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विवेकानंद युवाओं के प्रेरणास्रोत-प्रधानमंत्री

नरेंद्र मोदी का छात्रों के सम्‍मेलन में ओजपूर्ण सम्‍बोधन

दिल्ली कोलकाता लखनऊ सहित हुए कई कार्यक्रम

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Monday 11 September 2017 07:08:22 AM

pm narendra modi

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंडित दीनदयान उपाध्‍याय शताब्‍दी समारोह और स्‍वामी विवेकानंद के शिकागो संबोधन के 125 वर्ष पूरे होने पर आज नई दिल्‍ली के विज्ञान भवन में आयोजित छात्रों के सम्‍मेलन को सम्‍बोधित करते हुए कहा कि आज ही के दिन मात्र कुछ शब्‍दों के साथ एक युवा भारतीय ने पूरे विश्‍व को जीता था और पूरे विश्‍व को भारतीय संस्कृति की विविधता और एकता की ताकत दिखाई थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्‍वामी विवेकानंद ने हमारे समाज में प्रवेश कर चुकी सामाजिक बुराईयों के खिलाफ आवाज़ उठाई थी, स्‍वामी विवेकानंद ने कहा था कि केवल रीति-रिवाज़ किसी व्‍यक्ति को ईश्‍वर से नहीं जोड़ते, जनसेवा ही प्रभुसेवा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्‍वामी विवेकानंद उपदेश देने में विश्‍वास नहीं करते थे, उनके विचारों और आदर्शवाद ने रामकृष्‍ण मिशन के माध्‍यम से संस्‍थागत रूपरेखा का मार्ग प्रशस्‍त किया है। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद युवाओं के प्रेरणास्रोत हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन सभी लोगों का खासतौर पर जिक्र किया, जो स्‍वच्‍छ भारत के साथ अथक रूप से जुड़े हुए हैं और ये वे हैं, जिन्‍होंने वंदे मातरम की भावना को आत्‍मसात किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि छात्र संगठनों को विश्‍वविद्यालय चुनावों के प्रचार के दौरान स्‍वच्‍छता को अधिक महत्‍व देना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि केवल वे लोग जो महिलाओं का सम्‍मान करते हैं, वे ही स्‍वामी विवेकानंद के सम्‍बोधन के शुरूआती शब्‍दों अमरीका के भाइयों और बहनों पर सही रूप में गर्व कर सकते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्‍वामी विवेकानंद और जमशेदजी टाटा के बीच पत्राचार यह दर्शाता है कि स्‍वामीजी का ध्‍यान भारत की आत्‍मनिर्भरता पर था। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि ज्ञान और कौशल दोनों समान रूप से महत्‍वपूर्ण हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि अब लोग कहते हैं कि 21वीं सदी एशिया की सदी है, लेकिन काफी समय पूर्व स्‍वामी विवेकानंद ने वन एशिया का सिद्धांत दिया था और कहा था कि विश्‍व की समस्‍याओं का हल एशिया के माध्‍यम से होगा।
नरेंद्र मोदी ने कहा कि सृजनात्‍मकता और नवाचार के लिए विश्‍वविद्यालय परिसर से बढ़कर कोई और स्‍थान नहीं हो सकता। उन्‍होंने क‍हा कि एक भारत, श्रेष्‍ठ भारत की भावना को मजबूत करने के लिए संस्‍थानों की ओर से विभिन्‍न राज्‍यों की संस्‍कृति और भाषा दिवस आयोजित करना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत बदल रहा है, वैश्वि‍क स्‍तर पर भारत की प्रतिष्‍ठा बढ़ी है और ऐसा जनशक्ति के कारण हुआ है। उन्‍होंने छात्र समुदाय का आह्वान किया कि वे नियमों का पालन करें और भारत की विजय गाथा को आगे बढ़ाएं। उधर लखनऊ में राज्य के उपमुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा ने लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में आज सवेरे स्वामी विवेकानंद के सन् 1893 में शिकागो में दिए गए भाषण की 125वीं जयंती के कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वामी विवेकानंद पर भाषण को भी प्रसारित किया गया। देशभर में आज स्वामी विवेकानंद पर व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित हुए हैं। कोलकाता में विशेष कार्यक्रम हुए और दिल्ली में विभिन्न स्वेच्छिक और शैक्षणिक प्रतिष्ठानों में उनको श्रद्धापूर्वक याद किया गया।

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