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'सूचना की विश्वसनीयता से कोई समझौता न हो'

आईआईएस प्रशिक्षुओं को सूचना सचिव ने दीं स्नातकोत्तर डिग्रियां

'जन संचार शासन का अभिन्न अंग, प्रौद्योगिकी से और समृद्ध करें'

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Wednesday 2 September 2026 01:05:04 PM

information secretary awarded postgraduate degrees to iis trainees

नई दिल्ली। भारतीय जनसंचार संस्थान ने मानद विश्वविद्यालय के तौरपर भारतीय सूचना सेवा के 2009, 2023 और 2024 बैचों के आईआईएस प्रशिक्षु अधिकारियों को स्नातकोत्तर डिग्रियां प्रदान कीं। सूचना एवं प्रसारण सचिव चंचल कुमार ने इस अवसर पर कहाकि भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों की भूमिका जनसंचार से कहीं अधिक है, वे शासन और नागरिक आकांक्षाओं केबीच महत्वपूर्ण कड़ी हैं, जो सटीक, विश्वसनीय और संवेदनशील सूचना के जरिए भरोसा उत्पन्न करते हैं। उन्होंने कहाकि जन संचार शासन का अभिन्न अंग है और इसे बदलती प्रौद्योगिकियों और प्लेटफार्मों केसाथ विकसित होना चाहिए। उन्होंने आईआईएस प्रशिक्षुओं से कहाकि उनको उभरती प्रौद्योगिकियों की जानकारी होनी चाहिए, जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक महत्वपूर्ण बदलाव ला रहा है, जबकि गलत सूचना, असली जैसे प्रतीत होने वाले नकली वीडियो, ऑडियो या इमेज (डीपफेक) और कृत्रिम रूपसे निर्मित सामग्री नई चुनौतियां पेश कर रही हैं।
सूचना प्रसारण सचिव ने कहाकि जन संचार दोतरफा प्रक्रिया होनी चाहिए, जिसमें लोगों की प्रतिपुष्टि, नीतियों और उनका कार्यांवयन बेहतर बनाने में सहायक हो। उन्होंने कहाकि त्वरित सूचना देना महत्वपूर्ण है, लेकिन इसमें विश्वसनीयता से कोई समझौता नहीं हो सकता, क्योंकि प्रत्येक सूचना संस्था की प्रामाणिकता दर्शाती है। उन्होंने कहाकि जन संचार अधिकारियों को निरंतर अपना कौशल उन्नयन करना चाहिए, जमीनी स्तरपर जुड़े रहना चाहिए और संचार से परे अन्य दायित्व सौंपे जाने पर शासन के पहलुओं को समझने और अपनाने केलिए तत्पर रहना चाहिए। चंचल कुमार ने कहाकि अधिकारियों को हमेशा यह देखना चाहिएकि क्या उनके कार्यों से विशेषकर सबसे निर्धन लोग लाभांवित हो रहे हैं, यदि नहीं तो उन्हें फिरसे गौरकर नए सिरे से योजनाएं बनानी चाहिएं और हमेशा लोगों की चिंताओं पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए उनकी सहायता केलिए काम करना चाहिए।
भारतीय जनसंचार संस्थान की कुलपति डॉ प्रज्ञा पालीवाल गौर ने कहाकि स्नातकोत्तर डिग्री पाने वाला यह पहला समूह है, जो जन संचार के क्षेत्रमें आईआईएमसी की शैक्षणिक भूमिका और व्यावसायिक प्रशिक्षण केबीच घनिष्ठ संबंध दर्शाता है। उन्होंने कहाकि जन संचार का अर्थ केवल सूचनाभर देना नहीं, बल्कि इसके बारेमें समझ विकसित करना है। उन्होंने आईआईएमसी अधिकारियों से स्पष्टता, निष्पक्षता और संवेदनशीलता केसाथ अपने दायित्व निभाने को कहा। डॉ प्रज्ञा पालीवाल गौर ने कहाकि यह डिग्री निरंतर विकसित हो रहे क्षेत्रमें निरंतर सीखने के महत्व का स्मरण कराती है। दीक्षांत समारोह में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अपर सचिव प्रभात, संयुक्त सचिव केके निराला, प्रशिक्षण महानिदेशक एल मधु नाग, वरिष्ठ अधिकारी, संकाय सदस्य और प्रशिक्षु अधिकारी उपस्थित थे।

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