पिछले अंक

महत्वपूर्ण विश्लेषण

4 अलीगढ़ - एएमयू अपडेट

4 छत्तीसगढ़ अपडेट

4जुलाई माह- मंगल पाण्डे पर विशेष

4भारतीय साहित्य में कानपुर का बड़ा योगदान

4लखनऊ कोर्ट की सुरक्षा की अनदेखी

4पंजाब में धान बुआई मजदूरों की चांदी

4ऋग्वेद में पांचजन और पंच परम्परा

4मायावती सर्वजन के कितने नजदीक

4महत्वाकांक्षाएं उजागर नहीं करना चाहते रमन सिंह!

4पंद्रहवीं लोकसभा के विजयी सदस्य

4आईपीएल में रंगभेद, कोई नई बात नहीं !

4यूपीए को पीएचडी की बधाई

4बढ़ते चरण शिखर पुस्तक का विमोचन

4एलयू में पीएचडी पर लगी रोक हटी

4धारा-370 में संशोधन जरूरी- भीमसिंह

4हमारा प्रधानमंत्री और देश का प्रधानमंत्री

4पैंथर्स पार्टी की दिल्ली यूनिट भंग

4पश्चिम में रालोद-भाजपा के झंडे गड़े

4न्यायिक अधिकारी त्वरित निर्णय करें- प्रदीप कांत

4लोकतंत्र का चौथा स्तंभ लड़खड़ा रहा है- अध्यक्ष प्रेस परिषद

4सृजनगाथा सम्मान की घोषणा

4उलेमा कौंसिल ने सपा के पक्ष में अपील की

4इटावा में बसपा प्रत्याशी का यह कैसा प्रचार?

4भाजपा और सपा में सिमटा लखनऊ का मुकाबला

4लखनऊ में टंडन के लिए टूटा छीका

4कहां आजम खां और कहां जया प्रदा!

4बसपा सरकार ने आचार संहिता तोड़ी

4बाबा दुबे ने बसपा को हैसियत बताई

4अंबेडकर जयंती पर वेदों के खिलाफ किताबों की बिक्री

4बिजनेस लीडरशिप विकसित की जाए

4अहमदाबाद में कनाडा का व्यापार कार्यालय

4चुनाव घोषणा पत्र में सपा के वादे

4मंजरी दुबे को राग विहार का स्मृति पुरस्कार

4यूपी में जान-माल सुरक्षित नहीं- भाजपा

4रीता बहुगुणा देंगी लखनऊ में जोरदार टक्‍कर

4भारत के सम्‍मान के लिए माल्‍या आगे आए

4हिंदुस्तान में क्यों न दफन हों ये आतंकवादी ?

4बेचारा पाकिस्‍तान!

4क्या होती है 107/116/151 दण्ड प्रक्रिया संहिता?

4आखिर लोहे का टुकड़ा स्वर्ण में कैसे बदला?

4श्रीराम स्वरूप कालेज में छात्र सिंपोजिया

4पारदर्शी मतदान में बाधक चुनाव निशान

4आज कहां है केरल

4सोनभद्र पर चला जेपी का बुल्‍डोजर

4फंडों के निवेश में धैर्य से काम लीजिए

4गुजरात में अब नैनो सिटी

4सस्‍ते कर्ज़ में भी हैं कई खतरे

4नकोदर का दरी कारोबार सिमटा

4कोरस से हिलता टाटा स्टील का मुनाफा

4नौकशाहों ने फंसाया प्रतिस्पर्धा कानून

4खेती में भारत पड़ोसियों से भी पिछड़ा?

4बॉलीवुड को आस्‍कर से ज़िंदगी!

4ऑस्कर के अलावा पिंकी को और क्या मिला?

4न देखी गई फिल्म की समीक्षा

4क्या भारी पड़ेगी गजनी की गाज?

