राष्ट्र की अनेकता में एकता की सूत्रधार
बेसिक शिक्षा, कई धाराओं और धारणाओं में भटकती बेसिक शिक्षा, उत्तर प्रदेश सरकार के
प्राइमरी स्कूलों में ठोकरें खाती और उपहास बनती बेसिक शिक्षा, राजनेताओं,
नौकरशाहों, दलालों के भ्रष्टतंत्र से थर्राती बेसिक शिक्षा और राष्ट्रधर्म एवं
राष्ट्रकर्म के लिए तरसती बेसिक शिक्षा को आज किसी बड़े सहारे की जरूरत है।
भ्रष्टतंत्र से थर्राती बेसिक शिक्षा, लुटता
पुष्टाहारदिनेश
शर्मा की रिपोर्ट
भारत के सरकारी क्षेत्र में उच्च
प्रशिक्षित बेरोज़गारों की कोई पूछ नहीं है और निजी क्षेत्र से भी उनको सुरक्षित
रोज़गार और अच्छा पैसा नहीं मिल रहा है, जिससे प्रतिभाएं कुंठाग्रस्त हो रही हैं।
यह स्थिति सामाजिक वैमनस्यता का भी रूप लेती जा रही है। कई देशों में आंतरिक संघर्ष
और गृह युद्ध के चलते रोज़गार का संकट बढ़ा है। एशियायी देश इसकी अच्छी खासी चपेट
में है।
भारत सहित दुनिया में नौकरियों का संकट? स्वतंत्र
आवाज़ डॉट कॉम
एसआईटी से मुक्ति के बाद गुजरात के
मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत का प्रधानमंत्री देखने की आरएसएस की महेच्छा ने
उन्हें एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है। कुछ भी हो
गुजरात में हिंदू हों या मुसलमान, सभी से मोदी के सद्भावना मिशन को खासा समर्थन
मिला है, इससे मोदी की छवि को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता तो मिली
ही है।
गुजरात ने पकड़ी दिल्ली की राह...! कन्हैया
कोष्टी की रिपोर्ट
राष्ट्रीय गंगा नदी थाला प्राधिकरण की
स्थापना एक ऐसे उच्चस्तरीय निकाय के रूप में की गई थी, जो गंगा की प्राचीन गरिमा
और पवित्रता बहाल करने के लिए अपना परम कर्तव्य समझकर काम करे और इसकी समृद्ध
विरासत भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखे। सभी इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रयास
को सफल करने के लिए मिलकर काम काम करें, याद रखना चाहिए कि अतीत में इस दिशा में
हमारे प्रयास सफल नहीं हुए हैं।
राष्ट्रीय गंगा नदी थाला प्राधिकरण की तीसरी बैठक स्वतंत्र
आवाज़ डॉट कॉम
इस समय पूरी मानवजाति को मानसिक संघर्ष और दबाव से गुजरना पड़ रहा है। हमें सिर्फ नासरत के ईसा मसीह के पुनरुत्थान को याद रखना चाहिए कि किस प्रकार संसार की सारी शक्तियां नाकाम हो गईं, यहां तक कि मृत्यु की ताकत भी नाकाम हो गई और वह ईसा संसार में अकेला हो कर भी जीत गया। ईसा ने कहा-‘तुम सत्य को जानो, सत्य तुम्हें स्वतंत्र करेगा।’ अंतिम विजय सत्य की है, चाहे वह कितना भी अकेला क्यों न हो।
ईसा ने कहा-‘तुम सत्य को जानो’ आरएल फ्रांसिस का आलेख
भारत और अमरीका का संयुक्त रूप से विकसित ओजीपीएल एक सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म है, जिसका उद्देश्य सरकार के आंकड़ों और दस्तावेजों तक जनता की पहुंच को बढ़ाना है और सरकार के साथ लोगों को जोड़ने की प्रक्रिया को प्रोत्साहित करना है। यह प्रयास दोनों पक्षों की सामूहिक क्षमता का लाभ उठाने का परिणाम है और मिलकर काम करने का एक अच्छा उदाहरण है।
भारत-अमरीका का ओपन गवर्नमेंट प्लेटफॉर्म स्वतंत्र आवाज़ डॉट
कॉम
भारतीय रेलवे ने अप्रैल से जून 2012 तक ग्रीष्मकालीन अवधि के दौरान यात्रियों की भीड़-भाड़ और असुविधा को दूर करने के लिए व्यापक इंतजाम किये हैं। गर्मियों में यात्रियों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष रेलगाड़ियों के 5600 से अधिक फेरे लगाये जाने की योजना बनायी गई है।
अप्रैल से जून तक विशेष रेलगाड़ियां स्वतंत्र आवाज़ डॉट
कॉम
कोलकाता के सेरोलॉजी संस्थान में बच्ची के शौच के दोनों नमूनों का परीक्षण किया गया, लेकिन पोलियो के लक्षणों की पुष्टि नहीं हुई। इस मामले की पूरी जांच की जा रही थी, लेकिन इस बीच कुछ मीडिया ने इस बच्ची सुमी के मामले को पोलियो का मामला बताकर प्रचारित किया, जिससे भारत के पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम को भारी धक्का लगा है। पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम को धक्का स्वतंत्र आवाज़ डॉट
कॉम
भारत में प्रधानमंत्री निवास के पास बम विस्फोट को लेकर जहां विभिन्न मुस्लिम संगठनों ने इसे इजराइल का कारनामा बताया है वहीं उर्दू अख़बारों ने इस पर संपादकीय भी लिखे हैं कि भारत में हुआ विस्फोट यह चिन्हित करता है कि इस तरह के विस्फोट के विशेषज्ञ सीआईए और मोसाद हैं। मोसाद विश्व की सबसे अच्छी खुफिया एजेंसी है, मगर दुनिया की यह बेहतरीन एजेंसी अभी तक पता नहीं लगा सकी है कि इन वारदातों में किसका हाथ है। उर्दू अख़बारों में बम धमाके के पीछे इजराइल खुर्शीद आलम की रिपोर्ट
संसार में कहीं भी धर्म और सुधार आंदोलन स्वच्छंद यौनाचार का समर्थन नहीं करते, पूरे विश्व में अभी भी नारी पुरुष संबधों में पवित्रता का आदर्श पूरी तरह मान्य है, लेकिन आज भारत के अंदर व्यक्तिगत स्वतंत्रता और आधुनिकीकरण के नाम पर स्वेच्छाचारी जीवनशैली की वकालत करना फैशन बनता जा रहा है, इससे परिवार संकट में हैं, इसीलिए परिवारों में विघटन पर पश्चिमी समाज में गहन चिंतन हो रहा है। वेलेंटाइन और मैकाले सभ्यता से घिरा भारत आरएल फ्रांसिस की रिपोर्ट
दुधवा राष्ट्रीय उद्यान को स्थापित हुए पैंतीस साल हो गए हैं। मोटे तौर पर इसके लाभ-हानि का यदि आकलन किया जाए तो यहां काफी कुछ नष्ट हो चुका है। सच कहा जाए तो भारतीय वन प्रबंधन इसके लिए सीधे जिम्मेदार है। शीर्ष अधिकारियों की पदलोलुप महत्वाकांक्षाएं, भ्रष्टाचारजनित कृत्य और अकर्मण्यता से वन और वन्यजीवन की सुरक्षा एवं संरक्षण आज एक गंभीर संकट बन चुका है।दुधवा नेशनल पार्क का स्वर्णकाल अब एक कहानी देवेंद्र प्रकाश मिश्र की रिपोर्ट
धर्मांतरण से न केवल धर्म बल्कि भाषा और सामाजिक व्यवस्था भी पूरी तरह बदल जाती है। मध्य एशिया में धर्मांतरण राजनीति का आधार बनता जा रहा है। इस्लामी व्यवस्था भी इसकी पक्षधर है, लेकिन जिस रफ्तार से ईसाइयत फैल रही है और अपने पंथ को आधार बनाकर वे जिस तरह से दुनियां को चलाना चाहते हैं, यह आज के समाज-दुनियां के लिए बड़ी चुनौती है। जनसंख्या के आंकड़े देश और दुनियां को बदलते हैं, इसलिए धार्मिक उन्माद समस्त मानवता के लिए चुनौती है।धर्मांतरण के लिए सरकारी निमंत्रणआरएल फ्रांसिस की एक रिपोर्ट
बसपा दो ही प्रकार से सत्ता में लौट सकती है, या तो वह अपने बूते बहुमत हासिल करे या फिर उसकी सरकार बनवाने के लिए पर्याप्त संख्या बल के साथ कोई उसके साथ आए। बसपा जानती है कि उसके लिए भाजपा में अब कोई सहानुभूति नहीं है। भाजपा का नेतृत्व नितिन गडकरी के हाथ में है, जो अपनी शर्तों पर बसपा से समर्थन तो ले सकते हैं, लेकिन बसपा को समर्थन नहीं देंगे, उन्हें विपक्ष में बैठना मंजूर है। इस स्थिति में बसपा का भाजपा के सामने समर्पण कोई आश्चर्य नहीं होगा। गडकरी ने बढ़ाई मायावती की चिंताएक रिपोर्ट
स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम आप सभी के असीम प्यार, विश्वास और सहयोग से सफलता की ओर बढ़ रहा है। स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम आज पांच जनवरी २०१२ को आपके बीच अपना चौथा जन्मदिन मना रहा है। इसे, इसी प्रकार से आपके निरंतर प्यार और सहयोग की आवश्यकता है। स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम को जन्मदिन पर आपने जो शुभकामनाएं दी हैं, वह उसका सदैव हौसला बढ़ाए रखेंगी। आप सभी का धन्यवाद।
