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दोहरी शिक्षा पद्धति विनाशकारी-लक्ष्य

'दलित समाज शिक्षित बने और अंधविश्वास छोड़े'

सीतापुर के गांव खाफाकलां में लक्ष्य का कैडर कैंप

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Monday 16 October 2017 05:35:04 AM

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सीतापुर। भारतीय समन्वय संगठन लक्ष्य की टीम ने दलित समाज में शिक्षा, बुनियादी अधिकारों, नशाखोरी और अंधविश्वास के प्रति जागरुकता और समाज के उत्‍थान के लिए प्रेरणाप्रद कार्यक्रम चलाने की श्रृंखला में जिला सीतापुर में महमूदाबाद क्षेत्र के ग्राम खाफाकलां में एक दिवसीय कैडर कैंप का आयोजन किया, जिसमें गांव की महिलाओं, युवतियों तथा युवाओं ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया और लक्ष्य की महिला कमांडरों के ओजस्वी विचारों को सुना। इससे पहले हरदोई में कैडर कैंप लगा था, उसमें भी बड़ी संख्या में भागीदारी देखी गई। गौरतलब है कि दलित समाज में जागरुकता के रूप में पहली बार इस प्रकार के आयोजन देखने को मिल रहे हैं, दलित समाज ने अबतक राजनीतिक रैलियों और जनसभाओं को ही देखा है, मगर समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचते हुए उसकी सुनने और अपनी बात कहने के ऐसे अवसर नहीं देखे गए हैं। दलित समाज की महिलाएं अपने दुखदर्द सुनाती हैं और लक्ष्य की महिला टीम उनकी सहेली बनकर उनकी समस्याओं के समाधान के रास्ते खोजती है।
लक्ष्य कमांडर सुषमा बाबू ने कैडर कैंप को संबोधित करते हुए आह्वान किया कि घर की महिलाएं और बालिकाएं अपनी घरेलू समस्याओं के समाधान के लिए पहल करें, परिवार की एकजुटता के साथ घर में प्रारंभिक शिक्षा और विकास की सीढ़ी बनें। उन्होंने महिला शिक्षा में अनुकरणीय योगदान के लिए माता सावित्रीबाई फूले के योगदान की विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि जिस दिन बहुजन समाज शिक्षा, नशाखोरी, अंधविश्वास के प्रति जागरुक हो जाएगा, वह खुद-ब-खुद औरों की तरह बड़ी ताकत बन जाएगा। उन्होंने देश में दोहरी शिक्षा पद्धति की आलोचना की और कहा कि सरकारें शिक्षा पद्धति सुधारें, ताकि लोगों को रोज़गार मिल सके।
लक्ष्य कमांडर राज कुमारी कौशल ने साफ-सफाई एवं बच्चों की शिक्षा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज को रूढ़ीवादी व्यवस्था और अंधविश्वास से दूर रहना चाहिए, क्योंकि ये दोनों उसके विकास की बहुत बड़ी बाधाएं हैं। लक्ष्य कमांडर मुन्नी बौद्ध ने समाज को बाबा साहब डॉ भीमराव अम्बेडकर के संघर्षों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बहुजन समाज तथा महिलाओं को आज जो भी अधिकार मिले हुए हैं, वह केवल बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर के संघर्ष का ही परिणाम हैं। लक्ष्य कमांडर रेखा आर्या ने लक्ष्य संगठन के कार्य एवं उद्देश्य बताए तथा बहुजन समाज के महापुरुषों और विशेष रूपसे मान्यवर कांशीराम के बहुजन जनजागरण में योगदान की विस्तारपूर्वक चर्चा की। उन्होंने कहा कि बहुजन समाज का उद्धार केवल उनके महापुरुषों के बताए मार्ग से ही सम्भव है। उन्होंने महिलाओं पर अत्याचारों पर चिंता प्रकट की और महिलाओं से शोषण के खिलाफ आवाज़ बुलंद करने की अपील की।
लक्ष्य कमांडर संघमित्रा गौतम ने पंचशील त्रिशरण, बुद्ध और उनके धम्म पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि तथागत गौतम बुद्ध की शिक्षाओं पर ही चला जाए, तथागत गौतम की शिक्षाओं से ही प्रेरित होकर डॉ भीमराव अम्बेडकर ने 14 अक्टूबर 1956 को अपने लाखों अनुयायियों के साथ बौद्धधर्म अपनाया था। लक्ष्य कमांडर प्रमोद भारती ने छत्रपति शाहूजी महाराज के बहुजन समाज के उत्थान के लिए कार्यों पर विस्तृत जानकारी दी। लक्ष्य कमांडर मंजीत कौर ने कहा कि यह कैंप दलित समाज की जागरुकता के लिए शानदार उत्तरदान हैं। कार्यक्रम का संचालन आरएल बौद्ध ने किया। इसके आयोजन में सत्यप्रकाश मौर्य और कौशलेंद्र मौर्य की मुख्य भूमिका रही। कैडर कैंप में आए लोगों और विशेषतौर से महिलाओं, युवतियों और युवाओं ने लक्ष्य की महिला कमांडरों की प्रेरणा की भूरी-भूरी प्रशंसा की।

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