4कसाब को कानूनी मदद

4आतंक के समुद्री रास्‍ते, एक और चुनौती

4बिहार में लाठी पीछे, विकास आगे

4राजमहल छोड़ना चाहती हैं राजमाता

4मीरा अमेरिका में नई राजदूत

4विवेक कुंदरा व्हाइट हाउस में

4फैशनेबल चार्ल्स

4माओवादी सत्‍ता में घिसटता नेपाल

4नेपाल में प्रचंड को दंड

4नेपाल में ‘देवी कुमारी’ पर विवाद

4वेबसाइट से छवि निखारिए, नेताओं में होड़

4ज्ञानेंद्र का राजशाही बहाली का प्रयास

4चावला नए मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त

4बांग्लादेश में हालात अभी भी बेकाबू

4उल्फा को खालिदा के समर्थन की पोल खुली

4‘अछूत की शिकायत’ के बहाने

4पासवान दलित फ्रंट के पीएम उम्मीदवार

4मीडिया, कुए में घुली भांग

4ग्वालियर मे अनोखा जैन तीर्थ

4बांग्लादेश में हालात अभी भी बेकाबू

4मदर टेरेसा का उपहार

4भोजपुरी के तुलसीदास

4छत्तीसगढ़ में जादू-टोना रोकने की पुलिस की पहल

4‌हिंदी अगली सदी का शोधपत्र

4डेविड फ्राली यानि वामदेव शास्त्री से मिलिए!

4बदरीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ की छाया-स्मृति

4दिनकरजी की जन्मशति पर कानपुर में संगोष्ठी

4साहित्य में घुसा बाज़ारवाद और जुगाड़वाद

4कपिलवस्तु के लिए इस सरकार ने क्या किया?

4अतीत के झरोखे-एक जाम तुम्हारे नाम

4किस किसका ‘मुख’ देखेगी धरती?

4वर्षा वन की निशा का घुप्प संसार

4क्रिकेट का बदला चेहरा

4तेंदुलकर को सब कुछ मिला, भारत को क्या मिला?

4ऐसा क्या है राजस्थान रॉयल्स में?

4आप का बच्चा झूठ बोले तो!

4मेरे पास भी एक हरित पार्टी हो तो

4‌प्राचीन श्रीलंका और उसका इतिहास

4तमिलों को भारत के खिलाफ भड़का रहा है लिट्टे

4शिक्षा और अनुशासन ही सबकुछ

4मुख्यमंत्री ने कार्टून बनाया

4मक्खी: एक विलक्षण कीट

4जासूसों के जासूस

4महिलाओं के लंबे जीवन का रहस्य

4शक्ति बढ़ाने के लिए व्यायाम करें

4‌बच्चों में भी अब फैशन का क्रेज

4मध्यवर्गीय नैतिकता की कब्रगाह

4दारूल उलूम पर लगे प्रतिबंध

4तेहरान में क़ैद अमरीकी महिला पत्रकार

4भ्रष्‍ट राजनीति के खिलाफ अंबिका का नगाड़ा

एक वर्ग अमीर होता चला जा रहा है और दूसरा वर्ग गरीब होता जा रहा है। प्रणव मुखर्जी के पास अगर इस दूरी को कम करने का कोई फार्मूला हो तो वह पेश करें, जनता आप के चरण धोकर पिएगी, अन्यथा संसद में अन्य वित्त मंत्रियों की तरह से उस ब्रीफकेस के साथ बजट पेश करने न आए जो कि कुछ समय के लिए देश की धड़कने रोककर सनसनी पैदा किए रहता है। वित्त मंत्री को इस ब्रीफकेस की लोक दिखावा संस्कृति से मुक्त करना होगा। कुछ है भी इस ब्रीफकेस में? दिनेश शर्मा की विशेष रिपोर्ट  


