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कृषि भारतीयों की बुनियादी संस्कृति-नायडू

कृषि एवं प्रौद्योगिकी चंद्रशेखर आजाद विवि का दीक्षांत

सरकार की कृषि एवं किसान कल्याण की कई योजनाएं

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Tuesday 5 December 2017 01:52:02 AM

m. venkaiah naidu with the faculty of chandra shekhar azad university

कानपुर। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा है कि अनुसंधान और वैज्ञानिक अभिनवों का उद्देश्य किसानों को लाभ पहुंचाना होना चाहिए। उपराष्ट्रपति ने कानपुर में कृषि एवं प्रौद्योगिकी चंद्रशेखर आजाद विश्वविद्यालय के 19वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि कृषि एवं प्रौद्योगिकी चंद्रशेखर आजाद विश्वविद्यालय कानपुर ने 1893 में एक कृषि विद्यालय के रूपमें अपनी यात्रा शुरू की थी, जो अब कृषि शिक्षा में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि इस संस्थान ने अपनी स्थापना से ही गुणवत्ता शिक्षण और अनुसंधान की एक समृद्ध परंपरा बनाए रखी है। उन्‍होंने कहा कि यहां विकसित खाद्यान्नों की बेहतर उपज वाली उन्‍नत किस्मों ने हरित क्रांति और भारत देश में एक जीवंत कृषि क्षेत्र के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि कृषि भारतीयों की बुनियादी संस्कृति है। उन्होंने कहा कि हरित क्रांति ने हमें आत्मनिर्भर बनाने और बढ़ती आबादी के खाद्यान्‍न आपूर्ति में सक्षम किया है। उन्होंने कहा कि कृषि को लाभदायक और टिकाऊ बनाने के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाना होगा, फसलों की विविधता को प्रोत्साहित करने के अलावा ग्रामीण सड़कों, बिजली, कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं, ग्रामीण गोदामों और प्रशीतन वाहनों के रूपमें अवसंरचना प्रदान करने पर जोर देने की जरूरत है। उन्‍होंने कहा कि किसानों को समय पर ऋण सुनिश्चित करने और कृषि पर सार्वजनिक खर्च में वृद्धि की भी आवश्यकता है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि समय की मांग है कि अब हमारी कृषि प्रणाली स्थायी हो, क्‍योंकि कृषि भूमि में कोई वृद्धि नहीं हुई है, जबकि खेती वाले परिवारों और उनकी जरूरतों में वृद्धि हो रही है।
वेंकैया नायडू ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, कृषि सिंचाई योजना, फार्म यांत्रिकरण अभियान, राष्ट्रीय कृषि विपणन योजना, ग्रामीण भंडारण योजना और मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना जैसी कई कृषि एवं किसान कल्याण योजनाएं शुरू की गई हैं, ताकि आजीविका सुरक्षा और खाद्य उत्पादन में वृद्धि हो। उन्होंने कहा कि नई और अभिनव प्रौद्योगिकियों के लाभों को किसानों को एक साधारण और सुगम भाषा में अवगत कराया जाना चाहिए। उपराष्ट्रपति ने स्नातकों को बधाई और आशीर्वाद दिया। उन्होंने उन्हें गौतम बुद्ध के 'आप्‍पो दीप्पो भव' जिसका अर्थ है 'स्‍वयं में ही प्रकाश बनो' के दर्शन का पालन करने की सलाह देते हुए कहा कि बुद्धि का प्रकाश दोनों वास्तविक एवं शाब्दिक रूपमें स्‍वयं आपको तथा पूरी मानवता को सफलता, शांति और समृद्धि के मार्ग का अनुसरण करने में सहायक हो सकता है। दीक्षांत समारोह में उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक, उत्तर प्रदेश के कृषिमंत्री सूर्यप्रताप शाही और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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