भारत में हर साल धूमधाम से गणतंत्र दिवस मनाया जाता है।
इस मौके पर देश के राजपथ पर शक्ति प्रदर्शन के साथ इस दिवस की
रस्में अदा की जाती हैं। क्या यह देश जान सकता है कि उसके वे
सपने कहां हैं जो भारतीय संविधान को लागू करते हुए देखे गए थे?
क्या ये ही वो सपने हैं-आरक्षण, जातिवाद, राग-द्वेष, भाषा और
प्रांतवाद, भ्रष्टाचार या अपराध की राजनीति? जरा सोचिए और अपने
गणतंत्र दिवस की उपलब्धियों को तलाशिए।
भारतीय गणतंत्र में ये आरक्षण!
अनवर वकार अल्वी
का आलेख
मुलायमऔर
अमर में रिश्तों को लेकर उठे तूफान को अब देर-सवेर निर्णायक
तबाही तक पहुंचने से शायद ही कोई रोक पाए। राजनीतिक विश्लेषक
कहते हैं कि एक दलाल और एक राजनीतिज्ञ के बीच में एक दिन ऐसा
होना ही था। इनमें इतना बड़ा अंतर है कि राजनीतिज्ञ एक
राजनीतिज्ञ होता है जबकि दलाल सिर्फ एक दलाल। इसलिए मुलायम
सिंह यादव भले ही आज राजनीतिक भंवर में उलझे हुए हों लेकिन अमर
सिंह ने बौखलाहट में जिस रणनीति से नाराज़गी की छछूंदर पकड़ी
है वह उनको उनके हश्र तक जरूर पहुंचा देगी।
बौखलाए
अमर सिंह को 'शरण' की
तलाश
विशेष संवाददाता
अंग्रेजों को वास्तव में इससे कोई लेना-देना नहीं था
क़ि भारतीय यानी हिंदू चिंतन कितना श्रेष्ठ है। उन्हें तो केवल
इसमें रुचि थी कि इसे धर्म के रूप में कैसे इस्लाम के खिलाफ
खड़ा किया जा सकता है। हिंदू श्रेष्ठता के अहंकार में हिंदू
(भारतीय) चिंतक भी उस जाल में फंसते गये, भारतीय सुधारक राजा
राममोहन राय भी। इसका एक ही चारा है कि हम फिर से भारत और
भारती को अपनाएं और अपनी सोच को पुन: सार्वभौम मानववाद
से जोड़ें।
'हिंदू' शब्द भारत की एक नई समस्या?
डॉ राधेश्याम शुक्ल
का आलेख
कहीं
बर्फ से लकदक चोटियां, कहीं शीतल जल धाराएं, तो कहीं गर्म पानी
के चश्में। यह सब नजारे हिमाचल में एक साथ मिलते हैं। हिमाचल
ने पारिस्थितकीय संतुलन को कायम रखते हुए पर्यटन क्षेत्र में
तीव्र गति से प्रगति की है। यहां के लोग अतिथि का आदर-सत्कार
करने के लिए बहुत विख्यात हैं, तभी तो हिंसा मुक्त हिमाचल
प्रदेश, पर्यटकों के लिए सुरक्षित एवं आरामदायक डेस्टिनेशन
माना जाता है।
बेमिसाल और बेनज़ीर हिमाचल!
जोगिंदर पाल
की रिपोर्ट
महिलाओं
के प्रति आसक्ति या मुर्गे की टांग खाना भी दिग्गजों की
कुर्सियों के लिए खतरा बनते आए हैं। अपनी संतुष्टी, ब्लैकमेल
या किसी अन्य लाभ की आशा में राजनीतिक साजिशें रचने वालों के
कारण न केवल समाज और देश संकट में खड़ा दिखाई देता है अपितु एक
नहीं बल्कि कई हस्तियों और राजनेताओं का राजनीतिक जीवन समाप्त
हो जाता है। देखा जाए तो ऐसी साजिशें समाज, देश या शासन
व्यवस्था पर किसी बाहरी हमले
से कम नहीं मानी जा
सकतीं।
राजनीतिक साजिशों के मारे ये राजनेता!दिनेश
शर्मा
की रिपोर्ट
उत्तरप्रदेश में कड़े राजनीतिक संघर्ष और अपनी
ही रणनीतियों के असली सच का आज सामना कर रहे हैं, समाजवादी
पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव। वे कहां खड़े हैं?
वे धरती-पुत्र के नाम से विख्यात हैं लेकिन आज यह खिताब और
उनकी ख्याति दोनों ही ख़तरे मे हैं। उनके सारथी अमर सिंह ने
उन्हें ऐसे रास्ते पर लाकर खड़ा कर दिया है कि अब वे अपनी
विफलताओं पर तोहमते लगाते रहेंगे। ऐसे बहुत से मामले हैं जो
मुलायम सिंह यादव को अब सीना तान कर चलने नहीं दे रहे हैं। इस
राजनीतिक परिदृश्य में उनके साथियों को अपने नेता के राजनीतिक
भविष्य को लेकर घोर आशंकाएं और
चिंताएं घेर रही हैं।
अमर के मकड़जाल में मुलायम नज़रबंद!
विशेष संवाददाता
कांग्रेसइस
बात को स्वीकार करती है कि अलग तेलंगाना राज्य के गठन की घोषणा
उससे जल्दीबाजी में हो गई है लेकिन इसका अमल ठोक-बजाकर ही किया
जाएगा। हड़बड़ी में गड़बड़ी स्वाभाविक है और उसके अपने
दुष्परिणाम भी होते हैं। कल तक आंध्र प्रदेश के जो विधायक अलग
तेलंगाना राज्य के हिमायती थे, वे अचानक ही उसके विरोधी कैसे
हो गए, इसकी तह में भी कांग्रेस
को जाना होगा।
छोटे राज्य देश
के लिए कितने मुफीद?