'निशंक' के सामने उत्तराखंड के भाजपा के शीर्ष नेताओं में सामंजस्य स्थापित करके चलने की जरूरत है जिसमें भगत सिंह कोश्यारी को भी संतुष्ट रखना होगा। इस पूरे राजनीतिक परिदृश्य में एक बात बिल्कुल स्पष्‍ट है कि भाजपा यहां तभी जनता का खोया हुआ विश्वास हासिल कर सकती है जब उसके लीडर राजनीति के 'कॉमन मिनिमम प्रोग्राम' से चलेंगे अन्यथा कांग्रेस इन सबको निगल जाने के लिए तैयार बैठी है। पत्रकार से मुख्यमंत्री तक पहुंचे 'निशंक' की अब असली परीक्षा दिनेश शर्मा की विशेष रिपोर्ट  


प्र में बसपा को साथ लेकर जो गलती सपा के नेता मुलायम सिंह यादव और भाजपा ने की थी वही गलती हरियाणा के पूर्व मुख्‍यमंत्री भजन लाल कर रहे हैं। हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए उन्‍होंने जिस तरह बसपा अध्‍यक्ष मायावती से सीटों का समझौता किया है उससे उन्‍हें कोई लाभ मिले या न मिले अलबत्‍ता हरियाणा की राजनीति में एक राजनीतिक कोढ़ की नींव जरूर पड़ गई है। हरियाणा का बंटाधार करेंगे भजन और माया रणवीर सिंह की रिपोर्ट  


सवाल शासन और समाज का पीछा कर रहा है कि इन्हें डाकू किसने बनाया और वे कौन हैं जो इनकी बर्बादी और बीहड़ों में धकेलने के लिए जिम्मेदार हैं। सामंतवादी शक्तियां और इलाकाई पुलिस, सामाजिक एवं आर्थिक रूप से यदि उन्हें आगे बढ़ने देती तो आज केवट न डाकू कहलाते और न अपराधी। उनका डाकू और अपराधी के रूप में चिन्हित होने का ज्यादातर मतलब है कि उन्होंने पुलिस और सामंतियों के असहनीय अत्याचारों का सामना किया होगा। चित्रकूट के बीहड़ों में कौन बना रहा है इन्हें डाकू ? वीरेंद्र वर्मा की रिपोर्ट


रोड़ों लोगो के आराध्य भगवान जगन्‍नाथ का भव्‍य रथयात्रा महोत्सव उड़ीसा में शुरू हो चुका है। श्रद्घालु आध्‍यात्‍मिक चेतना के साथ भगवान जगन्नाथ के सम्‍मुख खड़े होकर आत्‍मसंतोष प्राप्‍त कर रहे हैं। रथ यात्रा में भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्‍नाथ के रूपों को सजीव ढंग से दिखाया गया है। श्रद्घालुओं का सैलाब इतना है कि उड़ीसा सरकार रथयात्रा प्रबंधन और राज्‍य के पर्यटन विभाग ने इस उत्सव के लिए खास इंतजाम किए हैं।  उड़ीसा में भगवान जगन्‍नाथ का महोत्सव शुरू  राजबली पांडेय


दूसरों से बेमेल समझौतों और अपने थके हुए सलाहकारों की नाकामियों से जूझती कांग्रेस कभी-कभी अपने भले के भी काम कर जाती है जिनकी उससे कम ही उम्मीद होती है, चाहे वे जाने में हो जाएं या अनजाने में। उसने दिग्गज दलित नेता बाबू जगजीवन राम का कांग्रेस पर कर्ज उतारने का प्रयास करते हुए उनकी पुत्री मीरा कुमार को लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी देकर देश में महिला आरक्षण की मांग पर कई बार उठे तूफान को प्रभावहीन करने की रणनीति भी अपनाई है। दलित राजनीति पर मीरा कुमार का पहरा  दिनेश शर्मा