चुनाव आयोग ने यूपी सहित पांच राज्यों में चुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी है, साथ ही साफ-साफ बोल दिया है कि चुनाव में गड़बड़ी फैलाने वालों, पेड न्यूज़ और मतदाताओं को प्रलोभन देने वालों से पूरी सख्ती से निपटा जाएगा। आयोग ने उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रबंधन पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया है, जहां 4 फरवरी से सात चरणों में चुनाव होंगे। आयोग ने पहली बार मतदान से जुड़ीं शिकायतों के लिए एक कॉल सेंटर की शुरूआत भी की है, जिसका नंबर 1950 है। अठ्ठाईस जनवरी से पांच राज्यों में चुनाव रिपोर्ट
यह बात ध्यान देने लायक है कि शहरी बदलाव में जो मुख्य बातें सहायक हैं, प्रशासन उनमें सबसे कमजोर कड़ी है और जबतक हमारी संस्थाओं में सुधार नहीं होता और उनका संचालन ठीक ढंग से नहीं होता, वे न तो शहरी बुनियादी ढांचे के निर्माण और रखरखाव के लिए आवश्यक विशाल निवेश राशि आकर्षित कर सकेंगी और न ही सतत रूप से कुशल सेवाएं प्रदान कर सकेंगी।एक अरब का ऋण जोखिम गारंटी कोष रिपोर्ट
कबड्डी के मुकाबले जीतकर कभी एक बनियान और पीतल की एक ट्रॉफी से ही खुशी में उछलने वाले कबड्डीबाजों ने कभी नहीं सोचा होगा कि पंजाब में एक दिन ऐसा भी आएगा जब कबड्डी पर भी धन और सरकारी नौकरियों की बारिश होगी और इसकी धूम, धमक और महक पूरे देश में खेल जगत में एक हलचल पैदा कर देगी। कबड्डी के विश्वकप की परिकल्पना सुखवीर सिंह बादल के दिमाग में खूब आई कबड्डी से निकली 'कस्तूरी' बादल ने लपकी आदर्श पाल सिंह की रिपोर्ट
यह बात तो शुरू से कही जाती रही है कि मायावती एक न एक दिन अपने विश्वासपात्रों के नाम पर इर्द-गिर्द घेरा डाले घुसपैठियों से ही गच्चा खाएंगी और यह कोई कम गंभीर मामला नहीं है कि मायावती के परम नजदीकी के रूप में विख्यात बाबू सिंह कुशवाहा ने मायावती के ही अत्यंत विश्वासपात्र कहे जाने वाले राज्य के कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह, राज्य के प्रमुख सचिव गृह कुंवर फतेह बहादुर सिंह और राज्य मंत्रिमंडल के वरिष्ठ मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी से अपनी जान को ख़तरा बताया है। कुशवाहा की चिट्ठी में फसी मायावती सरकार एक रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती और उनकी 'सलाहकार मंडली' ने विकीलीक्स मामले पर आश्चर्यजनक चुप्पी साध ली है। विकीलीक्स के एक खुलासे के सामने औंधे मुंह गिरी मायावती में गरजने और बंदर घुड़की के अलावा विकीलीक्स को एक कानूनी नोटिस भेजने का भी साहस नहीं बचा है। मायावती को नहीं मालूम था कि उनकी रसोई से लेकर उनके घर और मुख्यमंत्री कार्यालय तक की, उन्हीं के 'खास लोग' ख़तरनाक 'मुखबिरी' कर रहे हैं। झूठे और फरेबियों से घिरीं मायावती ! एक रिपोर्ट
भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी से
निशंक को 'कांम्प्लीमेंट' मिला कि उन पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं है। गडकरी को
उत्तराखंड विधान सभा चुनाव में इसी प्रश्न का उत्तर देना है कि जब निशंक 'ईमानदार'
ही हैं और उन पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं है, तो फिर ऐन चुनाव के पहले उन्हें
बेदखल कर उन भुवन चंद्र खंडूडी को फिर से सत्ता क्यों दे दी गई, जो बेशक ईमानदार और
अच्छे शासनकर्ता तो हैं, लेकिन चुनाव जिताऊ मुख्यमंत्री नहीं माने जाते हैं। उत्तराखंड
में भाजपा को 'तूफान' ने घेरा !
यह
यक्ष प्रश्न है कि कांग्रेस और भाजपा में वह कौन करिश्माई चेहरा है, जो उत्तर
प्रदेश के सत्ता के महासंग्राम में खड़ा हो सके? कांग्रेस में जब राहुल गांधी को
भावी प्रधानमंत्री के रूप में पेश किया जा सकता है, तो भाजपा में वरूण गांधी
के लिए यूपी के मुख्यमंत्री के रूप में क्यों नहीं सोचा जा सकता?राहुल
गांधी पीएम तो वरूण गांधी सीएम क्यों नहीं?
विश्लेषण
कांग्रेस को नए
चुनाव को लेकर लालकृष्ण आडवाणी के बयान की कोई चिंता नहीं है। यूपीए गठबंधन अपने
स्थायित्व को लेकर आश्वस्त है और कांग्रेस की रणनीति के तहत, जुलाई 2012 में
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को देश का अगला राष्ट्रपति और उनके साथ ही राहुल गांधी को
प्रधानमंत्री बनाया जा सकता है।मनमोहन
सिंह राष्ट्रपति और राहुल गांधी प्रधानमंत्री!
दिनेश शर्मा
की
रिपोर्ट
प्रधानमंत्री ने अपने सात साल का
लेखा-जोखा प्रस्तुत करके यह बताना चाहा कि उनके कार्यकाल में देश ने सबसे ज्यादा
प्रगति की है। हालांकि देश में सूचना क्रांति से विकास के द्वार खोलने का सेहरा तो
राजीव गांधी के ही सर पर माना जाता है जिनका कार्यकाल मनमोहन सिंह से भी कम रहा है।
मनमोहन सिंह को अपने संरक्षण में फल-फूल रहे भ्रष्टाचार का पता ही नहीं चल पाया और
आज देश को समझा रहे हैं कि भ्रष्टाचार कितना ख़तरनाक है।लाल
किले की प्राचीर से गूंजा भ्रष्टाचार
विशेष संवाददाता
गुलाबी बलुआ पत्थर एवं धौलपुर
पांडु पत्थरों का उपयोग, राष्ट्रपति भवन का, मुगल एवं राजपुर प्रासादों से संबंध
स्थापित करता है। राष्ट्रपति भवन की सबसे प्रमुख विशेषता बौद्ध गुंबद है जो एक
विशाल अग्रपाद पर ऊँचा उठता हुआ सांची के स्तूप को नमन करता है। मुगल गार्डन, जैसा कि इसके
नाम से पता चलता है, ताजमहल और श्रीनगर के शालीमार बागों की ज्यामितीय संरचना है। शांति
और भव्य का संगम है राष्ट्रपति भवन
सर्वोच्च
न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह की नियुक्ति पर
आखिर सवाल दाग ही दिया है।इससे शशांक शेखर सिंह एक गंभीर कार्मिक विवाद में फंस गए
हैं तो मायावती सरकार भी कटघरे में खड़ी हो गयी है। हालांकि शशांक शेखर सिंह इस
सरकार में अपनी महत्वपूर्ण पारी खेल चुके हैं और इस समय केवल सेवा विस्तार पर हैं।का
वर्षा जब कृषि सुखाने!
रिपोर्ट
लादेन का मारा जाना अमरीकी
राष्ट्रपति
बराक हुसैन ओबामा के लिए वरदान बना है तो पाकिस्तान के लिए नरक बन गया
है। अमेरिका दस साल से जो ख़बर सुनना चाहता था वह उसे ओबामा से मिली है इसलिए ओबामा
का दोबारा से अमरीका का राष्ट्रपति होने का सपना पूरा समझिए। पाकिस्तान दुनिया के
सामने दस साल तक झूठ बोलता रहा और आखिर अमेरिका ने उसके घर में घुसकर अपना मुलजिम हासिल कर ही लिया। बराक
ओबामा हीरो, पाकिस्तान ज़ीरो !
विशेष रिपोर्ट
साईं बाबा ने शिक्षा से लेकर
आध्यात्म तक का एक हब खड़ा किया, जिसमें देश-विदेश के जाने-माने राजनेता, समाज
सुधारक, उद्योपति, शीर्ष न्यायिक अधिकारी, नौकरशाह, दार्शनिक और विभिन्न विधाओं के
महान लोग शामिल हैं। बहुत सारी विशेषताओं और जनसामान्य के लिए महान कार्यकलापों के
बावजूद यह तथ्य भी अपने स्थान पर कायम है कि सत्य साईं बाबा भी लोकापवादों से मुक्त
नहीं रहे। उनके विभिन्न पक्षों को लेकर संशयात्मक आलोचनाएं अभी भी मौजूद हैं। ब्रह्मलीन
हुए सत्य साईं बाबा
महिलाओं
के शैक्षिक, सामाजिक, राजनैतिक उन्नयन के लिए करोड़ों रूपये खर्च किये जा रहे हैं,
बावजूद इसके कि इन योजनाओं के परिणामों की कोई गारंटी नहीं है। दूसरी ओर कुछ
महिलाएं ऐसी भी हैं जिन्हें न तो किसी जेंडर बजट की आवश्यकता है और न किसी योजना
की। इन महिलाओं ने अपने बूते ही आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम की है। अंतर्राष्ट्रीय
महिला दिवस के सौ साल पूरे होने पर महिला समाख्या ने उत्तराखंड राज्य की ऐसी 19
महिलाओं को सम्मानित कर उनका हौसला बढ़ाया।पहाड़
सी ज़िंदगी में महिलाओं का ये हौसला!
