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राष्ट्रपति ने देखी और सराही हथकरघा बुनाई

लोगों से स्वदेशी और हथकरघा उत्पादों को प्रोत्साहन का आह्वान

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर प्रदान किए राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Friday 7 August 2026 05:10:16 PM

president viewed the rich handloom weaving

नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर आज राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में समारोहपूर्वक हथकरघा बुनकरों को संत कबीर हथकरघा पुरस्कार और राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार-2025 देकर सम्मानित किया। राष्ट्रपति ने इस अवसर पर उल्लेख कियाकि स्वदेशी आंदोलन की औपचारिक शुरुआत 7 अगस्त 1905 को हुई थी, बंगाल के विभाजन के विरोध में शुरू हुए इस आंदोलन का उद्देश्य स्वदेशी उत्पादों, घरेलू उद्योगों, विशेष रूपसे हथकरघा बुनकरों को बढ़ावा देना था। उन्होंने कहाकि इस ऐतिहासिक घटना के सम्मान में भारत सरकार 2015 से 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के रूपमें मना रही है। उन्होंने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर हथकरघा क्षेत्र से जुड़े लोगों को बधाई दी और कहाकि यह अवसर हमारे देश की सांस्कृतिक एकता को परिभाषित करने वाली विविधता का उत्सव है, यह सरकार और बुनकर समुदाय के संयुक्त प्रयासों को मान्यता देने का अवसर है, जो भारत के हथकरघा क्षेत्र केलिए एक उच्चगुणवत्ता वाली छवि स्थापित कर रहे हैं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारत की समृद्ध और विविध हथकरघा बुनाई परंपराओं को समर्पित चार स्मारक डाक टिकट भी जारी किए। राष्ट्रपति ने कहाकि हथकरघा सदियों से भारत की सभ्यता के विकास का अभिन्न अंग रहा है, यह राष्ट्र की असाधारण विविधता को दर्शाता है और हमारी क्षेत्रीय विशिष्टता को संरक्षित रखता है। उन्होंने कहाकि हथकरघा क्षेत्र रोज़गार, महिला सशक्तिकरण, कला और संस्कृति तथा प्रकृति प्रेम को बढ़ावा देता है, हथकरघा भारत के स्वतंत्रता संग्राम और आत्मनिर्भरता की भावना से भी जुड़ा हुआ है। राष्ट्रपति ने कहाकि भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के प्रमुख मानवकेंद्रित उदाहरण के रूपमें हमारे हथकरघा क्षेत्र के उभरने की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने कहाकि प्रमुख हथकरघा समूहों को आधुनिक तकनीक और समकालीन प्रशिक्षण विधियों से जोड़ा जा रहा है, सरकार बुनकरों की आय बढ़ाने केलिए विभिन्न उपाय लागू कर रही है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त कीकि सरकार के इस क्षेत्र को प्रमाणित सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था में परिवर्तित करने के प्रयासों से भारतीय हथकरघा क्षेत्रकी अंतर्राष्ट्रीय छवि में सुधार हो रहा है।
राष्ट्रपति ने कहाकि प्रौद्योगिकी और नवोन्मेषी डिजाइनों से लैस कई प्रतिभाशाली युवा उद्यमी इस क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने कहाकि सरकारी योजनाओं और संस्थानों के माध्यम से युवाओं को सक्रिय रूपसे मार्गदर्शन दिया जाना चाहिए, ताकि उनका उत्साह और कौशल इस क्षेत्रकी दीर्घकालिक, बहुआयामी सफलता सुनिश्चित कर सके। उन्होंने कहाकि युवा उद्यमी, डिजाइनर और स्टार्टअप पारंपरिक शिल्पों को आधुनिक रुझानों, ब्रांडों और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़कर इस क्षेत्रमें नए अवसर पैदा कर सकते हैं। उन्होंने यह जानकर प्रसन्नता व्यक्त कीकि भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थानों के तत्वावधान में डिजाइन संसाधन केंद्र और बुनकर सेवा केंद्र इस क्षेत्र में युवाओं को शामिल करने केलिए महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। राष्ट्रपति ने कहाकि इस क्षेत्र के सतत विकास केलिए नई तकनीकों का उचित उपयोग आवश्यक है, आधुनिक डिजिटल समाधानों से बाजार तक पहुंच को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। इसके अलावा ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से भारतीय हथकरघा उत्पादों की वैश्विक बाजारों तक पहुंच को काफी मजबूत किया जा सकता है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विश्वास व्यक्त कियाकि हथकरघा क्षेत्र देश के समावेशी विकास और आत्मनिर्भरता केलिए एक मजबूत आधार बनेगा। गौरतलब हैकि ने बतायाकि संत कबीर हथकरघा पुरस्कार हथकरघा बुनकरों केलिए देश का सर्वोच्च सम्मान है, जो उनकी असाधारण शिल्प कौशल, आजीवन समर्पण और भारत की बुनाई परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन में उनके निरंतर योगदान को मान्यता देता है। राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार उन हथकरघा बुनकरों और हितधारकों को सम्मानित करता है, जिन्होंने पारंपरिक कौशल को संरक्षित करते हुए आधुनिक तकनीकों को अपनाते हुए उत्कृष्ट रचनात्मकता, गुणवत्ता, नवाचार और उत्कृष्टता का प्रदर्शन किया है। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में कपड़ा मंत्री गिरीराज सिंह, हथकरघा बुनकर, वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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