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सांस्कृतिक कूटनीति संघर्ष खत्म करने का बड़ा हथियार
अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम
विश्वविद्यालय के पश्चिम एशिया अध्ययन केन्द्र में
सांस्कृतिक कूटनीति और संघर्ष प्रस्ताव विषय पर आयोजित
व्याख्यान को संबोधित करते हुए पूर्व राजनीयिक बाल आनंद ने कहा
है कि सांस्कृतिक कूटनीति दुनिया में आपसी संघर्ष समाप्त करने
का सबसे बड़ा हथियार है और यह पब्लिक कूटनीति की परिधि में भी
आता है। सांस्कृतिक कूटनीति विभिन्न देशों के द्विपक्षीय व
आपसी संबंधों को मजबूत बनाने व संवाद के नये द्वार खोलने का भी
सशक्त माध्यम है। उन्होंने पंडित जवाहर लाल नेहरू का उदाहरण
देते हुए कहा कि वह विश्व के सांस्कृतिक कूटनीति के
निर्माताओं में एक थे क्योंकि उनमें न केवल विश्व की सभ्यता
की समझ थी बल्कि वह कूटनीति संस्कृति को भी बखूबी समझते थे। इस
लिए उनके समय में इंडियन कांउसिल ऑफ कल्चरल रिलेशन्स
(आईसीसीआर) और इंडिया कांउसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स
(आईसीडब्ल्यूए) की स्थापना कर भारत के संबंध विश्व के अन्य
देशों से मजबूत हुए। उनकी दूर दृष्टि का ही परिणाम है कि आज
भारत के सभी देशों से बेहतर संबंध हैं। बाल आनंद ने कहा कि आज
के वैश्वीकरण के दौर में रूस जैसे देश को भी इस बात को समझने
की आवश्यकता है कि वह सांस्कृतिक कूटनीति में सकारात्मक भूमिका
निभायें।
प्रमुख इस्लामी विद्वान और मुस्लिम पसर्नल बोर्ड के
उपाध्यक्ष मौलाना डा कल्बे सादिक ने कहा कि राष्ट्र व व्यक्ति
विशेष की पहचान उसकी संस्कृति और कर्म की वजह से होती है न कि
उसके धर्म से। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को न्याय प्रिय होना
चाहिए। समाज विज्ञान संकाय के पूर्व अधिष्ठाता प्रोफेसर महमूद
उल हक ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि संस्कृतियों का
अध्ययन व्यापक परिदृश्य में किया जाना चाहिए क्यों कि इसके
द्वारा ही व्यक्तियों का सामाजिक व राजनीतिक जीवन प्रतिबिम्बता
होता है।
पश्चिम एशियन अध्ययन विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर
मुहम्मद गुलरेज ने कहा कि जब हम किसी देश के इतिहास का अध्ययन
करते हैं तो उस देश का आर्थिक व्यवस्था, राजनीतिक व्यवस्था एवं
संस्कृति का महत्व बढ़ जाता है। इस विभाग में हम आज के युग के
अनुरूप नई आर्थिक व्यवस्थाओं, कूटनीति, व्यापार व क्षेत्रवाद,
राष्ट्रसंघ का पतन, नस्लवाद एंव आतंकवाद के बढ़ते प्रभाव का
अध्ययन भी करते हैं।
प्रोफेसर नाजि़म अली ने उपस्थितजनों का आभार जताया। इस अवसर पर
प्रो शमीर हसन, प्रोफेसर अली मुहम्मद नकवी, प्रो अली मुहम्मद,
डा जावेद इकबाल, डा नईमा खातून, डा रकशिदा फाज़ली, डा गुलाम
मुरसलीन, इकबाल एस मुहम्मद, डा मुहम्मद परवेज, डा असफर अली खान
सहित छात्र व शोधार्थी बड़ी संख्या में मौजूद थे।
एएमयू नेशनल नालिज नेटवर्क के लिए चयनित
अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को नेशनल नालिज
नेटवर्क से जोड़ने के लिये एक नोड के रूप में चुना गया है।
नेशनल नालिज नेटवर्क की स्थापना का उद्देश्य देश भर की शिक्षा
संस्थाओं व अनुसंधानों को एक इलैक्ट्रोनिक्स डिजिटल हाइबैंडविद
नेटवर्क से जोड़ना है। इससे देश भर के एक हजार से अधिक
संस्थाओं के बीच सूचना और ज्ञान प्राप्त करने को आसान बनाने