प्रवीन कुमार भट्ट की
रिपोर्ट
भारत को क्रिकेट का विश्वविजेता
बनने के लिए अट्ठाईस साल प्रतीक्षा करनी पड़ी। इस प्रतीक्षा में विश्वविख्यात
बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर को कई बार निराश होना पड़ा। आखिर महेंद्र सिंह धोनी का उदय
हुआ और भारत ने लगातार तीन बार के विश्वविजेता आस्ट्रेलिया को इस विश्वकप से बाहर
करने के बाद पहले अपने सनसनीख़ेज़ प्रतिद्वंदी पाकिस्तान पर शानदार विजय हासिल की
और फिर श्रीलंका को पराजित कर आईसीसी के विश्वकप के विश्वविजेता का खिताब हासिल
किया-बधाई! भारत
क्रिकेट का विश्वविजेता! बधाई!!
भारत की जनसंख्या 1 अरब 21 करोड़
के आंकड़े को पार कर गई है दूसरे देशों के मुकाबले भारत बहुत तेजी से जनसंख्या
वृद्धि में लगा है भारत पर यह एक ऐसा बोझ है जिसे आगे सहन करना उसके वश की बात नहीं
है संसाधन जवाब दे रहे हैं, उत्पादन घट रहा है। रोजगार, कानून व्यवस्था, आर्थिक
तंगी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी देश की गंभीर समस्याएं आगे और विकराल रूप लेंगी। भारत
की आबादी 1 अरब 21 करोड़ के पार
रिपोर्ट
आलोक तोमर! आप
हारे नहीं हैं, आप वीरगति को प्राप्त हुए हैं। पत्रकारिता तुम पर गर्व करती है।
सुप्रिया! तुम भाग्यशाली हो जो तुम्हें आलोक तोमर जैसा महान पति मिला। तुम्हें आलोक
तोमर की लड़ाई को एक और हौसला देना होगा। स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम इस वीर को भावभीनी
श्रद्धांजलि के साथ सैल्यूट करता है और उनके माता-पिता को धन्यवाद देता है
जिन्होंने पत्रकारिता को आलोक तोमर दिया। 'वीरगति'
को प्राप्त हुए आलोक तोमर!
धरती
पर अनियंत्रित विकास एवं प्राकृतिक संसाधनों के क्षमता से अधिक दोहन के
दुष्परिणामों का कोई अंत नहीं हुआ है। जापान का यह विनाश दुनिया के लिए एक
और चेतावनी भर है जिसमें यह संदेश बिल्कुल स्पष्ट है कि यदि दुनिया में ऐसे ही
विकास की होड़ और आंधी चलती रही तो किसी दिन पूरी दुनिया सोती ही रह जाएगी और धरती
और पाताल का पता भी नहीं होगा। जापान में इस त्रासदी में न जाने कितने हज़ार परिवार
समूल तबाह हो गए हैं, प्रभु से प्रार्थना है कि ऐसी त्रासदी कभी न हो, कभी न
हो और कभी न हो। हे
प्रभु! ऐसा अनिष्ट? कभी न हो!!
रज़िया बानो का आलेख
मायावती
का हेलीकॉप्टर उड़ाने वाले और राज्य के
केबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह, जाट हैं और
मुरादाबाद में यह बात इस तरह से हर आदमी
की जुबान पर है कि वे मायावती की नज़र में
बने रहने के लिए जाटों को भड़का रहे हैं।
कहा तो यह भी जा रहा है कि कुछ जाट नेता
खरीदे गए हैं और कुछ को राजनीतिक लालच
देकर रेलवे ट्रैक पर बैठा दिया गया है
ताकि केंद्र सरकार को दबाव में लिया जा
सके। मुरादाबाद
में मायावती से गुस्साए लोग
सुनीता गौतम की
रिपोर्ट
दुनिया
वाले भी समझ बैठे हैं कि हिंदुस्तान बेईमानों, बोदों, जलीलों और भ्रष्टाचारियों का
देश है। मनमोहन सिंह क्या देश के प्रधानमंत्रियों के इतिहास में इस रूप में दर्ज
होने के लिए तैयार हैं कि उनके कार्यकाल में दुनिया में देश की यह छवि और उनकी
प्रशासनिक विफलताओं के साथ भ्रष्टाचार चरम पर फला-फूला? क्या वे समझते हैं कि देश
उन्हें कुशल शासक और चक्रवर्ती प्रधानमंत्री के रूप में याद करेगा? शायद हरगिज नहीं
और कभी नहीं।
मनमोहन
सिंह की लाचारी, भ्रष्टाचार जरूरी!
दिनेश शर्मा
की विशेष रिपोर्ट
यह बरेली शहर है
और जो आप देख रहे हैं यह किसी घटना के फलस्वरूप कोई घोषित कर्फ्यू नहीं है बल्कि
महाशिवरात्रि के दिन मुख्यमंत्री मायावती इस समय बरेली दौरे पर हैं और यह स्थानीय
प्रशासन की दहशतभरी सुरक्षा तैयारी है जिसमें आदमी तो क्या परिंदा भी पर नहीं मार
सकता। जनसामान्य में भारी आलोचनाओं और निंदा से घिरे विकास कार्यों की स्थलीय
समीक्षा के लिए मुख्यमंत्री मायावती बरेली में लगभग एक घंटा रहीं। मायावती
का यह बरेली दौरा था या दहशत?
मनोज शर्मा की
रिपोर्ट
काया के पिंजरे में कैद
हंसा-सी फड़फड़ाती वह पवित्र आत्मा, जो जीवन भर एक फिरंगी लेखक की बेवफाई और जमाने
भर की रूसवाई का दंश सहती रही, अंतत: अनंत में विलीन हो गई। मध्य प्रदेश और
छत्तीसगढ़ के सीमांत डिंडौरी जिले के धुर जंगलों में बसे गुमनाम गांव रैतवार की
कोसीबाई को उसका प्रारब्ध डॉ हैरी वारियर एल्विन जैसे महान शोधकर्ता लेखक तक खींच
ले गया था, जो बाद में उसके लिए परम छलिया सिद्ध हुए।कोसीबाई
से फिरंगी लेखक का यह फरेब!
सोमदत्त शास्त्री की
रिपोर्ट
अरब देशों के बाद
अब बारी है अफ्रीका के उन देशों की जहां के लोगों का शोषण इस युग में भी चरम सीमा
पर हो रहा है। इन शासकों को तुरंत लोकतंत्रवाद की घोषणा करना अनिवार्य है, जिससे वे
स्वयं को भी राजनीतिक तौर पर सुरक्षित रख सकते हैं और अपने देश को भी। आज भारत के
सामने स्वर्णिम अवसर है कि वह लोकतंत्रवाद की शमा लेकर विश्व के लोगों की रहनुमाई
करे। अरब
के शेख और सुल्तान चंद दिनों के मेहमान
प्रोफेसर भीम सिंह का आलेख
वामपंथी
किले की प्राचीर को चुनौती देते हुए ममता बनर्जी की यह सब रेलवे की कीमत पर पश्चिम
बंगाल का चुनाव जीतने की रणनीति है। रेल बजट में ममता ने पहले अपनी राजनीति का
इंतजाम किया है और देश को दूसरे नंबर पर रख कर उधार के मुनाफे का रेल बजट पेश किया
है। धरातली सच्चाई तो यही है कि इस प्रकार के रेल बजट से
बढ़े हुए खर्चे और महंगाई को पाटने के लिए आज नहीं तो कल रेल यात्रियों पर धम्म से
किराए का बोझ डाला ही जाएगा।बंगाल
में ममता ने चलाई चुनावी रेल
एक रिपोर्ट
भारत
में 243 मिलियन यानी 24.3 करोड़ किशोर रहते हैं, जो देश की कुल आबादी का एक चौथाई
हिस्सा हैं। पिछले दो दशक के दौरान देश में विकास की तेज रफ्तार से लाखों लोग गरीबी
से बाहर निकले हैं। विकास और सरकारी योजनाओं से ही देश के किशोरों का स्वास्थ्य और
विकास बेहतर हुआ है। हालांकि अभी भी लड़कियों के लिए काफी मुश्किलें बाकी हैं।दुनिया
में 1.2 अरब किशोरों का भविष्य?
एक
रिपोर्ट
यह समस्या पूरे
इलाके की है जिस पर बिजली विभाग के अधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया और टरकाते
रहे। डीएम बुलंदशहर शशि भूषण लाल सुशील के पास पहुंचे तो वह भी बोदे और असहाय ही
साबित हुए जिसके बाद गांव के लोगों को आंदोलन का रास्ता अख्तियार करना पड़ा। ये
अधिकारी श्रीराम बंसल को भूख हड़ताल से मर जाने देते यदि उत्तर प्रदेश की
चक्रवर्ती मुख्यमंत्री मायावती का बुलंदशहर में औचक निरीक्षण का प्रस्तावित
कार्यक्रम नहीं होता।बिजली
मांगने पर धमका रहा है प्रशासन
एक
रिपोर्ट
साबरमती
एक्सप्रेस के गोधरा पहुंचते ही उसकी एक बोगी में आग लगाने की लोमहर्षक घटना पर
विशेष अदालत का फैसला आ गया है। अदालत ने इसे एक पूर्वनियोजित साजिश माना है और
इसमें 31 लोगों को गुनाहगार पाया है। इस रेल गाड़ी में वह बोगी आग के हवाले की गई
थी जिसमें अयोध्या से लौट रहे कारसेवक सवार थे। फैसले से किसी प्रकार की संभावित
प्रतिक्रिया को देखते हुए गुजरात में सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं। गोधरा
घटना एक साजिश थी-विशेष अदालत
एक
रिपोर्ट
कांग्रेस
महासचिव राजा दिग्विजय सिंह की ये ज़ुबान फिसल रही है या वे किसी योजना के तहत ऐसी
बयानबाज़ी पर उतर आए हैं जैसी हर एक राजनीतिक दल में कुछ सड़कछाप नेता करते रहते
हैं? वे अपने ही दल में किसी उकसाऊ राजनीति के शिकार तो नहीं हो रहे हैं? या वे
कांग्रेस में ऊब गए हैं जिसके बाद कोई नेता 'मैं नहीं तो तू नहीं' की रणनीति पर उतर
आता है? वे अपने ही दल में मुंह फेरकर हंसी के पात्र तो बन ही चुके है.... कांग्रेस
की प्रयोगशाला बने राजा दिग्विजय सिंह
लिमटी खरे की
रिपोर्ट
हिंदुस्तान के
राजनेता, नौकरशाह, प्रचंड साधू सन्यासी और मीडिया तक 'नीरा राडियाओं' के कब्जे में
हैं। एक ब्रिटिश महिला दलाल और जासूस नीरा राडियाकी अटल बिहारी वाजपेयी,
प्रभावशाली साधू संतों तक आसान पहुंच है। वह इन सभी
को अपनी उंगलियों पर नचाती आ रही है। हिंदुस्तान की
भोली-भाली जनता को नहीं पता है कि जिन्हें वह देशभक्त, अपना आदर्श और हितरक्षक
मानती है वे किन-किनके साथ खड़े होकर हिंदुस्तान के निर्माण की बजाय उसे खोखला कर
रहे हैं।अटलजी!
