने कहाकि इस समारोह में शामिल होना उनके लिए व्यक्तिगत रूपसे बहुत बड़ा अर्थ रखता है और यहभी कहाकि शांति का दीप भूटान और दुनियाभर के हर घर को प्रकाशित करे। प्रधानमंत्री ने भूटान नरेश जिग्मे सिंग्ये वांगचुक के जीवन को ज्ञान, सादगी, साहस और राष्ट्र केप्रति नि:स्वार्थ सेवा का संगम बताते हुए कहाकि उन्होंने 16 वर्ष की अल्पायु में ही बहुत बड़ा दायित्व ग्रहण किया और पिता जैसा स्नेह देते हुए अपने दूरदर्शी नेतृत्व से देश को आगे बढ़ाया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उल्लेख कियाकि उन्होंने अपने 34 वर्ष के शासनकाल में भूटान की विरासत और विकास दोनों को एकसाथ लेकर चले। उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थापना से लेकर सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति को बढ़ावा देने तक निर्णायक भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री ने कहाकि नरेश जिग्मे सिंग्ये वांगचुक की ओर से दिया गया ‘सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता’ का विचार विकास को परिभाषित करने केलिए विश्वस्तर पर मान्यता प्राप्त मानदंड बन गया है। उन्होंने कहाकि नरेश जिग्मे सिंग्ये वांगचुक ने यह प्रदर्शित किया हैकि राष्ट्र निर्माण केवल सकल घरेलू उत्पाद से नहीं, बल्कि मानवता की भलाई से होता है। नरेंद्र मोदी ने कहाकि भारत और भूटान केबीच मैत्री को औरभी ज्यादा मज़बूत करने में भूटान नरेश जिग्मे सिंग्ये वांगचुक का अनुकरणीय योगदान है। उन्होंने कहाकि उन्होंने जो नींव रखी उसपर दोनों देशों की मित्रता निरंतर फल-फूल रही है। प्रधानमंत्री ने भारतीयों की ओर से नरेश जिग्मे सिंग्ये वांगचुक को हार्दिक बधाई दी और उनके बेहतर स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की शुभकामनाएं कीं।
नरेंद्र मोदी ने कहाकि भारत और भूटान सिर्फ़ सीमाओं से ही नहीं, बल्कि संस्कृतियों से भी जुड़े हैं, हमारा रिश्ता मूल्यों, भावनाओं, शांति और प्रगति का है। प्रधानमंत्री ने 2014 में पदभार ग्रहण करने केबाद भूटान की अपनी पहली विदेश यात्रा को याद करते हुए कहाकि उस यात्रा की यादें आजभी उन्हें भावुक कर देती हैं। उन्होंने भारत-भूटान संबंधों की मज़बूती और समृद्धि पर ज़ोर दिया और कहाकि दोनों देश मुश्किल समय में साथ खड़े रहे हैं, चुनौतियों का मिलकर सामना किया है और अब प्रगति और समृद्धि के पथ पर साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं। नरेंद्र मोदी ने कहाकि नरेश जिग्मे सिंग्ये वांगचुक भूटान को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं और भारत भूटान केबीच विश्वास और विकास की साझेदारी पूरे क्षेत्र केलिए बहुत बड़ा मॉडल है। प्रधानमंत्री ने कहाकि भारत भूटान की ऊर्जा साझेदारी विकास को गति दे रही है, भारत भूटान जलविद्युत सहयोग की नींव नरेश जिग्मे सिंग्ये वांगचुक के नेतृत्व में रखी गई थी और उन्होंने एवं पंचम नरेश ने भूटान में सतत विकास और पर्यावरण प्रथम विजन को आगे बढ़ाया है। नरेंद्र मोदी ने कहाकि उनकी इसी दूरदर्शी नींव ने भूटान को दुनिया का पहला कार्बन निगेटिव देश बनने में सक्षम बनाया है, जो असाधारण उपलब्धि है। उन्होंने कहाकि प्रति व्यक्ति नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में भूटान विश्व के सर्वोच्च देशों में से एक है और वर्तमान में अपनी 100 प्रतिशत बिजली का उत्पादन नवीकरणीय स्रोतों से करता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि इस क्षमता का और विस्तार करते हुए आज 1000 मेगावाट से अधिक की एक नई जलविद्युत परियोजना का शुभारंभ किया गया है, जिससे भूटान की जलविद्युत क्षमता में 40 प्रतिशत वृद्धि होगी। इसके अतिरिक्त लंबे समय से रुकी हुई एक और जलविद्युत परियोजना पर भी काम फिरसे शुरू हो रहा है। प्रधानमंत्री