में मदद मिलेगी। जाकिर हुसैन इंजीनियरिंग कालेज के प्राचार्य
प्रोफेसर एमटी अहमद इस नेटवर्क के नोडल अफसर बनाए गए हैं।
इस नेटवर्क की सहायता से ज्ञान के भंडारों तक पहुंचने, इस
संस्थाओं के बीच सूचना के आदान-प्रदान में सहायक सिद्ध होगा।
नेशनल नालिज नेटवर्क के माध्यम से उच्च स्तरीय कम्पयूटिंग, ई
लाइब्रेरी का इस्तेमाल, वरचुल क्लास रूम, ई-प्रबंधन और डाटा
प्राप्त करने के सपने को साकार बनाया जायेगा। कुलपति प्रोफेसर
पीके अब्दुल अजीज ने जाकिर हुसैन इंजीनियरिंग कालेज के
प्राचार्य प्रोफेसर एमटी अहमद को अलीगढ़ मुस्लिम
विश्वविद्यालय और नेशनल नालिज नेटवर्क के बीच गतिविधियों को
आगे बढ़ाने के लिये नोडल आफीसर नियुक्त किया है। पूरी
यूनिवर्सिटी में इस कार्यक्रम की निगरानी के लिये एक टैकनीकल
टीम का भी गठन किया जा रहा है।
मेडिकल कालेज ज़ील-09 महोत्सव
अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहर लाल
नेहरू मेडिकल कालेज की कालेज सोसायटी के वार्षिक कालेज महोत्सव
ज़ील-09 के समापन पर भव्य एवं रंगारंग समारोह में बीडीएस
छात्रा समीन खान को मिस ज़ील तथा एमबीबीएस छात्र देवांश शर्मा
को मिस्टर ज़ील का मुकुट पहनाया गया। जब कि वर्ष के
सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का पुरस्कार प्रतीक रस्तोगी व अहमद मामून
कासिम व वर्ष के श्रेष्ठ साहित्यकार का पुरस्कार अर्नव सिंह
तनवर को प्रदान किया गया। इसके अलावा खेलकूद तथा साहित्यक व
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने वाले छात्र-छात्राओं को
भी पुरस्कार प्रदान किये गये।
मेडिकल कालेज के प्रांगण में आयोजित पुरस्कार वितरण
समारोह में मुख्य अतिथि कुलपति प्रोफेसर पीके अब्दुल अजीज,
मानद् अतिथि नामवर शायर प्रोफेसर शहरयार व गेम्स कमेटी के सचिव
प्रोफेसर तारिक मंसूर ने यह पुरस्कार प्रदान किये। इस अवसर पर
मेडीसन संकाय के डीन प्रोफेसर अबुकमर सिद्दीकी भी मौजूद थे।
समारोह में स्पेनाथॉन, पिलर डेकोरेशन, पॉट पेंटिंग, मंहदी, टी
शर्ट पेंटिंग, जस्ट ए मिनट, स्वरचित कविता, स्टेज डेकोरेशन,
इंग्लिश डिबेट, रंगोली, एक्सटेम्पोर, टर्न ए क्योट,
इंस्टूमेंटल, फैशन शो, डम्बाराड, प्रेस कांफ्रेंस अंताक्षरी,
गोल रोटी, वॉकल्स, स्किट, मूवी स्पूफ सहित कैरम, टेबिल टेनिस,
वॉलीबाल, क्रिकेट, बास्केटबाल आदि प्रतियोगिताओं में प्रथम,
द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को
पुरस्कार प्रदान किये गये।
कुलपति प्रोफेसर पीके अब्दुल अजीज ने कहा कि जवाहर लाल
नेहरू मेडिकल कालेज को एम्स के समान उन्नयन के लिए भारत सरकार
द्वारा जो 150 करोड़ रूपये की राशि उपलब्ध कराई जा रही है इससे
मेडिकल कालेज न केवल अत्य आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होगा
बल्कि रोगियों को उच्च स्तर की आधुनिक उपचार सुविधा व
चिकित्सकों व छात्रों को भी चिकित्सा के क्षेत्र में कार्य
करने के अंतर्राष्ट्रीय स्तर के अवसर प्राप्त होंगे। कुलपति ने
यह भी कहा कि समर स्कूल कार्यक्रम को फिर से शुरू किया जाएगा
ताकि एएमयू के छात्र व शिक्षक अपने पूर्व छात्रों के ज्ञान का
लाभ उठा सकें। उन्होंने मेडिकल कालेज में हो रहे परिवर्तन के
लिए प्राचार्य प्रोफेसर आरफ मलिक को बधाई दी और मेडिकल छात्रों
की प्रतिभा की प्रशंसा भी की। कुलपति ने कालेज लाइब्रेरी में
मेडलार सेंटर का भी उद्घाटन किया।