यहां तो जातिगत राजनीति के हर कुएं में आरक्षण की भांग पड़ी हुई है। कांग्रेस सांसद सलमान खुर्शीद ने अगर मुसलमानों के लिए अलग से आरक्षण की मांग उठा दी है तो ईसाइयों को भी आरक्षण देने की मांग बुलंद होती रही है। जैन धर्म से जुड़े लोगों को भी आरक्षण देने की मांग उठ ही चुकी है। गुर्जरों को आरक्षण देने की मांग भी एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। सर्वोच्च न्यायालय की व्यवस्था पर विचार किया जाए तो अब किसी को भी किसी तरह का आरक्षण लाभ मिलना मुमकिन नहीं है आरक्षण का बेताल फिर डाल पर सियाराम पांडेय ‘शांत’ का आलेख


विदेशी मामलों में भारत की स्थिति अत्यंत दयनीय और लचर होती जा रही है। कूटनीतिज्ञों का कहना है कि इतना कमजोर भारत कभी नहीं था जितना कि आज दिखाई पड़ रहा है। इसका कारण भारत में आंतरिक राजनीतिक कलह और सरकार में सामंजस्य का भारी अभाव है। भारतीय विदेश नीति में हस्तक्षेप रखने वालों के अपने एजेंडे हैं। किसी एक मुद्दे पर भी सहमति बन पाना बहुत मुश्किल होता है इसलिए कूटनीतिक बैठकें निरर्थक ही साबित होती जा रही हैं। नेपाल के सामने भी भारत बेबस विशेष संवाददाता


छत्तीसगढ़ मे अगर युवा नेता को मौका देने की बात करें तो कार्यकर्ता कटाक्ष करते हुए कहते हैं कि पार्टी मे तो 60 वर्ष के नेता भी स्वयं को युवा कहने से नही चूकते तो फिर 45 वर्ष से कम उम्र के नेताओं की क्या बिसात। इसके बावजूद मानना है कि अगर प्रदेश मे पार्टी महासचिव राहुल गाँधी का युवाओं को आगे लाने का नारा चल गया तो कोई आश्चर्य नही कि अध्यक्ष पद की कुर्सी पर कोई युवा नेता ही विराजमान होगा। कौन बनेगा छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष ? योगेश मिश्रा की रिपोर्ट


भार के विश्वकप से बाहर होते ही महेंद्र सिंह धोनी खेल प्रेमियों से इस हार के कारण माफी भी मांग चुके हैं, जिससे क्षमाशील क्रिकेट प्रेमी उन्हें माफ तो कर ही देंगे। आवश्यकता इस बात की है कि लार्ड्स के मैदान पर इस हार को पकड़कर न बैठा जाए और आगे के विश्वकप की जोरदार तैयारियां की जाएं। उम्मीद की जाती है कि भारत 2011 के विश्वकप में ट्वेंटी ट्वेंटी विश्वकप की हार का बदला लेकर जीत का परचम लहराएगा धोनी! राजनीति छोड़ो, क्रिकेट खेलो! सुनील कुमार की रिपोर्ट


‘द पापुलेशन बम’ की तो शुरूआत भी कुछ इस प्रकार से होती है। ‘संपूर्ण मानवता का पेट भरने की जद्दोजहद में सैकड़ों लाख लोग भूख से मरने जा रहे हैं।’ ऐरलिक ने लिखा, ‘विश्व की मृत्यु दर को यथेष्ट रूप से बढ़ने से कोई चीज नहीं रोक सकती।’ इन्होंने 1974 में भविष्यवाणी की। ‘1985 से पहले ही मानवता अभावों के एक युग में प्रवेश करेगी,’ जिसमें कई प्रमुख खनिजों की सहज उपलब्धि करीब-करीब समाप्ति का मुख देखेगी।’ किस किसका ‘मुख’ देखेगी धरती? जॉन टीयनीर की रिपोर्ट