ये नीरा राडिया तो नहीं?
दिनेश शर्मा की
रिपोर्ट
अमरीका में रह रहे भारतीयों में अब यह बात उठ रही है कि अमरीकी अर्थव्यवस्था
में उनके गैर भारतीय मुल्कों से भी ज्यादा उल्लेखनीय योगदान के बावजूद भारतीयों के
साथ सबसे ज्यादा नस्लीय भेदभाव और उन पर भद्दी नस्लीय टिप्पणियां बढ़ती जा रही हैं।
भारतीय समुदाय को खुलेआम कॉकरोच, बोदा, बिकाऊ और लालची तक कहा जाने लगा है। अमरीका
में भारतीयों को कोई चाहे कितना बुरा कहकर चला जाए इसका कोई संज्ञान नहीं लिया जाता
है। इन असहनीय नस्लभेदी टिप्पणियों पर भारत सरकार भी चुप है।भारतीय
समुदाय अमरीका में 'भारतीय तिलचट्टे'
दिनेश सिंह की
रिपोर्ट
खामोश
अर्जुन भी आज कुछ कहना चाहते हैं। उनके करीबी कह रहे हैं कि उनकी खामोशी जल्द ही
टूटने वाली है। भ्रष्टाचार, घोटालों और अव्यवस्था से घिरी कांग्रेस गठबंधन सरकार
में इस समय जिस तरह रहस्योद्घाटनों की झड़ी लगी है उसमें एक कड़ी अर्जुन सिंह की भी
जुड़ने वाली है और वे जो बोलेंगे तो एक बार कांग्रेस में भूचाल जरूर आएगा यह अलग
बात है कि कांग्रेस भी इस वक्त गैंडे की खाल ओढ़े हुए है और सब हमलों को झेलती आ
रही है।अर्जुन
के बाण भी तुणीर से बाहर आने को आतुर
लिमटी खरे की
रिपोर्ट
भले ही इस सच्चाई
को गंभीरता से न लिया जाए किंतु यह सत्य है कि उत्तर प्रदेश की सत्ता और दलित
राजनीति की लड़ाई 'मायावती बनाम पीएल पुनिया' में शीघ्र ही बदल जाएगी। वे उस समाज
में भी अपनी सहानुभूति खो रही हैं जो उन्हें सर आंखों पर बैठाकर अपना मसीहा और
कुलदेवी मान बैठा है। मायावती जिस 'भ्रष्ट सिंडिकेट' के चंगुल में हैं उससे उनका
बाहर निकलना नामुकिन है, इसलिए हो न हो पीएल पुनिया ही उनकी इस कमजोरी का पूरा लाभ
उठाएंगे।उत्तर
प्रदेश में नई जंग : मायावती बनाम पीएल पुनिया
सुनीता गौतम की
रिपोर्ट
'देश
के प्रसिद्ध उद्योगपति रतन नवल टाटा ने देश के प्रमुख राजनेताओं और नौकरशाहों के
भ्रष्ट आचरण पर अपरोक्ष रूप से सावधानीपूर्वक तीखी टिप्पणी करते हुए कहा है कि
मूल्य एवं नैतिकता समाज के सभी क्षेत्रों के लिए बेहद आवश्यक है, दुर्भाग्यवश भारत
की पहचान ऐसे देश के रूप में बनती जा रही है, जहां के लोग कोई काम करने या अपना काम
करवाने के लिए गलत तरीके से पैसे का लेन देन करते हैं।'शासनकर्ताओं के भ्रष्ट
आचरण पर तीखा प्रहारएक रिपोर्ट
क्या भारत वास्तव में एक असहाय देश है और हथियार कंपनियों का मोहताज है? इस्राइल को भारत के कुछ राजनीतिक दल भारत का हितैषी मानते हैं, किसलिए? क्या इसलिए कि उसके यहां की हथियार निर्माता कंपनियां भारत को हथियार सप्लाई करती हैं? वीडियो में देखिए की 'जांबाज मर्द' इस्राइल, 'असहाय महिलाएं' भारतीय के जीवन की पूरी सुरक्षा और संरक्षण का किस तरह वादा कर रहा है यदि ये महिलाएं वही करें जो उनको करने के लिए कहा जाएगा।सौ करोड़
भारतीयों के साठ लाख इस्राइली पति ! दिनेश शर्मा की रिपोर्ट
ह्वाइट
हाउस, इस युग में अमरीका की शक्ति और उसके
स्थायित्व का चरम प्रतीक है। यहां
राष्ट्रपति आते हैं और जाते हैं, किंतु
लोकतांत्रिक व्यवस्था के वरदान स्वरूप ये
उस स्थान में रहते हैं जिसे हर अमरीकी को
अपना समझने का पूरा अधिकार है। जॉन ऐडम्ज़
ने इस भवन में अपने निवास की दूसरी रात को
लिखा था- 'प्रभु से मेरी प्रार्थना है कि
यहां आने वाले सभी महानुभावों पर आपका
वरदहस्त बना रहे और इस भवन से केवल
ईमानदार और बुद्धिमान मनुष्यों के
अतिरिक्त कोई और कभी शासन न करे।'
ह्वाइट हाउस, अमरीका की राष्ट्रीय धरोहर!
प्रिंस
चार्ल्स से उद्घाटन को लेकर देश में काफी
विवाद हुआ था और मांग की गई थी कि
राष्ट्रमंडल खेल चूंकि भारत में हो रहे
हैं इसलिए राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह
पाटिल को उद्घाटन करना चाहिए लेकिन इस
सबके बावजूद ब्रिटिश परंपरा के अनुसार
प्रिंस चार्ल्स ने ही उद्घाटन किया।इनके बाद भारत की राष्ट्रपति
प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने राष्ट्रमंडल
खेल 2010 नई दिल्ली के शुभारंभ की घोषणा
की।
प्रिंस चार्ल्स ने किया राष्ट्रमंडल खेलों का उद्घाटन
अयोध्या में जहां रामलला की मूर्ति स्थापित है, वह स्थान ही रामजन्मभूमि है। करोड़ों लोगों की धार्मिक और आध्यात्मिक आस्था के चरम किंतु 'विवादित' शब्द से घिरे इस विश्व विख्यात स्थान पर कभी हिंदू धार्मिक स्थल हुआ करता था जिसे तोड़कर बाबरी मस्जिद बनाई गई थी जोकि इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ थी, जिसे मस्जिद नहीं माना जा सकता। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खण्डपीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अयोध्या में विवादित स्थल रामजन्मभूमि-उच्च न्यायालय
कोर्ट
को धन्यवाद कि जिसने ऐसे चेहरों को बेनकाब किया जो
न्याय की राह में रोड़ा बनते हैं। इन दिनों ऐसे चेहरों
को आप टीवी चैनलों पर भी उनके खतरनाक विश्लेषणों और
बयानों के रूप में देख और पहचान सकते हैं।
धर्मनिरपेक्षता और निष्पक्ष पत्रकारिता का रूप धरे,
घोर साम्प्रदायिक सोच वाले उन मीडिया वालों को भी जरूर
पहचानिए जो पेशेवर लोगों को किस प्रकार बार-बार आपके
सामने पेश करते हैं। देश
में आखिर क्या चाहता है ये मीडिया? दिनेश सिंह की रिपोर्ट
केन्द्रीय
मंत्रिमंडल की बैठक में रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद
विवाद के मामले में
24 सितम्बर को आने वाले उच्च
न्यायालय के संभावित फैसले को देखते हुए एक प्रस्ताव
पारित कर देशवासियों से अपील की गई है कि किसी वर्ग के
उकसाने मे आकर कोई ऐसा प्रयास नहीं किया जाना चाहिए या
ऐसी कोई बात नहीं की जानी चाहिए जो दूसरों की भावनाएं
आहत करे। केंद्र
सरकार की धैर्य बनाए रखने की अपील
यद्यपि
वैश्विक तपन और जलवायु परिवर्तन के प्रत्याशित
प्रभावों का अभी भली-भांति अंदाजा नहीं लगाया जा सका
है, तथापि यह निश्चित मानिए कि भविष्य में पानी की
समस्या का एक विकराल रूप सामने आने वाला है। भारत में
पिछले कुछ दशकों में तेजी से बढ़ती जनसंख्या की निरंतर
बढ़ती मांग के कारण वैसे भी जल संसाधनों पर काफी दबाव
बढ़ गया है। बढ़ती आबादी से जल का भयावह संकट रिपोर्ट
क्या
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री डॉ निशंक यह बात स्वीकार
करते हैं कि उनके राज्य में अवस्थापना सुविधाओं का
अभाव है? और यदि यह सही है तो वे राज्य में आने वाले
बाकी उद्यमियों की मूलभूत आवश्यकताओं को कैसे पूरा
करेंगे? आज से नहीं बल्कि इस राज्य के अस्तित्व में
आने के बहुत पहले से ही उत्तराखंड की स्वर्ग सी
