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हिंदी में भी रोज़गार के अवसर हों-राष्‍ट्रपति

गृह मंत्रालय का विज्ञान भवन में हिंदी दिवस समारोह

विदेशी मूल के विद्वानों का भी हिंदी में योगदान

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Friday 15 September 2017 06:18:37 AM

president ram nath kovind presented the rajbhasa puruskar

नई दिल्ली। भारत सरकार के गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग ने विज्ञान भवन नई दिल्‍ली में हिंदी दिवस समारोह का आयोजन किया, जिसमें राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविद ने देशभर में विभिन्‍न मंत्रालयों, विभागों और कार्यालयों के प्रमुखों को राजभाषा कार्यांवयन में उत्‍कृष्‍ट कार्य हेतु पुरस्‍कृत किया। पुरस्‍कार प्राप्तकर्ताओं को शील्‍ड तथा प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। कार्यक्रम में राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविद ने कहा कि हमारे महापुरुषों ने हिंदी की ताकत को पहचाना और स्‍वतंत्रता के बाद हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया। उन्होंने कहा कि संविधान सूची में 22 भाषाओं को मान्‍यता दी गई है और इन सभी के संदर्भ में निर्देश भी दिए गए हैं। राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविद ने कहा कि हिंदी सभी भारतीय भाषाओं के बीच संपर्क भाषा की भूमिका निभाती है, यह हमारी राष्‍ट्रीय एकता को मजबूत करती है, यह एक सार्थक पहल होगी, जब स्वेच्छा और आपसी सद्भाव से प्रेरित होकर हिंदीभाषी लोग अन्य क्षेत्रीय भाषाओं को सीखें और गैर हिंदीभाषी भी इसी प्रकार से हिंदी को अपनाएं।
राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविद ने भाषानीति और शिक्षानीति में आपसी सहयोग और आदान-प्रदान के आधार पर बहुभाषिकता को बढ़ावा देने, आम सहमति से हिंदी को संपर्क भाषा के रूप में आगे बढ़ाने एवं हिंदी में रोज़गार के अवसर उपलब्‍ध कराने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 तक इंटरनेट पर हिंदी का उपयोग बढ़ेगा और डिजिटल साक्षरता, ई-महाशब्‍दकोश से लोग लाभांवित होंगे। उन्होंने कहा कि हिंदी का अस्तित्‍व एवं विकास गैर हिंदी भाषी लोगों के बोलने और समझने तथा उपयोग करने पर बढ़ता है। उनका कहना था कि विदेशी मूल के विद्वानों ने भी हिंदी की सेवा में महत्‍वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि आज आवश्‍यकता इस बात की है कि हिंदी भाषी लोगों को आगे आकर सभी भाषाओं के साथ समन्‍वय बिठाते हुए हिंदी की प्रगति में योगदान करना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि यह सभी का दायित्‍व बनता है कि हम सभी भाषाओं का सम्‍मान करें।
हिंदी दिवस पर हुए इस कार्यक्रम की अध्‍यक्षता गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने की। कार्यक्रम में गृह राज्‍यमंत्री हंसराज गंगाराम अहीर और किरेन रिजिजू, भारत सरकार के विभिन्‍न मंत्रालयों, विभागों, उपक्रमों आदि के मंत्री, संसद सदस्‍य तथा वरिष्‍ठ अधिकारी भी मौजूद थे। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब-जब देश को एकजुट करने की आवश्‍यकता पड़ी है, तब-तब हिंदी भाषा ने हमेशा महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा की है। उन्होंने कहा कि देश के स्‍वतंत्रता आंदोलन में हिंदी ने राष्‍ट्रप्रेम और स्‍वाभिमान की अद्भुत भावना जागृत करने में अहम भूमिका निभाई थी। अहिंदी भाषी के कई महापुरुषों का जिक्र करते हुए उनका कहना था कि राष्ट्रपिता महात्‍मा गांधी ने कहा था कि स्‍वतंत्रता आंदोलन मेरे लिए केवल स्‍वराज का नहीं अपितु स्‍वभाषा का भी प्रश्‍न