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साइकिल व पैदल पथों की जरूरत-उपराष्ट्रपति

हैदराबाद में शहरी मोबिलिटी भारत सम्मेलन व प्रदर्शनी

'शहरीकरण 21वीं शताब्दी की एक वास्तविकता है'

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Monday 6 November 2017 01:41:21 AM

urban mobility india conference & exhibition in hyderabad

हैदराबाद। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा है कि सतत और स्वच्छ शहरी मोबिलिटी के लिए योजना निर्माण एवं डिजाइन बनाने में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। वे हैदराबाद में 10वें शहरी मोबिलिटी भारत सम्मेलन और प्रदर्शनी-2017 और सीओडिएटीयू-2017 सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर केंद्रीय आवास और शहरी मामले के स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री हरदीप सिंह पुरी, तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मोहम्मद महबूब अली, सीओडीएटीयू फ्रांस के अध्यक्ष डोमिनिक बुसेरेयू, फ्रांस के भारत में राजदूत एलेक्जेंडर जिगलर और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। उपराष्ट्रपति ने कहा कि शहरीकरण 21वीं शताब्दी की एक वास्तविकता है, इस शताब्दी को शहरी शताब्दी भी कहते हैं। उन्होंने कहा कि 2011 की जनगणना स्पष्ट रूप से बताती है कि भारत में तेजी से शहरीकरण हो रहा है और प्रत्येक तीसरा व्यक्ति शहर का निवासी है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण के वर्तमान पैटर्न, शहरी मोबिलिटी प्रणाली के समक्ष नई चुनौतियां पेश कर रहे हैं।
उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा कि शहरी परिवहन पूरे विश्व की 25 प्रतिशत ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार है, यह शहर की स्थानीय हवा और ध्वनि प्रदूषण के लिए भी उत्तरदायी है, जो लोगों को अस्वस्थ बनाता है। उन्होंने कहा कि शहरी परिवहन व्यवस्था से ट्रैफिक की भीड़-भाड़ होती है, जिससे यात्रियों और परिवहन संचालकों को आर्थिक क्षति होती है और उत्पादन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि वाहनों की बढ़ती संख्या से ट्रैफिक पर भीड़-भाड़ और प्रदूषण का दबाव बढ़ रहा है तथा यात्रा अवधि लंबी होती जा रही है। उन्होंने प्रसिद्ध अमरीकी शहरी वास्तुविद और इतिहासकार लेविस मैमफोर्ट के कथन का उल्लेख किया कि ‘भीड़-भाड़ से बचने के लिए अधिक संख्या में सड़कों का निर्माण ठीक वैसा ही है, जैसे एक मोटा व्यक्ति अपने मोटापे से बचने के लिए अपना बेल्ट ढीला करता है।’ उन्होंने कहा कि भारत ने कई शहरों में सार्वजनिक परिवहन प्रणाली के विकास में बहुत उन्नति की है।
वेंकैया नायडू ने कहा कि कई शहरों में बड़ी तेजी से मेट्रो रेल का आगमन हुआ है, जिसमें दिल्ली सबसे आगे है। उन्होंने कहा कि कई शहरों में बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम यानी बीआरटीएस ने भी उल्लेखनीय प्रगति की है, इसके तहत 250 किलोमीटर की दूरी तक का संचालन किया जा रहा है तथा और भी 250 किलोमीटर दूरी के लिए बीआरटीएस व्यवस्था निर्माण के अधीन है। उन्होंने एनरिक पेनेलोसा का उल्लेख किया जो बोगोटा के मेयर हैं, जो कहते हैं कि ‘विकसित राष्ट्र वह नहीं है, जहां ग़रीब मोटरकार का इस्तेमाल करते हैं, बल्कि वह है, जहां अमीर सार्वजनिक परिवहन प्रणाली का उपयोग करते है।’ उपराष्ट्रपति ने कहा कि पैदल चलना या साइकिल की सवारी करना जैसी गैरमोटर आधारित परिवहन व्यवस्था न केवल यातायात के अंतिम गंतव्य तक जोड़ती है, बल्कि यह स्वास्थ्य पर भी अच्छा प्रभाव डालती है, सतत मोबिलिटी के लिए पैदल चलने और साइकिल की सवारी को प्रोत्साहन देना महत्वपूर्ण है।
उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा कि स्वस्थ जीवनशैली, मधुमेह और मोटापे से लड़ने तथा प्रदूषण को कम करने के लिए हमें अधिक पैदल पथों और साइकिल पथों की जरूरत है। उपराष्ट्रपति ने हैदराबाद मेट्रो रेल परियोजना के लिए तेलंगाना सरकार को बधाई देते हुए कहा कि परियोजना पूरी होने के बाद यह विश्व की सबसे बड़ी परियोजना होगी, जिसे सार्वजनिक और निजी भागीदारी के तहत निर्मित किया गया है। उन्होंने उन सभी को शुभकामनाएं दीं, जो शहरी क्षेत्रों में बेहतर मोबिलिटी प्रणाली निर्माण के लिए प्रयासरत हैं। गौरतलब है कि जो बात आज उपराष्ट्रपति कह रहे हैं, उसपर उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी की सरकार और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने काफी काम किया है। इस सरकार ने प्रदेश की राजधानी लखनऊ सहित पैदल और साइकिल पथ बनाए हैं, भले ही साइकिल सपा का चुनाव चिन्ह हो, जिसका अर्थ यह साबित हुआ कि उन्होंने इस तरह अपने चुनाव चिन्ह का ज्यादा प्रचार किया।

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