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ईस्टर पर्व पर बधाई और शुभकामनाएं!

यीशु का पुर्नजन्म ही ईसाई धर्म के विश्वास की नींव

राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री की शुभकामनाएं

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Saturday 15 April 2017 05:13:10 AM

easter festival

नई दिल्ली। राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उपराष्‍ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी ने प्रभु यीशु के पुर्नजनम ईस्‍टर पर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। दुनिया के ईसाईयों में यह पर्व के रूप में मनाया जाता है। हालाकि ईसाईयों का एक वर्ग ईस्‍टर नहीं मनाता है। राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने ईस्टर की पूर्व संध्‍या पर अपने बधाई संदेश में कहा है कि ईस्‍टर के उल्‍लासपूर्ण अवसर पर मैं भारत एवं विदेश में अपने भारतवासियों को, विशेष रूप से अपने ईसाइभाइयों एवं बहनों को बधाइयां और शुभकामनाएं देता हूं। राष्ट्रपति ने कहा कि ईश्वर करे, यह ईस्‍टर आपके जीवन में पुनरोत्‍थान एवं पुर्नजीवन का संदेश लेकर आए। उन्होंने कहा कि प्रभु ईसा मसीह के संदेश हमें सच्‍चाई, क्षमा, प्रेम एवं नि:स्‍वार्थ सेवा का जीवन जीने के लिए प्रेरित करते हैं, इसलिए आइए, हम एकजुट होकर समाज से हिंसा और घृणा का उन्‍मूलन कर दें, निर्बलों और वंचितों की सेवा में खुद को समर्पित कर दें। उपराष्‍ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी ने ईस्‍टर के पावन अवसर पर लोगों को बधाई संदेश में कहा है कि हम जाति, संप्रदाय एवं मजहब से इतर सभी मानवों की दिशा में करुणापूर्ण होने के द्वारा ईस्‍टर का उत्‍सव मनाएं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ईस्टर पर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।
ईस्टर, ईसाईयों का सबसे महत्वपूर्ण वार्षिक धार्मिक पर्व है। ईसाई धार्मिक ग्रंथ के अनुसार यीशु सूली पर लटकाए जाने के तीसरे दिन पुर्नजीवित हो गए थे। इस मृतोत्थान को ईसाई ईस्टर दिवस या ईस्टर रविवार के रूप में मानते हैं। ये दिन गुड फ्राईडे के दो दिन बाद आता है। ईसाई धर्म के इतिहास में उनकी मृत्यु और उनके पुर्नजीवन के कालक्रम को अनेक तर्क और तरीके से बताया गया है। ईस्टर को चर्च के वर्ष का काल या ईस्टर काल या द ईस्टर सीज़न भी कहा जाता है। परंपरागत रूप से ईस्टर काल चालीस दिन का होता है। कहते हैं कि ये ईस्टर दिवस से लेकर स्वर्गारोहण दिवस तक होता आया है, लेकिन आधिकारिक तौर पर अब ये पचास दिन का होता है। ईस्टर सीज़न या ईस्टर काल के पहले सप्ताह को ईस्टर सप्ताह या ईस्टर अष्टक या ओक्टेव ऑफ़ ईस्टर कहते हैं। ईस्टर को चालीस सप्ताहों के काल या एक चालीसे के अंत के रूप में भी देखा जाता है, इस काल को उपवास, प्रार्थना और प्रायश्चित करने के लिए माना जाता है।
