गांधी और राम के बाद लोकमान्य
बाल गंगाधर तिलक मायावती के तीसरे नए शिकार हैं। एक ही
आदेश में मायावती ने तिलक का नाम-ओ-निशान मटियामेट कर
दिया और ब्रिटिश काल में भारत के स्वतंत्रता सेनानियों
पर पुलिस बर्बरता करने के एवज
में यूपी पुलिस के पहले डीजी की
कुर्सी का ईनाम पाए बीएन
लहरी का नाम
आबाद कर दिया।
मायावती का बाल
गंगाधर तिलक पर हमला |
मानवता ,
न्याय और यकीन की बुनियाद पर खड़े इस्लाम पर उंगलियां
उठ रही हैं। गैर मुसलमानों की नई पीढ़ी में एक शक घर
कर रहा है कि क्या आतंकवाद फैलाने का काम मुसलमान करते
हैं? द़निया में जो आंखें खोल रहे हैं उनके सामने से
इस्लाम की सही तस्वीर ओझल हो रही है। इस पीढ़ी की यह
बदकिस्मती कहेंगे कि वह उपदेशों, शिक्षा और नसीहतों से
भरे इस्लाम के खज़ाने
से कुछ भी हांसिल नहीं कर
पा रही है।
शक के घेरे में खड़ा
मुसलमान! एक रिपोर्ट |
दुधवा
में पेशेवर हत्यारे सारा पता रखते हैं। इसलिए अब यह
कभी सुनने को नहीं मिलता है, कि वन की महारानी ने कब
और कहां वन के राजकुमारों को जन्म दिया और कब वे
हत्यारे तस्करों की भेंट चढ़ गए।
वनराज के
साम्राज्य पर तस्करों का हमला।
उमाशंकर पटवा
की रिपोर्ट |
जमीनी हकीकत यह है कि मीडिया
गंभीर संक्रमण और अग्निपरीक्षा के दौर से गुजर रहा है
मीडिया संगठनों में विश्वसनीयता और संचित गुडविल की
कीमत पर मुनाफा
कमाने की होड़ लगी है। पैसा कमाने के लिए कई तरीके
अख्तियार किए जा रहे हैं।
विस्तार से बता रहें हैं अरविंद कुमार सिंह
|
केंद्र
सरकार के वामदलों से रिश्तों में कड़वाहट के बाद
सपा
का एकाएक
केंद्रीय राजनीति में
महत्व बढ़ा है।
उत्तर
प्रदेश में सपा में राजनैतिक सेंधमारी की कोशिशों के
बावजूद आज भी
मुलायम सिंह यादव मुसलमानों की पहली पसंद बने हुए हैं।
विशेष रिपोर्ट |
कल
तक जिन्हें मनुवादी कहकर हांसिये पर धकेला जा रहा था,
आज उनमें ‘कस्तूरी’ नजर आने लगी है, जिससे इनका
‘राजयोग’ फिर से चमक उठा है। बसपा अध्यक्ष मायावती के
लिए, आखिर यही ब्राह्मण सत्ता के कारक बने हैं।
राजनीति में ब्राह्मण फिर से मुख्य मुद्दा!
दिनेश शर्मा की विशेष रिपोर्ट |
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राजनीतिक
खून खराबे की सरजमीं बनते जा रहे पाकिस्तान में अब ऐसी
हत्याएं आम होती जा रही हैं। इस समय जो सबसे बड़ी खबर
है वह यह चिंता है कि दुनिया का सबसे बड़ा दहशतगर्द
ओसामा बिन लादेन अपने
खुफिया नेटवर्क के जरिए
पाकिस्तान के परमाणु बम के बटन को कब्जाने की योजना
बना रहा है। बेनजीर
के बाद लादेन का अगला शिकार कौन?
इरफान गाजी की रिपोर्ट |
देश में जब गैर कांग्रेसी
सरकारों का आना हुआ तो वे सरकारें भी आपसी कलह और
अन्तर्द्वंद के कारण न तो चल सकीं न दोबारा सत्ता में
वापस आ सकीं
हैं। इस समय
भी यही हाल है। केंद्र की यूपीए
सरकार ने वामपंथियों के
शामिल
होने
का देश
भारी
नुकसान उठा
रहा है।
तीसरा मोर्चा अब फिर तीसरा मोर्चा-है कहाँ? |
भारत
के लिए परमाणु डील में देर ज्यादा ही परेशानी वाली और
नुकसानदेह होती जा रही है क्योंकि भारत को फिलहाल
जितनी देश के वामपंथियों की जरूरत है उससे कहीं ज्यादा
जरूरत उसे विश्व समुदाय के उन देशों की है जो
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के आर्थिक सुरक्षा और
कूटनीतिक
मामलों में अपना पूरा दखल रखते
हैं जिन्हें
नजरअंदाज
करना भारत के लिए उतना आसान नहीं है।
परमाणु डील की ओर
बढ़े भारत-अमरीका
विशेष रिपोर्ट |
लोकसभा
का चुनाव अभी दूर है और भाजपाइयों ने प्रधानमंत्री तय
कर लिया है। भाजपा की इसी लॉबी ने ऑपरेशन नरेंद्र मोदी
चलाया हुआ है। कारण यह है कि पूरा देश नरेंद्र मोदी को
देश के भावी प्रधानमंत्री के रूप में देख रहा है,
जिससे भाजपा के बड़े नेता लालकृष्ण आडवाणी, राजनाथ
सिंह और दूसरे नेताओं के सीने पर सांप लौट रहा है।
भाजपा में आपरेशन मोदी
-
मनोज कुमार |
उमा
भारती
भाजपा में भी कितनों के राजनीतिक राजयोग की सबसे बड़ी
बाधा मानी जाती हैं। मगर भाजपा के ड्राइंगरूमी नेताओं
ने अकेले उमा को ही नहीं बल्कि अपनी पार्टी
के कितने ऐसे नेताओं को ठिकाने लगा दिया है,
इसका कोई हिसाब नहीं
है। आज भाजपा
को उमा की बहुत जरूरत
है।
राजेन्द्र जोशी की रिपोर्ट |
जो लोग भारतीय हाकी फेडरेशन
के अध्यक्ष केपीएस गिल को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं वह
कितने दूध के धुले हुए हैं वह जरा इस पर भी सोचे।
भारतीय
हाकी पर किसी एक तरफ से हमला नहीं हुआ है इसके हत्यारे
इसी के भीतर छिपे हैं। हाकी में घुसे गिरोहोबाजो ने
इसे नौकरी पाने और सैर पर जाने का ऐसा जरिया बनाया कि
इसमें सभी ने
हाथ धोने
शुरू कर दिए।
हॉकी के हत्यारे कौन?