समारोह के मानद् अतिथि प्रख्यात शायर प्रोफेसर शहरयार
ने कहा कि जेएन मेडिकल कालेज एम्स के समान ख्याति अर्जित करे
और रोगियों को वही वो तमाम सुविधायें उपलब्ध हों जो एम्स में
मौजूद हैं। उन्होंने अपनी भावनाओं को अपने शेर में कुछ यूं
व्यक्ति किया-- इनके पीछे ना चलो इनकी तमन्ना ना करो, साये फिर
साये हैं कुछ देर में ढल जाएंगें। उन्होंने कहा कि वर्तमान
कुलपति का दौर विवि का सबसे स्वर्णिम दौर है। जेएन मेडिकल
कालेज के प्रिंसपिल प्रोफेसर एम आरफ मलिक ने अपने स्वागत भाषण
में कहा कि मेडिकल कालेज में गत चालीस वर्षों से यह कार्यक्रम
निरंतर आयोजित हो रहा है, कालेज में न केवल प्रतिभावान
छात्र-छात्रायें मौजूद हैं बल्कि यह कालेज गंगा जमुनी संस्कृति
का प्रतीक है।
इस अवसर पर नबील, रबाब, फहीम व आमिर ने अपनी मधुर आवाज़
में गीत सुनाकर उपस्थितजनों को मंत्र मुग्ध कर दिया। बाबर व
उनकी टीम ने गिरते राजनीतिक स्तर, आतंकवाद, गरीबी व बेरोजगारी
पर स्किट पेश किया। इसके अलावा अनारकली नाटक भी पेश किया गया।
कार्यक्रम का संचालन जयेश खट्टर ने किया। कार्यक्रम को सफल
बनाने में कालेज सोसायटी के अध्यक्ष माज़ उज़ैर, उपाध्यक्ष शेख
सरफराज़, सचिव इरफान अहमद खान, संयुक्त सचिव पुनीत अग्रवाल,
फैजान महमूद, संयुक्त कल्चरल सचिव मुर्तजा बोहरा, अब्दुल्लाह
अंसारी, साहित्यक सचिव जयेश खट्टर, निदा खान, अर्जुन अग्रवाल,
जफर अहमद व दानिश अख्तर का सक्रिय योगदान रहा।
सिविल सर्विसेज़ पर कार्यशाला
अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कोचिंग एण्ड
गाइडैंस सैंटर की इंजीनियरिंग कालेज में सिविल सर्विसेज़ एज़ ए
कैरियर फॉर इंजीनियर्स विषय पर कार्यशाला हुई जिसमें ध्येय
आईएएस नई दिल्ली के एकेडमिक डायरेक्टर प्रशांत शर्मा और मुम्बई
विश्वविद्यालय के सिविल सेवा उत्तीर्ण इंजीनियरिंग के छात्र
विनायक भट्ट ने इंजीनियरिंग छात्रों को सिविल सेवा में
उत्तीर्ण होने के गुर बताये।
प्रशांत शर्मा ने सिविल सर्विसेज़ की अहमियत पर प्रकाश
डालते हुए कहा कि इंजीनियरिंग के छात्र में वो तमाम गुण
विद्यमान होते हैं जिनकी इस सर्विसेज़ की परीक्षा तथा अफसर
शाही में आवश्यकता होती है। इंजीनियरिंग छात्रों को केवल अपने
आत्म विश्लेषण की आवश्यकता है। कोचिंग एण्ड गाइडैंस सेंटर के
निदेशक डा परवेज तालिब ने उपस्थित जनों का स्वागत किया।
इंजीनियरिंग कालेज के ट्रेनिंग एण्ड प्लेसमेंट आफीसर डा फरीद
महदी ने कार्यशाला के उद्देयों के बारे में बताया। कोचिंग एण्ड
गाइडैंस सेंटर के कांउसलर डा साद हमीद ने आभार जताया।
कार्यशाला के दूसरे सत्र में कोचिंग एण्ड गाइडैंस सेंटर में
छात्रों की परीक्षा से संबंधित शंकाओं का निवारण किया गया।
इसमें बड़ी संख्या में छात्रों ने भाग लिया। डा साद हमीद ने
बताया कि भविष्य में ट्रेनिंग एण्ड प्लेसमेंट के साथ मिलकर
अन्य विषयों पर कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा।
प्रो
फैजान उड़ीसा में वीसी बनाए गए
अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पूर्व
रजिस्ट्रार एवं विधि संकाय के पूर्व डीन और वर्तमान में आईआईटी
लॉ स्कूल भुवनेश्वर में डायरेक्टर प्रोफेसर फैजान मुस्तफा को
नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी उड़ीसा का वाइसचांसलर नियुक्त किया गया
है। प्रोफेसर फैज़ान मुस्तफा ने एएमयू से एलएलबी एलएलएम तथा
