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कर्नाटक में जल की मांग और पूर्ति का प्रबंधन

सीजीडब्‍ल्‍यूबी और आईआईएस बंगलौर में हुआ समझौता

जल प्रवाह प्रबंधन पर जल संसाधन मंत्रालय गंभीर

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Saturday 9 September 2017 05:07:45 AM

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नई दिल्ली। कर्नाटक के कुछ हिस्‍सों में भू-जल प्रवाह के विकास तथा भू-जल प्रवाह प्रबंधन को लेकर जल संसाधन मंत्रालय की केंद्रीय भू-जल परिषद और इंडियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ साइंस बंगलौर के बीच सहमति पत्र पर हस्‍ताक्षर हुए। इस गणितीय प्रारूप को जल प्रवाह स्‍तर पर मापने तथा प्रबंध कार्यक्रम के उद्देश्‍य से विकसित किया जा रहा है। यह भू-जल की वर्तमान स्थिति को बेहतर ढंग से प्रस्‍तुत करेगा। इससे यह भी जानकारी मिलेगी कि भविष्‍य में किन क्षेत्रों में भू-जल का स्‍तर अत्‍यधिक है और कहां कम है।
प्रभावी जल प्रबंधन के जरिए मांग और पूर्ति के बीच संतुलन स्‍थापित किया जा सकेगा। इस अध्‍ययन में 48000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को शामिल किया गया है। इस क्षेत्र में चिकबल्‍लापुर और कोलार जिले आते हैं तथा बगलकोट, बंगलौर ग्रामीण, बेलगाम, बेल्‍लारी, चित्रदुर्ग, देवनगिरी, गदग, गुलबर्गा और यदगिर जिलों के कुछ हिस्‍से शामिल हैं। इस अध्‍ययन को एक साल में पूरा किया जाना है और इस संबंध में इंडियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ साइंस प्रारंभिक रिपोर्ट और अंतिम विस्‍तृत रिपोर्ट प्रस्‍तुत करेगा।
सहमति पत्र के हस्‍ताक्षर होने के दो महीने के अंदर ही प्रारंभिक रिपोर्ट जमा करनी है। प्रारंभिक रिपोर्ट में कार्ययोजना की विस्‍तृत रिपोर्ट होगी, जिसमें उद्देश्‍य, कार्यक्षेत्र, कार्यप्रारूप, समयावधि आदि का स्‍पष्ट उल्‍लेख होगा। अंतिम रिपोर्ट में सारांश, परिचय, आंकड़ों की समीक्षात्‍मक रिपोर्ट, हाइड्रोज्‍योलोजिकल जानकारी, भू-जल प्रणाली का विभिन्‍न स्थितियों में प्रतिक्रिया, प्रखंड आधारित प्रबंधन योजना, प्रखंड आधारित प्रबंधन योजना का प्रभाव आदि पर विस्‍तृत जानकारी प्रदान की जाएगी। सहमति पत्र पर सीजीडब्‍ल्‍यूबी के सदस्‍य डॉ दीपांकर साहा तथा इंडियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ साइंस के रजिस्‍ट्रार प्रोफेसर वी राजराजन ने हस्‍ताक्षर किए।

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