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वित्तीय
साक्षरता पर रिजर्व बैंक का जोर
लखनऊ ।
भारतीय रिजर्व बैंक इस समय अपना प्लेटिनम जयंती मना रहा है।
वर्ष भर चलने वाले इस कार्यक्रम के तहत बैंकों के बैंक भारतीय
रिजर्व बैंक ने लखनऊ में वित्तीय साक्षरता बढ़ाने हेतु एक
कार्यक्रम का आयोजन किया। अलीगंज में आयोजित इस कार्यक्रम में
बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों के अलावा वाणी विकास एवं आशा
ज्योति संस्थाओं के मानसिक रूप से विकलांग लोगों ने भी
कार्यक्रम में भागीदारी की। जाली नोटों की पहचान करने का तरीका
नाटकीय अंदाज में रचनात्मक कार्यों के माध्यम से प्रस्तुत किया
गया। रिजर्व बैंक ने वित्तीय समावेशन अर्थात हर व्यक्ति का
बैंक खाता खोलने पर जोर दिया। इस दौरान मानसिक रूप से विकलांग
बच्चों ने रंगारग कार्यक्रम भी पेश किया। सन् 1935 में स्थापित
भारतीय रिजर्व बैंक अपने 75वे वर्ष में वित्तीय साक्षरता बढ़ाने
हेतु इस तरह के नए-नए कदम उठा रहा है। भारत निर्माण कार्यक्रम
में आयोजित होने वाले अभियानों में भागीदारी से भी रिजर्व बैंक
लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रहा है। कार्यक्रम में 160
मानसिक रूप से विकलांग बच्चों को नोटों
के बारे में विस्तार से पहचान कराई गई और नोटों के बारे में
उनकी रूचि पैदा करने संबंधी फिल्म भी दिखाई गई।
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