समृद्धशाली और सम्मोहन से भरपूर वादियों में देश-विदेश
की विभिन्न भाषाई एवं विख्यात फिल्मों का निर्माण होता
आया है उत्तराखंड में अवस्थापना सुविधाओं का अभाव ? दिनेश सिंह की रिपोर्ट
इटावा में जिलाधिकारी कार्यालय की प्राचीर पर चिथड़ों
में लटका राष्ट्रीय ध्वज आप भी देखिए। यह जिलाधिकारी के अपनी कलक्ट्रेट के घटिया
प्रबंधन का एक प्रमाण है। जिलाधिकारी से पूछिए कि उनके भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयन का
क्या औचित्य है? क्योंकि वे भारतीय संविधान की दृष्टि में एक
श्रेष्ठ प्रशासनिक अधिकारी माने जाते हैं और यदि राष्ट्रीय
ध्वज की यह दुर्गति भी उनकी नज़रें नहीं देख सकी हैं तो वे
अपने जिले में बाकी और क्या देख रहे हैं? इटावा में
कलक्ट्रेट की प्राचीर पर तिरंगे के चिथड़े विकास मिश्रा की रिपोर्ट
खुले आसमान में हर साल लाखों टन अनाज सड़ता और नालियों
में बहता रहता है, हर साल करोड़ों लोग दो वक्त की रोटी
की जद्दोजहद में घुटते-मरते रहते हैं। ये दो तस्वीरें
हैं भारत में भ्रष्टाचार और अव्यवस्था की। भारत का
दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि स्थितियां सुधरने के बजाय
और ज्यादा बिगड़ ही रही हैं। सरकार की छत्रछाया में
अन्न की बरबादी हो और सुप्रीम कोर्ट को इसमें आदेश
देने पड़ें तो समझा जा सकता है कि सरकार अपनी
जिम्मेदारी नहीं निभा रही है। अनाज सड़ता रहे पर गरीबों में नहीं बटेगा ?- रिपोर्ट
संजीव
मेहता आज भारत को 63वें स्वतंत्रता दिवस पर तोहफ़े के रूप
में भारत की जनता को ईस्ट इंडिया कंपनी पेश करते हैं। ईस्ट
इंडिया के क़रीब तीस से चालीस मालिक थे। संजीव मेहता ने एक-एक
को ढूंढ कर कंपनी के मालिक़ाना हक़ अपने नाम करवाए। अगले साल
संजीव ईस्ट इंडिया कंपनी को भारत लाने की योजना बना रहे हैं।
यानि कि चक्र पूरा होगा और यह कंपनी इस बार अपने भारतीय पैरों
के साथ दोबारा भारत पहुंचेगी। ईस्ट
इंडिया कंपनी पर भी लहराया तिरंगा- तेजेन्द्र शर्मा की रिपोर्ट
भारत में जनता अधनंगी, भूखी, प्यासी तरसे और खेलों के नाम पर
कांग्रेस से नेताओं और उनसे जुड़े कारिंदे करोड़ों कमाकर मौज
उड़ाएं? भारत का कानून इन कालनेमियों को अपनी जद में लेने में
असहाय महसूस करे? देश की पुलिस इनमें से कई भ्रष्टाचारियों और
दुराचारियों को सलाम ठोके और गरीब गुरबों को थाने की हवालात और
जेल की हवा खिलाए? खेल-खेल में अरबों का खेल-लिमटी
खरे की रिपोर्ट
क्रांति की शक्ति सिर्फ पुरुषों को ही आकृष्ट नहीं करती है बल्कि
महिलाओं को भी वैसे ही आकृष्ट करती आ रही है, इसीलिए हर युग के
इतिहास में महिलाओं की शौर्य-गाथाओं का प्रमुखता से वर्णन
मिलता है। भारत में सदैव नारी को श्रद्धा की देवी माना गया है,
जब अवसर आया तो इसी नारी ने चंडी का भी रूप धरा और अपनी अदम्य
शक्ति का लोहा मनवाया। भारतीय वीरांगनाओं की ये शौर्य-गाथाएं!- आकांक्षा यादव का आलेख
चंदौली में स्वतंत्रता संग्राम के आखिरी दौर में राष्ट्रपिता महात्मा
गांधी के ‘करो या मरो’ के आह्नान पर 16 अगस्त 1942 को महाईच
परगना के आन्दोलनकारियों ने जो कुछ किया वह कामयाबी और बलिदान
के नजरिये से संयुक्त प्रान्त (उत्तर प्रदेश) और भारत के ऐसे
कई बड़े मामलों में से एक था, लेकिन इस कांड की उतनी चर्चा नहीं
हो पाई जितनी होनी चाहिए थी। इसकी प्रमुख वजह यह थी कि खुफिया
विभाग ने ब्रिटिश गवर्नर को जो रिपोर्ट भेजी थी उसमें धानापुर
(वाराणसी) के स्थान पर चानापुर (गाजीपुर) लिखा था। शहादत की एक अमर गाथा-एम अफसर खां
‘सागर’ की
रिपोर्ट
टाटा
उद्योग समूह के अध्यक्ष रतन टाटा के छठवें उत्तराधिकारी की
खोज अभी से आरंभ हो गई है। रतन टाटा ने 1991 में इसके अध्यक्ष
का कार्यभार संभाला था। अगले 29 माह में वे यह पद छोड देंगे।
लगभग बीस साल के कारोबार में रतन टाटा के नेतृत्व में टाटा
समूह के राजस्व में पच्चीस फीसदी बढोत्तरी दर्ज की गई है। रतन टाटा के उत्तराधिकारी की खोज - एक रिपोर्ट
यदि फेसबुक पर युवाओं में राजनीति को लेकर घोर निराशावादी धारणाएं
घर कर रही हैं तो इसके गंभीर कारण हैं जोकि भारतीय राजनीति के
लिए अच्छे संकेत नहीं कहे जा सकते। इस गहरी निराशा को उखाड़
फेंकने के लिए राजनीतिक दलों को कुछ तो उपाय करने ही होंगे
ताकि धरती पर मनुष्य के लिए अनंतकाल से सर्वश्रेष्ठ उत्तरदान
मानी जाने वाली 'राजनीति' के प्रति युवाओं के दिल और दिमाग में
विश्वास लौट सके। आखिर लोकतंत्र में इन्हीं के हाथों में तो
देश के भविष्य का निर्माण निहित है। 'आई हेट पॉलिटिक्स' मगर क्यों...?-असमा
फातिमा की रिपोर्ट
गुजरात की मानव बम इशरत जहां, भारतीय जनता पार्टी के लिए बिहार विधान
सभा चुनाव में सशक्त चुनावी मुद्दा बन गई है। हेडली का
रहस्योद्घाटन भाजपा के सुपर स्टार और गुजरात के मुख्यमंत्री
नरेंद्र मोदी के लिए एक 'कलंक' से मुक्ति और एक वरदान बन गया
है। इंटरनेट पर धूम मचा रहे नरेंद्र मोदी के सामने ऐसे समय पर
इशरत जहां के पैरोकार राजनीतिक दलों को बेनकाब करने का अवसर
आया है जब देश के महत्वपूर्ण राज्य बिहार में आम चुनाव सर पर
हैं जिसमें भाजपा राजनीतिक दलों और केंद्र सरकार को अभी से ही
पूरी तरह घेरने में जुट गई है। हेडली का बयान भाजपा के लिए वरदान--विशेष
संवाददाता
भारत के जनसेवक अपनी जवाबदारी भूल चुके हैं, यह बात पूरी तरह
स्थापित हो चुकी है। अब किस पर भरोसा किया जाए? क्या न्यायालय
स्वयं ही इस मामले में संज्ञान लेकर इन सभी से यह पूछ सकता है
कि छब्बीस साल तक सभी गोपनीय राजों को अपने सीने में दफन करने
वालों की नींद अब क्यों टूटी है और उन्होंने किसके दबाव में
अपने कर्तव्यों से मुंह मोड़ा था? सोनिया गांधी को भी अपना मौन
तोड़ना ही होगा, वरना उनकी चुप्पी राजीव गांधी पर लगने वाले
आरोपों की मौन स्वीकारोक्ति ही समझी जाएगी। सत्ता के गलियारों में
भी रिसी भोपाल गैस-लिमटी खरे की
रिपोर्ट
वाद्ययंत्र से जुड़ा एक प्रशिक्षु कलाकार जब सारंगी के बारे में नही जानता
है तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि सारंगी सुनने वाले कितने बचे
होंगे? छानबीन से पता चलता है कि सारंगी के उस्ताद भी बस गिने
चुने हैं और सीखने वाले तो नदारद हैं ही। इसलिए इस वाद्य यंत्र
की मधुर और कर्णप्रिय लय अब बहुत कम ही सुनने को मिलती है। यदि
सारंगी को संगीत की मुख्य धारा से जोड़े रखना है तो इसके अधिक
से अधिक प्रचलन एवं प्रचार-प्रसार के साथ इसकी खूबियों को
बताया जाना बहुत जरूरी है। 'सारंगी' को नही जानते हैं क्या?-असमा
फातिमा की रिपोर्ट
