'युवा आज़ादी की लड़ाई की विरासत को संजोकर रखें'
रक्षामंत्री ने हुतात्मा स्मृति स्मारक का उद्घाटन कियास्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Thursday 27 August 2026 12:59:56 PM
पणजी। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने गोवा के पत्रादेवी में पुनर्विकसित ‘हुतात्मा स्मृति स्मारक’ का उद्घाटन किया। पत्रादेवी गोवा के पुर्तगाली शासन से मुक्ति केलिए चले ऐतिहासिक संघर्ष से जुड़ा एक महत्वपूर्ण स्थल है। रक्षामंत्री ने गोवा मुक्ति आंदोलन के उन वीर सत्याग्रहियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने देश की एकता और गोवा की मुक्ति केलिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया, इनमें पंजाब के करनैल सिंह, मध्य प्रदेश की सहोदरा देवी और महाराष्ट्र के मधुकर दामोदर चौधरी प्रमुख थे। रक्षामंत्री ने कहाकि यह आंदोलन केवल एक क्षेत्रीय संघर्ष नहीं था, बल्कि भारत की राष्ट्रीय चेतना, एकता और अखंडता की सशक्त अभिव्यक्ति था। राजनाथ सिंह ने कहाकि राष्ट्रीय एकता क्षेत्रीयता, सांप्रदायिकता और जातिवाद जैसी संकीर्ण सोच से कहीं ऊपर है। उन्होंने कहाकि भारत में भलेही विभिन्न क्षेत्रीय, सामाजिक और सांस्कृतिक पहचानें हों, लेकिन ‘भारतीय होना’ वह साझा सूत्र है, जो हम सभीको एकजुट करता है।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहाकि पात्रादेवी के सत्याग्रहियों ने अपने साहस और संकल्प से यह साबित कियाकि भारत शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीकों से अपने अधिकारों केलिए आवाज़ उठा सकता है। हालांकि जब किसी संप्रभु राष्ट्र की क्षेत्रीय अखंडता पर गंभीर खतरा मंडरा रहा हो और शांतिपूर्ण प्रयासों की सीमाएं समाप्त हो जाएं, तब राष्ट्र को अपनी संप्रभुता और अखंडता की रक्षा केलिए अपनी पूरी शक्ति का इस्तेमाल करने का भी अधिकार है। उन्होंने 1961 में गोवा की आजादी केलिए चलाए गए ‘ऑपरेशन विजय’ के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों की प्रदर्शित व्यावसायिकता, साहस और अनुशासन की सराहना की। उन्होंने कहाकि भारतीय सैनिकों की वीरता और अदम्य साहस ने विश्व की सेनाओं केलिए एक मिसाल कायम की। उन्होंने कहाकि भारतीय सशस्त्र बलों ने जिस आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प केसाथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया, उससे एक ऐसी गौरवशाली परंपरा की शुरुआत हुई, जो आजभी निरंतर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहाकि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ इस परंपरा का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसने साबित कर दिया हैकि भारतीय सशस्त्र बल देश की संप्रभुता और सुरक्षा को चुनौती देने वालों को मुंहतोड़ जवाब देने में पूरी तरह सक्षम हैं।
राजनाथ सिंह ने गोवा की मुक्ति को न केवल भारतीय सशस्त्र बलों के गौरवशाली पराक्रम को स्मरण करने का अवसर बताया, बल्कि यह भी याद दिलायाकि भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा केलिए भारतीय सशस्त्र बलों को सदैव सतर्क, सक्षम और तैयार रहना चाहिए। रक्षामंत्री ने 1961 केबाद से भारत में आए व्यापक बदलावों का उल्लेख करते हुए कहाकि आज हमारी रक्षा सेनाएं युद्धपोतों, लड़ाकू विमानों, उन्नत रडार प्रणालियों, नेटवर्क केंद्रित युद्धक क्षमताओं और लंबी दूरी की हवाई शक्ति जैसी अत्याधुनिक प्रणालियों से लैस होकर राष्ट्रीय हितों की रक्षा कर रही हैं। उन्होंने उल्लेख कियाकि हमारे पास एक विशाल अर्थव्यवस्था, प्रतिभाशाली युवा और तेजी से विकसित होता रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र है, हम कई क्षेत्रों में अपनी स्वदेशी क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रहे हैं। उन्होंने कहाकि हम रक्षा उपकरणों के बड़े आयातक देश से बदलकर रक्षा उपकरणों के निर्माण और निर्यात के क्षेत्रमें एक महत्वपूर्ण वैश्विक देश बनते जा रहे हैं।
