स्वतंत्र आवाज़
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'हमारा संविधान हमारी सबसे बड़ी ताकत है'

'युवा संवैधानिक विषयों पर बहस और चर्चा का हिस्सा बनें'

प्रधानमंत्री का संविधान दिवस पर देशवासियों को संबोधन

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Saturday 26 November 2022 02:38:05 PM

best wishes to the countrymen on the constitution day

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सर्वोच्च न्यायालय में संविधान दिवस समारोह में देशवासियों को संविधान दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए उन महान विभूतियों को नमन किया, जिन्होंने हमें हमारा संविधान दिया और हमारे राष्ट्र केलिए उनके विजन को पूरा करने की अपनी प्रतिबद्धता को भी दोहराया। प्रधानमंत्री ने कहाकि वर्ष 1949 में आज काही दिन था, जब स्वतंत्र भारत ने अपने लिए एक नए भविष्य की नींव डाली थी, इस बारका संविधान दिवस इसलिए भी विशेष है, क्योंकि भारत ने अपनी आजादी के 75 वर्ष पूरे कर लिए हैं और हम अमृत महोत्सव मना रहे हैं। उन्होंने आधुनिक भारत का सपना देखने वाले संविधान निर्माता बाबासाहेब डॉ भीमराव रामजी आंबेडकर और संविधान सभा के सभी सदस्यों को आदरपूर्वक नमन किया। प्रधानमंत्री ने कहाकि बीते सात दशक में संविधान की विकास और विस्तार यात्रा में विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका के अनगिनत लोगों का भी योगदान रहा है, मैं इस अवसर पर देशकी ओर से उन सबके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता हूं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि आज 26/11 मुंबई आतंकवादी हमले का दिन भी है, 14 वर्ष पहले जब भारत अपने संविधान और अपने नागरिकों के अधिकारों का पर्व मना रहा था, उसी दिन मानवता के दुश्मनों ने भारत पर सबसे बड़ा आतंकवादी हमला किया था, मुंबई आतंकवादी हमले में जिनकी मृत्यु हुई, मैं उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। प्रधानमंत्री ने कहाकि आज की वैश्विक परिस्थितियों में विश्व की नज़र भारत पर है, भारत के तेज विकास, बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था और मजबूत होती अंतर्राष्ट्रीय छवि के बीच दुनिया हमें बहुत उम्मीदों से देख रही है। उन्होंने कहाकि एक ऐसा देश, जिसके बारेमें आशंका जताई जाती थीकि वो अपनी आजादी बरकरार नहीं रख पाएगा, जिसके बारेमें कहा जाता थाकि वो बिखर जाएगा, आज पूरे सामर्थ्य से, अपनी सारी विविधताओं पर गर्व करते हुए ये देश आगे बढ़ रहा है और इन सबके पीछे हमारी सबसे बड़ी ताकत हमारा संविधान है। नरेंद्र मोदी ने कहाकि हमारे संविधान की प्रस्तावना की शुरुआत में जो 'हम लोग' लिखा है, ये सिर्फ तीन शब्द नहीं हैं, एक आह्वान, एक प्रतिज्ञा, एक विश्वास है, संविधान में लिखी ये भावना उस भारत की मूल भावना है, जो दुनियामें लोकतंत्र की जननी रहा है, यही भावना हमें वैशाली के गणराज्य मेभी दिखती है, वेद की ऋचाओं में भी दिखती है। प्रधानमंत्री ने कहाकि मुझे संतोष हैकि आज देश लोकतंत्र की जननी के रूपमें अपने प्राचीन आदर्शों और संविधान की भावना को लगातार मजबूत कर रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि जनहितैषी नीतियों की ताकत से देश और देश का