मेघों की गर्जना से आत्मविभोर होकर कर्णप्रिय आवाज़ के साथ नृत्य
करने वाले मोर प्यास के मारे दम तोड़ रहे हैं। विकास के नाम पर
उनके परंपरागत परिवास उजाड़कर प्रशासन ने उनका प्राकृतिक
वातावरण नष्ट कर दिया है। कल तक वे जिसे अपना घर-आंगन समझते थे
वह उन्हें पराया लग रहा है। उन्हें न पानी नसीब है और न घर। इस
कारण सारस के बाद राष्ट्रीय पक्षी मोर पर भी इटावा में मौत
मंडरा रही है। यदि इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह पक्षी भी
वन्य जीवों की सुंदर प्रजातियों से गायब हो जाएगा। इटावा में प्यास से दम तोड़
रहे हैं मोर विकास मिश्रा की रिपोर्ट
अरूधंती ने अपने कहे की नई व्याख्या की है और ठीकरा मीडिया पर फोड़
दिया। मीडिया के इस काम को उन्होंने मीडिया का ग्रीनहंट नाम
दिया है। जाहिर तौर पर अरूंधती को जो करना था वे कर चुकी हैं।
वे एक हिंसक अभियान से जुड़े लोगों को संदेश दे चुकी हैं। अपने
दो जून के वक्तव्य की 12 जून को सफाई देकर वे अपना लक्ष्य पा
चुकी हैं। उनका पहला लक्ष्य था वह प्रचार जो गुनहगारों के पक्ष
में वातावरण बनाता है, दूसरा लक्ष्य खुद को चर्चा में लाना और
तीसरा लक्ष्य एक भ्रम का निर्माण। किन्हें गुमराह
कर रही हैं अरूंधती? संजय द्विवेदी की रिपोर्ट
राजनेताओं,
उद्योगपतियों धर्माचार्यों और फिल्मी दुनिया की हस्तियों को
अपनी मायावी साधना के चुंबकीय चमत्कारों से चकरघिन्नी बना देने
वाले नेमीचंद जैन यानी तांत्रिक गुरू चंद्रास्वामी को अगर किसी
ने भाव नहीं दिए थे तो वे राजीव गांधी थे। एक समय, देश-दुनिया
के बड़े-बड़े 'राजयोगियों' पर चंद्रास्वामी ने इतना प्रभावशाली
सम्मोहन यंत्र चलाया हुआ था कि बड़े-बड़े आचार्यों के भाव गिर
गए। 'समय' के ही अचूक फेर में स्वामीजी को तिहाड़ जेल भी जाना
पड़ा। चंद्रास्वामी के 'प्रचंड राजयोग' को करीब से देखने वाले आलोक तोमर ने कुछ लिखा है-'चंद्रास्वामी
की दोबारा उदय होने की तैयारी'
भारत में पूज्य माने जाने वाले 'गजराज' को अपने अस्तित्व के लिए
आजकल एक नई लड़ाई लड़नी पड़ रही है। उनके शिकार, घटते जंगल और
आहार में कमी और उससे भी ज्यादा इनकी आए दिन मनुष्य के साथ
मुठभेड़ या गुस्से में इनका उपद्रव इनके लिए बड़ी मुसीबत बनता
जा रहा है। कहीं इनकी संख्या लगातार कम होती जा रही है तो कहीं
बढ़ रही है। वन्य पशुओं के आने-जाने के रास्ते पर बढ़ते
अतिक्रमण के चलते रोजमर्रा के टकराव की कीमत दूसरे वन्यजीवों
को भी चुकानी पड़ती है।गजराज
क्यों भटक रहे हैं? देवेंद्र प्रकाश मिश्रा की रिपोर्ट
कौन हैं
जिन्होंने अश्लील आर्केस्ट्रा को पूर्वांचल का दरवाजा और घर
आंगन दिखाया है और दिखा रहे हैं? परंपरावादी भोजपुरी संगीत
आर्केस्ट्रा के सामने क्या संरक्षित और सुरक्षित रह पायेगा? आज
हर नेता, हर साहित्यकार गीतकार और हर दार्शनिक भोजपुरी की
बड़ी-बड़ी बातें करता है। लेकिन इस अश्लीलता पर उसकी प्रतिक्रिया
सामने नहीं आ रही है। लोक-लिहाज की वह पुरानी सभ्यता यहां
तार-तार हो जाती है जब गावों में देर रात और भोर तक माइक बंद
किये बिना आर्केस्ट्रा के असली रूप का नंगा नाच होता है। अश्लील मुंबईया
आर्केस्ट्रा की पूर्वांचल में घुसपैठ कुसुम सिंह की रिपोर्ट
क्या बौद्ध धर्म
से उन्हें यही शिक्षा मिली है कि वे जातीय नफरत पैदा करें,
दूसरों के धर्मों, महापुरूषों, उनके पूज्य देवी-देवताओं वेदों
शास्त्रों का अपमान करें? उन्हें ही क्या यह किसको अधिकार है
कि वह ऐसा कृत्य करे कि दूसरों की भावनाएं आहत हों? ऐसा करने
की हिम्मत तभी हो सकती है जब उसको किसी शक्तिशाली की शह
प्राप्त हो। क्या मायावती या उनकी सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क
विभाग को यह मालूम नहीं है कि एक कथित पत्रिका हिंदू धर्म,
ब्राह्मण, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, देवी-देवताओं और
वेद-शास्त्रों के खिलाफ गालियां लिखकर बेतुका और जातीय रंजित
विषवमन कर रही है? और क्यों न करें क्योंकि मायावती भी तो ऐसा
करती रही हैं। देवताओं, धर्मशास्त्रों के हमलावर को मायावती की शह?
यद्यपि सरकार राष्ट्र मंडल खेलों की तैयारी की गंभीरता और सक्रिय
प्रयासों का एहसास कराती आ रही है परन्तु तैयारी के संबंध में
और समय पर तैयारी पूरा होने में कई मंचों से सन्देहास्पद खबरें
भी आ रही हैं जो इस खेल की महत्ता के दृष्टिगत देश को एक
असम्माननक एवं अजीब परिस्थति में खड़ी कर सकती हैं। राष्ट्रमंडल
खेलों की तैयारी के नाम पर कितने बड़े घपले हो रहे हैं और
उन्हें कितनी बेशर्मी से दबाया जा रहा है इस पर जरा गौर
कीजिएगा- कॉमन वेल्थ में भी दलालों का अरबों का खेल
मनु, यह नाम दुनिया के लिए दर्शन, ज्ञान, नीति, उपदेश,
शासन-प्रशासन, जीवन-शैली, यश और अपयश का भेद बताता है। जहरीले
जातिवादियों को मनु का आभारी होना चाहिए जो आज राजयोग भोग रहे
हैं और एक नीचतापूर्ण भ्रामक शैली में जन-मानस को मनु के खिलाफ
भड़काने की अनाधिकृत चेष्टा कर रहे हैं। इनमें बहुत से चलते तो
हैं मनु के अनुसार मगर समाज व्यवस्था को अपने पक्ष में करने के
लिए मनु की झूठी आलोचना करने से बाज नही आते हैं। मनु से मिला है इन्हें राजयोग! हृदयनारायण दीक्षित का आलेख
भारतीय वित्त आयोग ने इन राजनीतिक वास्तविकताओं को
नजरअंदाज कर दिया कि उसके सुझाये वस्तु और सेवाकर मॉडल को कुछ
राज्यों ने स्वीकार नहीं किया है। वित्त आयोग ने उन राज्यों के
लिए कुछ निरुत्साही शर्तें रख दी हैं, जो आयोग के आर्थिक
अनुशासन और अन्य सिफारिशों को लागू नहीं करेंगे। गरीब राज्यों
की विवशता यह भी है कि वे अपने यहां आर्थिक और राजनीतिक संतुलन
बनाए रखने के लिए न तो अधिक कर लगा सकते हैं और न ही सामाजिक,
आर्थिक क्षेत्रों की विभिन्न परियोजनाओं पर खर्च कम कर सकते
हैं। वित्त आयोग ने की राज्यों की उपेक्षा डा विष्णुदत्त नागर
अदालत में पुरातत्ववेत्ताओं की अयोध्या उत्खनन रिपोर्ट पर बयान लिखे
जाने का कार्य समाप्ति की ओर है। जिरह बाद फैसला लिखा जाएगा।
क्या निर्णय होगा, इसकी भविष्यवाणी भी कोई नहीं कर सकता। फैसले
के क्रियान्वयन का नैतिक बल सरकार के पास होगा या नहीं, यह
कहना भी बहुत कठिन है। बनारस के दोशीपुरा कब्रिस्तान से
सम्बंधित शिया व सुन्नी मुसलमानों के बीच पिछले 110 वर्ष
पुराने विवाद में सर्वोच्च न्यायालय के वर्ष 1983 में दिए गए
निर्णय का क्रियान्वयन आज तक नहीं हुआ। प्रश्न उठ रहा है कि
क्या जागरूक और स्वाभिमानी समाज अपने धर्म की रक्षा का दायित्व
सरकार की कृपा पर छोड़ दे? कहां पहुंचा राम-जन्म भूमि मुक्ति आंदोलन?
