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भारतीय हज समिति ने कीं कई सिफारिशें

अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री नकवी को रिपोर्ट सौंपी गई

हज की सिफारिशें लागू होने पर हाजियों को बड़ी राहत

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Sunday 8 October 2017 07:06:07 AM

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नई दिल्ली। भारतीय हज समिति ने अपनी महत्वपूर्ण सिफारिशों के साथ हजनीति 2018-22 की रिपोर्ट केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याणकार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी को सौंप दी है। अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने 2013-17 के लिए भारत सरकार की हजनीति की समीक्षा करने और हजनीति 2018-22 के लिए रूपरेखा का सुझाव देने के लिए समिति गठित की थी। इस अवसर पर अल्पसंख्यक मंत्रालय में सचिव अमेयसिंग लुइखम, भारतीय हज समिति के अध्यक्ष चौधरी महबूब अली कैसर, सऊदी अरब में भारत के राजदूत अहमद जावेद, भारतीय हज समिति के सदस्य और अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। गौरतलब है कि हज भारत सरकार की सीमाओं से बाहर किए गए सर्वाधिक जटिल संगठनात्मक कार्यों में से एक है, यद्यपि यह पांच दिन का धार्मिक समागम होता है, मगर इसके लिए वर्षभर प्रबंधकीय कार्रवाई चलती रहती है। एचपीआरसी की रिपोर्ट जांच की जाएगी और स्वीकृत सिफारिशों को हज 2018 से आगे कार्यांवित करने के लिए सभी संबंधितों से रणनीति साझा की जाएगी। उम्मीद की गई है कि हज का प्रबंधन और आगे सरल होगा, जिससे भारतीय हाजियों के लिए आरामदायक और किफायती हज का उद्देश्य पूरा करने में सहायता मिलेगी।
भारतीय हजयात्री, जो सबसे बड़े राष्ट्रीय समूह में से एक होते हैं, दो माध्यमों से हज करते हैं-पहला भारतीय हज समिति और दूसरा पंजीकृत निजी टूर आपरेर्ट्स के जरिए। हज समिति अधिनियम 2002 के अधीन स्थापित भारतीय हज समिति इसके माध्यम से हज करने वालों के लिए प्रबंध करने के लिए उत्तरदायी होते हैं। सऊदी अरब में एचसीओआई के लिए सभी व्यवस्थाओं का समन्वय भारत के महाकौंसलावास जेद्दा करता है। हज-2013 के बाद सऊदी अरब सरकार ने भारत के लिए हजकोटा 136020 निर्धारित किया था। वर्ष 2016 में 135902 ने हज किया, जिसमें 99902 भारतीय हज समिति के माध्यम से गए थे और 36000 निजी टूर आपरेटरों के माध्यम से गए। हज-2017 के लिए हजकोटा बढ़ाकर 170025 कर दिया गया, जिसमें से 1,25,025 का कोटा भारतीय हज समिति को और 45,000 का कोटा निजी टूर आपरेटरों को आवंटित किया गया है।
भारतीय हज समिति और निजी टूर आपरेटरों के लिए हजनीति के बारे में उच्चतम न्यायालय के निर्देशों को देखते हुए मौजूदा नीतियों की समीक्षा करने और एक नई नीति बनाने का निर्णय लिया गया, तद्नुसार अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने एक समिति गठित की, जिसके संयोजक भारत सरकार के पूर्व सचिव अफजल अमानुल्लाह और भूतपूर्व सीजीआई जेद्दा थे। इनके अलावा बॉम्बे उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस एसएस पार्कर, कैसर शमीम, भारतीय हज समिति के पूर्व अध्यक्ष कमल फारूकी, प्रसिद्ध चार्टर्ड एकाउंटेंट एवं मुस्लिम विद्वान इसके सदस्य थे। अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय में हजप्रभारी संयुक्त सचिव जे आलम समिति के सदस्य सचिव थे। समिति के विचारार्थ विषयों में-भारतीय हज समिति और निजी टूर आपरेटरों से संबंधित मौजूदा हजनीति के उद्देश्यों और उपलब्धियों की रोशनी में इसकी समीक्षा करना। हजनीति के संबंध में उच्चतम न्यायालय के विभिन्न निर्देशों के निहित प्रभावों की छानबीन करना और ऐसे निर्देशों की रोशनी में हजनीति में उपयुक्त संशोधन सुझाना शामिल था।
