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मायावती की सुरक्षा चुनौती कहां-कहां से?

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मायावती सुरक्षा-mayawati security

लखनऊ।उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने बसपा के राष्ट्रीय अधिवेशन में एक बार फिर अपनी हत्या की आशंका जताकर उत्तर प्रदेश की पुलिस के सुरक्षा और खुफिया तंत्र को तो चुनौती दे ही डाली है साथ ही उन्होंने इस प्रश्न को भी हवा में उछाल दिया है कि उनकी हत्या कौन करा सकता है? एक डरी हुई और पूरी तरह से बौखलाई हुई मायावती का भाषण हताशा और निराशा से भरा हुआ था। अपने राजनीतिक विरोधियों को नेस्तनाबूद करने की कसम खाने वाली मायावती को अब यह स्पष्ट करने की भी चुनौती आ गई है कि उन्हें अपनी हत्या की आशंका का किस स्रोत से पता चला है और इसके लिए उन्होंने अपने सुरक्षा प्रबंधों को किनके जिम्मे छोड़ा है क्योंकि जिस पुलिस की सुरक्षा में राज्य की मुख्यमंत्री मायावती चलती हैं वह सुरक्षा चक्र मायावती के एक ही बयान से ही संदेह के घेरे में आ गया है। मायावती ने यूपी पुलिस के सुरक्षा प्रबंधों और उसकी क्षमताओं पर बड़ा भारी प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है यह अलग बात है कि यूपी पुलिस केवल मूकदर्शक है और वह मायावती के जीवन के प्रति खतरों को लेकर केवल एकतरफा ही सोचती रही है।
राज्य सरकार का खुफिया तंत्र उन सूचनाओं और संभावनाओं से बेपरवाह है जिनमें यह भी कहा जा रहा है कि मायावती को केवल बाहर से ही खतरा नहीं है बल्कि उनके ही घर के भीतर भी खतरा हो सकता है। भारत में ही देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से लेकर भाजपा के नेता प्रमोद महाजन तक के मामले तो देश के बच्चे-बच्चे के सामने ही हैं। अन्य राजनेताओं के साथ भी ऐसी घटनाएं अंजाम हो चुकी हैं। कारण जो भी रहे हों, मायावती जिस सुरक्षा घेरे में हैं यहां उस पर पर कोई शक खड़ा नहीं किया जा रहा है, अपितु उसके कई कारण ऐसे हैं, जिनका संपत्ति के रखरखाव और पैसे के लेन-देन से ज्यादा संबंध है। मायावती के काले धन को सफेद करने के लिए अपनाई गई युक्तियों और उन व्यक्तियों के खुलासे पर इस काले धन और संपदा को लेकर कभी भी गंभीर आंतरिक विवाद उठ सकता है।
मायावती के कई ‘विश्वासपात्रों’ के नाम से विभिन्न बैंकों के खातों में ऐसा धन जमा बताया जाता है या उनके नाम ऐसी भू-संपत्तियों के बयनामे बताए जाते हैं जिनको अब तक दुनिया की नजरों से छिपाने की कोशिश की जाती रही है, लेकिन वे अब कई विश्वासपात्रों का साथ छोड़ने के कारण धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं। कुछ विश्वासपात्र ऐसे हैं जिनको डर सता रहा है कि कहीं उनके नाम की गई धन संपत्ति उनके हाथ से न निकल जाए। क्योंकि उनमें से कई को उम्मीद है कि मायावती जल्दी से उनसे वह धन संपत्ति लौटाने को नहीं कहेंगी और जब कहेंगी तो तब जैसा होगा, देखा जाएगा। फिलहाल वह मायावती के अत्यंत विश्वासपात्रों के रूप में साए की तरह से साथ खड़े हैं। इस समय जो हालात बन रहे हैं और मायावती के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति का मुकदमा शुरू होने की संभावना लग रही है उसमें किसी वक्त मायावती का अपने विश्वासपात्रों के उस अदृश्य एवं कपटपूर्ण विरोध का भी सामना करना पड़ सकता है।
