झारखंड के पत्रकार समूह ने देखा थुंबा इक्वेटोरियल रॉकेट लॉंचिंग स्टेशन
साधारण शुरुआतों से भारत ने अंतरिक्ष में हासिल की ऐतिहासिक उपलब्धिस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Friday 4 September 2026 02:17:35 PM
तिरुवनंतपुरम (केरल)। झारखंड के पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने पत्र सूचना कार्यालय रांची और पीआईबी तिरुवनंतपुरम के समन्वय से केरल के प्रेस टूर पर ऐतिहासिक थुंबा इक्वेटोरियल रॉकेट लॉन्चिंग स्टेशन का दौरा किया। इस दौरान पत्रकारों को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की गौरवशाली यात्रा, उपलब्धियों और भविष्य की महत्वाकांक्षी योजनाओं की जानकारी दी गई। प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए एक परिचयात्मक ब्रीफिंग में बताया गयाकि थुंबा इक्वेटोरियल रॉकेट लॉन्चिंग स्टेशन की स्थापना वर्ष 1962 में डॉ विक्रम साराभाई और डॉ होमी जहांगीर भाभा के नेतृत्व में की गई थी। थुंबा का चयन इसलिए किया गया, क्योंकि पृथ्वी का चुंबकीय भूमध्य रेखा इस स्थान से होकर गुजरता है, जो वायुमंडलीय एवं आयनमंडलीय अनुसंधान केलिए इसे विशेष रूपसे उपयुक्त बनाता है।
भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के शुरुआती दौर से भी पत्रकारों को अवगत कराया गया। बताया गयाकि उस समय क्षेत्रमें मौजूद एकमात्र प्रमुख संरचना सेंट मैरी मैग्डलीन चर्च थी, जिसे स्थानीय मछुआरा समुदाय ने उदारतापूर्वक अंतरिक्ष कार्यक्रम केलिए उपलब्ध कराया। इसी चर्च परिसर का उपयोग भारत के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने शुरुआती दौर में कार्यालय और प्रयोगशाला के रूपमें किया था। इन्हीं साधारण शुरुआतों से भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। भारत ने 21 नवंबर 1963 को थुंबा से अपना पहला साउंडिंग रॉकेट नाइक-अपाचे प्रक्षेपित किया था। पत्रकारों को बताया गयाकि थुंबा नियमित रूपसे साउंडिंग रॉकेट प्रक्षेपण और वैज्ञानिक गतिविधियों को संचालित करता है तथा भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम केतहत विभिन्न महत्वपूर्ण मिशनों की तैयारियां भी लगातार जारी हैं। पत्रकारों को अंतरिक्ष संग्रहालय में देश-विदेश के अंतरिक्ष अभियानों और अंतरिक्ष विज्ञान के विकास की यात्रा को प्रदर्शित किया गया है।
पत्रकार प्रतिनिधिमंडल ने उपग्रह प्रणालियों, प्रक्षेपण यानों, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी से संबंधित विभिन्न कार्यशील मॉडलों और प्रदर्शों को देखा। पत्रकारों ने विशेष कलाम कॉर्नर का अवलोकन किया। यह कॉर्नर भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं महान वैज्ञानिक डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के प्रारंभिक वैज्ञानिक जीवन और उनके प्रेरणादायी योगदान को समर्पित है। डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने थुंबा में भारत के शुरुआती अंतरिक्ष कार्यक्रम के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। प्रतिनिधिमंडल को भारत के महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम की भी जानकारी दी गई। पत्रकारों को गगनयान मिशन केबारे में बताया गया, जिसका उद्देश्य मानव को अंतरिक्ष में भेजने की भारत की क्षमता को प्रदर्शित करना और मानव सक्षम अंतरिक्ष यान के विकास को आगे बढ़ाना है।
गगनयान से आगे भारत दीर्घकालिक अंतरिक्ष योजनाओं के तहत भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की दिशामें भी कार्य कर रहा है। इसके साथही भारत की व्यापक अंतरिक्ष दृष्टि-2047 केतहत मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्रमें कई महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। पत्रकारों को बताया गयाकि भारत की दीर्घकालिक आकांक्षाओं में एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को चंद्रमा पर भेजना भी शामिल है। यह यात्रा थुंबा में शुरू हुई भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की विनम्र शुरुआत से लेकर आत्मनिर्भर, उन्नत अंतरिक्ष क्षमताओं और भविष्य की महत्वाकांक्षी योजनाओं तकके विकास को दर्शाती है।