मायावती
और कांग्रेस के बीच घमासान आज अपने चरम पर पहुंच
गया है। मायावती के ईमानदार होने का फैसला अब सिर्फ
देश की अदालत को ही करना है जिससे अब ‘काले धन’ पर कभी
भी निर्णायक मुकद्मेबाजी शुरू होनी तय है। इसमें
मायावती को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ सकता
है। मायावती की
अकूत
दौलत पर है निर्णायक घमासान
विशेष रिपोर्ट
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दुनिया
भारत में लीडरों के नैतिक पतन की पराकाष्ठा देख रही
है। वह देख रही है कि भारत के लीडर और राजनीतिक दल किस
तरह बिकते हैं। प्रधानमंत्री की कुर्सी के लिए जीभ
निकाले घूम रहे महाभ्रष्ट और चार्जशीटेड नेता कुर्सी
के लिए कैसे-कैसे समझौते करने को तैयार हो जाते हैं।
देशहित के गंभीर मुद्दों पर भी ये राजनीतिज्ञ एक मेज
पर कभी
बैठते नहीं हैं।
लीडरों से निराश-हताश
भारतीय
राजनीति!
विशेष रिपोर्ट |
हज
और उमरा के लिए
अब वही लोग जा सकेंगे जिनकी हैसियत आलीशान फाइव स्टार
होटलों के किराए की शक्ल में लाखों रूपए अदा करने की
होगी। इतना ही नहीं हरम के एतराफ में अब दो-पांच और दस
रियाल में सर भी नहीं मुड़ाया जा सकेगा, क्योंकि
हालात इतने खराब हैं कि उमरा करने के बाद अल्लाह के घर
के एतराफ में नाई और चाय की एक दुकान तक नहीं बची।
अब आसान नहीं रहा हज और उमरा
हिसाम-उल
सिद्दी़की की विशेष रिपोर्ट |
राष्ट्रवाद
और राष्ट्रधर्म की शेखी बघारने वालों को सोमनाथ दा ने
सीख दी है कि राष्ट्रवाद किसे कहते हैं और असली
राष्ट्रधर्म क्या है। इससे सोमनाथ चटर्जी ने करोड़ों
देशवासियों के मन में अपनी जगह बनाई है, अथाह सम्मान
और विश्वास पाया है।
लोकतंत्र के
महानायक सोमनाथ
दा
दिनेश शर्मा की विशेष रिपोर्ट |
नत्थू-कढेरा
और बंसी अपने छप्पर के नीचे बैठे हुए महंगाई से
घुट-घुट कर मर रहे हैं। उनके घर में जिन जरूरी चीजों
की जरूरत है वह उनकी पहुंच से बाहर चली गई है। इसका
सबसे सही उत्तर डा. मनमोहन सिंह के पास है जो न केवल
एक प्रख्यात अर्थशास्त्री हैं बल्कि देश के
प्रधानमंत्री भी हैं। वह
ही
आम जनता को महंगाई से मोक्ष दिला
सकते
हैं।
महंगाई-महंगाई
तू कहां से आई ?
विशेष रिपोर्ट |
आतंकवाद
और संगठित अपराध पर चर्चा में इस बार भारत और
अफगानिस्तान का पाकिस्तान पर जोरदार हमला जरूर देखने
को मिला जिसमें पाकिस्तान अपना बचाव करते हुए अलग-थलग
सा नज़र आया। सभी देश आतंकवाद पर अपनी कार्ययोजनाएं तो
लेकर आए मगर वे सम्मेलन में ‘फ्लापी’ से बाहर ही नहीं
निकलीं।
सार्क वही घिसे-पिटे मुद्दे और नतीजा जीरो
शंकर
बसु की
विशेष रिपोर्ट |
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राहुल
गांधी की शादी को लेकर उत्सुकता तो है ही मगर उससे
ज्यादा उत्सुकता यह जानने की है कि राहुल गांधी की
अर्द्धांगिनी आखिर कौन होगी? क्या राहुल गांधी अपने
पिता राजीव गांधी का अनुसरण करेंगे या वे किसी भारतीय
कन्या के साथ ही
सात फेरे लेंगे?
राहुल गांधी की शादी
पर
देश की निगाहें
एक विशेष रिपोर्ट |
यदि
पाकिस्तान को दुनिया के बीच में खड़े रहना है तो
उसे भी आतंकवाद पर उसी प्रकार गोले बरसाने होंगे जिस
प्रकार अमरीका बरसाता आ रहा है जिसे अब पाकिस्तान में
एक सैनिक शासक ही कर सकता है। जो अध्याय जनरल मुशर्रफ
ने शुरू किया है उस पर चलना पाकिस्तान की मौजूदा सरकार
के लिए कठिन भी और मजबूरी भी बन गया है। यहां का
लोकतंत्र अब सेना से अलग नहीं देखा जा सकता।
पाकिस्तान में
सेना की उंगली पर
नाचता लोकतंत्र
इरफान
गाज़ी
की रिपोर्ट |
नेपाल
में ‘बंदूकवादी लोकतंत्र’ लेकर आए माओवादियों को अपनी
सरकार के गठन में दिन में तारे नज़र आ गए। माओवादियों
के सुप्रीम कमांडर कमल दहल प्रचंड की चीन से दोस्ती और
भारत से पंगा, नेपाली जनता और यहां के राजनीतिक दलों
में घमासान का मुख्य कारण बन रहा है।
नेपाल में ‘बंदूकवादी
लोकतंत्र’ की प्रचंड की सत्ता
यज्ञपुरुष गहिरे
की विशेष रिपोर्ट |
मुझे
आश्चर्य होता है कि एक देश जो पूर्णतः पशुओं पर
निर्भर है और जो यह सीख ले कि उनके साथ किस प्रकार
कार्य करना है तो शाही ठाठ-बाट में रह सकता है, उसमें
पशुओं के साथ व्यवहार करने के लिए लोगों को प्रशिक्षित
करने हेतु कोई
शैक्षणिक प्रणाली नहीं है।
मेनका गांधी लिखती हैं-कहां
हैं
वन्यजीव
पाठ्यक्रम
और
प्रबंधन? |
देश
में बदले सत्ता समीकरणों के कारण इस लोकसभा में
महिला आरक्षण बिल के पारित होने की अब कोई संभावना नज़र
नहीं आती
है। महिला विधेयक पर बनी समिति भी अभी तक
इस पर अपनी रिपोर्ट नहीं दे सकी है। इसलिए बिल में ही
चला गया लगता है यह आरक्षण बिल।
बिल में गया महिला आरक्षण बिल!
