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यूपीआई भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र की रीढ़!

यूपीआई के 10 वर्ष पर भारत की डिजिटल भुगतान क्रांति की चर्चा

डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में वैश्विक मानकों पर यूपीआई खरा

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Monday 24 August 2026 05:28:53 PM

upi (file photo)

भारत के एक इंस्टेंट रियल टाइम पेमेंट सिस्टम (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) यानी यूपीआई का अगला दशक देश के डिजिटल भुगतान परिदृश्य में और अधिक परिवर्तनकारी रहेगा। भारतीय रिज़र्व बैंक की नियामक निगरानी में भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम के द्वारा 25 अगस्त 2016 को आरंभ यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के भारत में डिजिटल भुगतान में क्रांतिकारी बदलाव के 10 वर्ष पूरे हो गए हैं। यूपीआई भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र की रीढ़ और वित्तीय समावेशन का अहम चालक बनकर उभरा है। यूपीआई पारितंत्र में नए उपयोगकर्ताओं और व्यापारियों को शामिलकर केंद्र सरकार यूपीआई आधारित नवोन्‍मेष के अगले चरण को तकनीकी प्रगति एवं वित्तीय समावेशन से और ज्यादा सुदृढ़ बनाने केलिए प्रतिबद्ध है। घरेलू भुगतान के क्षेत्रमें नवाचार के तौरपर आरंभ यह उपाय आज डिजिटल भुगतान के क्षेत्रमें वैश्विक मानक बन गया है। वर्ष 2025 तक यूपीआई की विश्व के वास्तविक समय लेनदेन भुगतान में लगभग 49 प्रतिशत मात्रा रही, इसी कारण अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्रा कोष ने इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना है।
यूपीआई सीमापार डिजिटल भुगतान के वैश्विक मंच के रूपमें उभरकर सामने आया है और अभी यह संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, भूटान, श्रीलंका, नेपाल, सिंगापुर, मॉरीशस, कतर, कंबोडिया, ग्रीस और मालदीव सहित 11 देशों में संचालित है। यूपीआई के एक दशक से अधिक के संचालन में असाधारण विस्तार और गति रही है। यूपीआई भारत के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के सबसे सफल स्तंभों में से एक बन गया है। यह एक ऐसा अंतरसंचालनीय उपाय है, जिससे लेनदेन के लाभार्थी को तुरंत धनराशि उपलब्ध हो जाती है। यह एक ही एप्लिकेशन से निर्बाध पीयर-टू-पीयर और पीयर-टू-मर्चेंट लेनदेन सक्षम बनाता है। आज यह भारत में लेनदेन के तरीके बदलकर लाखों उपयोगकर्ताओं के भुगतान का पसंदीदा माध्यम बन गया है। यूपीआई ने डिजिटल विभाजन में कमी वित्तीय समावेशन को बढ़ावा और डिजिटल वित्तीय सेवाओं की पहुंच का विस्तारकर देश में लोगों और समुदायों को सशक्त बनाने केसाथ ही व्यापक आर्थिक भागीदारी को बढ़ावा दिया है।
वित्तीय वर्ष 2026 में कुल 24,162 करोड़ रुपये के यूपीआई लेनदेन में देशभर में रोजमर्रा के डिजिटल भुगतान में विशेष रूपसे व्यापार संवर्ग में मजबूत गति केसाथ इस प्लेटफॉर्म का गहन एकीकरण दिखा। पर्सन-टू-मर्चेंट ग्राहक किसी दुकानदार, व्यापारी या बिजनेस को डिजिटल माध्यम से पैसे का लेनदेन मुख्य रूपसे छोटी राशि के भुगतानों से प्रेरित थे, जिनमें से 86 प्रतिशत 500 रुपये से कम थे। यह नियमित खुदरा और दैनिक वाणिज्य में यूपीआई का गहन इस्‍तेमाल दर्शाता है, जबकि उच्च मूल्य के लेनदेन में भी वृद्धि जारी रही। आपस में सीधे लेनदेन में भी कम मूल्य के हस्तांतरण का व्यापक उपयोग देखा गया, जबकि 500 रुपये से अधिक के लेनदेन का 41प्रतिशत यूपीआई की नियमित व्यक्तिगत भुगतानों और एकबार में बहुत बड़ी राशि के धन हस्तांतरण दोनों को सुविधाजनक बनाने में बढ़ती बहुपयोगी क्षमता दर्शाता है। यूपीआई के शुभांरभ से ही संस्थागत भागीदारी में लगातार और व्यापक विस्तार रहा है। यूपीआई पर सक्रिय बैंकों की संख्या वित्तवर्ष 2016-17 में 44 बैंकों से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 तक 703 पहुंच गई है। इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, निजी बैंक, लघु वित्त बैंक, भुगतान बैंक और सहकारी बैंक शामिल हैं, जिससे यूपीआई की व्यापक पहुंच हो गई है। प्रत्येक बैंक प्रेषक या लाभार्थी भुगतान सेवा प्रदाता के रूपमें कार्य करता है और एनपीसीआई सभी प्रतिभागियों के प्रदर्शन मानकों की निगरानी रखता है।
यूपीआई के अभूतपूर्व विस्‍तार, विश्वसनीयता और अंतरसंचालनीयता को वैश्विक मान्यता मिल गई है और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने इसे लेनदेन के आधार पर दुनिया की सबसे बड़ी रीयल टाइम भुगतान प्रणाली माना है, जो मापनीय, समावेशी और नवोन्मेषी डिजिटल सार्वजनिक अधोसंरचना स्‍थापित करने में भारत की अग्रणी भूमिका रेखांकित करता है। यूपीआई से भुगतान में वर्ष 2026 महत्वपूर्ण रहा है। मई 2026 में इसके जरिए मासिक लेनदेन की संख्या पहलीबार 2,300 करोड़ के पार 2,320 करोड़ पहुंच गई, जो यूपीआई के व्यापक प्रसार को दर्शाता है। पूरे वर्ष यह गति जारी रही और जुलाई 2026 में यूपीआई के मासिक लेनदेन की संख्या 2,366 करोड़ दर्ज किए गए, जो एक दशक में सबसे अधिक है। भारत के डिजिटल भुगतान में वित्तवर्ष 2025-26 में यूपीआई की 84 प्रतिशत उल्लेखनीय हिस्सेदारी है, जो यूपीआई के देश-विदेश में डिजिटल भुगतान प्रणाली के रूपमें बड़े पैमाने पर मान्यता को दर्शाती है।

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