रक्षामंत्री ने कहाकि रक्षा निर्यात, जो 2014 से पहले केवल 600 करोड़ रुपये था, आज रिकॉर्ड स्तरपर पहुंचकर 38,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। राजनाथ सिंह ने कहाकि रक्षा उत्पादन, जो कभी केवल 40,000 करोड़ रुपये था, अब बढ़कर 1.81 लाख करोड़ रुपये के अब तकके उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है और अगर पश्चिम एशिया का संकट न होता तो हम अबतक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुके होते। राजनाथ सिंह ने बढ़ती ‘नारी शक्ति’ का उल्लेख करते हुए कहाकि जो महिलाएं कभी स्वतंत्रता संग्राम में अग्रिम पंक्ति में थीं, वे आज लड़ाकू विमान उड़ा रही हैं, सेना में नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभा रही हैं, अंतरिक्ष अभियानों में योगदान दे रही हैं और नवाचार एवं उद्यमिता को बढ़ावा दे रही हैं। रक्षामंत्री ने कहाकि देश के स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानियों से मिली आजादी का सम्मान करना वर्तमान और आनेवाली पीढ़ियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहाकि आजादी का अर्थ केवल अपनी बात कहने का अधिकार नहीं है, बल्कि इसके साथ राष्ट्रीय एकता बनाए रखने, संवैधानिक मूल्यों का सम्मान करने, कानून का पालन करने और निजी हितों से ऊपर राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने की जिम्मेदारी भी जुड़ी है। राजनाथ सिंह ने इस आजादी, इसके मूलभूत मूल्यों और भावना को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने तथा इसे संजोकर रखने का आह्वान किया।
रक्षामंत्री ने कहाकि पात्रादेवी के शहीदों की गाथाएं इतिहास की किताबों में केवल नाम और तारीख बनकर नहीं रह जानी चाहिए। उन्होंने युवाओं से स्वतंत्रता केलिए संघर्ष करने वाले वीरों के जीवन, संघर्ष, साहस और बलिदान से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। राजनाथ सिंह ने कहाकि जब हमारे युवा गोवा जाएं तो वे इस स्मारक पर अवश्य जाएं और समझेंकि देश की अखंडता किस कीमत पर सुरक्षित की गई थी। उन्होंने कहाकि जो पीढ़ी अपने इतिहास को समझती है, वही अपने भविष्य को सही दिशा दे सकती है। गौरतलब हैकि गोवा सरकार ने ‘गोवा स्टेट इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन’ के जरिए लगभग 9.50 करोड़ रुपये की लागत से इस स्मारक का व्यापक पुनर्विकास किया है। पुनर्विकसित स्मारक को एक ऐसे शैक्षिक व स्मृति स्थल के रूपमें विकसित किया गया है, इसमें नया मुख्य स्मारक, मूर्तिकला से जुड़ी कलाकृतियां, सूचना केंद्र व स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को दर्शाने वाले भित्तिचित्र हैं। पात्रादेवी में आजादी की लड़ाई का एक महत्वपूर्ण अध्याय लिखा गया, जिसने इस स्थल को साहस, बलिदान और गोवा को पुर्तगाली शासन से मुक्त कराने के सामूहिक संकल्प का सशक्त प्रतीक बना दिया।
भारत से हजारों स्वयंसेवकों ने 15 अगस्त 1955 को पूरे गोवा में शांतिपूर्ण सत्याग्रह में भाग लिया। भारतीय तिरंगा हाथों में लिए सत्याग्रहियों का पहला जत्था पात्रादेवी के रास्ते गोवा में दाखिल हुआ, जहां पर उन्हें पुर्तगाली मशीनगनों की गोलीबारी का सामना करना पड़ा। पात्रादेवी में कई सत्याग्रही शहीद हुए, जबकि आंदोलन के दौरान अन्य स्थानों पर भी अनेक लोगों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया। इस पुनर्विकास का उद्देश्य आगंतुकों विशेषकर युवा पीढ़ी को उन स्वतंत्रता सेनानियों एवं स्वयंसेवकों के बलिदान को समझने, उनसे प्रेरणा लेने और उन्हें स्मरण करने का अवसर प्रदान करना है, जिन्होंने गोवा की मुक्ति में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम में गोवा के मुख्यमंत्री डॉ प्रमोद सावंत, विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्यमंत्री श्रीपाद वाई नाइक, राज्यसभा सांसद सदानंद शेत तानावडे, पेरनेम के विधायक प्रवीण अर्लेकर, गोवा, दमन और दीव फ्रीडम फाइटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रोहिदास देसाई, राज्य सरकार मंत्री एवं अधिकारी और सत्याग्रहियों के परिजन उपस्थित थे।