पीएचडी की डिग्री प्राप्त की है। वह विधि विभाग में लेक्चरार
नियुक्त हुए और बाद में प्रोफेसर बने। उन्होंने कानून पर आठ
पुस्तकें लिखी हैं और उनके सौ से अधिक शोध-पत्र राष्ट्रीय
पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। इंटरनेशनल
बायोग्राफिकल सेंटर कैम्ब्रिज इंग्लैंड द्वारा उन्हें
इंटरनेशनल एजूकेटर के एवार्ड तथा प्रतिष्ठित शाह वलीउल्लाह
एवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है।
कला पर उपभोक्तावाद का असर
अ लीगढ़।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के ललित कला विभाग की भारतीय कला
के विभिन्न आयाम विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला व सेमीनार के
समापन समारोह में मुख्य अतिथि रजिस्ट्रार प्रोफेसर वीके अब्दुल
जलील ने कहा है कि वैश्वीकरण के दौर में उपभोक्तावाद का असर
कला पर भी पड़ा है और इसका व्यवसायीकरण होने से कलाकार इस पर
सही तरीके से ध्यान नहीं दे रहे हैं। उन्होंने आह्वान किया कि
वे भारतीय चित्रकला को प्रोत्साहित करने के लिए कार्य करें।
उन्होंने कहा कि कला एक अभिव्यक्ति है जिसके लिए
कलाकारों को संघर्ष करना होगा। कलाकार की कृतियों की आजादी को
सुरक्षित रखने की बेहद आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस बात पर
भी चर्चा होनी चाहिए कि कलाकार की आजादी की सीमा क्या होनी
चाहिए। उन्होंने इस अवसर पर कार्यशाला में भाग लेने वाले
प्रतिभागियों को सर्टीफिकेट भी वितरित किये।
जामिया मिल्लिया इस्लामिया के वीजुअल आर्टस संकाय के
डीन प्रोफेसर ग़ज़नफ़र ज़ैदी ने कहा कि ललित कला को बढ़ावा
देने के लिए एएमयू और जामिया को मिलकर संयुक्त रूप से प्रयास
करने चाहिए और एक दूसरे के यहॉ छात्रों की प्रदर्शनी आयोजित
करनी चाहिए। उन्होंने छात्रों से कहा कि वह आर्ट गैलरी में
अपने टेलेंट का नुमायना करें। कनोरिया पीजी कालिज जयपुर की
विभागाध्यक्ष डा मीनाक्षी कसलीवाल भारती ने कहा कि आर्ट केवल
मार्केटिंग का जरिया नहीं बल्कि जीवन के एक अंग की तरह होना
चाहिए। उन्होंने कहा कि चित्रकारों में गंभीरता धीरे-धीरे
विकसित होती है इसलिए उन्हें धैर्य से कार्य लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इंटरनेट के युग में विदेशों के म्यूजि़यम की
जानकारी प्राप्त करना भी आसान हो गया है और छात्रों को उनके
बारे में भी जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।
ललित कला विभाग की अध्यक्ष डा मधुरानी ने कहा कि
कार्यशाला में महत्वपूर्ण लोगों को रिर्सोस पर्सन के रूप में
आमंत्रित किया गया। उन्होंने कहा कि कार्यशाला में भारतीय कला
के विविध आयामों को सामने लाने का सार्थक प्रयास हुआ है।
कार्यशाला की आयोजन सचिव डा बदर जहॉ ने कहा कि कला की
व्यवसायिकता से इंकार नहीं किया जा सकता और इसने सभी को अपनी
गिरफ्त में ले लिया है। व्यवसायीकरण का यह रूप कहीं अच्छे तो
कहीं बुरे रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि कार्यशाला
में इस बात का प्रयास किया गया है कि भारतीय कला के हरेक
दृष्टिकोण पर कुछ नई बात उभर कर सामने आये। इसके अलावा
कार्यशाला में बौद्धिक चिंतन व बहस भी हुई। प्रोफेसर सीमा
जावेद, डा रेहाना खुसरो, रूबाब ज़ैदी व सुनीता गुप्ता ने भी
अपने विचार रखे।

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