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संघ किसी के विरोध में नहीं - मोहन भागवत

प्रयाग।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर संघचालक मोहन राव भागवत ने माघ
मेला में परेड ग्राउण्ड पर आयोजित संघ समागम में हजारों
गणवेशधारी स्वयं सेवकों और नागरिकों को संबोधित करते हुए कहा
कि भोगवादी, प्रकृतिविरोधी, पश्चिमी जीवन शैली को छोड़कर और
हिंदू संस्कृति को अपनाकर ही पर्यावरण और मानवता की रक्षा की
जा सकती है। उन्होंने कहा कि यदि दुनिया के सभी देश पर्यावरण
को लेकर समय रहते नहीं चेते तो कुछ ही समय में दुनिया से मानव
जीवन ही समाप्त हो जायेगा। इसका एकमात्र उपाय त्यागपूर्ण
भारतीय संस्कृति से संभव है। इसलिए हम प्रकृति का एक अंग होने
के नाते प्रकृति से उतना ही लें जितना हमें चाहिए। भागवत ने
बहती उर्जा का इस्तेमाल करने पर बल दिया और कहा कि बहती रुपी
उर्जा जैसे सूर्य, नदी, जंगल और खनिज संपदा का इस्तेमाल शोषण
के बजाय दोहन के रुप में करें, तो सब कुछ नियंत्रित हो सकता
है।
संघ प्रमुख ने कहा कि स्वयं सेवकों के एक लाख से अधिक
सेवा के कार्य बिना सरकार के सहयोग से चलाए जा रहे हैं। इस
प्रकार के कार्यो में उन्होंने जनता के सहयोग की अपेक्षा की और
कहा कि संघ का कार्य शाखा के माध्यम से व्यक्तित्व का निर्माण
करना है, यदि संघ को जानना हो तो बड़ी संख्या में स्वयंसेवक
बनकर जान सकते हैं। उन्होंने अधिक से अधिक स्वयंसेवक बनने का
आह्वान किया। संघ प्रमुख ने स्पष्ट रूप से कहा कि संघ का कार्य
न किसी के विरोध में और ना ही किसी प्रतिक्रिया में है, इसे
समझने के लिए ही संघ की शाखा में आना जरुरी है।
जहां हिंदू जनसंख्या प्रभावी नहीं है, वहां षडयंत्रकारी
शक्तियां देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त हैं। इन सारी
समस्याओं का समाधान हिंदुत्व में है। उन्होंने कहा कि विदेशी
ताकतें यह विभ्रम फैला रही हैं कि हिंदू भी आतंकवादी होता है
जबकि संघ का मानना है कि हिंदू आतंकवादी हो ही नहीं सकता है और
यदि कोई हो भी गया तो हिंदू समाज उसके साथ कभी खड़ा नही हो
सकता। जब तक हिंदुत्व की विचारधारा के आधार पर देश के सभी
वर्गो, समुदायों एवं जातियों को एकसूत्र में बांधा नहीं जायेगा
तब तक वैभवशाली राष्ट्र का निर्माण नहीं हो सकता।
भागवत ने कहा कि तथाकथित राजनेता अपने निजि स्वार्थो के
कारण जाति, पंथ, भाषा, सम्प्रदाय और क्षेत्रवाद को बढ़ावा दे
रहे हैं। इन नेताओं का देश की सुरक्षा और समस्या से कोई लेना
देना नहीं है, इनको सिर्फ कुर्सी चाहिए। तेलंगाना राज्य के
मुद्दे पर कहा कि ये तुच्छ राजनीति करने वाले राजनेताओं की देन
है। आज उनका कुछ नहीं बिगड़ रहा है उनकी इस करतूत के कारण देश
की सम्पति जल रही है। उन्होंने सन् 1952 के गुरुजी के विचारों
का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका मानना था कि भाषावाद के नाम पर
राज्य का बॅटवारा नहीं होना चाहिए, आज इस प्रकार की समस्या हम
सबके सामने दिख रही है। उन्होंने कहा कि भारत की सीमाएं चारों
तरफ से असुरक्षित हैं। चीन अपनी सामंतवादी नीति के तहत भारत को
चारों तरफ से घेर रहा है।
उन्होंने पाकिस्तान का नाम लेकर कहा कि वह भारत से दुश्मनी
छोड़ नहीं सकता है क्योंकि उसका जन्म ही दुश्मनी से हुआ है।
बांग्लादेश हमारे सैनिकों को मारता है और भारतीय सीमाओं के
अन्दर घुसपैठ करके अपना दावा ठोकता है। धीरे-धीरे बांग्लादेश
आतंकवादियों का गढ़ बनता जा रहा है, समय रहते इस समस्या का
समाधान नहीं हुआ तो आने वाले समय में देश के सामने खतरा बढ़ेगा।
उन्होंने जोर देकर कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के
बावजूद भी सरकार बांग्लादेशी घुसपैठियों को बाहर भेजने में
असफल है। राजनीतिक स्वार्थो के चलते घुसपैठियों को राशन कार्ड,
मतदाता सूची में नाम अंकित कर उनसे सहानुभूति जतायी जा रही है।
उन्होंने इन सभी समस्याओं के पीछे सरकार की ढुलमुल नीति को
जिम्मेदार ठहराया।
मोहन भागवत ने देश की आन्तरिक समस्याओं पर बोलते हुए
कहा कि नक्सलवाद, उग्रवाद सहित अन्य प्रकार की समस्या जो हमारे
सामने आ रही है उसके मूल में विदेशी ताकतें हैं। रंगनाथ कमेटी
का नाम लिये बगैर उन्होंने कहा कि संविधान के खिलाफ दिया जा
रहा आरक्षण देश को बांटने का काम करेगा न कि जोड़ने का, इसलिए
इस प्रकार के आरक्षण से सरकार को बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि
भारत में तथाकथित अल्पसंख्यकों को इतनी अधिक सुविधाएं दी जा
रही हैं कि देश में बहुसंख्यक होना अपराध सा हो गया है।
प्रारम्भ में स्वयंसेवक घोष की थाप पर पथ संचलन करते
हुए संघ समागम स्थल पर पहुंचे। सभा में सर संघचालक के आने पर
स्वयंसेवकों ने आद्य सर संघचालक को प्रणाम किया। तत्पश्चात
ध्वजारोहण हुआ। मोहन भागवत के उद्बोधन के पूर्व स्वयंसेवकों ने
सूर्य नमस्कार, दण्ड, नियुद्ध आदि का प्रदर्शन किया। संघ समागम
में प्रमुख रुप से विहिप के अन्तर्राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक
सिंघल, पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ मुरली मनोहर जोशी,
भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष केशरी नाथ त्रिपाठी, पूर्व
मंत्री डॉ नरेन्द्र सिंह गौर, लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व
कुलपति एवं संघ के सह क्षेत्र संघचालक प्रो देवेन्द्र प्रताप
सिंह, लोकसेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रांत संघचालक प्रो
कृष्ण बिहारी पाण्डेय, क्षेत्र प्रचारक अशोक बेरी, क्षेत्र
कार्यवाह राम कुमार वर्मा, विद्याभारती के क्षेत्र संगठन
मंत्री शिवकुमार और प्रांत प्रचारक शिवनाराण सहित अन्य
स्वयंसेवक और कार्यकर्ता उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन
प्रांत शारीरिक शिक्षण प्रमुख
रत्नाकार और अतिथियों का परिचय प्रांत कार्यवाह डॉ विश्वनाथ
लाल निगम ने किया।
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