पंजाब में धान बुआई मजदूरों की चांदी

  • राजीव कुमार

चंडीगढ़। पंजाब में एक बार फिर धान की बुआई के लिए प्रवासी श्रमिकों की भारी किल्लत हो गयी है। श्रमिकों को लेकर मुक्तसर जिले के वट्टू गांव में दो किसानों के बीच गोली तक चल गई। राज्य में धान की बुआई के लिए 7.5 लाख मजदूरों की जरूरत होती है जबकि इस साल अब तक केवल 5 लाख मजदूर ही मुहैया हो पाए हैं। धान की बुआई का काम अगले करीब 45 दिन तक चलेगा। मजूदरों की मांग की तुलना में कम उपलब्धता ने उनकी मजदूरी का भाव आसमान पर पहुंचा दिया है। बताया जा रहा है कि मजदूरी के लिए 500 रुपये तक दिए जा रहे हैं। मजदूरों को इस दर से भुगतान करने पर पंजाब के किसानों और उद्योगों का गणित बिगड़ सकता है।
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्रियों के मुताबिक यहां 26 लाख हेक्टेयर यानी कि 65 लाख एकड़ जमीन पर धान की बुआई लगातार डेढ़ महीने तक चलती है। चार-पांच मजदूर एक दिन में एक एकड़ खेत में बुआई करते हैं। मजदूरों की कमी के कारण प्रति एकड़ बुआई की मजदूरी पिछले साल के 1,500-1,600 रुपये के मुकाबले 2,000 रुपये तक पहुंच चुकी है। पिछले साल भी पंजाब में धान बुआई के दौरान प्रवासी मजदूरों की किल्लत हो गयी थी और एक एकड़ बुवाई की मजदूरी 800-900 रुपये से उछलकर 1,500-1,600 रुपये तक जा पहुंची थी। अर्थशास्त्री एमएस सिध्दू कहते हैं, 'चार-पांच दिन पहले वट्टू गांव में दो किसानों के बीच इसलिए गोली चल गई, क्योंकि एक किसान ने दूसरे किसान के खेत में काम कर रहे मजदूरों को अधिक पैसे देकर अपने खेत में बुआई के लिए बुला लिया।
जाहिर है इस साल फिर पिछले साल की तरह बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश से आने वाले मजदूरों की भारी कमी है।' पिछले हफ्ते पंजाब के एक अखबार में बिहार सरकार की तरफ से अपने मजदूरों से प्रदेश लौटने की अपील की गयी थी और उन्हें ब्लू कार्ड स्कीम के तहत 3,600 रुपये प्रति माह देने की बात कही गयी थी। जालंधर के किसान जसविंदर सांगा कहते हैं, 'पंजाब के किसान इन दिनों सुबह-सुबह मजदूरों की तलाश में आसपास के बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों की खाक छान रहे हैं। अपनी पेशकश में वे मजदूरों को अधिकतम मजदूरी के साथ उनके रहने खाने के उम्दा इंतजाम की पेशकश कर रहे हैं।' धान बुआई के काम में अधिक मजदूरी मिलने से पंजाब के शहरों में काम करने वाले मजदूर भी इन दिनों गांव की ओर पलायन कर गये हैं। लिहाजा पंजाब की औद्योगिक इकाइयों में भी गैर प्रशिक्षित श्रमिकों की कमी हो गयी है।
पंजाब इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के अधिकारियों के मुताबिक प्रति माह 4,000 रुपये वेतन देने के बावजूद पिछले दो सालों से पंजाब की औद्योगिक इकाइयों में 40 फीसदी मजदूरों की कमी आ चुकी है। वह कहते हैं कि दो-तीन साल पहले तक प्रवासी मजदूर फरवरी में अपने घर जाते थे और मई बीतते-बीतते पंजाब वापस आ जाते थे, लेकिन अब 50,000 मजदूर पंजाब से जाते हैं तो वापस आने वालों की संख्या 15,000 तक ही होती है। (बिजनेस स्टैंडर्ड से साभार)