सानिया मिर्जा से भारतीय जन मानस में सवाल पूछा जा रहा है कि बीस
करोड़ भारतीय मुसलमानों में उसे अपनी पसंद का दूल्हा नहीं
मिला? ऐसा करके उसने भारतीयों को क्या संदेश देना चाहा है? एक
भारतीय से मंगनी करने के बाद सानिया ने बेरहमी से उस रिश्ते को
तोड़ दिया, किसके लिए? एक पाकिस्तानी के लिए? भारत की टेनिस स्टार सानिया मिर्जा की पाकिस्तान के प्रतिबंधित
सट्टेबाज क्रिकेट खिलाड़ी शोएब मलिक से शादी? सचमुच सबको
चौकाने वाली इस सच्ची ख़बर से मिनटों में सानिया मिर्जा,
भारतीयों की नज़रों से गिर गई है। भारत में खत्म हुआ सानिया मिर्जा का 'खेल'! विशेष संवाददाता
उत्तर भारत से विमुख होते हुए दक्षिण की ओर रूख कर रही भाजपा के नए
अध्यक्ष नितिन गडकरी का इंदौर एजेंडा उनके दस फीसदी वोटों का
इजाफा ऐसे कर पाएगा? खुद कॉडर भाजपाई ही कह रहे हैं कि भाजपा
की धंसती जमीन और उसकी आंतरिक कलह पर खड़े ये वो सवाल हैं
जिनका उत्तर केवल इंदौर में सपने देखने से ही प्राप्त नहीं
किया जा सकता। अपने ज़मीनी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और उन्हें
लगातार बेइज्जत करती आ रही भाजपा का इसीलिए कॉडर दरक रहा है। दस फीसदी वोट कहां से लाएंगे गडकरी? दिनेश शर्मा की विशेष रिपोर्ट
दुधवा नेशनल पार्क में चल रही विश्व की अद्वितीय गैंडा पुनर्वास
परियोजना संबंधित अफसरों की लापरवाही कुप्रबंधन एवं उपेक्षा का शिकार हो
गयी है। उर्जाबाड़ से संरक्षित वनक्षेत्र में रहने वाले तीस
सदस्यीय गैंडा परिवार के पांच सदस्य करंटयुक्त फैंसिंग तोड़कर
बाहर घूम रहे हैं। पार्क प्रशासन के अफसर गैंडों की सुरक्षा की
कोई पुख्ता दीर्घकालिक व्यवस्था नहीं कर रहे हैं। इससे मानव के
आक्रोश से उनका जीवन भी संकट में है। इसके अतिरिक्त एक ही नर
गैंडा की संतानों का परिवार होने से उनके ऊपर अनुवांशिक
प्रदूषण यानी अन्तःप्रजनन के खतरे की तलवार भी लटक रही है। दुधवा में अब गैंडों और मानव के बीच संघर्ष शुरू देवेन्द्र प्रकाश मिश्र की रिपोर्ट
भारत के सामाजिक
एवं आर्थिक विकास में जनसम्पर्क एक अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका
निभा रहा है। देखते ही देखते जनसम्पर्क पहले की तुलना में एक
प्रतिष्ठित पेशा बन गया है और यह कैरियर क्षेत्र भी बनकर उभर
रहा है। जनसम्पर्क एक बहुत ही रचनात्मक कार्य है, ये
सृजन-सम्पर्क की आत्मा है। इस पेशे को अपनाकर आप एक साथ अपने
व्यवसाय, समाज, शासन और व्यवसायिक प्रतियोगी क्षेत्र में
महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। दुनिया में जनसंपर्क की बढ़ती महत्ता हीरा देवांगन एवं रूसेन कुमार का आलेख
दहेज उत्पीड़न और शारीरिक यातनाएं देकर प्रियंका को घर से निकालने
एवं उसमें पुलिस की फाइनल रिपोर्ट का एक मामला इन दिनों
गाजियाबाद में काफी चर्चा का विषय है। अपने को मुख्यमंत्री
मायावती का अत्यंत विश्वासपात्र प्रचारित करने वाले और आईपीएस
काडर में भ्रष्ट और बदनाम गाजियाबाद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक
रघुबीर लाल की इस मामले में भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे
हैं। यह मामला शुरूआती दौर में तो न्याय की तरफ जाता दिखाई
दिया था मगर जैसे ही यह एसएसपी रघुबीर लाल के हाथों में आया,
न्याय की धज्ज़ियां उड़ती चली गईं। दहेज उत्पीड़न में इसलिए लगवाई फाइनल रिपोर्ट!
संत कंवर राम त्याग और
तपस्या की प्रतिमूर्ति, जीवन के मर्म को जानने वाले ऋषि, दया
के सागर, दीन दुखियों, यतीमों और विकलांगों के मसीहा थे। जहां
उनके मुख मण्डल पर किसी ऋषि सा तेज झलकता था वहीं उनके नेत्रों
से नूर बरसता था। मानव सेवा ही उनका मुख्य ध्येय था। उनके
परोपकारी एवं आध्यात्मिक जीवन ने मानव के संस्कारो में कल्याण,
सर्व धर्म समभाव, परोपकार एवं मानव आदर्शों को नई दिशा प्रदान
की है। चालीस वर्ष की अद्भुत गुरू भक्ति में संतजी के जीवन में
अनेक घटनाएं घटीं। जब संत कंवर राम की लोरी से बच्चा जीवित हो उठा विशेष आलेख
डूब मरने जैसी बात है कि भारतीय राज्य अपने नागरिकों को राष्ट्रीय
बजट से उच्चस्तरीय शिक्षा भी नहीं दे सकता। आश्चर्य है कि
विश्व की आर्थिक महाशक्ति का दावा ठोंकने वाला भारत उच्च
शिक्षा के लिए यूरोपीय/अमेरिकी कम्पनियों के ही सहारे है। भारत
के पास उच्च शिक्षा का स्वदेशी ढांचा नहीं है। दोषी केंद्र की
सरकार है। भारत के दुर्दिन हैं, राष्ट्रनिर्माण के संवैधानिक
जिम्मेदार ही स्वदेशी का अपमान और विदेशी का सम्मान करा रहे
हैं। घर का जोगी जोगना, आन गांव का सिद्ध! हृदयनारायण दीक्षित का आलेख
श्रीराम मर्यादा पुरूषोत्तम हैं। वे लोकश्रुति में हैं। स्मृति में
हैं। इतिहास में हैं। वे संज्ञा हैं, सर्वनाम हैं, वे भारत का
मन हैं, अंतरंग हैं, बहिरंग हैं। प्रीति और प्यार हैं। रस हैं,
छन्द हैं। गीत और काव्य हैं। प्रीति और अनुभूति हैं। तरूणाई और
यौवन हैं। वे लोकआस्था में ब्रह्म हैं। मंगल भवन अमंगल हारी
हैं। भारतीय इतिहास के महानायक श्रीराम के जन्म का मंगल
मुहुर्त भी यही मधुमास है। 'मंगल
भवन अमंगल हारी' राम नवमी पर विशेष आलेख
इंडिया-इंडिया की गूंज करने वाला भारत कब समझेगा?
राष्ट्रीय खेल सिर्फ नारों और सपनों से नही बचता, इसके लिये
जुटना पड़ता है। ध्यान चंद तो संघर्ष के दौर में निकले थे
लेकिन, उनकी मौत एम्स के जनरल वार्ड में हुई और इलाज कर रहे
डॉक्टर की उनकी मौत पर पहली टिप्पणी यही थी, हॉकी मर गई। लेकिन
तब भारत के लिये गोल्ड मेडल जीतना कोई मायने नहीं रखता था,
जरूरी यह होता था कि विरोधी टीम कोई गोल ना कर जाए। मगर अब
समूचा खेल ही रक्षात्मक हो गया है, यानी अब तो विरोधी का गोल
बचाने की कोशिश होती है। .....तो वह हॉकी कहां गई? पुण्य प्रसून बाजपेयी का आलेख
तीस हज़ारी में महिला अदालत की न्यायाधीश रहीं
स्वर्णकांता ने कहा 'महिलाओं पर जुल्म के मामलों की सुनवाई के
बाद वे कह सकती हैं कि घरेलू हिंसा का शायद ही कोई ऐसा मामला
हो जिसमें औरत, औरत के खिलाफ न हो। इतना ही नहीं, कानून का
फायदा सशक्त पक्ष को मिल जाता है। अबलाओं की रक्षा के लिए बने
कानून अधिकांश मामलों में अपने मूल लक्ष्य को नहीं पाते।
उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण को तब तक नहीं पाया जा सकता
जब तक औरत अपने साथ की औरत की पीड़ा न समझे।' बिखरते रिश्तों के सामने बेबस कानून! एक रिपोर्ट
बुंदेलखंड में पूज्य नाग देवता के दंश से हर साल सैकड़ों लोग काल के मुंह
में चले जा रहे हैं। जन सामान्य में इसे लेकर काफी असहजता है।
भीषण गर्मी और जंगलों की तबाही भी सर्पदंश की घटनाओं में
वृद्धि के महत्वपूर्ण कारण हैं। इस भू भाग पर सर्पदंश से हाने
वाली मौतों का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। बुंदेलखंड के
छतरपुर, पन्ना और टीकमगढ़ जिले सबसे अधिक सर्पदंश से प्रभावित
हैं। फिर भी यहां नाग देवता की बहुत मान्यता है और कुल देवता के रूप में
पूजा-अर्चना की जाती है। सर्पदंश से थर्राया बुंदेलखंड धीरज चतुर्वेदी की रिपोर्ट
देश के जाने-माने राष्ट्रीय उद्यानों में एक दुधवा नेशनल पार्क से
आज जैसे रोने की आवाज आती है। यह पार्क वन्य प्राणियों और
समृद्धशाली वनसम्पदा से आच्छादित था। मीलो लंबी हरियाली और
हरे-भरे मैदानों में फलते-फूलते वन्यप्राणी साम्राज्य की हलचल
से गुलजार, बारहों-मास वसंत ऋतु की दूर तक फैली महक से आस-पास
के इलाकों में मदमस्ती का एहसास कभी किसी स्वर्ग लहरी से कम
नही था। लेकिन आज दुधवा में मरघट का सा सन्नाटा दिखाई देता है। दुधवा में मरघट का सा सन्नाटा! डीपी मिश्रा का आलेख
रंगनाथ मिश्र आयोग की सदस्य सचिव आशा दास ने तो इसाई और
मुसलिम दलितों को अनुसूचित जाति वाला आरक्षण देने की सिफारिश
का विरोध करने के साथ सलाह दी है कि हमारे देश में धर्म और
जाति के आधार आरक्षण देने से निहित स्वार्थों का लाभ ही हो रहा
है, इसलिए सरकार अपनी नीतियों और कार्यक्रमों में बदलाव करे और
धर्म और जाति के आधार के बगैर परिवार को इकाई मान कर सभी ऐसे
परिवारों की सहायता के लिए विशेष कदम उठाए जो आर्थिक, सामाजिक
और शैक्षणिक रूप से पिछड़े हों। रंगनाथ आयोग की सिफारिशें ही सर्वसम्मत नहीं एक रिपोर्ट
भारत में हर साल धूमधाम से गणतंत्र दिवस मनाया जाता है।
इस मौके पर देश के राजपथ पर शक्ति प्रदर्शन के साथ इस दिवस की
रस्में अदा की जाती हैं। क्या यह देश जान सकता है कि उसके वे
सपने कहां हैं जो भारतीय संविधान को लागू करते हुए देखे गए थे?
