मेरे और हमारे बारे में

कौन हूं मैं? आप मुझे दिनेश शर्मा कहते हैं। पत्रकारिता में मेरे नाम राशि और भी कई हैं, जो पत्रकारिता के पेशे में अपनी कलम के जौहर दिखा रहे हैं, मगर मैं इनमें आपके लिए अनजान और सबसे छोटा हूं और अभी भी पत्रकारिता में खड़े होने और कलम पकड़ने की तमीज़ सीख रहा हूं।
मेरे लिए यह कहना बहुत ही कठिन और चुनौती भरा है, कि मैं आपको अपने परिचय में पत्रकारिता के कुछ मनीषियों की संगत में रहने की खुशी और हिंदी पत्रकारिता में लंबे और अनवरत संघर्ष के अलावा और क्‍या बताऊं? मेरे नाम तमगे या कोई उपलब्धी नहीं है, जिसका मै आपके सामने बखान करुं। कुछ हिंदी समाचार पत्रों और कुछ समय दूरदर्शन के लिए काम किया और फिर प्रिंट मीडिया में लौट आया। पांच जनवरी 2008 को स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम का उदय हुआ, तबसे स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम ऑनलाइन हिंदी समाचार पोर्टल के साथ मैं आपके सामने उपस्‍थित हूं।
आपको मेरी और इन कुछ लाइनों पर ही संतोष करना होगा, कि मैं एक ग्रामीण परिवेश में पला-बढ़ा हूं और सौभाग्‍य से एक शिक्षक परिवार से हूं। हिमालय की तलहटी और उत्तर प्रदेश में ऋषि मुनियों की तपोभूमि, राजा दुष्यंत-शकुंतला के यशस्वी पुत्र भरत एवं पत्रकारिता क्षेत्र के दिग्गजों की जन्म-भूमि कहे जाने वाले जनपद बिजनौर की धरती पर मुझे इस खूबसूरत संसार को देखने और पत्रकारिता के महानतम पेशे को अपनाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।
नैतिक मूल्‍यों, कड़े अनुशासन और अत्‍यंत सादे जीवन के साथ एक आदर्श शिक्षक रहे मेरे पिताश्री ओमप्रकाश शर्मा का पुत्र होने में मैं अपने को धन्य समझता हूं, हालांकि उनके नैतिक मूल्यों के आगे तो मैं कुछ भी नहीं हूं। पत्रकारिता की ओर मेरा झुकाव जानकर शुरूआती समय में पिताश्री मेरे भविष्‍य के प्रति काफी चिंतित रहे, मेरा मन शुरू से ही पत्रकारिता के साथ था, सो उन्‍होंने मेरा मार्ग रोका नहीं और मुझे मेरे कर्तव्य-पथ पर चलने दिया। पत्रकारिता की अहमीयत और इसके बेहद रोमांचित करने वाले जोखिम, मुझे निर्भीकता से चलते रहने की प्रेरणा देते आए हैं, एक देश, एक समाज और एक पेशे में ईमानदारी से अपना काम करते जाने के लिए। मै खुश हूं कि मेरा शौक मेरा पेशा बना।
स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम, देश-दुनिया के समाचारों, विश्लेषणों और विचारों का ऑनलाइन हिंदी समाचार पोर्टल है। इसको लाने का उद्देश्‍य हिंदी भाषा का प्रचार-प्रसार करना तो है ही, साथ ही उस पत्रकारिता को प्रोत्‍साहन देना है, जिसकी हर व्‍यक्‍ति मीडिया जगत से आशा करता है। स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम को हिंदी में ऑनलाइन प्रसारित करके मुझे अपनी मातृ भाषा हिंदी के विकास के क्रम में जो भी कुछ करने का अवसर मिला है, वह मेरे लिए एक शानदार उत्तरदान है। सभी भाषा-भाषियों के प्रति भी हृदय से सम्मान प्रकट करते हुए स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम को मैं अपनी ‌हिंदी भाषा पर सहर्ष न्‍योछावर करता हूं। आपसे भी आग्रह करता हूं कि आप अन्य भाषाओं के साथ इसका भी मान बढ़ाइए और हिंदी को दुनिया में फलते-फूलते देखकर इस पर गर्व कीजिए।

स्वतंत्र आवाज़
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