डी कुमार की रिपोर्ट |
पश्चिम
उत्तर प्रदेश के दलित, मुस्लिम, पिछड़ा वर्ग और जाट
बाहुल्य पट्टी में कई विधानसभा सीटों पर जाट अपनी
निर्णायक भूमिका में हैं, जो राजनीतिक मामलों में
ज्यादातर चौधरी अजित सिंह के ही साथ चलते हैं। कोई भी
स्थिति रही हो अजित सिंह का राजनीतिक
महत्व हमेशा से कायम है।
क्या कर रहे हैं अजित विशेष रिपोर्ट |
दुनिया
भर के जो सैलानी नेपाल आते हैं, उन्हें अभी नहीं मालूम
है कि अब नेपाल बदल गया है। यहां की भोली-भाली जनता
लोकतंत्र का मतलब समझने से पहले ही विघटनकारियों की आग
उगलती कार्बाइनों और मशीनगनों के सामने धकेल दी गई।
उदारवादी नेता
हाशिए पर चले गए हैं और
माओवादी बंदूक की नोक पर लोकतंत्र की
परिभाषा तय करने लग गए
हैं।
नेपाल पर विघटन की
काली छाया काठमांडू से
विशेष रिपोर्ट |
वित्तमंत्री थिरू पी चिदंबरम के बजट से यह समझने
में कोई चूक नहीं होनी
चाहिए
कि राहतों का यह पिटारा केवल जादुई है जिसे वोटों के
लिए खोला गया है। यह कांग्रेस की लोकसभा के चुनाव की
तैयारी है। बिल्कुल साफ है कि इसी साल के अंत तक ये
चुनाव हो जाएंगे।
'वोट
लेने के बाद खाल खींचने वाला ये बजट'
विशेष रिपोर्ट |
भारत
के
सबसे खूबसूरत समुद्र तटीय पर्यटन शहर गोवा में विदेशी
पर्यटकों के साथ आए दिन हत्या, बलात्कार, दुर्व्यवहार,
धोखाधड़ी और मादक पदार्थों की खुले आम बिक्री की
घटनाएं खूबसूरत गोवा के लिए कलंक बन गई है। पर्यटकों
की रहस्यमय मौत और
बलात्कार जैसी वारदातों ने सबको
चिंता में डाल रखा है।
गोवा में हत्या लूट बलात्कार, विदेशी पर्यटक शिकार
विशेष रिपोर्ट |
धिक्कार है,
व्यवस्था
के इस अंधे और बेरहम दौर को, जिसके सामने कंचन जैसी न
जाने कितनी बेबस हैं, जिन पर आज तक किसी की नज़र ही
नहीं गई। विश्व विख्यात पीतल नगरी मुरादाबाद में
अनगिनत अरबपति उद्योगपतियों, समाजसेवियों और जिला
प्रशासन की नाक के नीचे संघर्ष कर रही कंचन अपने
भविष्य के अगले संघर्ष की ओर बढ़ रही है।
मुरादाबादः अरबपतियों की नाक के नीचे कंचन का संघर्ष
सतीश के शर्मा की रिपोर्ट
 |
दलाई लामा के अनुयायी अलग
तिब्बत के लिए विश्व समुदाय का समर्थन जुटाने के
लिए दुनिया भर में फैले हुए हैं और चीन के दमन के
खिलाफ जबरदस्त आंदोलन छेड़े हुए हैं। अमरीका दलाई लामा
के आंदोलनकारियों का समर्थन करता है इसलिए उसने चीन को
नसीहत दी है कि वह तिब्बतियों पर बल प्रयोग करने में
संयम बरते और इस समस्या का स्थायी समाधान खोजे।
दलाई
लामा की तिब्बत के लिए जंग
एक विशेष रिपोर्ट |
भुवनचंद खंडूरी की सफलता और
विफलता का रिपोर्ट कार्ड
उत्तराखंड
की जनता ही तैयार करेगी न कि यहां की नौकरशाही। मगर वे
फौजी फार्मूले से चलते हैं और जनता तिवारी फार्मूले को
ज्यादा समझती है। कहने वाले नहीं चूकते हैं कि तिवारी
तो कांग्रेस की गुटबाजी के कारण सत्ता से बाहर हुए
लेकिन खंडूरी अपनी ही रणनीतियों के मुगालते में
उत्तराखंड की
सत्ता से बाहर होंगे।
उत्तराखंड में अभी
तिवारी से
बहुत पीछे हैं खंडूरी
विशेष रिपोर्ट |
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