भारत के घास के मैदानों खुले प्राकृतिक इकोसिस्टम पर मार्गदर्शिका
मंगोलिया में हुआ संयुक्तराष्ट्र मरुस्थलीकरण निवारण सम्मेलनस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Tuesday 18 August 2026 12:55:22 PM
उलानबातर (मंगोलिया)। भारत ने मंगोलिया में संयुक्तराष्ट्र मरुस्थलीकरण निवारण सम्मेलन (यूएनसीसीडी) के पक्षकारों के सम्मेलन (कॉप-17) के 17वें सत्र में भारत के घास के मैदानों और अन्य खुले प्राकृतिक इकोसिस्टम केलिए अपनी पहली मार्गदर्शिका जारी की है। यह दस्तावेज़ भारत के घास के मैदानों, सवाना, मरुस्थलों और खुले प्राकृतिक इकोसिस्टम की समृद्ध विविधता, पारिस्थितिक महत्व, सामाजिक और आर्थिक महत्व को उजागर करता है। यह इनके संरक्षण, पुनर्स्थापन और सतत प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। भारत सरकार के पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव का इस मौके पर वीडियो संदेश प्रसारित किया गया। कॉप-17 में इसका शुभारंभ भारत को अपने विविध खुले इकोसिस्टम को प्रदर्शित करने और भूमि पुनर्स्थापन, चारागाहों और भूमि क्षरण तटस्थता पर वैश्विक चर्चा में उनकी भूमिका को मजबूत करने केलिए एक महत्वपूर्ण मंच भी प्रदान करता है।
भारत के केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस अवसर पर बताया कि घास के मैदानों, झाड़ियों और खाइयों को लंबे समय से वृक्षों के अभाव के आधार पर आंका जाता रहा है, जबकि ये इकोसिस्टम पृथ्वी पर कहीं और न पाई जाने वाली प्रजातियों को आश्रय देते हैं और पशुपालक समुदायों का भरण पोषण करते हैं। उन्होंने कहाकि आधुनिक विज्ञान स्थानीय समुदायों की इस समझ को पुष्ट करता हैकि स्वस्थ घास के मैदान जैव विविधता, आजीविका और जलवायु परिवर्तन केप्रति सहनशीलता केलिए आवश्यक हैं। भूपेंद्र यादव ने कहाकि गाइड उनके दिल के बेहद करीब है, क्योंकि उनका पालन पोषण राजस्थान के अजमेर में हुआ, जहां चरागाह और रेगिस्तानी झाड़ियां थीं, जिन्हें अक्सर बंजरभूमि कहा जाता था। गांवों में संरक्षित पारंपरिक ओरान या गौचर परिदृश्यों को याद करते हुए उन्होंने कहाकि स्थानीय समुदाय समझते थेकि भूमि, पशुधन और उनका अपना जीवन आपस में घनिष्ठ रूपसे जुड़े हुए हैं।
भूपेंद्र यादव ने मार्गदर्शिका को भारत के खुले प्राकृतिक इकोसिस्टम को मान्यता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया और वनों केसाथ इनके विज्ञान आधारित संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने आशा व्यक्त कीकि इससे इकोसिस्टम की बेहतर समझ और संरक्षण को प्रोत्साहन मिलेगा। भारत सरकार के पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तत्वावधान और मार्गदर्शन में यूएनसीसीडी कॉप-17 के आधिकारिक कार्यक्रम में मार्गदर्शिका का शुभारंभ हुआ। मार्गदर्शिका का प्रकाशन और कार्यक्रम अशोक ट्रस्ट फॉर रिसर्च इन इकोलॉजी एंड द एनवायरनमेंट द्वारा इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन सस्टेनेबल लैंड मैनेजमेंट, इंडियन काउंसिल ऑफ फॉरेस्ट्री रिसर्च एंड एजुकेशन और स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर, इसरो के सहयोग से आयोजित किया गया था। इसमें सरकार, वैज्ञानिक एवं अनुसंधान संस्थानों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
भारत के घास के मैदानों और वन क्षेत्रों की विविधता और वितरण, उनके पारिस्थितिक महत्व और भारत के भूमि क्षरण तटस्थता (एलडीएन) लक्ष्यों को प्राप्त करने में उनके पुनर्स्थापन की भूमिका पर प्रस्तुतियों और चर्चाओं में प्रकाश डाला गया, साथही मजबूत वैज्ञानिक ज्ञान, बेहतर भूमि क्षरण आकलन और भूदृश्य स्तर की योजना की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। मार्गदर्शिका भारतभर के प्रमुख खुले प्राकृतिक इकोसिस्टम (ओपन नेचुरल इकोसिस्टम्स) की जानकारी संकलित करती है। इसमें उनकी भौगोलिक स्थिति, पारिस्थितिक विशेषताएं, जैव विविधता और उनसे जुड़े समुदायों और जनजातियों का विवरण शामिल है। इसमें पशुपालन, अग्नि पारिस्थितिकी और कार्बन पृथक्करण पर विषयगत अनुभाग भी हैं। भारत के ये इकोसिस्टम हिमालय और तराई के घास के मैदानों से लेकर थार और बन्नी के भूभाग, दक्कन के सवाना, पथरीले पठार, खड्ड, झाड़ीदार भूमि, तटीय इकोसिस्टम और रेगिस्तानी भूभाग तक फैले हुए हैं। ये इकोसिस्टम विविध जैव विविधता का समर्थन करते हैं, मृदा और जल प्रक्रियाओं में योगदान करते हैं, अपनी मृदा में पर्याप्त कार्बन संग्रहित करते हैं और पशुपालन, पशुधन आधारित और कृषि आजीविका को बनाए रखते हैं।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों, वैज्ञानिक संस्थानों, नागरिक समाज और समुदाय-केंद्रित संगठनों के साथ दो अनौपचारिक चर्चा सत्र भी आयोजित किए गए। चर्चाओं में घास के मैदानों और शुष्क भूमि के संरक्षण और पुनर्स्थापन, जन-केंद्रित चारागाह शासन, जलवायु परिवर्तन केप्रति लचीलापन और वन एवं वनों के व्यापक संरक्षण और सतत प्रबंधन केलिए आवश्यक संस्थागत, वैज्ञानिक और नीतिगत उपायों पर ध्यान केंद्रित किया गया। इस पहल ने भूमि पुनर्स्थापन और सतत भूमि प्रबंधन केलिए विज्ञान आधारित और भूदृश्य आधारित दृष्टिकोण केप्रति भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। इसमें भूमि क्षरण, जैव विविधता संरक्षण, जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता और सतत आजीविका से सम्बंधित मुख्यधारा की चर्चाओं में घास के मैदानों, चारागाहों और अन्य खुले प्राकृतिक इकोसिस्टम को शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। मार्गदर्शिका नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं, संरक्षण विशेषज्ञों, विकास एजेंसियों, भारत के घास के मैदानों और अन्य खुले इकोसिस्टम के संरक्षण, पुनर्स्थापन और सतत प्रबंधन की दिशा में काम कर रहे समुदायों केलिए एक मूल्यवान संसाधन के रूपमें काम करेगी।