साझा विरासत और आपसी जुड़ाव एससीओ परिवार की शक्ति-नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एससीओ के प्रमुखों के साथ गर्मजोशी से सेशनस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Tuesday 1 September 2026 05:06:24 PM
बिश्केक। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन में नाम लिए बगैर आतंकवाद पर पाकिस्तान को जमकर लताड़ लगाई। एससीओ के प्रमुखों केबीच और खासतौर से चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन का भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केप्रति मित्रवत सम्मान और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री मुहम्मद शहबाज़ शरीफ को अलग थलग देखकर पाकिस्तान बौखला गया। इसकी प्रतिक्रिया पाकिस्तान की सोशल मीडिया पोस्ट पर देखी गई, जिसके फोटो सेशन में उसने एससीओ प्रमुखों के ग्रुप सेशन को क्रॉपकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोटो हटा दिया और इसकी कड़ी आलोचना आने पर नरेंद्र मोदी वाले ग्रुप फोटो को फिरसे लगा दिया। बहरहाल पाकिस्तान का यह नफरती दागदार चेहरा सामने आ ही गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान को बेनकाब करने में कोई कसर नहीं छोड़ी और पाकिस्तान की एससीओ में जमकर किरकिरी हुई। एससीओ में आतंकवाद पर पाकिस्तान को लताड़ को एससीओ में समझा गया हैकि पाकिस्तान विश्व समुदाय के सामने बेनकाब होता जा रहा है।
किर्गिज़स्तान की मेजबानी में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किर्गिज़स्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव का उनके स्वागत और आतिथ्य केलिए हार्दिक अभिनंदन किया। नरेंद्र मोदी ने कहाकि एससीओ की 25वीं वर्षगांठ और किर्गिज़स्तान के स्वतंत्रा दिवस पर बिश्केक में उपस्थित रहना उनका सौभाग्य है। उन्होंने वर्ल्ड नोमैड गेम्स की शानदार ओपनिंग सेरेमनी के दौरान किर्गिज़स्तान की समृद्ध संस्कृति और साझा विरासत की झलक देखी और कहाकि यही साझा विरासत और आपसी जुड़ाव एससीओ परिवार की बड़ी शक्ति है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि पच्चीस वर्ष में एससीओ ने यूरेशिया के विशाल भूभाग में संवाद और सहयोग की एक मजबूत परंपरा विकसित की है। उन्होंने कहाकि हमने मिलकर अपने लोगों की भलाई केसाथ-साथ मानवता के विकास में भी बहुमूल्य योगदान दिया है, इन पच्चीस वर्ष में हमने सहयोग की मजबूत नींव तैयार की है, अब आनेवाले पच्चीस वर्ष में हमारा लक्ष्य इस सहयोग को स्पष्ट परिणामों में बदलने का होना चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि आज जब विश्व अनिश्चितता और अस्थिरता से गुजर रहा है, हमें अपने साझा भूगोल को साझा अवसरों में बदलना है और हमारे प्रयासों से हमारे लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना हैं। उन्होंने कहाकि पिछली बैठक में उन्होंने एससीओ को लेकर भारत की सोच के तीन मुख्य स्तंभों का उल्लेख किया था-सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर। अब समय हैकि इन तीनों स्तंभों को विजन से आगे बढ़ाकर ठोस परिणामों तक ले जाया जाए और इसकी पहली आवश्यकता है शांति और सुरक्षा। उन्होंने कहाकि आतंकवाद मानवता केलिए गंभीर चुनौती बना हुआ है, इसके विरुद्ध लड़ाई में हम क्रिया प्रतिक्रिया की सोच तक सीमित नहीं रह सकते। नरेंद्र मोदी ने कहाकि हमें आतंकवाद के फाइनेंसिंग, भर्ती, कट्टरता और सुरक्षित ठिकानों के पूरे इकोसिस्टम को ध्वस्त करना होगा, हमें एक स्वर में बोलना होगाकि इस गंभीर विषय पर दोहरे मापदंड केलिए कोई स्थान नहीं हो सकता। उन्होंने कहाकि जो देश आतंकवाद को अपनी नीति का साधन बनाते हैं, आतंकियों को पनाह और समर्थन देते हैं, उन्हें कड़ा संदेश देना होगाकि आतंकवाद किसी केलिए रणनीतिक संपत्ति नहीं हो सकता।
