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जल संरक्षण पर प्रथम अखिल भारतीय सम्मेलन

'जल को सहयोग और समन्वय का विषय बनाना हर राज्य का दायित्व'

जल संरक्षण के लिए जनभागीदारी और जागरुकता जरूरी है-प्रधानमंत्री

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Thursday 5 January 2023 02:39:35 PM

pm narendra modi

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज वीडियो संदेश के जरिए जल संरक्षण के विषय पर राज्यों के मंत्रियों के प्रथम अखिल भारतीय वार्षिक सम्मेलन को संबोधित किया, जिसका विषय 'वाटर विजन @ 2047' है और फोरम का उद्देश्य सतत विकास एवं मानव विकास केलिए जल संसाधनों के दोहन के तरीकों पर चर्चा केलिए प्रमुख नीति निर्माताओं को एकसाथ लाना है। प्रधानमंत्री ने जल सुरक्षा के क्षेत्रों में भारत के अभूतपूर्व कार्यों एवं देश के जल मंत्रियों के पहले अखिल भारतीय सम्मेलन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहाकि हमारी संवैधानिक व्यवस्था में पानी का विषय राज्यों के नियंत्रण में आता है और जल संरक्षण केलिए राज्यों के प्रयास, देश के सामूहिक लक्ष्यों को प्राप्त करने में बहुत सहायक होंगे। उन्होंने कहाकि जल को सहयोग और समन्वय का विषय बनाना प्रत्येक राज्य की जिम्मेदारी है, जल संरक्षण से जुड़े अभियानों में जनता, सामाजिक संगठनों, सिविल सोसाइटी कोभी ज्यादा से ज्यादा साथ लेना होगा। प्रधानमंत्री ने कहाकि वाटर विजन @ 2047 अमृतकाल की अगले 25 वर्ष की यात्रा का एक महत्वपूर्ण आयाम है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'समग्र सरकार' और 'संपूर्ण देश' के अपने दृष्टिकोण को दोहराते हुए इस बात पर जोर दियाकि सभी सरकारों को एक ऐसी प्रणाली की तरह काम करना चाहिए, जिसमें राज्य सरकारों के विभिन्न मंत्रालय जैसे-जल, सिंचाई, कृषि, ग्रामीण एवं शहरी विकास और आपदा प्रबंधन मंत्रालय केबीच निरंतर संपर्क और संवाद हो। उन्होंने कहाकि अगर इन विभागों केपास एक-दूसरे से संबंधित जानकारी और डेटा होगा तो योजना बनाने में मदद मिलेगी। यह बताते हुएकि केवल सरकार के प्रयासों से सफलता नहीं मिलती है प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक एवं सामाजिक संगठनों और नागरिक समाजों की भूमिका की ओर ध्यान आकर्षित किया और जल संरक्षण से संबंधित अभियानों में उनकी अधिकतम भागीदारी केलिए कहा। उन्होंने कहाकि जनभागीदारी को बढ़ावा देने से सरकार की जवाबदेही कम नहीं होती है, इसका मतलब यह नहीं हैकि सारी जिम्मेदारी लोगों पर डाल दी जाए। उन्होंने कहाकि जनभागीदारी का सबसे बड़ा लाभ यह हैकि अभियान में किएजा रहे प्रयासों और खर्च किएजा रहे धन के बारेमें जनता केबीच जागरुकता पैदा की जाती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि जब किसी अभियान से जनता जुड़ी रहती है तो उसे कार्य की गंभीरता भी पता चलती है, इससे जनता में किसी योजना या अभियान के प्रति सेंस ऑफ ओनरशिप भी आती है। प्रधानमंत्री ने स्वच्छ भारत अभियान का उदाहरण देते हुए कहाकि जब लोग स्वच्छ भारत अभियान से जुड़े तो जनता मेभी एक चेतना जागृत हुई। भारत के लोगों को उनके प्रयासों का श्रेय देते हुए प्रधानमंत्री ने कहाकि सरकार ने कई पहल कीं चाहे वह गंदगी हटाने केलिए संसाधन एकत्र करना हो, विभिन्न जल उपचार संयंत्रों का निर्माण करना हो या शौचालयों का निर्माण करना हो, लेकिन इस अभियान की सफलता तब सुनिश्चित हुई, जब जनता ने गंदगी को बिल्कुल हटाने का निर्णय लिया। प्रधानमंत्री ने जल संरक्षण केप्रति जनभागीदारी के इस विचार को मन में बैठाने और प्रभावी तौरपर जागरुकता पैदा करने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने सुझाव दियाकि हम 'जल जागरुकता महोत्सव' आयोजित कर सकते हैं या स्थानीय स्तरपर मेलों में जल जागरुकता से संबंधित एक कार्यक्रम जोड़ा जा सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विद्यालयों में पाठ्यचर्या से लेकर गतिविधियों तक नवीन तरीकों से युवा पीढ़ी को इस विषय से अवगत कराने की आवश्यकता पर बल दिया। प्रधानमंत्री ने बतायाकि देश हर जिले में 75 अमृत सरोवर बना रहा है, जिसमें अबतक 25 हजार अमृत सरोवर बन चुके हैं। उन्होंने समस्याओं की पहचान करने और समाधान खोजने केलिए प्रौद्योगिकी, उद्योग और स्टार्टअप्स को जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया और जियो सेंसिंग और जियो मैपिंग जैसी तकनीकों के बारेमें बताया, जो बहुत मददगार हो सकते हैं। उन्होंने नीतिगत स्तरों पर पानी से संबंधित मुद्दों से निपटने केलिए सरकारी नीतियों और नौकरशाही प्रक्रियाओं को लागू करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। प्रत्येक घर को पानी उपलब्ध कराने केलिए एक राज्य केलिए एक प्रमुख विकास पैरामीटर के रूपमें 'जल जीवन मिशन' की सफलता पर प्रधानमंत्री ने कहाकि कई राज्यों ने अच्छा काम किया है, जबकि कई राज्य इस दिशामें बढ़ रहे हैं। उन्होंने सुझाव दियाकि एकबार यह व्यवस्था लागू हो जाने केबाद हमें भविष्य मेभी इसी तरह इसका रखरखाव सुनिश्चित करना चाहिए। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि ग्राम पंचायतें जल जीवन मिशन का नेतृत्व करें और काम पूरा होने केबाद वे यहभी प्रमाणित करेंकि पर्याप्त और स्वच्छ पानी उपलब्ध हो गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि प्रत्येक ग्राम पंचायत भी एक मासिक या त्रैमासिक रिपोर्ट ऑनलाइन प्रस्तुत कर सकती है, जिसमें गांव में नल से पानी प्राप्त करने वाले घरों की संख्या बताई गई हो। उन्होंने कहाकि पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करने केलिए समय-समय पर जल परीक्षण की व्यवस्था भी विकसित की जानी चाहिए। प्रधानमंत्री ने उद्योग और कृषि दोनों क्षेत्रों में पानी की आवश्यकताओं के बारेमें चर्चा करते हुए सुझाव दियाकि हमें इन दोनों ही सेक्टर्स से जुड़े लोगों में विशेष अभियान चलाकर इन्हें वाटर सिक्योरिटी केप्रति जागरुक करना चाहिए। उन्होंने फसल विविधीकरण और प्राकृतिक खेती जैसी तकनीकों का उदाहरण दिया, जो जल संरक्षण पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना केतहत शुरू हुए 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' अभियान पर भी प्रकाश डाला और बतायाकि देशमें अबतक 70 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि को सूक्ष्म सिंचाई केतहत लाया जा चुका है। उन्होंने कहाकि सभी राज्यों को सूक्ष्म सिंचाई को लगातार बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने अटल भूजल संरक्षण योजना काभी उदाहरण दिया, जिसमें भूजल पुनर्भरण केलिए जिलों में बड़े पैमाने पर वाटरशेड का काम जरूरी है और पहाड़ी क्षेत्रों में स्प्रिंगशेड को पुनर्जीवित करने केलिए विकास कार्यों में तेजी लाने की जरूरत पर भी बल दिया।
जल संरक्षण केलिए राज्य में वन क्षेत्र को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने पर्यावरण मंत्रालय और जल मंत्रालय के समन्वित प्रयासों का आह्वान किया। उन्होंने जल के सभी स्थानीय स्रोतों के संरक्षण परभी ध्यान देने का आह्वान किया और कहाकि ग्राम पंचायतें अगले 5 वर्ष केलिए एक कार्ययोजना तैयार करे, जहां जल आपूर्ति से लेकर स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन तकके रोडमैप पर विचार किया जाए। प्रधानमंत्री ने राज्यों से कहाकि किस गांव में कितने पानी की जरूरत है, इसके लिए क्या काम किया जा सकता है, इसके आधार पर पंचायत स्तर पर जल बजट तैयार करने के तरीके अपनाएं। 'कैच द रेन' अभियान की सफलता पर प्रधानमंत्री ने कहाकि ऐसे अभियान राज्य सरकार का एक अनिवार्य हिस्सा बनने चाहिएं, जहां उनका वार्षिक मूल्यांकन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहाकि बारिश का इंतजार करने के बजाय बारिश से पहले सारी योजना बनाने की जरूरत है। जल संरक्षण के क्षेत्र में सर्कुलर इकोनॉमी के महत्व पर प्रधानमंत्री ने बतायाकि सरकार ने इस बजट में सर्कुलर इकोनॉमी पर काफी जोर दिया है।
प्रधानमंत्री ने कहाकि जब ट्रीटेड वॉटर को री-यूज किया जाता है, फ्रेश वाटर को कंजर्व किया जाता है तो उससे पूरे इकोसिस्टम को बहुत लाभ होता है, इसलिए वाटर ट्रीटमेंट, वॉटर रीसाइकलिंग आवश्यक है। प्रधानमंत्री ने दोहरायाकि राज्यों को विभिन्न उद्देश्यों केलिए 'ट्रीटेड वॉटर' के उपयोग को बढ़ाने के तरीके खोजने होंगे। प्रधानमंत्री ने कहाकि हमारी कोईभी नदी या वाटर बॉडी बाहरी कारकों से प्रदूषित ना हो, इसके लिए हमें हर राज्य में वाटर मैनेजमेंट और सीवेज ट्रीटमेंट का नेटवर्क बनाना होगा। उन्होंने हर राज्य में अपशिष्ट प्रबंधन और सीवेज ट्रीटमेंट का एक नेटवर्क बनाने पर जोर देते हुए कहाकि हमारी नदियां हमारी वाटर बॉडीज पूरे वाटर इकोसिस्टम का सबसे अहम हिस्सा होते हैं। प्रधानमंत्री ने कहाकि नमामि गंगे मिशन को एक खाका बनाकर अन्य राज्य भी नदियों के संरक्षण केलिए इसी तरह के अभियान शुरू कर सकते हैं। जल संरक्षण के विषय पर प्रथम अखिल भारतीय वार्षिक सम्मेलन में सभी राज्यों के जल संसाधन मंत्रियों ने भाग लिया।

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