एक रिपोर्ट
भारतमें
सत्ता के कमज़ोर नेतृत्व और देश में राष्ट्रीय एकता अखण्डता
जैसे मुद्दों पर भी यहां के राजनीतिक दलों में गहरी मतभिन्नता
का आखिर कहीं तो नुकसान होना ही है और वह हो रहा है।
अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में भारत की क्या हैसियत है और
शक्तिशाली देश भारत को कितनी तवज्जोह देते हैं यह अमेरिका-चीन
की संयुक्त विज्ञप्ति से पता चल जाता है। यह मुद्दा भी इस
यात्रा में निश्चित रूप
से दोनो देशों के आगे
पीछे रहेगा।
'बीजिंग
आघात' के साए में
भारत-अमेरिका वार्ता
एक रिपोर्ट
यूपी के कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह ने सोचा होगा कि
एमएलसी सुनील सिंह से भी वे उनका बंगला या उसकी जमीन ले लेंगे
लेकिन यह पासा उल्टा पड़ गया है। इसे लेने के लिए जिस प्रकार
का दबाव बनाया है वह रिकार्डिंग सुनकर समझा जा सकता है। बंगले
के अधिग्रहण की भी वे इशारे-इशारे में धमकी दे रहे हैं। इस टेप
मे सबसे अहम बात यह है कि प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री शैलेश कृष्ण
बड़े ही आत्म विश्वास से कोर्ट की बेंच बदलने की बात कर रहे
हैं जिससे लगता है कि किसी स्तर पर कोर्ट को मैनेज किया हुआ है
और कोर्ट में या उसके बाहर उनके पास कोई ऐसा है जो इतना
शक्तिशाली है कि किसी भी कोर्ट में कुछ भी कर सकता या करा सकता
है।धौंस
देकर
मायावती के
लिए
बंगला मांग रहे हैं शशांक और शैलेश
एक रिपोर्ट
मधु कोडा, देश में कांग्रेस की राजनीति का एक घोर पाप है,
जिसका घड़ा धड़ाम से फूटा है। उसने झारखंड में निरीह और
भोले-भाले आदिवासियों पर भारी भरकम अजगर छोड़ दिए जिन्होंने
झारखंड को लूट-खसोट कर उसे नक्सलियों की आग में जलने को छोड़
दिया। मधु कोडा जैसे दैत्य कभी सर न उठाते यदि कांग्रेस झारखंड
में भाजपा को पटकनी देने के लिए राजनीतिक मर्यादाओं को ताक पर
रख कर घटिया समझौते और तौर-तरीके अख्तियार नहीं करती। पता चल
रहा है कि सरकार में माफियाओं का एक बड़ा सिंडिकेट है जोकि
भारी सरकारी सुरक्षा के बीच रहकर काले कारनामों को सफलतापूर्वक
अंजाम दे रहा है।
कांग्रेस का घोर पाप है मधु कोडा!
दिनेश शर्मा की विशेष रिपोर्ट
आपने
लखनऊ
में कहा था कि अपन का ऊपर भी इंडियन एक्सप्रेस हाउस रहेगा।
किसी संस्थान के प्रति निष्ठा की ऐसी बेजोड़ मिसाल पेश करने
वाले प्रभाष जोशी जी आप ठीक ही कह रहे थे। यहां आपकी निष्ठा पर
कोई उंगुली नहीं उठा पाया। पत्रकारिता के प्रभाष जोशी युग के
अंत होने से अपूर्णनीय नुकसान हुआ है, लेकिन जब-जब देश में
हिंदी पत्रकारिता के कदम लड़खड़ाएंगे तब-तब प्रभाष जोशी एक
अदृश्य प्रेरणा के रूप में जरूर सामने होंगे। पत्रकारिता में
कुछ नया कर दिखाने वालों के इस हृदय सम्राट के प्रति स्वतंत्र
आवाज़ डॉट कॉम अपनी
विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता है।
प्रभाष जोशी-मेरी पाठशाला!
दिनेश शर्मा
कश्मीर
में आतंक का बहादुरी से
मुकाबला करने वाली रूखसाना कौशर का हिंदुस्तान कायल हो गया है।
उसकी बहादुरी के चर्चे पाकिस्तान अमेरिका, ब्रिटेन जैसे देशों
में हो रहे हैं। हर कोई उसे सैल्यूट करता है। जम्मू कश्मीर में
न जाने कितनी ऐसी बहादुर लड़कियां होंगी जिनकी भुजाएं आज
आतंकवादियों को मौत के घाट उतारने के लिए फड़फड़ा रही होंगी।
यहां एक प्रश्न भी उठ रहा है कि जम्मू-कश्मीर सरकार की तरफ से
विशेष पुलिस अधिकारी के रूप में बहादुरी में मिली इस आधी-अधूरी
सौगात को क्या नाम दिया जाए? यदि सरकार रूखसाना को सच्चा ईनाम
देना चाहती है तो वह इसे इसी ओहदे पर पुलिस की पक्की नौकरी दे।
रूखसाना कौशर को हिंदुस्तान का सैल्यूट!
