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गणतंत्र परेड में सौ वर्ष पुरानी ‘पंजाब मेल’

नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस परेड 2012 में भारतीय रेल अपनी झांकी में अतीत और वर्तमान दोनों को साथ-साथ दिखाएगा। भारतीय रेल की लोकप्रिय गाड़ी ‘पंजाब मेल’ को इस झांकी के लिए चुना गया है, क्योंकि यह देश में ऐसी पहली गाड़ी है, जिसे रेलवे के इतिहास में 100वें वर्ष में प्रवेश करने का गौरव प्राप्त हुआ है। इस झांकी में आधुनिक गाड़ी के साथ-साथ उसके पुराने स्वरूप को भी रखा गया है जो पहले भाप इंजन से चलती थी। पंजाब मेल अब विद्युत और डीजल से चलती है। आधुनिक गाड़ी में एक विद्युत इंजन को, एक शयनयान डिब्बे को खींचते हुए दिखाया गया है। इसके साथ-साथ पंजाब मेल के पुराने छोटे स्वरूप को दिखाया गया है, जिसमें भाप इंजन पुराने लकड़ी के डिब्बों को खींच रहा है। ये गाडि़यां एक सुंरग में से निकलती हुई दिखाईं देती हैं।
यह झांकी एक भू-तत्व को भी दिखाती है, जिसमें पंजाब के शहर कपूरथला में स्थित रेल डिब्बा फैक्टरी के रेल कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्य सवार हैं, झांकी के सामने भंगड़ा नृत्य करेंगे। झांकी में अतीत का भी आह्वान किया गया है और यह कुल मिलाकर जनता को वर्तमान की ओर अग्रसर का अहसास कराएगी। ‘पंजाब मेल’ पहले ‘पंजाब लिमिटेड’ के नाम से जानी जाती थी। यह भारतीय रेल के बड़ी लाइन वाले नेटवर्क पर 100वें वर्ष में प्रवेश करने का गौरव प्राप्त करने वाली पहली रेल है। मध्य रेलवे ने एक पुराने दस्तावेज (1911 के लागत आंकलन पत्र) के आधार पर जन्मतिथि की गणना की है।
अंग्रेजों के शासन के दौरान, शुरू में यह रेलगाड़ी 2496 किलोमीटर मार्ग तय करती थी और यह इटारसी, आगरा, दिल्ली, अमृतसर और लाहौर होते हुए पेशावर छावनी पर समाप्त होती थी। पंजाब मेल की सेवाएं मुख्यत: उच्च श्रेणी के गोरे साहिबों के लिए थी, बाद में 1930 के मध्य में तृतीय श्रेणी के डिब्बे जोड़कर निम्न श्रेणी के लोगों के लिए इसकी सेवाएं शुरू की गई, भारत के स्वतंत्रता प्राप्त करने से कोई दो वर्ष पूर्व 1945 में ‘पंजाब मेल’ के साथ इसकी पहली वातानुकूलित कार जोड़ी गई। सन् 1947 में स्वाधीनता के बाद यह रेल मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनस (पहले विक्टोरिया टर्मिनस के नाम से विख्यात) और पंजाब में फिरोजपुर के बीच चलती है। चौबीस डिब्बों वाली इस रेल में वातानुकूलित और सामान्य दोनों तरह के शयनकक्ष डिब्बे हैं और यह 1930 किलोमीटर यात्रा तय करती है।
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