प्रतिक्रियावादी मतदान एवं देश में लोकसभा का नया परिसीमन भी इस परिणाम में प्रमुख रूप से शामिल हैं। कांग्रेस उत्तर प्रदेश में जिंदा हुई, जातिवादी भ्रष्टाचारी एवं अहंकारवादी शक्तियों को मतदाताओं ने सबक सिखाया। ब्लैकमेलरों और अवसरवादियों को ठिकाने लगाया। कांग्रेस को भी एक चेतावनी दी कि उसे जो अवसर दिया जा रहा है वह इसलिए है कि ताकि वह अपनी गलतियों से सबक ले। ब्लैकमेलरों का सफाया, यूपीए फिर आया दिनेश शर्मा की रिपोर्ट


उत्तर प्रदेश में तिकड़मों से शराब के व्यवसाय में एकाधिकार कायम करने वाले शराब के ठेकेदार पौंटी चढ्ढा चार साल से कोयले का भी जमकर कारोबार कर रहें है, लेकिन यह सारा काम इतनी सफाई से हो रहा है कि किसी को कानों कान खबर तक नहीं है। पौंटी चड्डा की मायावती सरकार में भी बल्ले-बल्ले है और वह इतनी घुसपैठ रखते हैं कि उनके दावे के सामने कोई नही खड़ा होता। शराब के बाद पौंटी चढ्ढा ने अब कोयला भी हड़पा श्रवण शुक्ला की रिपोर्ट


नेगारा के नेशनल पार्क और सुमात्रा (इंडोनेशिया) के गुनुंग ल्युसर नेशनल पार्क जैसे, दक्षिण पूर्वी एशिया के अनछुए वर्षा वनों की अंधेरी रात का रहस्य व भयानकता इतनी गूढ़ होती है कि उसके समक्ष अदृष्ट और अज्ञात का रहस्य भी फीका पड़ जाता है। फिर भी वन्य जीवन के शौकीनों के लिए इससे बेहतर स्थान और समय कोई दूसरा नहीं हो सकता। वर्षा वन की निशा का घुप्प संसार केन रूबेली की रिपोर्ट


मायावती यह नहीं देखती हैं कि वह जो आरोप लगा रही हैं उसकी प्रकृति कैसी है और राज्य की जनता और सुरक्षा बलों पर उसका क्या असर पड़ेगा? राज्य में हर प्रकार से सक्षम सुरक्षाबल मौजूद हैं मगर जब वह स्वयं को सुरक्षित महसूस नहीं करती हैं तो राज्य की जनता को वह क्या सुरक्षा दे पाएंगी?  सुरक्षा बलों का मनोबल तोड़ रही हैं मायावती विशेष रिपोर्ट


क्या वे सवाल आज खत्म हो गए हैं कि आर्य समाज दुविधा में पड़ा हुआ है? यह नहीं माना जा सकता। जिन चुनौतियों से लड़ने के कारण आर्य समाज की पहचान बनी है वे मौजूद हैं। फिर भी आंदोलन में कोई दम नहीं दिखता। इसके कारण कुछ गहरे हैं। उन्हें पहचाने बिना आर्य समाज को जिन्दा नहीं किया जा सकता। कहां है आर्य समाज आंदोलन? राम बहादुर राय की रिपोर्ट


वरुण गांधी ने राजनीति की जो राह पकड़ी है उसमें उनकी मुठ्ठी में बहुत कुछ है, जबकि राहुल गांधी का हाथ सबको दिखाई दे रहा है। देश के जिन लोगों ने संजय गांधी का दौर देखा है, पीलीभीत से वरुण का राजनीति में आग़ाज़ देखकर, उनकी भी पुरानी यादें ताजा हो गई होंगी। वरुण गांधी भी हुए भाजपा के युवराज! दिनेश शर्मा की विशेष रिपोर्ट


हालांकि जिन्ना मुसलमानों के अधिकारों और स्वाधीनता का ही प्रतिनिधित्व करते थे लेकिन वह रूढि़वादी कभी नहीं रहे। कुछ लोगों ने इसी रूप में जब उनका अभिनंदन किया तो उन्होंने कहा, ‘मैं तुम्हारा धार्मिक नेता नहीं हूं।’ निस्संदेह हमें जश्‍न कायद जैसा दूसरा लीडर नहीं मिल सकता। कायदे आज़म पाकिस्तान जनाब मोहम्मद अली जिन्ना शाइस्ता इकरामुल्ला