गुल मोहम्मद की रिपोर्ट
दलित वोटों को अपनी रैयत समझकर उन्हें ठेकेदारों,
गुंडों और माफियाओं को बेचती आ रहीं बसपा अध्यक्ष मायावती के
भ्रष्टाचार जनित अहंकार का 'मर्दन' करने निकले कांग्रेस
महासचिव राहुल गांधी के लिए उत्तर प्रदेश में किसी ताकतवर दलित
नेता को आगे किए बिना ऐसा कर पाना संभव नहीं है। राहुल गांधी
को कांग्रेस के 'दलित मिशन' के लिए ऐसा दलित नेता चाहिए जो
दलित राजनीति की गहरी-समझबूझ रखता हो। कहना न होगा कि यदि
मायावती को राजनीति आती तो उनको प्रधानमंत्री की कुर्सी तक
पहुंचने
से कोई रोक नहीं
पाता।
कांग्रेस की यह चूक!
दिनेश शर्मा की विशेष रिपोर्ट
देश में काम की
कमी नहीं है, लेकिन काम आदमियों के लिए नहीं है, मशीनों के लिए
है। आम मेहनतकश अनपढ़ लोगों का काम बुल्डोजर जैसी मशीने लेती
जा रही हैं और पढ़े-लिखे लोगों का काम कम्प्यूटर लेता जा रहा
है। ऐसे में हर हाथ को काम देने और दिला पाने का नारा केवल एक
गैरजिम्मेदार व्यक्ति ही उछाल सकता है, जिसने बदली हुई
परिस्थितियों का पर्याप्त अध्ययन नहीं किया है। एक याचिका में
कहा गया है कि 1750 रुपए प्रत्येक मतदाता को मिलेगा तो कोई
व्यक्ति देश में ऐसा नहीं बचेगा जिसके दिमाग को रोजगार न मिले।
तब मतदान भी पर्याप्त संख्या में होगा और लीडरशिप
भी विकसित होगी।
हर वोटर को
1750 रुपए देने के लिए आंदोलन
भरत गांधी का लेख
बहुजन
समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच घटिया दर्जे का
वाक-युद्ध अपने चरम पर है। उत्तर प्रदेश्ा की तेईस करोड़ की
आबादी पर समय-समय पर राज करने वाली इन दोनों राजनीतिक
पार्टियों के शीर्ष नेताओं ने सत्ता को हथियाने और अपना कब्जा
बनाए रखने के लिए जिन हथकंडों का इस्तेमाल किया हुआ है उनसे
प्रबुद्ध वर्ग तौबा कर रहा है और आम आदमी घुट-घुट कर जी रहा
है। मायावती, उनके मंत्रियों और कुछ शीर्ष अधिकारियों की सपा
या कांग्रेस नेताओं के खिलाफ साजिशों का भंडाफोड़ भी हो रहा है
जिसमें बसपा और मायावती को
बदनामियों के अलावा कुछ भी हासिल नही हो रहा है।सपा-बसपा
में बदज़ुबानी का नंगा नाच
एक रिपोर्ट
मुंबई
फिल्मों में अक्सर एक छोटा सा बच्चा फुटपाथ पर बूट-पॉलिश करता
है और उसके सामने पॉलिश का पैसा फेंक देने पर वह स्वाभिमान में
अकड़ते हुए डॉयलॉग बोलता है कि 'साहब वह मेहनत का पैसा ले रहा
है न कि कोई भीख।' बूट-पॉलिश कराने वाला साहब उससे प्रभावित
होता है और फिर उसके हाथ में पैसे दे देता है। वास्तविकता
देखनी हो तो मुंबई आइए जहां उसका स्वाभिमान तो छोड़िए, उसका
जीवन ढाबों, होटलों, घरों, दुकानों और आग और ज़हर उगलने वाले
कारखानों में सिसक रहा है।
मुंबई में लोहे की भट्टियों में झुलसता बचपन
आलोक नंदन की रिपोर्ट
नौकरशाहीको
उसका धर्म बताना या उनके कर्त्तव्यों और कार्यप्रणाली पर टीका
टिप्पणी करना या सलाह देना उनके 'ईगो' को सीधे चोट पहुंचाना
समझा जाता है। ये अपने स्वार्थ या किसी दबाव में ही अक्सर काम
करते देखे जाते हैं। यही कार्य प्रणाली आज इनके लिए मुसीबत बन
गई है। वास्तव में उत्तर प्रदेश में नौकरशाहों की गुलामों से
भी बदतर स्थिति हो गई है। यह नज़ीर हमेशा कायम रहेगी कि एक
नौकरशाह को दूसरों की करनी कैसे
भोगनी
पड़ रही है।
काल
बिबस कहुं भेषज जैसे'
विशेष रिपोर्ट
कहते हैं
कि रिश्ते ऊपर से बनकर धरती पर आते हैं। 'हिना परवीन' उन
खुशनसीब लड़कियों में से एक है जिसने यतीमखाने में संरक्षण
पाकर अपने सुखद और वैवाहिक जीवन के सपने को पूरे होते देखा।
संघर्षों से भरी उसकी आत्मकथा को देखकर उसने कभी नहीं सोचा
होगा कि उसे और लड़कियों की तरह सम्मान और रीति-रिवाज़ के साथ
डोली में बैठाकर रूख़सत किया जाएगा। बचपन से ही अपनों से
तिरस्कार पाई हिना प्रारम्भिक जीवन के अनगित संघर्षों की जीती-जागती
दास्तान है।
यतीम से घर-बार हुई हिना!