ग़रीब का सशक्तिकरण हो रहा है, सामान्य मानवी केलिए क़ानूनों को सरल बनाया जा रहा है। उन्होंने कहाकि समयोचित न्याय केलिए हमारा न्यायतंत्र भी लगातार कई सार्थक कदम उठा रहा है, सुप्रीम कोर्ट ने ई-पहल की शुरूआत की है, मैं इसके लिए और 'न्याय में आसानी' के प्रयासों केलिए सभी को बधाई देता हूं। प्रधानमंत्री ने कहाकि इसबार 15 अगस्त को लालकिले से मैंने कर्तव्यों पर बल दिया था, ये हमारे संविधान कीही भावना का प्रकटीकरण है। उन्होंने कहाकि महात्मा गांधी कहते थेकि-‘हमारे अधिकार हमारे वो कर्तव्य हैं, जिन्हें हम सच्ची अखंडता और समर्पण केसाथ पूरा करते हैं’। उन्होंने कहाकि अमृतकाल में जब हम आज़ादी के 75 वर्ष पूर्ण करके अगले 25 वर्ष की यात्रा शुरू कर रहे हैं तो संविधान का ये मंत्र देश केलिए एक संकल्प बन रहा है। प्रधानमंत्री ने कहाकि आज़ादी का अमृतकाल देश केलिए कर्तव्यकाल है, चाहे व्यक्ति हों या संस्थाएं हमारे दायित्व ही आज हमारी पहली प्राथमिकता हैं, भारत के सामने नित नए अवसर बन रहे हैं और वह हर चुनौती को पार करते हुए बढ़ रहा है। उन्होंने कहाकि एक सप्ताह केबाद भारत को जी20 की प्रेसीडेंसी भी मिलने वाली है, ये बहुत बड़ा अवसर है, हम सभी टीम इंडिया के रूपमें विश्व में भारत की प्रतिष्ठा को बढ़ाएं, भारत का योगदान विश्व के सामने लेकर जाएं, येभी हम सभीका सामूहिक दायित्व है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि भारत की लोकतंत्र की जननी के तौरपर जो पहचान है, हमें उसे औऱ सशक्त करना है। उन्होंने कहाकि हमारे संविधान की एक और विशेषता है, जो आजके युवा भारत में और भी प्रासंगिक हो गई है, हमारे संविधान निर्माताओं ने हमें एक ऐसा संविधान दिया है, जो खुला एवं भविष्यवादी है और अपने आधुनिक विज़न केलिए जाना जाता है, इसलिए स्वाभाविक तौरपर हमारे संविधान की स्पिरिट युवा केंद्रित है। उन्होंने कहाकि स्पोर्ट्स हों या स्टार्टअप्स, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी हो या डिजिटल पेमेंट्स भारत के विकास के हर आयाम में युवाशक्ति अपना परचम लहरा रही है, हमारे संविधान और संस्थाओं के भविष्य की जिम्मेदारी भी हमारे इन युवाओं के कंधों पर ही है। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर सरकार की व्यवस्थाओं एवं न्यायपालिका से आग्रह कियाकि युवाओं में संविधान को लेकर समझ और बढ़े, इसके लिए जरूरी हैकि वो संवैधानिक विषयों पर बहस और चर्चा का हिस्सा बनें। उन्होंने कहाकि जब हमारा संविधान बना, तब देशके सामने क्या परिस्थितियां थीं, संविधान सभा की बहसों में उस समय क्या हुआ था, हमारे युवाओं को इनसब विषयों की जानकारी होनी चाहिए, इससे उनकी संविधान को लेकर दिलचस्पी और बढ़ेगी, इससे उनमें समानता और अधिकारिता जैसे विषयों को समझने का विज़न पैदा होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उदाहरण देकर बतायाकि हमारी संविधान सभा में 15 महिला सदस्य थीं और उनमें एक दक्शायिनी वेलायुधन वो महिला थीं, जे एक प्रकार से वंचित समाज से निकल करके वहां तक पहुंची थीं, उन्होंने दलितों, मजदूरों से जुड़े कई विषयों पर महत्वपूर्ण हस्तक्षेप किए, दुर्गाबाई देशमुख, हंसा मेहता, राजकुमारी अमृतकौर ऐसेही और कई महिला सदस्यों ने महिलाओं से जुड़े विषयों पर अहम योगदान