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स्वच्छता सेवा ईश्वर की आराधना के समान है!

गांधीजी का यह वाक्य हम सभी आत्मार्पित करें-राष्ट्रपति

बापू और सरदार पटेल भारत को गुजरात के उपहार हैं!

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Monday 2 October 2017 06:09:36 AM

president ramnath kovid at the kirti mandir porbandar, gujarat

पोरबंदर (गुजरात)। राष्ट्रपति रामनाथ कोविद ने गांधी जयंती पर राष्ट्र के नाम संदेश में कहा है कि गांधी जयंती सादा जीवन और उच्च नैतिक आदर्श के प्रतिरूप में देश को नई सोच और एक नई दिशा देती है, उनका अहिंसा और शांति का दर्शन आज के युग में और भी अधिक प्रासंगिक है, आइए! गांधीजी के वाक्य को हम सभी आत्मार्पित करें। राष्ट्रपति ने कहा कि चरखे और खादी के जरिए गांधीजी ने देश को आत्मनिर्भरता और श्रम की गरिमा का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता केवल सफाई कर्मचारियों और सरकारी विभागों की ही जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह एक बहुसाझेदारी राष्ट्रीय अभियान है, लगभग सौ वर्ष पूर्व गांधीजी ने स्वयं शौचालय की सफाई करके हमें यह सिखाने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि आज भारत स्वच्छता ही सेवा अभियान के जरिए स्वच्छता और हाईजिन के लिए संघर्ष कर रहा है। राष्ट्रपति ने कहा कि गांधीजी कहते थे कि स्वच्छता ईश्वर की आराधना के समान है, उन्होंने तीन आयामों-स्वच्छ मस्तिष्क, स्वच्छ शरीर और स्वच्छ वातावरण के सर्वोच्च मानदंड स्‍थापित किए।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविद ने कहा कि हमें जन स्वच्छता, व्यक्तिगत स्वच्छता और वातावरण की स्वच्छता के लिए प्रतिबद्ध होना ही होगा, यह एक ऐसा राष्ट्रीय आंदोलन है, जिसमें सभी लोगों की भागीदारी आवश्यक है और स्वच्छ भारत मिशन के लक्ष्य को हासिल करना गांधीजी की जयंती पर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी। राष्ट्रपति रामनाथ कोविद ने पोरबंदर में महात्मा गांधी की जन्मस्थली कीर्ति मंदिर के दर्शन किए और वहां राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि अर्पित की। राष्ट्रपति ने इसके बाद कीर्ति मंदिर में ग्रामीण गुजरात को खुले में शौच से मुक्त घोषित करने के लिए आयोजित समारोह को संबोधित किया। राष्ट्रपति ने कहा कि ग्रामीण ओडीएफ के लक्ष्य को प्राप्त करते हुए गुजरात ने गांधीजी को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की है। उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी और उनके पूरे दल की ओडीएफ के लिए सराहना की। राष्ट्रपति ने कहा कि 2 अक्टूबर 2019 तक स्वच्छ भारत मिशन के लक्ष्यों को प्राप्त करना ही राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जन्मशताब्दी पर उन्हें श्रद्धांजलि है और गुजरात की ओडीएफ उपलब्धि स्वच्छ भारत की दिशा में एक बड़ा कदम है।