रज़िया बानो
की रिपोर्ट
सास
गारी देवे, देवर जी समझा लेवे, ससुराल गेंदा फूल.... में
रायपुर का भी जिक्र आता है। इस गाने के बोल छत्तीसगढ़ी भाषा
में हैं, जिसे पहली बार रायपुर की ही प्रसिद्ध जोशी बहनों ने
गाया है। हालांकि अब जोशी बहनों को दुख है कि इस गीत को
फिल्मकार ने छत्तीसगढ़
को क्रेडिट नहीं दिया है। अगर ऐसा होता तो और
अच्छा होता, मगर उन्हें इसका ज्यादा मलाल नही होना चाहिए।
राष्ट्रीय फलक पर रायपुर का हस्तक्षेप धीरे-धीरे मुखर,
प्रखर और प्रभावी हो रहा है।
गेंदा फूल
भर नहीं, राष्ट्रीय फलक पर है रायपुर!
रिपोर्ट
गांधीजीइस मामले में बहुत साफ थे कि सिर्फ अंग्रेजों के देश के
चले जाने से भारत को सही स्वराज्य नहीं मिल सकता, वे साफ कहते
हैं कि हमें पश्चिमी सभ्यता के मोह से बचना होगा। पश्चिम के
शिक्षण और विज्ञान से गांधी अपनी संगति नहीं बिठा पाते। वे
भारत की धर्मपरायण संस्कृति में भरोसा जताते हैं और भारतीयों
से आत्मशक्ति के उपयोग का आह्लान करते हैं।
अंधेरों को चीरती
गांधी के
शब्दों की रौशनी
संजय द्विवेदी का आलेख
वायुयानसे देवदूतों की तरह रायपुर की धरती पर
उतरने वाले बुध्दिजीवी, बस्तर के गांवों के दर्द को नहीं समझ
सकते। आंखों पर जब खास रंग का चश्मा लगा हो, तो खून का रंग
नहीं दिखता। वे लोगों के गांव छोड़ने से दुखी हैं, लेकिन कोई
किस पीड़ा, किस दर्द में अपनी आत्मरक्षा के लिए अपना गांव छोड़ता
है, इस संदर्भ को नहीं जानते। सलवा-जुड़ूम के शिविरों की यातना
और पीड़ा उन्हें दिख जाती है, लेकिन नक्सलियों की सतत यातना और
मौत के मंजर उन्हें
नहीं दिखते।
नक्सलवाद यानि संगठित
अपराधियों का गिरोह विशेष आलेख
उत्तराखंड
के
पहाड़ी इलाकों में सड़कों के रखरखाव पर सालाना करोड़ों रूपए की
धनराशि खर्च करने पर भी सड़कों की स्थिति बहुत दयनीय है। इन
सड़कों पर भीषण दुर्घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। हर साल
सैकड़ों लोग इन हादसों में अपनी जान गंवाते हैं। यहां आने वाले
पर्यटक और तीर्थयात्री पहाड़ों की लाजवाब प्राकृतिक छटा के साथ
ही इन कष्टदाई सड़कों को भी नहीं भुला पाते। सामरिक दृष्टि से
भी इस पहाड़ी इलाके को रेलमार्ग से जोड़ा जाना अत्यन्त जरूरी
है।उत्तराखंड
के पहाड़ों में कब जाएगी रेल? हेमपंत
की रिपोर्ट
सुप्रीम
कोर्ट ने कहा है कि सरकार यह तय करे कि अब किसी सार्वजनिक
स्थान या सड़क पर मंदिर, मस्जिद, चर्च या गुरूद्वारा नहीं
बनेगा अगर सार्वजनिक स्थान पर इनमे से एक भी निर्माण हुआ तो
संबंधित अधिकारी को समुचित सजा दी जाएगी। इस महाआदेश के लिए हम
उच्चतम न्यायालय के आभारी हैं। केंद्र सरकार इस मामले पर यदि
राज्यों के साथ सहमति बनाने में कामयाब हो जाती है तो यह इस
देश की सौ करोड़ जनता के साथ न्याय और उपकार होगा। उच्चतम
न्यायालय के हम आभारी हैं! के
विक्रम राव
का आलेख
रेलप्रशासन,
रेलकर्मियों और रेल उपयोगकर्ताओं के बीच भारतीय रेल पत्रिका एक
मजबूत संपर्क-सूत्र का काम कर रही है। पत्रिका का पहला अंक 15
अगस्त 1960 को प्रकाशित हुआ था। पत्रिका की शुरूआत के पीछे
तत्कालीन रेल मंत्री लाल बहादुर शास्त्री तथा बाबू जगजीवन राम
का विशेष प्रयास था। भारतीय रेल पत्रिका अगस्त 2009 को अपनी
गौरवशाली यात्रा पर चलते हुए स्वर्ण जयंती मना
रही है।
रेल की हमसफर हिंदी
पत्रिका 'भारतीय
रेल' विशेष रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने
न्यायिक जांच के आदेश तो दिए हैं, लेकिन न्यायिक जांच के
निष्पक्ष होने पर संदेह व्यक्त किया जा रहा है। अब सवाल सिर्फ
अस्थाना की मौत की जांच का नहीं है बल्कि न्याय प्रणाली की
विश्वसनीयता पर उंगलियां उठ रही हैं। मसलन सूचना के अधिकार की
परिधि में जज साहब क्यों नहीं आते हैं? सुप्रीम कोर्ट में जजों
की नियुक्ति की क्या प्रक्रिया है? जज साहब की जवाबदेही किसके
प्रति है? इस देश के संविधान के प्रति, सरकार के प्रति या जनता
के प्रति
या
किसी के
प्रति नहीं?