ईस्टर एक गतिशील त्यौहार है, जिसका अर्थ है कि यह त्यौहार नागरिक कैलेंडर के अनुसार नहीं चलता। गिरिजाघर के अनुसार वैसे तो गणना के आधार पर विषुव की तिथि 21 मार्च है, इसलिए ईस्टर की तिथि 22 मार्च और 25 अप्रैल के बीच बदलती रहती है। पूर्वी ईसाइयत की अपनी गणना जूलियन कैलेंडर पर आधारित है, इस कैलेंडर में 21 मार्च की तिथि इक्कीसवी सदी के दौरान ग्रीगोरियन कैलेंडर के अनुसार 3 अप्रैल को पड़ती है। इस कैलेंडर के अनुसार ईस्टर का उत्सव 4 अप्रैल से 8 मई के बीच पड़ता है। ईस्टर संकेतों के प्रयोग के आधार पर ही नहीं, बल्कि कैलेंडर में अपनी स्थिति के अनुसार भी यहूदी पास्का या यहूदी ईस्टर से सम्बंधित है। ईस्टर पर कुछ नई चीज़ें ईस्टर बनी और ईस्टर एग्ग हंट्स छुट्टियों में आधुनिक समारोहों का हिस्सा बन गई हैं, जिन्हें कई ईसाई और गैर ईसाई लोग समान रूप से मानते हैं। ईसाईयों में एक वर्ग ऐसा भी है, जो ईस्टर नहीं मनाता, लेकिन ईस्टर मनाने वाले ईसाईयों की संख्या ज्यादा मानी जाती है। ईस्टर का नया विधान बताता है कि यीशु का पुर्नजनम ही ईसाई धर्म के विश्वास की नींव है। मृतोत्थान ने यीशु को एक शक्तिशाली पुत्र के रूप में स्थापित किया और इस बात को उद्धृत करते हुए प्रमाण दिया कि ईश्वर ही इस सृष्टि का न्यायोचित इंसाफ करेंगे।
ईसाई, यहूदी और मूर्तिपूजक निश्चित रूप से पहले हिब्रू कैलेंडर के बारे में अवगत थे, लेकिन इस बात का कोई पुख्ता सबूत नहीं है कि उन्होंने किसी वार्षिक ईसाई त्यौहार को विशेष रूप से मनाया हो। ईसाइयों की रीति के अनुसार कुछ लोगों का ऐसा विश्वास है कि गैर ईसाई लोगों में मनाया जाने वाला वार्षिक त्यौहार रोम के धर्मासन युग के बाद आई एक नवरीति है। नीदरलैंड के उत्तरी और पूर्वी भागों ट्वेनटे और ऐच्टरहोएक में ईस्टर ज्वाला यानी डच में पासवुर ईस्टर की शाम सूर्यास्त के समय जलाई जाती है। उत्तरी जर्मनी के बड़े हिस्से में भी ईस्टर की ज्वाला उसी दिन जलाई जाती है। कई पूर्वी यूरोपीय गैर यहूदी समुदायों जिनमें शामिल हैं-युक्रैनियन, बेलारुसी, हंगरी, बुलगारी, क्रोएट, चेक, लिथुआनी, पोल, रोमन, सर्ब, मेसेडोनीयाई और स्लोवाकियाई में ईस्टर के उपलक्ष्य में अंडों को सजाया जाता है। विश्वास किया जाता है कि ईसाई आध्यात्मिक रूप से यीशु के साथ ही पुर्नजीवित हुए, ताकि वो जीवन को एक नए तरीके से जी सके।
ईस्टर के बाद चेक गणराज्य और स्लोवाकिया में सोमवार को पीटने और कोड़े लगाने की परंपरा का पालन किया जाता है। सुबह में पुरुष एक विशेष हस्तनिर्मित कोड़े, जिसे पोम्लाज्का या कोर्बाक कहा जाता है, से महिलाओं को पीटते हैं और उनपर ठंडा पानी फेंकते हैं। पोल्माज्का या कोर्बाक लकड़ी की आठ, बारह या चौबीं छड़ियों से मिलकर बनता है, जोकि आम तौर पर आधे या दो मीटर लम्बा होता है और इसके अंतिम सिरे को रंग बिरंगे फीतों से सजाया जाता है। इससे पीटने से ज्यादा दर्द नहीं होता और दर्द पहुंचाने के उद्देश्य से नहीं पीटा जाता है। ज़्यादातर स्लाविक भाषाओं में ईस्टर का अर्थ है या तो महान दिवस या महान रात्रि। मेसेडोनियां, युक्रेन, बुल्गारिया और बेलारूसी में इसका मतलब है-महान दिवस।

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