है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि राष्‍ट्र के एकीकरण के लिए सर्वमान्‍य भाषा से प्रभावशाली और बलशाली तत्व और कोई नहीं है। उन्होंने कहा कि संविधान ने हम सब पर राजभाषा हिंदी के विकास और प्रयोग-प्रसार का दायित्‍व सौंपा है, यह कार्य सभी के सहयोग और सद्भाव से ही संभव है। उन्‍होंने कहा कि संविधान के अनुच्‍छेद 351 के अनुसरण में क्षेत्रीय भाषाओं के प्रचलित एवं लोकप्रिय शब्‍दों को ग्रहण करके हिंदी के शब्‍द भंडार को निरंतर समृद्ध करने की आवश्‍यकता है। गृहमंत्री ने कहा कि हमारे लोकतंत्र को निरंतर प्रगतिशील और अधिक मजबूत बनाने के लिए हमें संघ के कामकाज में हिंदी का और राज्‍यों के कामकाज में उनकी प्रांतीय भाषाओं का प्रयोग बढ़ाना होगा। राजनाथ सिंह ने कहा कि समय आ गया है कि हम विदेशी भाषा के प्रति अत्‍यधिक आकर्षण की वर्षों पुरानी अपनी मानसिकता को बदलें और अपनी भाषाओं के सामर्थ्य और स्‍वाभाविक शक्‍ति को पहचानकर इन्‍हें मन से अपनाएं।
केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि मातृभाषा हिंदी न होने पर भी उन्‍हें हिंदी भाषा का उपयोग करने में गर्व की अनुभूति होती है। उन्‍होंने कहा कि संविधान की अपेक्षाओं के अनुरूप हिंदी का प्रयोग, विकास एवं प्रचार-प्रसार सतत् रूपसे करना देश के हर नागरिक का उत्तरदायित्व है। उन्‍होंने कहा कि सरकारी कामकाज में हिंदी का प्रयोग बढ़ा है, लेकिन अब भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। उन्होंने कहा कि राजभाषा नीति का मुख्य उद्देश्य सरकारी कामकाज को मूल रूपसे हिंदी में करना है, कार्यालयीन कार्य मूल रूपसे हिंदी में किए जाने से ही राजभाषा हिंदी का प्रयोग बढ़ेगा तथा सही अर्थों में राजभाषा नीति का कार्यांवयन संभव होगा। गृह राज्यमंत्री ने केंद्र सरकार के प्रशासनिक प्रधानों से यह अनुरोध भी किया कि वे अपने कार्यालयों में राजभाषा संबंधी सभी कार्यकलापों में व्यक्तिगत रुचि लेते हुए सरकार की राजभाषा नीति से संबंधित अधिनियम एवं नियमों तथा राजभाषा हिंदी के कार्यांवयन से संबंधित राष्ट्रपति के आदेशों का गंभीरता से अनुपालन सुनिश्चित कराएं।
किरेन रिजिजू ने राष्‍ट्रप्रेम की भावना से एकजुट होकर हिंदी को यथोचित सम्मान देते हुए एक सशक्त, श्रेष्‍ठ और आधुनिक भारत के निर्माण के लिए मिल कर कार्य करने के लिए कहा। इस मौके पर राजभाषा विभाग के सी डैक के सहयोग से तैयार किए गए लर्निंग इंडियन लैंग्‍वेज विद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (लीला) के मोबाइल ऐप का लोकार्पण भी किया गया। इस ऐप से देशभर में विभिन्‍न भाषाओं के माध्‍यम से जन सामान्‍य को हिंदी सीखने में सुविधा और सरलता होगी तथा हिंदी भाषा को समझना, सीखना तथा कार्य करना संभव हो सकेगा। सचिव राजभाषा ने कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों का आभार व्‍यक्‍त किया तथा सभी पुरस्‍कार विजेताओं को बधाई दी।
ज्ञातव्य है कि हिंदी भाषा के देशव्‍यापी प्रसार और स्‍वीकार्यता को देखते हुए 14 सितंबर 1949 को इसे संघ की राजभाषा का दर्जा दिया गया था। इस दिवस की स्‍मृति में प्रतिवर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूपमें मनाया जाता है तथा विभिन्‍न मंत्रालयों, विभागों में राजभाषा हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए हिंदी सप्‍ताह, पखवाड़ा और माह का आयोजन किया जाता है। इस क्रम में गृह मंत्रालय का राजभाषा विभाग प्रत्‍येक वर्ष हिंदी दिवस समारोह का आयोजन करता है, जिसमें वर्षभर के दौरान राजभाषा हिंदी में उत्‍कृष्‍ट कार्य हेतु राजभाषा गौरव और राजभाषा कीर्ति पुरस्‍कार के अंतर्गत विभिन्‍न वर्गों में पुरस्‍कार दिए जाते हैं।

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