क्या ये ही वो सपने हैं-आरक्षण, जातिवाद, राग-द्वेष, भाषा और
प्रांतवाद, भ्रष्टाचार या अपराध की राजनीति? जरा सोचिए और अपने
गणतंत्र दिवस की उपलब्धियों को तलाशिए। भारतीय गणतंत्र में ये आरक्षण! अनवर वकार अल्वी का आलेख
मुलायमऔर
अमर में रिश्तों को लेकर उठे तूफान को अब देर-सवेर निर्णायक
तबाही तक पहुंचने से शायद ही कोई रोक पाए। राजनीतिक विश्लेषक
कहते हैं कि एक दलाल और एक राजनीतिज्ञ के बीच में एक दिन ऐसा
होना ही था। इनमें इतना बड़ा अंतर है कि राजनीतिज्ञ एक
राजनीतिज्ञ होता है जबकि दलाल सिर्फ एक दलाल। इसलिए मुलायम
सिंह यादव भले ही आज राजनीतिक भंवर में उलझे हुए हों लेकिन अमर
सिंह ने बौखलाहट में जिस रणनीति से नाराज़गी की छछूंदर पकड़ी
है वह उनको उनके हश्र तक जरूर पहुंचा देगी। बौखलाए अमर सिंह को 'शरण' की तलाश विशेष संवाददाता
अंग्रेजों को वास्तव में इससे कोई लेना-देना नहीं था
क़ि भारतीय यानी हिंदू चिंतन कितना श्रेष्ठ है। उन्हें तो केवल
इसमें रुचि थी कि इसे धर्म के रूप में कैसे इस्लाम के खिलाफ
खड़ा किया जा सकता है। हिंदू श्रेष्ठता के अहंकार में हिंदू
(भारतीय) चिंतक भी उस जाल में फंसते गये, भारतीय सुधारक राजा
राममोहन राय भी। इसका एक ही चारा है कि हम फिर से भारत और
भारती को अपनाएं और अपनी सोच को पुन: सार्वभौम मानववाद से जोड़ें। 'हिंदू' शब्द भारत की एक नई समस्या? डॉ राधेश्याम शुक्ल का आलेख
कहीं बर्फ से लकदक चोटियां, कहीं शीतल जल धाराएं, तो कहीं गर्म पानी
के चश्में। यह सब नजारे हिमाचल में एक साथ मिलते हैं। हिमाचल
ने पारिस्थितकीय संतुलन को कायम रखते हुए पर्यटन क्षेत्र में
तीव्र गति से प्रगति की है। यहां के लोग अतिथि का आदर-सत्कार
करने के लिए बहुत विख्यात हैं, तभी तो हिंसा मुक्त हिमाचल
प्रदेश, पर्यटकों के लिए सुरक्षित एवं आरामदायक डेस्टिनेशन
माना जाता है। बेमिसाल और बेनज़ीर हिमाचल! जोगिंदर पाल की रिपोर्ट
महिलाओं के प्रति आसक्ति या मुर्गे की टांग खाना भी दिग्गजों की
कुर्सियों के लिए खतरा बनते आए हैं। अपनी संतुष्टी, ब्लैकमेल
या किसी अन्य लाभ की आशा में राजनीतिक साजिशें रचने वालों के
कारण न केवल समाज और देश संकट में खड़ा दिखाई देता है अपितु एक
नहीं बल्कि कई हस्तियों और राजनेताओं का राजनीतिक जीवन समाप्त
हो जाता है। देखा जाए तो ऐसी साजिशें समाज, देश या शासन
व्यवस्था पर किसी बाहरी हमले से कम नहीं मानी जा सकतीं। राजनीतिक साजिशों के मारे ये राजनेता! दिनेश शर्मा की रिपोर्ट
उत्तरप्रदेश में कड़े राजनीतिक संघर्ष और अपनी
ही रणनीतियों के असली सच का आज सामना कर रहे हैं, समाजवादी
पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव। वे कहां खड़े हैं? वे धरती-पुत्र के नाम से विख्यात हैं लेकिन आज यह खिताब और
उनकी ख्याति दोनों ही ख़तरे मे हैं। उनके सारथी अमर सिंह ने
उन्हें ऐसे रास्ते पर लाकर खड़ा कर दिया है कि अब वे अपनी
विफलताओं पर तोहमते लगाते रहेंगे। ऐसे बहुत से मामले हैं जो
मुलायम सिंह यादव को अब सीना तान कर चलने नहीं दे रहे हैं। इस
राजनीतिक परिदृश्य में उनके साथियों को अपने नेता के राजनीतिक
भविष्य को लेकर घोर आशंकाएं और चिंताएं घेर रही हैं। अमर
के मकड़जाल में मुलायम नज़रबंद! विशेष संवाददाता
कांग्रेसइस
बात को स्वीकार करती है कि अलग तेलंगाना राज्य के गठन की घोषणा
उससे जल्दीबाजी में हो गई है लेकिन इसका अमल ठोक-बजाकर ही किया
जाएगा। हड़बड़ी में गड़बड़ी स्वाभाविक है और उसके अपने
दुष्परिणाम भी होते हैं। कल तक आंध्र प्रदेश के जो विधायक अलग
तेलंगाना राज्य के हिमायती थे, वे अचानक ही उसके विरोधी कैसे
हो गए, इसकी तह में भी कांग्रेस
को जाना होगा। छोटे राज्य देश के लिए कितने मुफीद? एक रिपोर्ट
भारतमें
सत्ता के कमज़ोर नेतृत्व और देश में राष्ट्रीय एकता अखण्डता
जैसे मुद्दों पर भी यहां के राजनीतिक दलों में गहरी मतभिन्नता
का आखिर कहीं तो नुकसान होना ही है और वह हो रहा है।
अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में भारत की क्या हैसियत है और
शक्तिशाली देश भारत को कितनी तवज्जोह देते हैं यह अमेरिका-चीन
की संयुक्त विज्ञप्ति से पता चल जाता है। यह मुद्दा भी इस
यात्रा में निश्चित रूप से दोनो देशों के आगे पीछे रहेगा। 'बीजिंग आघात' के साए में भारत-अमेरिका वार्ता एक रिपोर्ट
यूपी के कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह ने सोचा होगा कि
एमएलसी सुनील सिंह से भी वे उनका बंगला या उसकी जमीन ले लेंगे
लेकिन यह पासा उल्टा पड़ गया है। इसे लेने के लिए जिस प्रकार
का दबाव बनाया है वह रिकार्डिंग सुनकर समझा जा सकता है। बंगले
के अधिग्रहण की भी वे इशारे-इशारे में धमकी दे रहे हैं। इस टेप
मे सबसे अहम बात यह है कि प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री शैलेश कृष्ण
बड़े ही आत्म विश्वास से कोर्ट की बेंच बदलने की बात कर रहे
हैं जिससे लगता है कि किसी स्तर पर कोर्ट को मैनेज किया हुआ है
और कोर्ट में या उसके बाहर उनके पास कोई ऐसा है जो इतना
शक्तिशाली है कि किसी भी कोर्ट में कुछ भी कर सकता या करा सकता
है। धौंस देकर मायावती के लिए बंगला मांग रहे हैं शशांक और शैलेश एक रिपोर्ट
मधु कोडा, देश में कांग्रेस की राजनीति का एक घोर पाप है,
जिसका घड़ा धड़ाम से फूटा है। उसने झारखंड में निरीह और
भोले-भाले आदिवासियों पर भारी भरकम अजगर छोड़ दिए जिन्होंने
झारखंड को लूट-खसोट कर उसे नक्सलियों की आग में जलने को छोड़
दिया। मधु कोडा जैसे दैत्य कभी सर न उठाते यदि कांग्रेस झारखंड
में भाजपा को पटकनी देने के लिए राजनीतिक मर्यादाओं को ताक पर
रख कर घटिया समझौते और तौर-तरीके अख्तियार नहीं करती। पता चल
रहा है कि सरकार में माफियाओं का एक बड़ा सिंडिकेट है जोकि
भारी सरकारी सुरक्षा के बीच रहकर काले कारनामों को सफलतापूर्वक
अंजाम दे रहा है। कांग्रेस का घोर पाप है मधु कोडा! दिनेश शर्मा की विशेष रिपोर्ट
आपने लखनऊ
में कहा था कि अपन का ऊपर भी इंडियन एक्सप्रेस हाउस रहेगा।
किसी संस्थान के प्रति निष्ठा की ऐसी बेजोड़ मिसाल पेश करने
वाले प्रभाष जोशी जी आप ठीक ही कह रहे थे। यहां आपकी निष्ठा पर
कोई उंगुली नहीं उठा पाया। पत्रकारिता के प्रभाष जोशी युग के
अंत होने से अपूर्णनीय नुकसान हुआ है, लेकिन जब-जब देश में
हिंदी पत्रकारिता के कदम लड़खड़ाएंगे तब-तब प्रभाष जोशी एक
अदृश्य प्रेरणा के रूप में जरूर सामने होंगे। पत्रकारिता में
कुछ नया कर दिखाने वालों के इस हृदय सम्राट के प्रति स्वतंत्र
आवाज़ डॉट कॉम अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता है। प्रभाष जोशी-मेरी पाठशाला! दिनेश शर्मा