ने कहाकि यह साझेदारी केवल जलविद्युत तक ही सीमित नहीं है, भारत भूटान अब सौर ऊर्जा के क्षेत्रमें भी बड़े कदम उठा रहे हैं, इससे जुड़े अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। नरेंद्र मोदी ने कहाकि ऊर्जा सहयोग केसाथ भारत भूटान कनेक्टिविटी बढ़ाने पर भी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, गेलेफु और समत्से शहरों को भारत के विशाल रेल नेटवर्क से जोड़ने का निर्णय लिया गया है। प्रधानमंत्री ने कहाकि यह परियोजना पूरी होने पर भूटान के उद्योगों और किसानों की भारत के विशाल बाज़ार तक पहुंच और आसान हो जाएगी। उन्होंने कहाकि दोनों देश सीमा पर बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री ने भूटान नरेश की ओर से शुरू की गई दूरदर्शी गेलेफु माइंडफुलनेस सिटी पहल का उल्लेख करते हुए इसके विकास केलिए भारत के पूर्ण समर्थन की पुष्टि की। उन्होंने घोषणा कीकि भारत जल्द ही आगंतुकों और निवेशकों की सुविधा केलिए गेलेफु के पास आव्रजन चौकी स्थापित करेगा। प्रधानमंत्री ने कहाकि भारत भूटान की प्रगति और समृद्धि एकदूसरे से गहराई से जुड़े हैं, भारत सरकार ने इसी भावना को ध्यान में रखते हुए पिछले वर्ष भूटान की पंचवर्षीय योजना केलिए 10000 करोड़ रुपये के सहायता पैकेज की घोषणा की थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि इस निधि का उपयोग सड़कों से लेकर कृषि, वित्तपोषण से लेकर स्वास्थ्य सेवा तक सभी क्षेत्रोंमें किया जा रहा है, इससे भूटान के नागरिकों के जीवन को सुगम बनाया जा रहा है। नरेंद्र मोदी ने कहाकि भारत ने ऐसे कई कदम उठाए हैं, ताकि भूटान के लोगों को आवश्यक वस्तुओं की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित हो। उन्होंने कहाकि भूटान में यूपीआई भुगतान की सुविधा का विस्तार हो रहा है और हम इस दिशा में भी काम कर रहे हैंकि भूटान के नागरिकों को भी भारत आने पर यूपीआई सेवाओं का उपयोग करने की सुविधा मिले। नरेंद्र मोदी ने इस बातपर बल दियाकि भारत-भूटान की मज़बूत साझेदारी का सबसे अधिक लाभ दोनों देशों के युवाओं को हो रहा है। उन्होंने राष्ट्रीय सेवा, स्वैच्छिक सेवा और नवाचार को बढ़ावा देने में भूटान नरेश के अनुकरणीय कार्यों की सराहना की और युवाओं को तकनीक के जरिए सशक्त बनाने के उनके दूरदर्शी प्रयासों का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहाकि भूटानी युवा इस दृष्टिकोण से बेहद प्रेरित हैं और शिक्षा, नवाचार, कौशल विकास, खेल, अंतरिक्ष और संस्कृति सहित कई क्षेत्रोंमें भारत भूटान के युवाओं केबीच सहयोग बढ़ रहा है। उन्होंने बतायाकि दोनों देशों के युवा उपग्रह भी बना रहे हैं। उन्होंने इसे भारत और भूटान दोनों केलिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि भारत और भूटान संबंधों की एक बड़ी शक्ति दोनों देशों के लोगों केबीच के आत्मिक संबंध में निहित है। उन्होंने भारत के राजगीर में हालही में हुए शाही भूटानी मंदिर के उद्घाटन का उल्लेख किया और कहाकि इस पहल का अब देश के अन्य हिस्सों में भी विस्तार हो रहा है। प्रधानमंत्री ने भूटान के लोगों की आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए यह घोषणा कीकि भारत सरकार वाराणसी में एक भूटानी मंदिर और अतिथि गृह के निर्माण केलिए आवश्यक भूमि उपलब्ध करा रही है। उन्होंने कहाकि ये मंदिर भारत और भूटान केबीच बहुमूल्य एवं ऐतिहासिक सांस्कृतिक संबंधों को और सुदृढ़ बना रहे हैं। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण का समापन करते हुए यह आशा व्यक्त कीकि दोनों देश शांति, समृद्धि और साझा प्रगति के पथ पर आगे बढ़ते रहेंगे और दोनों देशों पर तथागत भगवान गौतम बुद्ध और गुरु रिनपोछे के निरंतर आशीर्वाद की शुभकामनाएं कीं।

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