पाकिस्तान को एक बेचारा पाकिस्तान कहें तो यह अतिश्योक्ति नही होगी। विशेषज्ञों की राय है कि सत्ताधारी वर्ग एवं सरकार की शोषक नीतियों गरीबी, बेरोजगारी, खाद्यान्न संकट, अत्याचार, सामंतवादी व्यवस्था, सैन्य तानाशाही और सबसे बढ़कर आतंकवाद ने पाकिस्‍तान को एक विफल राष्ट्र के रूप में ख्‍ाड़ा कर दिया है। बेचारा पाकिस्‍तान! शिव कुमार मिश्र का विश्‍लेषण


आतंकवाद के अभिशाप से शायद ही कोई देश मुक्त हो और इससे मुक्ति के लिए जरूरत है तो अंतरराष्ट्रीय सहयोग की। यह संदेश सर्वत्र फैल जाना चाहिए कि मतांधता के नाम पर किए जाने वाले हर आतंकवाद से निर्णायक रूप से तत्काल निबटा जाएगा, तभी दुनिया भर के निरीह नागरिक इन घातक प्रहारों से मुक्ति का अनुभव कर सकेंगे। आतंक के दशक, जो अब अपने चरम पर हैं  नैथन एम एडम्स


पाकिस्तान के लोकतंत्र और उसकी अग्रिम पंक्ति के राजनेताओं का शिकार करके और बचे-खुचों को निर्जीव करके पाकिस्तान की गुप्तचर एजेंसी आइएसआइ स्वात घाटी में एक ताकत बन चुके तालिबान और अलकायदा के साथ जा खड़ी हुई है। यहां अब ऐसी ताकतों ने पांव पसार लिए हैं जो पाकिस्तान को पाषाण युग में धकेलने के लिए आमादा हैं। स्वातघाटी, आइएसआइ की नई राजधानी  इरफान गाज़ी की विशेष रिपोर्ट


बिजनौर जनपद, अनेक विश्वप्रसिद्ध ऐतिहासिक घटनाओं का साक्षी है। इसने देश को नाम दिया है, अनेक अंतर्राष्ट्रीय प्रतिभायें दी हैं। यहां की धरती उर्वरक ही उर्वरक है। बिजनौर महाभारत काल तक सघन वनों से आच्छादित था। इस वन प्रांत में, अनेक ज्ञात और अज्ञात ऋषि-मुनियों के निवास एवं आश्रम हुआ करते थे। और यहां क्या-क्या अजूबे थें-जानिए। बिजनौर जिसकी धरती उगले सोना चेतन मटरू की रिपोर्ट


धरती, आकाश और पाताल प्राकृतिक चमत्‍कारों और एक से बढ़कर एक संरचना से समृद्घशाली हैं। मानव-जीवन को प्रकृति से यह संपदा न मिलती तो उसकी स्‍थिति उन प्राणियों से भी बद्तर हो जाती जो रेगिस्‍तान और बंजर में अपने अस्‍तित्‍व को बचाने के लिए चौबीसों घंटे संघर्ष में रहते हैं। नायग्रा फॉल्‍स जिसे आप देखना चाहेंगे! देवेंद्र मिश्र की रिपोर्ट


आइए तो नमन करें, उन चंदेल राजाओं को जो खजुराहो में धरती पर अद्भुत कला-शिल्‍प और सभ्यता से निकली एक बेजोड़ जीवनशैली का स्‍वर्ग लेकर आए। अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता प्रकट कीजिए जिन्‍होंने हमारे लिए अपनी विरासत और बेशकीमती निशानियां छोड़ी हैं। खजुराहो कला संस्कृति के स्वर्ग में मेरी यह यात्रा विनीता `राज`