न्यायपालिका की साख
का सवाल! अमलेंदु
उपाध्याय का आलेख
जलवायु
परिवर्तन को आज मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा माना जा रहा
है। माह दिसम्बर 2009 में ही डेनमार्क, कोपेहेगन में होने
वाले अन्तर्राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन समझौते को इसे रोकने
की दिशा में मील के पत्थर के रूप में देखा जा रहा है। धरती की
सतह पर बढ़ते तापमान को दो डिग्री सेंटीग्रेड से कम रखने के
लिए पूरे विश्व में अन्तर्राष्ट्रीय शासकीय, आर्थिक और
शैक्षिक स्तरों पर इसे लेकर विचार-विमर्श हो रहे हैं। जलवायु
असंतुलन की भयावह चपेट में भारत! डा
सीमा जावेद की विशेष रिपोर्ट
'निशंक'
के सामने उत्तराखंड के भाजपा के शीर्ष
नेताओं में सामंजस्य स्थापित करके चलने की जरूरत है जिसमें भगत
सिंह कोश्यारी को भी संतुष्ट रखना होगा। इस पूरे राजनीतिक
परिदृश्य में एक बात बिल्कुल स्पष्ट है कि भाजपा यहां तभी
जनता का खोया हुआ विश्वास हासिल कर सकती है जब उसके लीडर
राजनीति के 'कॉमन मिनिमम प्रोग्राम' से चलेंगे अन्यथा कांग्रेस
इन सबको निगल जाने के लिए तैयार बैठी है।
पत्रकार से
मुख्यमंत्री तक पहुंचे
'निशंक' की अब असली परीक्षा दिनेश
शर्मा की विशेष रिपोर्ट
इच्छा शक्ति हो तो पलायन रुक सकता है और इसके साथ ही
रुक सकता है लोगों के लापता होने का यह अंत हीन और दुखद
सिलसिला जोकि छत्तीसगढ़ जैसे विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक राज्य को
कहीं न कहीं शर्मशार करता है। यहां के सामाजिक संगठनों और
राजनीतिक दलों के लिए यह एक चुनौती है कि वे अपने राज्य के
बारे में उन गलत धारणाओं को खत्म करने के लिए गम्भीर पहल करें
क्योंकि अकेले पुलिस और प्रशासन के पास ही सारी सामाजिक और
शोषणात्मक समस्याओं का
समाधान नहीं हो सकता है।
कहां ग़ायब हैं छत्तीसगढ़ के वाशिंदे?
गिरीश पंकज
का
आलेख
विविधताओं से भरे देश में
किसी संदेश का आख़िरी आदमी तक पहुँच जाना साधारण नहीं होता।
कंपनियां अब ऐसी रणनीति बना रही हैं, जो उनकी इस चुनौती को हल
कर सकें। चुनौती साधारण वैसे भी नहीं है। भारत के गाँवों में
सालों के बाद झाँकने की यह कोशिश भारतीय बाज़ार के विस्तारवाद
के बहाने हो रही है। देश के मैनेजमेंट गुरू इन्हीं विविधताओं
को लेकर शोधरत हैं। यह रास्ता भारतीय बाज़ार के अश्वमेध जैसा
कठिन संकल्प है।विज्ञापन
बाज़ार अब चला गांव की ओर
संजय द्विवेदी
का आलेख
चीनकी साम्राज्यवादी सोच सुरसा मुख की तरह बढ़ रही है। पड़ोसी
देशों में उसकी अनधिकृत घुसपैठ को कमोवेश इसी रूप में देखा जा
सकता है। वह जिस तरह नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और पाकिस्तान
की भारत विरोधी सोच को हवा दे रहा है, यह इस बात का द्योतक है
कि उसे फाह्यान और ह्वेनसांग के सपनों का गौरवशाली भारत पसंद
नहीं है। पड़ोसी देशों की सामरिक महत्व की जमीनों को हथियाने
की उसकी कोशिशें परवान चढ़ रही है।
चीन
भारत का कितना हितैषी?