हज सब्सिडी से संबंधित मुद्दों सहित भारतीय हज समिति ने हज तीर्थयात्रियों के लिए आवास और हवाईयात्रा के प्रबंधों की कारगरता की समीक्षा करना, भारतीय हज समिति और सीजीआई की कार्य प्रणाली में अंतर संबंधों और तालमेल की कारगरता की छानबीन करना, हज तीर्थयात्रियों के हितों की रक्षा के लिए पीटीओ के लिए पारदर्शिता, उपभोगता संतुष्टि और प्रकटीकरण अपेक्षाओं के पहलुओं की छानबीन करना, ताकि नई नीति को तीर्थयात्रियों के लिए अधिक सहायक बनाया जा सके। निजी टूर आपरेटरों के बीच उचित प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने और उनके द्वारा प्रदान की गई सेवाओं के लिए अधिक महत्व के लिए उपाय सुझाना। एचसीओआई और पीटीओ के लिए हज नीति के संगत अन्य किन्हीं मुद्दों की छानबीन करना जैसे मुद्दों पर भारतीय हज समिति ने 15 फरवरी 2017 से अपना कार्य करना शुरू किया और सूचना संकलित करने तथा अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देने के लिए बहुतसी बैठकें कीं, जिसने सभी स्टेकहोल्डरों, मुस्लिम समुदाय के नेताओं और सामान्य जनता के साथ व्यापक परामर्श किया।
भारतीय हज समिति ने विभिन्न राज्य, संघ राज्य क्षेत्र के साथ पारस्परिक बातचीत के लिए मुंबई, कोलकाता और नई दिल्ली में बैठकें कीं और निजी टूर आपरेटरों और उनकी एसोसिएशनों के साथ मुंबई में बातचीत की। समिति नागर विमानन मंत्रालय और एयर इंडिया तथा सऊदी एयरलाइंस सहित हज एयर चार्टर आपरेशनों में लगी एयरलाइनों के पदाधिकारियों, जहाजरानी मंत्रालय और भारतीय जहाजरानी निगम के पदाधिकारियों से भी मिली। समिति ने हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू के सभी अग्रणी समाचार पत्रों में विज्ञापन देते हुए आमजनता से सुझाव मांगे और 25 मई 2017 को नई दिल्ली में आम जनता और अन्य स्टेकहोल्डरों के साथ व्यक्तिगत बातचीत की। हज समिति ने सऊदी अरब में विभिन्न स्थानों पर भारत के महाकौंसलावास यानी सीजीआई जेद्दा की हज व्यवस्थाओं की समग्र स्थिति को देखने के लिए अप्रैल 2017 में सऊदी अरब का दौरा किया था। समिति ने महाकौंसल और उसकी टीम के साथ कौंसलावास की भूमिका और कार्यों के बारे में बातचीत की और भारतीय हज समिति तथा सीजीआई के बीच पारस्परिक संबंध और समन्वय की प्रभावशीलता पर विचार-विमर्श किया।
हज समिति ने मोस्सासा के प्रचालन अधिकारियों और हज प्रचालन में लगे पदाधिकारियों अर्थात नक्काबा सय्यरत, मकता बुलवुकला, अदिला एस्टेब्लिशमेंट, सऊदी एयरलाइनों और जीएसीए आदि के प्रतिनिधियों के साथ परस्पर बातचीत की। सऊदी अरब में रह रहे भारतीय समुदाय के विभिन्न वर्गों के साथ अपने विचार व्यक्त किए। मक्का और अजीजीया जहां भारतीय हाजियों के लिए भवन किराए पर लिए जाते हैं, मीना, मुजादलिफा और अराफात तथा माशेर क्षेत्र के मेट्रो ट्रेन स्टेशनों का फील्ड दौरा भी किया। हज समिति ने व्यापक परामर्श और बातचीत के बाद अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप दिया। समिति की मुख्य सिफारिशें इस प्रकार हैं-भारतीय हज समिति और निजी टूर आपरेटरों के बीच कोटे का वितरण अगले 5 वर्ष केलिए 70:30 के अनुपात में युक्तिसंगत बनाया जाए। राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों के बीच सीटों का वितरण उनकी मुस्लिम आबादी के अनुपात के साथ-साथ प्राप्त आवेदनों के अनुपात में किया जाए। मेहरम के लिए कोटा 200 से बढ़ाकर 500 किया जाए।