दिया था, इनके योगदान की चर्चा कम ही हो पाती है। प्रधानमंत्री ने कहाकि जब युवा इन्हें जानेंगे तो उन्हें अपने सवालों का जवाब भी मिलेगा, इससे संविधान केप्रति जो निष्ठा पैदा होगी, वो हमारे लोकतंत्र, संविधान को और देशके भविष्य को मजबूत करेगी, आजादी के अमृतकाल में येभी देशकी एक अहम जरूरत है। प्रधानमंत्री ने आशा व्यक्त कीकि संविधान दिवस इस दिशामें हमारे संकल्पों को और अधिक ऊर्जा देगा। संविधान दिवस कार्यक्रम में भारत के मुख्य न्यायधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू, जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर, कानून राज्यमंत्री एसपी सिंह बघेल, एटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के प्रेसिडेंट विकास सिंह, न्यायाधीश और गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।
गौरतलब हैकि वर्ष 1949 में संविधान सभा के भारतीय संविधान को अंगीकार किएजाने के उपलक्ष्य में 2015 से संविधान दिवस 26 नवंबर को मनाया जाता है। प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान ई-कोर्ट परियोजना केतहत नई पहलों का भी शुभारंभ किया, जिसमें वर्चुअल जस्टिस क्लॉक, जस्टिस मोबाइल एप्प 2.0, डिजिटल कोर्ट और एस3वीएएएस वेबसाइट शामिल हैं। परियोजना वादकारियों, वकीलों और न्यायपालिका को आईसीटी आधारित अदालतों के जरिये सेवायें प्रदान करने का प्रयास है। वर्चुअल क्लॉक अदालत के स्तरपर न्याय आपूर्ति प्रणाली केलिए जरूरी आंकड़ों को दर्शाने की पहल है, जिसमें मुकदमों का विवरण, मुकदमों के निस्तारण और अदालती स्तर पर एक दिन/सप्ताह/महीने के आधार पर लंबित मुकद्मों की जानकारी मिलेगी। यह प्रयास अदालती कामकाज को जवाबदार और पारदर्शी बनाने के लिये हैं। इसमें अदालतों से निस्तारित मुकदमों की स्थित की जानकारी लोगों को उपलब्ध रहेगी। कोईभी व्यक्ति जिला न्यायालय की वेबसाइट में दर्ज किसी भी अदालत के बारे में वर्चुअल जस्टिस क्लॉक का अवलोकन कर सकता है।
जस्टिस मोबाइल एप 2.0 न्यायिक अधिकारियों केलिए है, जिसकी सहायता से वे न केवल अपनी अदालत में लंबित और निस्तारित मुकद्मों की स्थिति जान सकते हैं, उसका प्रबंध कर सकते हैं, बल्कि अपने अधीन कार्यरत न्यायिक अधिकारियों की अदालतों के बारे मेंभी जान सकते हैं। यह एप्प उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के लिये उपलब्ध है, जो अपने अधीन राज्यों व जिला अदालतों में लंबित व निस्तारित मामलों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। डिजिटल कोर्ट की पहल केतहत न्यायाधीश के लिये अदालती दस्तावेजों को डिजिटल रूपमें देखने की व्यवस्था है, जिससे पेपरलैस अदालतों की शुरूआत हो जाएगी। एस3डब्लूएएएस वेबसाइट एक प्रारूप है, जिसके तहत सम्बंधित जिला न्यायालय के मद्देनज़र विशेष सूचना और सेवाओं के बारे में वेबासइट पर हर जानकारी मिलेगी। इसके तहत सूचनाओं-सेवाओं का सृजन, उन्हें दुरुस्त करने, उनकी जानकारी देने और उनके प्रबंधन से जुड़े काम किये जायेंगे। एस3डब्लूएएएस एक क्लाउड सेवा है, जिसे सरकारी निकायों केलिए विकसित किया गया है, ताकि वे सुरक्षित, सुगम्य वेबसाइटों को तैयार कर सकें। यह बहुभाषी, नागरिक अनुकूल और दिव्यांग अनुकूल है।

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