सियाराम
पांडेय ‘शांत’
उत्तरप्रदेश के खेल मंत्री अयोध्या प्रसाद पाल ने खेल को भी
अपनी राजनीति का अखाड़ा बना दिया है। बदनाम गुटबाज़ जातिवादी
और राज्य के खेल परिसरों में अराजकतत्वों को बढ़ावा देकर खेल
के वातावरण को लंबे समय से दूषित करते आ रहे खेल विभाग के कुछ
अधिकारियों के साथ वे ऐसी गतिविधियों में लिप्त हैं जिनसे खेल
का कोई भी विकास नहीं हो सकता है। खेल छात्रावासों के
भोजनालयों को उन्होंने अपने बसपा कार्यकताओं का लंगर बना डाला
है। खेल
मंत्री ने आरएसओ का ऑडिट क्यों रूकवाया? रजनीश
सिंह की रिपोर्ट
यहां
तो जातिगत
राजनीति के हर कुएं में आरक्षण की भांग पड़ी हुई है। कांग्रेस
सांसद सलमान खुर्शीद ने अगर मुसलमानों के लिए अलग से आरक्षण की
मांग उठा दी है तो ईसाइयों को भी आरक्षण देने की मांग बुलंद
होती रही है। जैन धर्म से जुड़े लोगों को भी आरक्षण देने की
मांग उठ ही चुकी है। गुर्जरों को आरक्षण देने की मांग भी एक
बार फिर जोर पकड़ने लगी है। सर्वोच्च न्यायालय की व्यवस्था पर
विचार किया जाए तो अब किसी को भी किसी तरह का आरक्षण लाभ मिलना
मुमकिन नहीं है।
आरक्षण का बेताल फिर डाल पर
सियाराम पांडेय ‘शांत’का आलेख
छत्तीसगढ़ की सदियों पुरानी
आदिवासी सभ्यता विनाश के कगार पर आ खड़ी हुई है। अपने वतन के
प्रति वफादारी वीरता, सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं
के लिए विख्यात इस आदिवासी समाज का नेतृत्व ऐसे ख़तरनाक हाथों
में खेल रहा है, जिसका उद्देश्य इस समाज में विघटन पैदा करके
उसे प्रगतिशील समाज से अलग-थलग कर देना है। जिससे इस समाज का
सारा ऐतिहासिक वैभव और विशेषताएं सदा के लिए नष्ट
हो जाएंगी।
आतंकवाद के खिलाफ कभी
भी सशस्त्र अभियान
योगेश
मिश्रा
की रिपोर्ट
चेन्नईपुलिस
ने जिस प्रकार एफआईआर दर्ज कर 'दिनामलार' के संपादक बी लेनिन
को गिरफ्तार किया उससे जिस्मफरोशी के धंधे मे लिप्त कॉलीवुड की
ऐसी ताकतों को और ज्यादा खुलकर काम करने का प्रोत्साहन ही मिला
है। पुलिस को शर्म आनी चाहिए कि वह ऐसे अवसरों पर काले-धंधे
वालों के साथ ही खड़ी दिखाई देती है। जब ऐसी घटनाएं उजागर हुई
हैं तो पुलिस उसमें मूकदर्शक ही नज़र आई है क्योंकि ये कुकर्म
भी पुलिस की आय का बहुत बड़ा जरिया माने जाते हैं।
कॉलीवुड में
देह-व्यापार
पर मीडिया और कलाकार आमने-सामने
एक
रिपोर्ट
विदेशी मामलों में भारत की
स्थिति अत्यंत दयनीय और लचर होती जा रही है। कूटनीतिज्ञों का
कहना है कि इतना कमजोर भारत कभी नहीं था जितना कि आज दिखाई पड़
रहा है। इसका कारण भारत में आंतरिक राजनीतिक कलह और सरकार में
सामंजस्य का भारी अभाव है। भारतीय विदेश नीति में हस्तक्षेप
रखने वालों के अपने एजेंडे हैं। किसी एक मुद्दे पर भी सहमति बन
पाना बहुत मुश्किल होता है इसलिए कूटनीतिक बैठकें निरर्थक ही साबित होती जा रही
हैं।
नेपाल के
सामने भी भारत बेबस
विशेष संवाददाता
भारतके
राजमुकुट हिमालय में हीरे की तरह दमकता उत्तराखंड देश के
27वें राज्य के
रूप में अपनी अलौकिक छटा बिखेर रहा है। भौगोलिक एवं प्राकृतिक
संपदा से समृद्धशाली इस राज्य की राजनीतिक ऐतिहासिक
सांस्कृतिक, धार्मिक परंपराओं और सभ्यता लोक संगीत के विविध
आयाम इतने प्रेरणादायक हैं कि उनके जितने करीब जाएं उतना ही
आस्था और विश्वास को मजबूत करते हैं। उत्तराखंड ने हर क्षेत्र
और हर दौर में अपनी अलग औरमहत्वपूर्ण
भूमिका निभाई है।
अतीत में
उत्तराखण्ड
घनश्याम जोशी
की रिपोर्ट
किशोर दा!
क्या आप सुन रहे हैं कि आज दुनिया आपके सदाबहार गीतों को
कितनी शौक से
गा
रही है और
गुनगुना
रही है। आज का दिन हम सबके लिए इसलिए भावनात्मक और यादगार है
क्योंकि इस दिन आपने हमसे अचानक कहा अच्छा तो हम चलते हैं।
क्या आपने ये गाना आज के लिए ही गाया था? आपको हरेक रूप में और
हर रंग में ढूंढ लिया जाता है। कौन कहता है कि आपकी आवाज़ में
दर्द नही था? किसी आलोचक ने उसे महसूस करने की कोशिश ही नहीं
की। अच्छा
तो हम चलते हैं ... किशोर दा!
