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भारत और अफगान संबंध सदियों पुराने-डॉ महेश

दिल्‍ली में तीन दिवसीय भारत-अफगान सांस्‍कृतिक महोत्‍सव

'अफगानिस्‍तान में भी है सहिष्‍णु और विवि‍धता भरा समाज'

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Wednesday 29 November 2017 04:23:37 AM

dr. mahesh sharma the inauguration of india-afghan cultural festival

नई दिल्ली। केंद्रीय संस्‍कृति राज्‍यमंत्री डॉ महेश शर्मा और अफगानिस्‍तान इस्‍लामिक गणतंत्र के संस्‍कृति और सूचना मंत्री प्रोफेसर मोहम्‍मद रसूल बावरी ने आज नई दिल्‍ली में भारत-अफगान सांस्‍कृतिक महोत्‍सव का उद्घाटन किया। इसका आयोजन अफगानिस्‍तान सरकार और दूतावास तथा भारत सरकार और अंतर्राष्‍ट्रीय सांस्‍कृतिक संबंध परिषद ने संयुक्‍त रूप से किया है। डॉ महेश शर्मा ने इस अवसर पर कहा है कि भारत-अफगानिस्‍तान के बीच सदियों पुराने सांस्‍कृतिक और सभ्‍यतागत संबंध हैं तथा संगीत, कला, वास्‍तुकला, भाषा एवं व्‍यंजन के क्षेत्र में गहरे संबंध दोनों देशों के लोगों के बीच की मित्रता के लिए महत्‍वपूर्ण हैं।
संस्‍कृति राज्‍यमंत्री डॉ महेश शर्मा ने कहा कि जहां अफगानिस्‍तान के उस्‍ताद सरहंग जैसे प्रसिद्ध शास्‍त्रीय संगीतज्ञ पटियाला घराने से प्रशिक्षित हैं, वहीं बॉलीवुड का लोकप्रिय भारतीय संगीत अफगानिस्‍तान के घरों में भी सुनाई देता है। उन्‍होंने कहा कि अफगानिस्‍तान का केंद्रीय बमयान प्रांत हमारी साझा बौद्ध विरासत का केंद्र है। डॉ महेश शर्मा ने कहा कि गुरुदेव रबींद्रनाथ टैगोर के ‘काबुलीवाला’ के जरिए भारतीय, ईमानदार और बड़े दिलवाले अफगानियों के साथ जुड़े हुए हैं। दोनों देशों के साझा सामान्‍य मूल्‍यों को रेखांकित करते हुए संस्‍कृति राज्यमंत्री ने कहा कि काबुल में ही चार गुरुद्वारे और दो मंदिरों का होना अफगानिस्‍तान के सहिष्‍णु और विवि‍धता भरे समाज का साक्ष्‍य है।
राज्‍यमंत्री डॉ महेश शर्मा ने भारत द्वारा अफगानिस्‍तान के लोगों के विकास के लिए की जा रही भागीदारी पर बल देते हुए कहा कि अफगानिस्‍तान की सांस्‍कृतिक विरासत का पुर्नरुद्धार और इसके सांस्‍कृतिक संस्‍थानों को सुदृढ़ करना वहां के पुर्ननिर्माण में हमारी सहायता का महत्‍वपूर्ण हिस्‍सा है। उन्होंने कहा कि काबुल में स्‍टोरे पेलेस का पुर्नरुद्धार और अफगान राष्‍ट्रीय संगीत संस्‍थान की सहायता करना ऐसे कुछ उदाहरण हैं। डॉ महेश शर्मा ने कहा कि भारत-अफगान महोत्‍सव का आयोजन असाधारण कार्यक्रम है और इससे कला, हस्‍तशिल्‍प, नृत्‍य, संगीत तथा अन्‍य शैलियों के जरिए दोनों देशों के बीच समानता को सामने लाया जाएगा। तीन दिवसीय महोत्‍सव में अफगानिस्‍तान और भारत के सांस्‍कृतिक कार्यक्रम, हस्‍तशिल्‍प, प्रदर्शनियां, व्‍यंजन तथा सांस्‍कृतिक शो का प्रदर्शन किया जाएगा।

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