मायावती से गंभीर मतभेदों के चलते इस समय कई विश्वासपात्र मायावती के साथ नहीं हैं। वे मायावती के आंतरिक राज सीबीआई तक पहुंचा ही रहे हैं। आय से अधिक संपत्ति का मामला सीबीआई को सौंपे जाने के बाद से सीबीआई ने मायावती कैंप में ऐसा जाल बिछाया हुआ है कि जिसको काटना मायावती के किसी भी सुरक्षा दस्ते के वश में नहीं है। मायावती से अलग हुए विश्वासपात्रों को मायावती के अत्यंत मर्म स्थानों और रहस्यों का भी पता है और यकीन किया जाता है कि इनमें कुछ ऐसे भी हैं जिन्होंने मायावती के खिलाफ सीबीआई जैसी एजेंसियों को महत्वपूर्ण सूचनाएं दीं और उनकी सुरागरसी की है। मायावती ने अपनी धन संबंधी और राजनीतिक सूचनाओं को काफी गुप्त रखने की जो कोशिशें कीं वह इसीलिए गुप्त नहीं रह सकीं हैं। जाहिर सी बात है कि मौजूदा उच्च सुरक्षा तंत्र के बावजूद पार्टी और मायावती की सूचनाएं उनके कैंप के अलावा और कहीं से लीक होने का कैसे प्रश्न उठ सकता है? सीबीआई के पास जो सूचनाएं हैं वह बिल्कुल अद्यतन हैं और उन्हें उनके निजी कैंप के अलावा कोई भी लीक नहीं कर सकता है।
मायावती पिछले कुछ समय से अतिविशिष्ट लोगों की सुरक्षा में लगी एसपीजी सुरक्षा की जो तीव्रता से मांग कर रही हैं उसके पीछे उनकी जो और मंशा हो सकती है तो यही कि वह अपने मौजूदा सुरक्षा तंत्र से तत्काल मुक्ति चाह रही हों जो कि उनके अत्यंत गहरे राज से वाकिफ चला आ रहा है जिसका कि मायावती के राजनीतिक एवं घरेलू मामलों पर कभी भी प्रतिकूल असर आ सकता है। मायावती की संपत्तियों के बारे में जिस प्रकार की सूचनाएं जांच एजेंसियों के पास हैं उनमें यह बात उल्लेखनीय रूप से सामने आती है कि उन्होंने अपनी समस्त संपत्तियों को छिपाने के लिए अपने पारिवारिक सदस्यों, खास नौकरों, रसोइयों से लेकर दूसरे विश्वासपात्रों तक का इस्तेमाल किया है। मायावती को आज उन दिक्कतों का सामना न करना होता जो उनके लिए जी का जंजाल बन गई है। पार्टी को आए धन को अपने लिए लिया और उसे छिपाने के लिए छद्म नामों और नौकरों, रसोइयों के नामों का सहारा लिया गया है जिसका भेद अब खुलने लगा है। देश के राजनेताओं में शायद मायावती ऐसी पहली राजनेता हैं जिनके पास बड़े पैमाने पर लिक्विड मनी मानी जाती है। इस प्रकार की लिक्विड मनी देश के औद्योगिक घरानों के पास भी नहीं समझी जाती है। वह अपार संपदा के मालकिन मानी जाती हैं।