पोरबंदर में राष्ट्रपति रामनाथ कोविद ने देश की एकता और अखंडता के लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल का भी स्मरण किया, जिनका जन्मदिवस भी इसी माह 31 अक्टूबर को है। उन्होंने कहा कि जब महात्मा गांधी स्वतंत्रता आंदोलन के नेता थे, तब सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय एकता के मूर्तिकार थे, बापू और सरदार पटेल के योगदान के बिना आधुनिक भारत की कल्पना कतई असंभव है, यह दोनों महापुरूष भारत को गुजरात का उपहार हैं। रामनाथ कोविद ने कहा कि भारत की आजादी के निर्णय के समय देश का लगभग चालीस प्रतिशत क्षेत्र रजवाड़ों के अधीन था, उनके कारण जो समस्या थी, उसके विषय में बापू ने सरदार वल्लभभाई पटेल को लिखा था कि राज्यों की समस्या इतनी कठिन है कि केवल वे ही इसका समाधान कर सकते हैं। रामनाथ कोविद ने कहा कि इस महान राज्य ने देश को दो-दो प्रधानमंत्री भी दिए हैं। उन्होंने कहा कि मुझे अपनी युवावस्था में मोरारजीभाई देसाई के साथ काम करने का सौभाग्य मिला है, मोरारजी देसाई अनुशासन और नैतिकता पर अडिग रहने वाले आदर्शवादी राजनेता थे। रामनाथ कोविद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री के रूपमें जैसी निष्ठा के साथ गुजरात को देश में अग्रणी राज्य बनाया था, वैसी ही कर्मठता के साथ वे विश्व में भारत को अग्रणी राष्ट्र बनाने के कार्य में तत्पर हैं।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविद ने कहा कि एक अग्रणी राष्ट्र के लिए स्वच्छता का होना भी बुनियादी शर्त है, प्रधानमंत्री ने स्वच्छता को उच्चतम प्राथमिकता दी है और इसे जन आंदोलन का रूप दिया है। रामनाथ कोविद ने स्वच्छता के मामले में बाबू की स्मृतियों के पन्ने पलटते हुए कहा कि सन 1915 में शांतिनिकेतन में बापू ने विद्यार्थियों के सामने उदाहरण रखा, वे अपने सिर पर मल से भरी छबड़ी लेकर खेतों में गए, वहां गड्ढा खोदा, मल को गड्ढे में डाला और गड्ढे को मिट्टी से पाट दिया। उन्होंने बताया कि दो साल पहले ही नोबल सम्मान पा चुके गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर उस समय दुनिया में सबसे प्रसिद्ध भारतवासी थे, गुरुदेव ने इसपर कहा कि विद्यार्थियों को अपना काम खुद करने की जो सीख वे बरसों में नहीं दे सके थे, गांधीजी ने कुछ ही घंटों में उसे करके दिखाया। राष्ट्रपति ने कहा कि बापू कहा करते थे कि जबतक आप अपने हाथ में झाड़ू और बाल्टी नहीं उठाएंगे, तबतक आप अपने गाँव और शहर को साफ नहीं कर पाएंगे। रामनाथ कोविद ने कहा कि 2014 की गांधी जयंती के दिन से जो 'स्वच्छ भारत मिशन' पूरे देश में चल रहा है, उसे महात्मा गांधी की 150वीं पुण्यतिथि के दिन यानी 2 अक्टूबर 2019 को पूरा कर लेने का देश का लक्ष्य है और ग्रामीण गुजरात की इसमें सफलता स्वच्छ भारत की ओर एक बहुत बड़ा कदम है।
रामनाथ कोविद ने कहा कि सामाजिक और आर्थिक विकास के अनेक पैमानों पर गुजरात सारे देश में एक अग्रणी राज्य है, बिजली के क्षेत्र में गुजरात की सफलता का अध्ययन पूरे भारत में किया जाता है, कृषि और सिंचाई के क्षेत्र में यहां के सफल प्रयोगों का देशव्यापी विस्तार दिया जा रहा है, सरदार सरोवर योजना के जरिये कम पानी वाले क्षेत्रों में नर्मदा का पानी पहुंचाने का उदाहरण प्रभावशाली है। उन्होंने कहा कि यह खुशी की बात है कि गुजरात सरकार के मुख्यमंत्री गुजरात को अन्य क्षेत्रों के साथ-साथ स्वच्छता के क्षेत्र में भी ऊपर की पायदानों पर ले गए हैं, इस राज्य के स्वच्छ गुजरात, स्वस्थ गुजरात अभियान ने खुले में शौच के अभिशाप से मुक्ति पाई है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि एक अनुमान के अनुसार गंदगी से पैदा बीमारियों की वजह से रोज़ 1000 बच्चों की मृत्यु होती है, बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर बुरा असर पड़ता है, स्वच्छता के लिए काम करना सही मायनों में गरीबों की सेवा करना है।

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