डॉ भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के दीक्षांत में छात्रों को संबोधन
'अराजक या असंवैधानिक तरीके सामाजिक बदलाव के लिए घातक'स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Sunday 30 August 2026 02:12:04 PM
लखनऊ। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा हैकि युवा पीढ़ी को राष्ट्र की पहचान पर गर्व है, अपनी सभ्यता में विश्वास है और भविष्य पर भरोसा है। उन्होंने कहाकि 'नए भारत' में यही सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तन हुआ है, भारत में विश्वास की भावना ही मेक इन इंडिया की सफलता के पीछे है। भारतरत्न बाबासाहेब डॉ भीमराव रामजी अंबेडकर का मंत्र 'शिक्षित हो, आंदोलन करो और संगठित हो' का अर्थ कि ज्ञान प्राप्त करना, अन्याय पर हिंसा से नहीं, बल्कि संवैधानिक साधनों से सवाल उठाना और लोकतांत्रिक तरीकों से बदलाव लाने केलिए एकजुट होना’ बतलाते हुए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह डॉ भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय लखनऊ के दीक्षांत में छात्रों को संबोधित कर रहे थे। रक्षामंत्री ने जिक्र कियाकि डॉ भीमराव अंबेडकर ने संविधान सभा में अपने अंतिम भाषण में स्पष्ट रूपसे कहा थाकि सामाजिक और आर्थिक उद्देश्यों को संवैधानिक साधनों से ही प्राप्त किया जाना चाहिए।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहाकि बाबासाहेब ने चेतावनी दी थीकि जब लोकतांत्रिक और संवैधानिक रास्ते उपलब्ध हों तो हिंसा, अराजकता या असंवैधानिक तरीकों का सहारा लेना उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहाकि अराजकता या असंवैधानिक सहारा सामाजिक परिवर्तन केलिए घातक है, इसे त्याग देना चाहिए। राजनाथ सिंह ने कहाकि विश्वविद्यालयों को न्याय, समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के आदर्शों से प्रेरित युवा मस्तिष्कों को आकार देने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, ताकि वे राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान दे सकें। उन्होंने कहाकि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सोचने और समझने की क्षमता विकसित करती है, साथही व्यावहारिक कौशल को निखारती है। उन्होंने कहाकि शिक्षा की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका व्यक्तियों को अपने ज्ञान का उपयोग समाज के लाभ केलिए करना सिखाना है, उनमें मूल्यों और संवेदनशीलता का संचार करना है। राजनाथ सिंह ने कहाकि ज्ञान और उपलब्धियां नैतिक मूल्यों और आचरण पर आधारित होनी चाहिएं। स्वामी विवेकानंद से प्रेरणा लेते हुए उन्होंने युवाओं से कहाकि वे केवल व्यक्तिगत सफलता केलिए ही प्रयास न करें, बल्कि रोज़गार सृजनकर्ता, समस्या समाधानकर्ता और सकारात्मक परिवर्तन के उत्प्रेरक बनकर भारत के रूपांतरण में योगदान दें।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहाकि दुनिया तेजीसे बदल रही है, नई तकनीकें और नवाचार नए अवसर पैदा कर रहे हैं। उन्होंने छात्रों से निरंतर सीखने और अनुकूलनशीलता केप्रति प्रतिबद्ध रहने को कहा। उन्होंने कहाकि जो लोग निरंतर सीखने और नए कौशल हासिल करने के इच्छुक हैं, वे तेजीसे विकसित हो रही दुनिया में प्रगति केलिए सबसे अच्छी तरह से तैयार होंगे। राजनाथ सिंह ने कहाकि व्यक्तिगत प्रयास प्रगति में योगदान दे सकते हैं, लेकिन एकजुट संकल्प विकास की गति को कई गुना बढ़ा सकता है। उन्होंने छात्रों से 'टीम इंडिया' के हिस्से के रूपमें काम करने और 2047 तक विकसित भारत के साझा लक्ष्य में योगदान देने का आह्वान किया। रक्षामंत्री ने छात्रों से अनिश्चितता से न डरने, बल्कि समाधानों पर ध्यान केंद्रित करने, समर्पण से काम करने और निरंतर आत्म सुधार केलिए प्रयासरत रहने को कहा, जो सफलता की कुंजी है। अंतरिक्ष में भारत की उपलब्धियों पर राजनाथ सिंह ने कहाकि देश ने सीमित संसाधनों से मिशन शुरू करने से लेकर मानव अंतरिक्ष उड़ान और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन सहित उन्नत कार्यक्रमों को क्रियांवित करने तक की प्रगति कर ली है। उन्होंने निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका पर भी जोर दिया, जिसमें भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप्स ने प्रक्षेपण यानों और उपग्रह प्रौद्योगिकी में महत्वपूर्ण प्रगति की है।
रक्षामंत्री ने उल्लेख कियाकि 34 वर्ष केबाद देश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की गई है, भारतीय युवा अंतर्राष्ट्रीय ओलंपियाडों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं, स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं, यूनिकॉर्न कंपनियां बना रहे हैं और उन्नत प्रौद्योगिकियां विकसित कर रहे हैं। उन्होंने कहाकि भारत वैश्विक नवाचार सूचकांक में ऊपर चढ़कर और दुनिया के तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम के रूपमें उभरकर तेजीसे वैश्विक नवाचार का केंद्र बन रहा है। उन्होंने आश्वासन दियाकि सरकार एक ऐसा इकोसिस्टम बनाने का काम जारी रखेगी, जहां युवा बेहतर समाज केलिए समाधान तलाश सकें, नवाचार कर सकें, प्रयोग कर सकें, सृजन कर सकें और विकसित कर सकें। राजनाथ सिंह ने कहाकि विकसित और आत्मनिर्भर भारत की यात्रा को केवल आर्थिक विकास से नहीं मापा जा सकता। उन्होंने कहाकि आर्थिक शक्ति किसी राष्ट्र को समृद्ध बनाती है, जबकि सांस्कृतिक आत्मविश्वास उसे महान बनाता है। उन्होंने भारतीय भाषाओं, भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के प्रयासों पर भी प्रकाश डाला। रक्षामंत्री ने कहाकि विश्व में भारत न केवल एक प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूपमें उभरा है, बल्कि एक ऐसे राष्ट्र के रूपमें भी उभरा है, जो अपनी सभ्यता, संस्कृति और क्षमता में विश्वास रखता है। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राजकुमार मित्तल और विश्वविद्यालय के संकाय सदस्य एवं कर्मचारी उपस्थित थे।