जैसे-जैसे मायावती अपनी धन संपत्ति के मामले में संपत्तियों का ब्यौरा जांच एजेंसियों और अपनी रैलियों में सार्वजनिक करती जा रही हैं वैसे-वैसे ही उन लोगों पर इस संपत्ति की पार्टी या मायावती को वापस करने का दबाव बढ़ रहा है, जिनके नाम से मायावती ने बैंकों में भारी नगदी जमा कराई हुई है या जिनके नाम से चल-अचल संपत्तियों के बयनामे कराए हुए हैं। मायावती ने यह चतुराई जरूर दिखाई है कि जिसके नाम संपत्ति की गई है उससे पावर आफ एटानी भी लेकर रखी हुई है। उन लोगों को वह संपत्ति हस्तांतरित करनी पड़ सकती है जो ऐसे हालातों में उसे वापस करना अधिकांश लोगों के लिए नामुमकिन पाया गया है। इसके लिए किसी भी विश्वासपात्र को बेईमान बनने में कोई हिचक नहीं होगी। मायावती के यहां बहुत से ऐसे बताए जाते हैं जो आज उनके पैसे से ही सही लेकिन मन ही मन करोड़पति बनने का सपना पाले हुए हैं। ऐसा धन वापस करने के लिए कितने लोग तैयार होंगे यह गंभीरता से सोचने का विषय है।
इन संपत्तियों की आगे भी सुरक्षा को लेकर मायावती पर भारी दबाव है और उनसे इनकी वापसी मायावती के लिए एक बड़ी समस्या बन सकती है। ये संपत्तियां जिनके नाम से हैं उनकी महत्वाकांक्षाएं भी जगजाहिर ही हैं। उनमें कई को तो यही भरोसा होगा कि अब उनसे वह संपत्ति कोई वापस नहीं ले सकता। मायावती को जो धन आया है वह बेहिसाब है जिसमेंसे बड़े हिसाब-किताब का कोई अधिकृत दस्तावेज भी नहीं है। यह हिसाब ऐसा है जो आया कुछ है और दिखाया कुछ गया है। मायावती के परिवार में ही मतभेद हैं, इसका खुलासा वह अपनी जनसभा और कार्यकर्ताओं की मीटिंग में भी कर चुकी हैं। मायावती का यह बार-बार कहना कि उनकी जान को खतरा है उन्हें एसपीजी सुरक्षा चाहिए तो वह क्या एसपीजी इसलिए चाहती हैं कि राज्य की पुलिस उनकी सुरक्षा नहीं कर पा रही है? कहीं ऐसा तो नहीं कि बाहरी खतरों के बहाने वे अपनी आंतरिक सुरक्षा को लेकर अधिक चिंतित हों जिसे वह पूरी तरह से बदलना चाहती हों।
मायावती के बार-बार एसपीजी सुरक्षा मांगने से उनके निजी सुरक्षातंत्र की क्षमताओं पर भी ऐसे ही प्रश्न खड़े हो रहे हैं। उनकी सुरक्षा में पहले से ही कुछ पुराने लोग हैं लेकिन वह मायावती की आंतरिक सुरक्षा पर कितना नियंत्रण रख सकते हैं इस पर कुछ कहा नहीं जा सकता, क्योंकि इन तीन दशक में बड़े-बड़े राजनेताओं का जीवन आतंरिक सुरक्षा और विश्वासपात्रों के षड्यंत्र के कारण ही खतरे में पड़ा और ऐसे षड्यंत्र अधिकांश रूप में सफल रहे जिसमें कि प्रमोद महाजन की हत्या का ताजा उदाहरण सबके सामने है। मायावती का सार्वजनिक व्यवहार काफी प्रतिक्रियावादी माना जाता है और वह अपने विश्वासपात्रों में भी अपने व्यवहार और चुभती हुई बातों से डॉट-डपट के कारण कोई अधिक लोकप्रिय नहीं हैं। मायावती का राजनीतिक जीवन भले ही गंभीर विवादों से ग्रस्त है लेकिन उनकी सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है। मायावती की सुरक्षा को लेकर एक प्रश्नचिन्ह तो खड़ा हुआ है ही और सारी परिस्थितियों को देखकर यह चुनौती घर के भीतर से सबसे ज्यादा लग रही है।

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