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इलाहाबाद संगम पर जैवविविधता पार्क

नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत कछुआ पालन केंद्र

गंगा-यमुना और सरस्‍वती की स्वच्छता पहल

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Thursday 5 October 2017 02:19:47 AM

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इलाहाबाद। इलाहाबाद में करीब 1.34 करोड़ रुपये की लागत से गंगा-यमुना और सरस्‍वती के संगम पर नदी जैवविविधता पार्क विकसित किया जाएगा और कछुआ पालन केंद्र यानी त्रिवेणी पुष्‍प पर स्‍थायी नर्सरी तथा अस्‍थायी वार्षिक पालन स्‍थापित किया जाएगा। भारत सरकार ने गंगा नदी में समृद्ध जलीय जैवविविधता पर मानवजनित दबाव से रक्षा के लिए नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत इलाहाबाद में कछुआ शरणस्‍थली विकसित करने और संगम पर नदी जैवविविधता पार्क विकसित करने को मंजूरी दे दी है। उल्लेखनीय है कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से कछुआ और मगरमच्छ स्वच्छ जल के लिए जरूरी हैं, ये ही उन प्राणियों में प्रमुख माने जाते हैं, जो बहते जल को वैक्टीरिया रहित बनाते हैं।
नमामि गंगे परियोजना मंच के जरिए आगंतुक अपनी पारिस्थितिकीय प्रणाली, अपनी भूमिका और जिम्‍मेदारियों को जान सकेंगे एवं पर्यावरण के साथ सहअस्तित्‍व की जटिलता को भी समझ सकेंगे। इससे लोग महत्‍वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों पर पड़ने वाले मानवीय गतिविधियों के प्रभावों के प्रति जागरुक हो सकेंगे। परियोजना में गंगा नदी के बारे जनजागरुकता के कार्य को उत्‍साह से किया जाएगा। यह परियोजना 100 प्रतिशत केंद्र पोषित परियोजना है। सरकार ने गंगा नदी के महत्‍व और इसके संरक्षण की आवश्‍यकता के प्रति जागरुकता लाने की भी स्‍वीकृति दी है।
गंगा नदी में घड़ियाल, डॉलफिन तथा कछुए सहित 2000 जलीय प्रजातियां हैं, जो देश की आबादी की 40 प्रतिशत की जीवनरेखा की समृद्ध जैवविविधता को दिखाती है। इलाहाबाद में गंगा और यमुना में विलुप्‍त हो रही कछुओं की प्रजातियां जैसे-बतागुर कछुगा, बतागुर धोनगोका, निल्‍सोनिया गैंगेटिका, चित्रा इंडिका, हरदेला टूरजी आदि हैं। गंगा और यमुना में राष्‍ट्रीय जलीय प्रजातियां-गांगेय डॉलफिन और घड़ियाल हैं, यहां असंख्‍य प्रवासी और आवासीय पक्षियों ने भी अपना बसेरा बना रखा है।

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