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जनगणना के लिए कार्यशाला में प्रशिक्षण

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देहरादून। मुख्य सचिव सुभाष कुमार की अध्यक्षता में देश की सातवीं जनगणना के लिए प्रमुख जनगणना अधिकारी, जिलाधिकारियों, मुख्य नगर अधिकारी, जिला एवं नगर जनगणना अधिकारियों की एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला हुई। कार्यशाला में मुख्य सचिव ने कहा कि जनगणना एक राष्ट्रीय महत्व का कार्यक्रम है और विश्व के सबसे बड़े प्रशासनिक कार्य का अंग है। उन्होंने जनगणना से जुड़े अधिकारियों से इस कार्य को निष्ठा और परिश्रम से पूरा करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि जनगणना नियोजन कार्य के लिए बहुमूल्य है, इसलिए इसको रोचक विषय के रूप में लेते हुए सभी इसमें अपना योगदान करें। उन्होंने निदेशक जनगणना स्नेहलता अग्रवाल को आश्वस्त किया कि इस राष्ट्रीय कार्यक्रम की सफलता के लिए उत्तराखंड शासन उन्हें हर संभव सहयोग देगा। उन्होंने निदेशक जनगणना उत्तराखंड को समय-समय पर वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से भी प्रदेश के जनगणना से जुड़े अधिकारियों से सहयोग दिलाने का आश्वासन दिया। उन्होंने गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के आयुक्तों को भी निर्देश दिए कि इस कार्य से जुड़े अच्छे कार्य करने वाले अधिकारियों की चरित्र पंजिका में वे अच्छी प्रवृष्टि दें और लापरवाही बरतने वाले अधिकारी का भी चरित्र पंजिका में उल्लेख करें। मुख्य सचिव ने जनगणना के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए पोस्टर, नुक्कड़ नाटक, सिने स्लाइड शो और अखबारों के माध्यम से प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर निदेशक जनगणना स्नेहलता अग्रवाल ने बताया कि भारत में पहली जनगणना 1872 में हुई थी। वर्ष 1881 में संपूर्ण देश में समकालिक तौर पर जनगणना की गई, तब से प्रत्येक दस वर्ष में जनगणना की जा रही है। अब सातवीं जनगणना का कार्य चल रहा है। उन्होंने कहा कि इस वृहद कार्य के लिए गणना से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों की लगन और निष्ठा से कार्य करने की परंपरा रही है। जनगणना कार्य के प्रथम चरण में मकान सूचीकरण और मकानों की गणना का कार्य किया जा चुका है। दूसरे चरण में जनसंख्या की गणना का कार्य 9 फरवरी से 28 फरवरी के मध्य किया जाना है। इस अवधि में प्रत्येक जनगणना अधिकारी को अपने-अपने क्षेत्राधिकार में आने वाले ब्लॉक में रहने वाले सभी परिवारों और परिवार में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति की गणना करनी है। इसके लिए जनगणना विभाग जिला स्तर पर मास्टर ट्रेनर तैयार करेगा जोकि जन गणना से जुड़े प्रगणकों और सुपरवाइजरों को गणना का प्रशिक्षण देंगे।

उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन को केवल सिविल क्षेत्र में गणना करनी है और उनके जनपद में स्थित पैरामिलिट्री परिसरों में रहने वाले परिवारों की गणना स्पेशल चार्ज अधिकारी करेंगे। उन्होंने कहा कि मिलिट्री उपक्रमों के परिसर के अन्तर्गत रहने वाले परिवारों की गणना के लिए अलग से उनके अधिकारियों से संवाद बनाया जा चुका है। गणना का कार्य निर्धारित शिड्यूल के अंतर्गत किया जाएगा। बैठक में हरिद्वार जनपद में संभावित पंचायत चुनाव की संभावना को देखते हुए जिलाधिकारी हरिद्वार से प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए, ताकि जनपद हरिद्वार में गणना शिड्यूल के निर्धारण के लिए केन्द्रीय जनसंख्या निदेशालय को संदर्भित किया जा सके। जनगणना के लिए नियतकाल एक मार्च 2011, शून्य बजे तक की जानकारी अपने ब्लॉक को कर दी जाएगी और 1 मार्च से 5 मार्च 2011 तक भ्रमण कर उन सभी आगन्तुकों एवं परिवारों की गणना की जानी है, जो पूर्व गणना के बाद और एक मार्च 2011 तक गणना में नहीं है।

प्रशिक्षण कार्यशाला में जनगणना निदेशालय भारत सरकार के संयुक्त निदेशक आरके राम, उप निदेशक मोहम्मद अहमद ने भी विभिन्न विषयों पर जानकारी दी। इस अवसर पर सचिव रणवीर सिंह, जिलाधिकारी हरिद्वार आर मीनाक्षी सुन्दरम्, जिलाधिकारी देहरादून सचिन कुर्वे, जिलाधिकारी पौड़ी दिलीप जावलकर, जिलाधिकारी ऊधमसिंह नगर वीवीआर पुरुषोत्तम सहित जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी और उपजिलाधिकारी उपस्थित थे।

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