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कविता एक तरह की ज़िद है-अशोक वाजपेयी

अभिनेत्री शर्मिला टैगोर ने किया 'ख़ामोशी' का लोकार्पण

शायर कवि और फिल्मकार गौहर रज़ा की 'ख़ामोशी'

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Wednesday 20 September 2017 04:21:32 AM

release of book 'khamoshi'

नई दिल्ली। शायर, कवि और फिल्मकार गौहर रज़ा की सद्य प्रकाशित नज़्म पुस्तक 'ख़ामोशी' का लोकार्पण इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में हुआ। देश की जानी-मानी अभिनेत्री शर्मिला टैगोर ने इस पुस्तक का लोकार्पण किया है। 'ख़ामोशी' पुस्तक के प्रकाशक राजपाल एंड संस की विज्ञप्ति में बताया है कि इस अवसर पर हिंदी की प्रसिद्ध कवि अनामिका और प्रसिद्ध लेखक और कवि अशोक वाजपेयी ने पुस्तक के सम्बंध में चर्चा की। अशोक वाजपेयी ने 'ख़ामोशी' पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कविता एक तरह की ज़िद है और हमें कृतज्ञ होना चाहिए कि ऐसी कविता हमारे बीच और साथ में है। उन्होंने कहा कि कविता और राजनीति की कुंडली नहीं मिलती, लेकिन गौहर रज़ा अपनी कविता में जीवन के छोटे-बड़े सभी पहलुओं को जगह देते हैं। कवि अनामिका ने गौहर रज़ा की शायरी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि गौहर रज़ा की कविताएं दिल और सोच को छूने वाली हैं, सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि विदेश में होने वाली घटनाओं पर भी उनकी कड़ी नज़र रहती है।
अभिनेत्री शर्मीला टैगोर ने 'ख़ामोशी' के लोकार्पण पर कहा कि गौहर रज़ा बेबाकी के साथ और बिना डरे नज़्में लिखते हैं और अपना सख़्त से सख़्त प्रोटेस्ट भी हमेशा खूबसूरत ज़ुबान में लिखते हैं। उन्होंने कहा कि गौहर रज़ा की नज़्में हमारे उस ख़्वाब का हिस्सा हैं, जो हमने आज़ादी के वक़्त देखा था, एक ऐसा समाज बनाने का ख़्वाब, जहां ख्यालों की विविधता हो, जहां बोलने की आज़ादी हो, जहां अपनी तरह से जीने का अधिकार हो, ऐसे वक़्त में जब उम्मीद का दामन तंग लगने लगे तब गौहर रज़ा की नज़्में हम सबकी आवाज़ बनकर हमेशा सामने आई हैं। शायर गौहर रज़ा ने समारोह में 'ख़ामोशी' से कुछ चुनिंदा ग़ज़लें और नज़्में भी सुनाईं, जिन्हें श्रोताओं ने खूब पसंद किया। राजपाल एंड संस की अधिकारी मीरा जौहरी ने इस मौके पर बताया कि देश के सबसे पुराने पुस्तक प्रतिष्ठान से उर्दू शायरी की सैकड़ों लोकप्रिय कृतियां प्रकाशित हुई हैं, गौहर रज़ा की यह नई कृति भी उसी समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने वाली और लोकप्रिय सिद्ध होगी।
मीरा जौहरी ने कहा कि राजपाल एंड संस प्रकाशन से हिंदी की श्रेष्ठ पुस्तकों के प्रकाशन का क्रम बहुत पुराना है और 2017 में भी अनेक नई महत्वपूर्ण पुस्तकें प्रकाशित होने वाली हैं। 'ख़ामोशी' कविता संग्रह में गौहर रज़ा की 71 नज्‍़में हैं। इसमें 174 पन्ने हैं और इसकी कीमत 224 रुपए रखी गई है, ताकि यह आम नागरिक तक पहुंच सके। इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के कमलादेवी चटोपाध्याय काम्प्लेक्स में हुए इस आयोजन में हिंदी और उर्दू के लेखक, दिल्ली के जाने-माने कलाकार और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ नवोदित रचनाकारों और युवक-युवतियों ने भी भाग लिया। आयोजन में आलोचक अपूर्वानंद, कथाकार प्रियदर्शन, पत्रकार कुलदीप कुमार, कथाकार प्रेमपाल शर्मा, क़व्वाल ध्रुव संगारी, सामाजिक कार्यकर्ता शबनम हाशमी, हिंदू कॉलेज से डॉ रचना सिंह, प्रणव जौहरी, बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी, अध्यापक, चिंतक और लेखक उपस्थित थे।

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