नई संस्कृति में लेखन का उद्देश्य बदल गया है और लेखकीय प्रतिभा के मानदण्ड भी बदल गये हैं। जिस प्रकार अमृत की प्राप्ति के लिये भेष बदलकर देवताओं की पंक्ति में बैठे राहु को देवता भी नहीं पहचान सके थे, उसी प्रकार आज पाठकों के लिये असली और नकली लेखकों की पहचान कठिन हो गई है। साहित्य में घुसा बाज़ारवाद और जुगाड़वाद अंबा प्रसाद श्रीवास्तव की विशेष टिप्पणी


छत्तीसगढ़ मे जब से राज्य सरकार ने स्कूल शिक्षक बनने के लिए बीएड की उपाधि को अनिवार्य किया है तब से यह पाठ्यक्रम निजी कॉलेजों के लिए मोटी कमाई का जरिया बन गया है। प्रदेश मे नित नये खुलते प्राइवेट कालेजों मे यूं तो व्यवसायिक पाठ्यक्रमों की लंबी फेहरिस्त होती है परंतु इस सूची मे बीएड का अलग ही आकर्षण है क्योंकि इस एक वर्षीय कोर्स के लिए मारा मारी है और इससे निजी संस्थानों की जमकर कमाई होती है।  छत्तीसगढ़ में निजी कालेजों की बीएड कोर्स से मोटी कमाई योगेश मिश्रा की रिपोर्ट


दार्शनिकों का अभिमत है कि भावुकता से कर्तव्य बड़ा होता है। मगर यहां कर्तव्य पर भावुकता ज्यादा भारी है। यह विशिष्ट संदर्भ देश की क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर की उपलब्धियों को रेखांकित करता है जिसमें कुल उपलब्धि सचिन तेंदुलकर के नाम है और बची-खुची पर ही भारत संतोष करता है। तेंदुलकर को सब कुछ मिला, भारत को क्या मिला? मनोज कुमार की रिपोर्ट


जरा कल्पना कीजिए कि किसी स्त्री का पहाड़ में विवाह हुआ हो और उसके पति को अगले ही दिन अपनी डयूटी के लिए जाना हो तो दोनों को कैसा लगेगा? यहां तो ऐसा खूब हुआ है कि शादी भी हुई और दोनों ने एक दूसरे की शक्ल भी नहीं देखी और मिलन के इंतजार में लंबा समय गुजर गया। पहाड़ी नारी की यह संघर्ष पूर्ण ज़िंदगी !  हेम पंत की रिपोर्ट


आहार विज्ञान में हो रहे अग्रणी अनुसंधान क्षेत्र में आप का स्वागत है, जहां शोधकर्ता दैनिक खाद्य पदार्थों की रोग प्रतिरोधी और दीर्घायु देने की क्षमताओं का पता लगा रहे हैं। कुछ शोधकर्ता यह काम प्रयोगशालाओं में कर रहे हैं और कुछ भिन्न संस्कृति वाले समुदायों के आहारों का उन समुदायों में कैंसर व हृदय रोग की दर कम होने से क्या संबंध है, इसी की खोज में लगे हैं। आहार जो आप को दीर्घायु बनाते हैं लॉवेल पोंट की रिपोर्ट 


नोवैज्ञानिक कहते हैं कि लोग सबसे ज्यादा उड़ने के स्वप्न देखा करते हैं। स्कूल के बच्चों से पूछे जाने पर कि तुम कौन सा जानवर बनना चाहोगे तो वे अकसर यही उत्तर देते हैं कि ‘मैं चिडि़या बनना चाहूंगा।’ पक्षियों की उड़ान हम सबको यह प्रेरणा देती है कि हम भी ऊपर उड़ें और क्षितिज के उस पार झांक कर देखें कि वहां क्या है? पंछी जिनकी उड़ान में भी संदेश है  जे़फ रेनीक



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