आरती कनौजिया |
आस्था
सिर्फ श्रद्धा और विश्वास पर आधारित है। जहां बंगाल की
खाड़ी में इतनी आध्यात्मिकता समाये है, उस जगह प्रकृति
मनुष्य जानवर एवं सभी वन्यजीव जगन्नाथ भगवान की उस
शक्ति का सम्मान, एहसास और उनके अलौकिक रूप का दर्शन
करते हैं जिनकी महिमा का बखान मेरे शब्दों में संभव
नहीं।
मेरी पुरी की यात्राः
आध्यात्म से पर्यटन तक बता
रहीं हैं
जयंती
श्रीवास्तव |
आजादी
से आज तक बहुत कुछ बदला लेकिन इतवारी वहीं के वहीं
हैं। उनकी गरीबी से आज़ादी का नंबर अभी तक नहीं आया?
स्वतंत्रता दिवस हो या गणतंत्र दिवस इनके समारोहों में
सड़क किनारे खड़े होकर और पुलिसवालों के धकियाने पर भी
इतवारी और उनके बच्चे ही खुशी में हाथ में झंडे लहराते
हुए समारोह की शोभा बढ़ाते दिखाई देते हैं।
बासठ साल की आज़ादी और
सुलगते सवाल
नंदलाल भारती
की
कलम से  |
विवादों
और आलोचनाओं से घिरे
इस प्रख्यात समाजवादी को करीब से जानने वाले कहा करते
हैं कि मुलायम सिंह यादव ने हमेशा राजनीतिक और
सामाजिक मंच पर अपनी जरूरत का एहसास कराया है उनके
लिए चुनावी साल भारी राजनीतिक चुनौतियों के साथ सामने
होगा क्योंकि उन्हें अपनी नीतियों के साथ राज्य की
जनता के बीच जाना
है।
चुनौतियों के सामने
खड़ा एक समाजवादी!
राजनीतिक
संवाददाता
|
मनोरंजन
चैनल को ऑन करते ही कुछ नवोदित गवैये कुछ अंजाने
निर्णायकों के सामने गानों की शक्ल में चिल्लाते और
उछलते कूदते असंगत पौशाकों में नजर आएंगे। इससे यह पता
चलना कोई आसान काम नहीं है कि यह प्रतियोगिता गाने की
है या उछल कूदने की। किसी ऐसी सुर प्रतियोगिता के
जरिए प्रतिभा का आंकलन नहीं किया जा सकता।
जाने कहां गए वो सात सुर ?
अशोक कुमार की रिपोर्ट
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श्रीकृष्ण
ने दुनिया को इस संसार को जीने का सलीका बताया है।
पाश्चात्य देश श्रीकृष्ण से प्रेरणा लेते हैं कि जीवन
कैसे जिया जाए। भाद्रप्रद के आते ही यहां के मंदिर
सज-धज रहे हैं और ब्रज श्रीकृष्ण के जन्म की तैयारियों
में जुटा हुआ है।
‘अहो वृन्दावनं रम्यं यत्र
गोवर्धनो गिरिः’
रिपोर्ट-
गोपाल
शर्मा |
फिलहाल
खंडूरी ने अपनों का विश्वास तो खोया है, फिर भी उनकी
कुर्सी खतरा नहीं दिखता है। सितंबर में यहां
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव होने हैं और इसके बाद भाजपा
को फिर लोकसभा चुनाव का सामना करना है। इस पूरे
राजनीतिक परिदृश्य को देखकर अब यही लगता है कि
उत्तराखंड के आने वाले इन सभी चुनावों में भाजपा
मुश्किल में होगी।
खंडूरी ने खोया अपनों का
विश्वास लेकिन कुर्सी सलामत
राजेंद्र जोशी
की
रिपोर्ट
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दुनिया
सीमेंट की सड़कों पर मुद्दत से दौड़ रही है और भारत
अभी भी तारकोल की सड़कों के पीछे भाग रहा है। सड़क
निर्माण विशेषज्ञों के सीमेंट की सड़कों के निर्माण
प्रस्ताव अभी भी ठंडे बस्ते में पड़े हुए हैं, जबकि
निजी क्षेत्र ने अपनी परियोजनाओं में सीमेंटेड
सड़कों के निर्माण शुरू कर दिए हैं। सीमेंट
की सड़कों का आया
ज़माना
एक
रिपोर्ट |
उत्तराखंड
में ढहते मकान और जंग लगे ताले। जी हां! सदियों से
पहाड़ की यही कहानी और यही सच्चाई भी है। ये कहानी
है-पलायन की। अपने विकास और खूबसूरत दुनियां को देखने
की चाहत के ये विभिन्न अनचाहे रूप हैं।
ढहते मकान और जंग लगे ताले
हेम पंत
की
विशेष
रिपोर्ट |
 |
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