मनमोहन हर्ष का आलेख
देवधरट्राफी जैसी प्रतियोगिता को स्थगित किया गया है तो दूसरी
तरफ घरेलू क्रिकेट की स्थापित प्रतियोगिताओं पर कारपोरेट
टूर्नामेंट और आईपीएल चैपियंस टूर्नामेंट को तरजीह दी गई है।
एक ओर जहां इंग्लैंड और आस्ट्रेलिया में घरेलू क्रिकेट ढांचे
को मजबूत किया जा रहा है वहीं भारत में इसे हाशिये पर धकेला जा
रहा है। यदि इसी तरह से चलता रहा तो आने वाले समय में रणजी
ट्राफी जैसी प्रतियोगिताएं भी दोयम दर्जे की बनकर रह सकती है।
भारत में हाशिये पर जा रहा घरेलू क्रिकेट
मनीष कुमार जोशी
की रिपोर्ट
उत्तर
प्रदेश में तिकड़मों से शराब के व्यवसाय में एकाधिकार कायम
करने वाले शराब के ठेकेदार पौंटी चढ्ढा चार साल से कोयले का भी
जमकर कारोबार कर रहें है, लेकिन यह सारा काम इतनी सफाई से हो
रहा है कि किसी को कानों कान खबर तक नहीं है। पौंटी चड्डा की
मायावती सरकार में भी बल्ले-बल्ले है और वह इतनी घुसपैठ रखते
हैं कि उनके दावे के सामने कोई नही खड़ा होता।
शराब
के बाद पौंटी
चढ्ढा ने अब कोयला भी हड़पा
श्रवण शुक्ला
की
रिपोर्ट
एक
सवाल शासन और समाज का पीछा कर रहा है कि इन्हें डाकू किसने
बनाया और वे कौन हैं जो इनकी बर्बादी और बीहड़ों में धकेलने के
लिए जिम्मेदार हैं। सामंतवादी शक्तियां और इलाकाई पुलिस,
सामाजिक एवं आर्थिक रूप से यदि उन्हें आगे बढ़ने देती तो आज
केवट न डाकू कहलाते और न अपराधी। उनका डाकू और अपराधी के रूप
में चिन्हित होने का ज्यादातर मतलब है कि उन्होंने पुलिस और
सामंतियों के असहनीय अत्याचारों का सामना किया
होगा।
चित्रकूट के बीहड़ों में कौन बना रहा है इन्हें डाकू ? वीरेंद्र वर्मा
की रिपोर्ट
नेगारा के नेशनल
पार्क और सुमात्रा (इंडोनेशिया) के गुनुंग ल्युसर नेशनल पार्क
जैसे, दक्षिण पूर्वी एशिया के अनछुए वर्षा वनों की अंधेरी रात
का रहस्य व भयानकता इतनी गूढ़ होती है कि उसके समक्ष अदृष्ट और
अज्ञात का रहस्य भी फीका पड़ जाता है। फिर भी वन्य जीवन के
शौकीनों के लिए इससे बेहतर स्थान और समय कोई दूसरा नहीं हो
सकता।
वर्षा
वन की निशा का घुप्प संसार
केन रूबेली
की
रिपोर्ट
क्या
वे सवाल आज खत्म हो गए हैं कि आर्य समाज दुविधा में
पड़ा हुआ है? यह नहीं माना जा सकता। जिन चुनौतियों से
लड़ने के कारण आर्य समाज की पहचान बनी है वे मौजूद
हैं। फिर भी आंदोलन में कोई दम नहीं दिखता। इसके कारण
कुछ गहरे हैं। उन्हें
पहचाने बिना आर्य समाज को जिन्दा नहीं किया जा सकता।
कहां है आर्य समाज आंदोलन?
राम बहादुर राय की रिपोर्ट
पाकिस्तान
को एक बेचारा पाकिस्तान कहें तो यह अतिश्योक्ति नही होगी।
विशेषज्ञों की राय है कि सत्ताधारी वर्ग एवं सरकार की शोषक
नीतियों गरीबी, बेरोजगारी, खाद्यान्न संकट, अत्याचार,
सामंतवादी व्यवस्था, सैन्य तानाशाही और सबसे बढ़कर आतंकवाद ने
पाकिस्तान को एक विफल
राष्ट्र के रूप में ख्ाड़ा
कर दिया है।
बेचारा पाकिस्तान!
शिव
कुमार मिश्र का विश्लेषण
बिजनौर
जनपद, अनेक विश्वप्रसिद्ध ऐतिहासिक घटनाओं का साक्षी
है। इसने देश को नाम दिया है, अनेक अंतर्राष्ट्रीय
प्रतिभायें दी हैं। यहां की धरती उर्वरक ही उर्वरक है।
बिजनौर महाभारत काल तक सघन वनों से आच्छादित था। इस वन
प्रांत में, अनेक ज्ञात और अज्ञात ऋषि-मुनियों के
निवास एवं आश्रम हुआ करते थे।
और
यहां
क्या-क्या अजूबे थें-जानिए।
बिजनौर जिसकी धरती उगले सोना
चेतन मटरू की रिपोर्ट
आइए
तो नमन करें, उन चंदेल राजाओं को जो खजुराहो में धरती
पर अद्भुत कला-शिल्प
और सभ्यता से निकली एक बेजोड़ जीवनशैली
का स्वर्ग लेकर आए। अपने पूर्वजों के
प्रति कृतज्ञता प्रकट कीजिए
जिन्होंने
हमारे लिए अपनी विरासत और बेशकीमती
निशानियां
छोड़ी हैं।
खजुराहो
कला संस्कृति के स्वर्ग में मेरी यह यात्रा विनीता `राज`
नई संस्कृति
में लेखन का उद्देश्य बदल गया है और लेखकीय प्रतिभा के
मानदण्ड भी बदल गये हैं। जिस प्रकार अमृत की प्राप्ति
के लिये भेष बदलकर देवताओं की पंक्ति में बैठे राहु को
देवता भी नहीं पहचान सके थे, उसी प्रकार आज पाठकों के
लिये असली और नकली लेखकों की पहचान कठिन हो गई है।
साहित्य में घुसा बाज़ारवाद और जुगाड़वाद
अंबा
प्रसाद
श्रीवास्तव की
विशेष टिप्पणी
छत्तीसगढ़ मे जब से राज्य सरकार ने स्कूल
शिक्षक बनने के लिए बीएड की उपाधि को अनिवार्य किया है
तब से यह पाठ्यक्रम निजी कॉलेजों के लिए मोटी कमाई का
जरिया बन गया है। प्रदेश मे नित नये खुलते प्राइवेट
कालेजों मे यूं तो व्यवसायिक पाठ्यक्रमों की लंबी
फेहरिस्त होती है परंतु इस सूची मे बीएड का अलग ही
आकर्षण है क्योंकि इस एक वर्षीय कोर्स के लिए मारा
मारी है और इससे निजी संस्थानों की जमकर कमाई होती है।
छत्तीसगढ़
में निजी कालेजों की बीएड कोर्स से मोटी कमाई
योगेश मिश्रा की रिपोर्ट
भारतीय दंड संहिता
के अध्याय में समलैंगिक पुरूष यौन संबंधों को पाप
बताया गया है। यह अध्याय अंग्रेजों के जमाने में
संहिता में नहीं जोड़ा गया था, बल्कि यह शताब्दियों से
भारतीय सभ्यता और संस्कृति की विरासत रही है, यह एक
कटु सत्य है कि आज भी भारत एक सांस्कृतिक नेता के रूप
में दुनिया में विद्यमान है एवं तथाकथित पश्चिमी
सभ्यता वेदों एवं उपनिषदों की गहराई से जन्मी भारत की
सांस्कृतिक विरासत
से ईर्ष्या करती है।
समलैंगिकता पर राष्ट्रपति वीटो का प्रयोग करें
रिपोर्ट
जराकल्पना कीजिए कि किसी स्त्री का पहाड़ में विवाह हुआ
हो और उसके पति को अगले ही दिन
अपनी डयूटी के लिए जाना हो तो दोनों को कैसा लगेगा? यहां तो ऐसा खूब हुआ है कि शादी भी हुई और दोनों ने एक दूसरे की शक्ल भी
नहीं देखी और मिलन के इंतजार में लंबा समय गुजर गया। पहाड़ी
नारी की यह संघर्ष पूर्ण ज़िंदगी!
