स्वतंत्र आवाज़
word map

बिहार झारखंड सोन नदी के जल बंटवारे पर सहमत

गृहमंत्री की पहल पर राज्यों में वर्षों से लंबित जल विवादों का समाधान

झारखंड और बिहार के मुख्यमंत्री ने किया समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Tuesday 1 September 2026 01:41:07 PM

bihar and jharkhand agree on sharing of son river water

नई दिल्ली। बिहार और झारखंड ने सोन नदी के जल बंटवारे पर सहमति जताते हुए ऐतिहासिक समझौता किया है। गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में नई दिल्ली में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल, बिहार के उपमुख्यमंत्री, केंद्रीय गृह सचिव और भारत सरकार एवं दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। अमित शाह ने कहाकि बिहार और झारखंड केबीच इस समझौते से पूर्वी भारत के बहुप्रतीक्षित जलविवाद का समाधान हो गया है। उन्होंने कहाकि इससे बिहार और झारखंड के बहुत बड़े ग्रामीण क्षेत्र के लाखों किसानों को सिंचाई केलिए जल मिलने केसाथ ही लोगों को पीने का पानी उपलब्ध होगा। अमित शाह ने कहाकि सोन नदी जल बंटवारा समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘टीम भारत’ की परिकल्पना और सहकारी संघवाद का उत्कृष्ट उदाहरण है।
गृहमंत्री अमित शाह ने कहाकि देश के राज्यों का अलग अलग अस्तित्व तो है ही मगर भारत के परिप्रेक्ष्य में सभी राज्य टीम इंडिया बनकर आगे बढ़ें तो कोई समस्या ऐसी नहीं है। अमित शाह कहाकि इस वर्ष यह चौथा जल समझौता है, जिससे सिंचाई, ग्रामीण विकास और पेयजल केलिए जल उपलब्धता में वृद्धि होगी। गृहमंत्री ने कहाकि बिहार और झारखंड में 25 साल पुराने जल विवाद का हल इस बात का उदाहरण हैकि सहकारी संघवाद की भावना केसाथ संवाद हो तो हर समस्या का समाधान संभव है। उन्होंने कहाकि इससे बिहार के भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, अरवल, गया और पटना की बड़ी आबादी केलिए पीने के पानी एवं सिंचाई केलिए पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध होगा। झारखंड के पलामू, गढ़वा जैसे क्षेत्रों में सिंचाई और पीने का पानी उपलब्ध होगा। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोन नदी जल बंटवारे के समाधान केलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह केप्रति आभार व्यक्त किया।
गौरतलब हैकि गृहमंत्री अमित शाह की पहल पर अंतर्राज्यीय परिषद के जरिए देश में कई राज्यों केबीच वर्षों से लंबित जल विवादों का समाधान निकाला जा रहा है, इसवर्ष अबतक चार ऐतिहासिक समझौते हो चुके हैं। गृहमंत्री की उपस्थिति में 7 जुलाई 2026 को केंद्रीय नर्मदा अवार्ड लाभार्थी राज्यों महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश केबीच लंबित भुगतान के निपटारे पर समझौता हुआ था। यह समझौता मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र राज्यों द्वारा सरदार सरोवर परियोजना के निर्माण लागत साझाकरण के मुद्दों से जुड़े दीर्घकालिक विवादों को समाप्त करने की दिशा में एक मील का पत्थर है, इसके तहत लंबित देयों के अंतिम निपटान के रूपमें किए जाने वाले भुगतानों को एकमुश्त निपटान के रूपमें हल किया गया है। जून 29 को यमुना जल परियोजना के निर्माण और कार्यांवयन के संबंध में राजस्थान और हरियाणा सरकार केबीच समझौता हुआ। इसके तहत जुलाई से अक्टूबर तक लगभग 580 एमसीएम पानी यमुना नहर से तीन भूमिगत पाइपलाइन से राजस्थान पहुंचेगा।
यमुना जल परियोजना का उद्देश्य पश्चिमी यमुना नहर से भूमिगत पाइपलाइन से राजस्थान के हिस्से का यमुना का पानी पहुंचाना है। इससे राजस्थान, अपर यमुना बेसिन के इस्तेमाल लायक सतही पानी के बंटवारे पर 1994 के समझौते केतहत मिले पानी का सही तरीके से इस्तेमाल कर पाएगा। परियोजना से राजस्थान के सूखे और कम बारिश वाले इलाकों में पीने के पानी की निरंतर आपूर्ति होगी और सामाजिक व आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में 16 जून 2026 को ‘किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना’ पर संबंधित राज्यों में सहमति बनी। बैठक में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के क्रियांवयन पर सहमत हुए। किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना के संबंध में जल घटक के कार्य का 90 प्रतिशत केंद्रीय सहायता के रूपमें केंद्र सरकार और शेष 10 प्रतिशत धनराशि का वित्तीय भार 6 राज्य वहन करेंगे। हिमाचल प्रदेश के विद्युत घटक के हिस्से की लागत को साझा करने के एवज में हिमाचल प्रदेश केलिए आवंटित पानी को दिल्ली और राजस्थान को देने पर भी सहमति बनी। इससे आशा व्यक्त की गई हैकि देश में दशकों पुराने विवादों का समाधान विकसित भारत की यात्रा में मील का पत्थर साबित होंगे।

हिन्दी या अंग्रेजी [भाषा बदलने के लिए प्रेस F12]