हज के लिए सिफारिशों के अनुसार जम्मू एवं कश्मीर के लिए विशेष कोटा 1500 से बढ़ाकर 2000 किया जाए, 500 से कम आवेदन प्राप्त करने वाले राज्यों या संघ राज्य क्षेत्रों को अधिशेष सीटों के वितरण में प्राथमिकता दी जाए, इससे अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, दादर एवं नागर हवेली, दमन एवं दिव तथा पुद्दुचेरी जैसे संघराज्य क्षेत्रों के साथ-साथ छत्तीसगढ़, गोवा, हिमाचल प्रदेश और मणिपुर जैसे छोटे राज्यों को लाभ होगा। आवेदकों की आरक्षित श्रेणी अर्थात 70+ तथा चौथीबार वालों को समाप्त किया जाए, 45 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को मेहरम के बिना हज के लिए चार या इससे अधिक के समूह में जाने की अनुमति दी जाए, मक्का, अजीजीया और आसपास के क्षेत्रों में केवल एक श्रेणी का आवास यात्रियों केलिए परिवहन की सुविधाओं के साथ नई बहुमंजिला आधुनिक इमारतों में किराए पर लिया जाए, मदीना में सभी आवास केवल मरकजिया में ही किराए पर लिए जाएं, भारतीय हाजियों को ठहराना मीना की पारंपरिक सीमाओं के भीतर सुनिश्चित किया जाए, प्रत्येक हाजी के लिए अदाही कूपन अनिवार्य बनाए जाएं, ठेकेदारों के संघ को पारदर्शी बोली प्रक्रिया से जोड़ा जाए, बेहतर बातचीत से किराए की दर नीचे लाई जाए, आरोहण स्थल 21 से घटाकर 9 किए जाएं, जो दिल्ली, लखनऊ, कोलकाता, अहमदाबाद, मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, बैंगलूरू और कोचीन में हों।
हज समिति के अनुसार इन आरोहरण स्थलों पर उपयुक्त हजगृहों का निर्माण किया जाए, राज्य और जिलों को प्रत्येक आरोहण स्थल के साथ उचित रूपसे जोड़ा जाए, बंद कर दिए गए आरोहण स्थलों पर निर्मित सुविधाओं का उपयोग वर्षभर प्रशिक्षण, हाजियों के अभिमुखीकरण और समुदाय के लिए अन्य उत्पादक प्रयोगों के लिए किया जाए, पोत के द्वारा हज यात्रा करने के बारे में सऊदी सरकार से परामर्श किया जाए और उसके बाद ऐसी यात्रा के लिए बाजार की थाह लेने के लिए रूचि की अभिव्यक्ति का विज्ञापन दिया जाए। निजी टूर आपरेटरों के लिए सरकार की नीति के अंतर्गत पीटीओ आवेदनों पर कार्रवाई के लिए एक मजबूत पोर्टल विकसित किया जाए, हज प्रभाग के निर्णयों से दुखी पीटीओ के अभ्यावेदनों पर विचार करने के लिए 2-3 विशेषज्ञों की एक समिति बनाई जाए, पीटीओ को उनके अनुभव और वित्तीय क्षमता के अनुसार तीन वर्ग में वर्गीकृत किया जाए, पीटीओ का कोटा वैयक्तिक पीटीओ को सीटों का 200:100:50 के अनुपात में आवंटन करने के प्रावधान के साथ तीनों वर्ग के बीच 30:40:30 के अनुपात में विभाजित किया जाए।
सिफारिशों के अनुसार पीटीओ के लिए एक व्यापक पैनलीकरण नीति तैयार की जाए, जिससे आसानी एवं तेजीसे नवीकरण करने में सुविधा होगी। पैनल में शामिल करना दस्तावेजों के साथ-साथ पीटीओ के वास्ताविक निरीक्षण के आधार पर किया जाए, पीटीओ को सूची से निकालने और प्रतिभूति जमा को जब्त करने के लिए कठोर मानकों का अनुसरण किया जाए। पीटीओ यात्रियों से केवल बैंकखाते के माध्यम से पूर्ण पैकेज लागत वसूल करें और भारत से यात्रियों के प्रस्थान से पूर्व मंत्रालय को विवरण प्रस्तुत करें। प्रत्येक पीटीओ के पास पूर्व निर्धारित प्रकटन मानदंडों के साथ एक सही-सही वेबसाइट होनी चाहिए। पीटीओ का नाम बदलकर हज समूह संगठक किया जाए। अन्य सिफारिशें इस प्रकार हैं-बेहतर समन्वय के लिए अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के सचिव और विदेश मंत्रालय के सचिव की सहअध्यक्षता में अन्य संबंधित मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संचालन समिति का गठन किया जाए। भारत से दो सदस्यीय हज सद्भावना प्रतिनिधिमंडल जारी रहे। सीरिया, ईरान, ईराक और जोर्डन तक उमरा और जियारत शामिल करने, पुराने उपबंधों को हटाने, भारतीय हज समिति में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय का अधिकारी शामिल करने आदि के बारे में हज समिति अधिनियम में संशोधन सहित विभिन्न मंत्रालयों और एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और जवाबदेही सुनिश्चित करने की कई अन्य सिफारिशें की गई हैं। 

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