हेम पंत
की
रिपोर्ट
आहार
विज्ञान में हो रहे अग्रणी अनुसंधान क्षेत्र में आप का स्वागत
है, जहां शोधकर्ता दैनिक खाद्य पदार्थों की रोग प्रतिरोधी और
दीर्घायु देने की क्षमताओं का पता लगा रहे हैं। कुछ शोधकर्ता
यह काम प्रयोगशालाओं में कर रहे हैं और कुछ भिन्न संस्कृति
वाले समुदायों के आहारों का उन समुदायों में कैंसर व हृदय रोग
की दर कम होने से क्या संबंध है, इसी की
खोज में लगे हैं।
आहार
जो आप को दीर्घायु बनाते हैं लॉवेल पोंट
की रिपोर्ट
मनोवैज्ञानिक
कहते हैं कि लोग सबसे ज्यादा उड़ने के स्वप्न देखा
करते हैं। स्कूल के बच्चों से पूछे जाने पर कि तुम कौन
सा जानवर बनना चाहोगे तो वे अकसर यही उत्तर देते हैं
कि ‘मैं चिडि़या बनना चाहूंगा।’ पक्षियों की उड़ान हम
सबको यह प्रेरणा देती है कि हम भी ऊपर उड़ें और
क्षितिज के उस पार झांक कर देखें
कि
वहां क्या है?
पंछी
जिनकी उड़ान में भी संदेश हैजे़फ
रेनीक
हालांकि
जिन्ना मुसलमानों के अधिकारों और स्वाधीनता का ही
प्रतिनिधित्व करते थे लेकिन वह रूढि़वादी कभी नहीं
रहे। कुछ लोगों ने इसी रूप में जब उनका अभिनंदन किया
तो उन्होंने कहा, ‘मैं तुम्हारा धार्मिक नेता नहीं
हूं।’
निस्संदेह हमें जश्न कायद जैसा
दूसरा लीडर नहीं मिल सकता।कायदे
आज़म पाकिस्तान जनाब मोहम्मद अली जिन्ना
शाइस्ता
इकरामुल्ला
आतंकवाद
के
अभिशाप से शायद
ही कोई देश मुक्त हो और इससे मुक्ति
के लिए जरूरत है तो अंतरराष्ट्रीय सहयोग की। यह संदेश
सर्वत्र फैल जाना चाहिए कि मतांधता के नाम पर किए जाने
वाले हर आतंकवाद से निर्णायक रूप से तत्काल निबटा
जाएगा, तभी दुनिया भर के निरीह नागरिक इन
घातक प्रहारों से मुक्ति का अनुभव कर सकेंगे।
आतंक के दशक, जो अब अपने चरम पर हैं नैथन
एम एडम्स
पाकिस्तान
के लोकतंत्र और उसकी अग्रिम पंक्ति के राजनेताओं का
शिकार करके और बचे-खुचों को निर्जीव करके पाकिस्तान की
गुप्तचर एजेंसी आइएसआइ स्वात घाटी में एक
ताकत बन चुके तालिबान
और अलकायदा के साथ जा खड़ी हुई है। यहां अब
ऐसी ताकतों ने पांव पसार लिए हैं जो पाकिस्तान को
पाषाण युग में धकेलने के लिए आमादा हैं।
स्वातघाटी, आइएसआइ
की नई राजधानी इरफान
गाज़ी की विशेष रिपोर्ट
धरती,आकाश और पाताल प्राकृतिक चमत्कारों और एक से बढ़कर एक
संरचना से समृद्घशाली हैं। मानव-जीवन को प्रकृति से यह
संपदा न मिलती तो उसकी स्थिति उन प्राणियों से भी
बद्तर हो जाती जो रेगिस्तान और बंजर में अपने
अस्तित्व को बचाने के लिए चौबीसों घंटे संघर्ष में
रहते हैं।
नायग्रा फॉल्स जिसे आप देखना चाहेंगे!
देवेंद्र मिश्र की रिपोर्ट
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