नरेंद्र मोदी ने कहाकि शांत और सुरक्षित यूरेशिया की हमारी साझा आकांक्षा, अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता से भी जुड़ी है, भारत अफगानिस्तान के लोगों के विकास और मानवीय सहायता में योगदान देता रहा है और आगे भी देता रहेगा। प्रधानमंत्री ने कहाकि आजकी परस्पर दुनिया में सुरक्षा की परिधि और भी व्यापक हो चुकी है, पश्चिम एशिया के संकट ने यह दिखाया हैकि किसी एक क्षेत्र का संघर्ष वहीं तक सीमित नहीं रहता, उसका प्रभाव पूरे विश्व की ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ता है और इसका सबसे अधिक खामियाजा ग्लोबल साउथ के देशों को भुगतना पड़ता है, इसलिए भारत का आह्वान रहा हैकि सभी तनावों और युद्धों का समाधान युद्ध के मैदान पर नहीं, बातचीत और कूटनीति से ही संभव है। नरेंद्र मोदी ने कहाकि नशीले पदार्थों की तस्करी केवल एक अपराध नहीं है, बल्कि हमारी युवा पीढ़ी और क्षेत्रीय सुरक्षा केलिए गंभीर खतरा है, एससीओ के अंतर्गत सुरक्षा संबंधी खतरे, संगठित अपराध, सूचना सुरक्षा और नशीले पदार्थ जैसी चुनौतियों से निपटने केलिए स्थापित किए जा रहे केंद्र एक सकारात्मक कदम है, हमें इन्हें व्यावहारिक तालमेल और समय पर कार्रवाई का प्रभावी माध्यम बनाना चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि हमारे साझा विकास का दूसरा आधार है, मजबूत और विश्वसनीय कनेक्टिविटी भारत उन सभी प्रयासों का समर्थन करता है, जो बाजारों को जोड़ते हैं, व्यापार को सुगम बनाते हैं और विकास के नए रास्ते खोलते हैं, किंतु इन प्रयासों में सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान भी अत्यंत आवश्यक है, यही एससीओ चार्टर की भी मूल भावना है। नरेंद्र मोदी ने कहाकि आनेवाले समय में कनेक्टिविटी का स्वरूप और व्यापक होगा, सड़कें, रेलवे और हवाई कॉरिडोर केसाथ-साथ हमें कस्टम प्रक्रियाओं को सरल बनाना होगा, डिजिटल दस्तावेज़ीकरण को बढ़ावा देना होगा, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को अधिक कुशल बनाना होगा। प्रधानमंत्री ने कहाकि एससीओ के सहयोग का लाभ सीधे हमारे लोगों तक पहुंचे, हमारी सबसे बड़ी पूंजी हमारे लोगों केबीच आपसी संबंध हैं, भारत केलिए एससीओ महान सभ्यताओं, संस्कृतियों और विचारों का संगम है, एससीओ के अगले पच्चीस वर्ष में लोगों केबीच आपसी संबंध को हमारे सहयोग के केंद्र में रखना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहाकि हमारी सफलता की वास्तविक कसौटी यह होनी चाहिएकि हमारे प्रयासों से युवाओं को कितने नए अवसर मिले, हमारे उद्यमियों केलिए कितने नए बाजार खुले, हमारे किसानों को तकनीकी का कितना लाभ मिला और हमारे नागरिकों का जीवन कितना बेहतर हुआ, यही सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर का वास्तविक अर्थ है।
प्रधानमंत्री ने कहाकि एससीओ में हमारा सहयोग केवल सरकार द्वारा संचालित नहीं, बल्कि लोगों पर केंद्रित होना चाहिए। नरेंद्र मोदी ने खुशी जताईकि किर्गिज़स्तान की अध्यक्षता में एससीओ में युवा सहभागिता पर विशेष बल दिया गया है, भारत ने एससीओ में स्टार्ट-अप फोरम, यंग ऑथर्स कॉन्क्लेव और यंग साइंटिस्ट्स फोरम जैसी पहलें की हैं। उन्होंने कहाकि पिछले वर्ष भारत ने एससीओ सभ्यतागत संवाद मंच का प्रस्ताव रखा था, इसका पहला सेशन इसवर्ष भारत में आयोजित होगा और उन्हें विश्वास हैकि सबकी सक्रिय भागीदारी से यह फोरम एससीओमें जीवंत संवाद का सशक्त मंच बनेगा। नरेंद्र मोदी ने कहाकि किर्गिज़स्तान के महान साहित्यकार चिंगिज़ ऐतमातोव ने विश्व को एक सुंदर और गहरा विचार दिया था, उन्होंने कहा थाकि हम अक्सर उन बातों को अधिक देखते हैं, जो हमें अलग करती हैं और उन बातों को कम, जो हमें जोड़ती हैं। प्रधानमंत्री ने कहाकि आज एससीओ केलिए भी यही संदेश प्रासंगिक है, हमारी विविधता हमारी पहचान है, हमारा साझा उद्देश्य हमारी शक्ति है, बिश्केक से हमें यही संकल्प लेकर आगे बढ़ना चाहिए-साझा भूगोल से साझा अवसरों की ओर, विज़न से नतीजों की ओर और सरकार द्वारा संचालित सहयोग से लोगों द्वारा संचालित साझेदारीकी ओर, भारत इसी विश्वास और इसी प्रतिबद्धता केसाथ एससीओ परिवार की साझा यात्रा में अपना योगदान देने केलिए तैयार है।