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फंडों के निवेश में धैर्य से काम लीजिए
मुंबई। पिछला साल जिस तरह इक्विटी फंडों के निवेशकों के
लिए निराशाजनक रहा है, जिसमें फंडों से मिलने वाला रिटर्न
ऋणात्मक ही रहा। चाहे निवेश एक मुश्त तौर पर किया गया हो या
योजनाबद्ध निवेश के रूप में, इसे धैर्य के साथ ही लेना होगा।
दुनिया में जारी मंदी के दौर में अब सवाल यह है कि यह साल
निवेशकों के लिए कैसा रहेगा? क्या उनके घाटे की भरपाई हो
पाएगी? आइए, विभिन्न विशेषज्ञों से जानने की कोशिश करते हैं।
टॉरस म्युचुअल फंड के प्रबंध निदेशक आरके गुप्ता कहते
हैं- साल की शुरूआत से ही बाजार में गिरावट का दौर रहा है।
इक्विटी में निवेश करने वाले निवेशकों को नुकसान हुआ है लेकिन
अभी नहीं कहा जा सकता कि यह यह साल मंदी की दृष्टि से आशाजनक
रहेगा। आरके गुप्ता ने कहाकि साल के पहले तीन महीनों में बाजार
स्थिर रहेगा। लोकसभा चुनाव के आस-पास बाजार में उतार-चढ़ाव
रहेगा। लेकिन हमारा अनुमान है कि साल की समाप्ति अच्छी रहेगी।
इक्विटी फंडों में सिप के माध्यम से निवेश करने का यह समय उचित
है। अगला साल निवेशकों की खुशियां वापस लौटा सकता है।
वित्तीय योजनाकार विश्राम मोदक का कहना हैकि अगर निवेश
किसी वित्तीय लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए किया जाए तो घाटे
की संभावना कम होती है, क्योंकि निवेशक अपनी जोखिम उठाने की
क्षमता के अनुसार विभिन्न रूपों से निवेश करता है। योजनाबद्ध
निवेश योजनाएं निवेश का अनुशासित तरीका हैं, लेकिन इक्विटी
फंडों में निवेश कर तीन साल के बाद पैसे निकालने की बात नहीं
सोचनी चाहिए। इक्विटी या इक्विटी फंडों में सिप के माध्यम से
कम से कम सात वर्षों के लिए निवेश किया जाना चाहिए, वह भी किसी
वित्तीय लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए, विभिन्न फंडों में
निवेश करते हुए। ऐसे में निवेशकों को बेहतर रिटर्न मिल सकता
है। उनका मानना है कि साल के अंत में बाजार की स्थिति में
सुधार होगा। फलस्वरूप, सिप के माध्यम से निवेश करने वाले नए और
पुराने दोनों निवेशकों को लाभ होगा।
वैल्यू रिसर्च के मुख्य कार्यकारी अधिकारी धीरेन्द्र
कुमार का कहना हैकि 'वित्तीय लक्ष्य निर्धारित करने के बाद
दीर्घावधि के लिए विभिन्न इक्विटी फंडों में सिप के माध्यम से
नियमित तौर पर निवेश करना चाहिए। बाजार के उतार-चढ़ाव का
प्रभाव अल्पावधि के निवेश पर पड़ता है। दीर्घावधि (सात साल से
अधिक की अवधि) के लिहाज से इक्विटी
फंड
बेहतर रिटर्न देते हैं। गया साल निवेशकों के लिए अच्छा नहीं
रहा लेकिन उम्मीद है कि अगले साल वे कुछ बेहतर लाभ अर्जित कर
पाएंगे।
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