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नौसेना
आतंक के समुद्री रास्ते, एक और चुनौती
नई दिल्ली।
मालवाहक
जहाजों को लुटेरों से बचाने के लिए अदन की खाड़ी में तैनात,
भारतीय नौसेना के आईएनएस तबर ने भीषण मुठभेड़ में समुद्री
लुटेरों का जब एक मदरशिप को डुबो दिया तो दुनिया को भारतीय
नौसेना की जांबाजी का एहसास हुआ। भारतीय नौसेना का समुद्री
लुटेरों पर वह हमला इतना तगड़ा था कि समुद्र में तैनात दूसरे
देशों की नौसेनाएं, भारतीय नौसेना की बहादुरी की कायल हो गईं।
कहीं थोड़ी सी चूक हुई जो लुटेरे अपने मदरशिप से कूदकर किसी
दूसरी नौका से भाग निकलने में सफल हुए, नहीं तो वे भी धरे जाते
या मारे जाते। कई देशों के दर्जनों जहाजों को अगवा कर अरबों की
फिरौती वसूल चुके और इसके लिए हर समय किसी न किसी समुद्री जहाज
का पीछा करते रहने वाले इन समुद्री लुटेरों को उनके ही गढ़ में
भारतीय नौसेना ने हफ्ते भर में ही यह बड़ा झटका दिया था।
भारतीय नौसेना की इस काबिलियत का लोहा मानने वालों में अमरीका
और फ्रांस भी हैं जो लाख कोशिशों के बाद भी समुद्री लुटेरों से
हारते रहे हैं। नौसेना की इस कामयाबी ने 1971 की यादें ताजा
कीं। उस समय भारतीय नौसेना ने पाकिस्तान का जहाज डुबोया था।
यह इत्तेफाक कहा जाए या फिर नौसेना की समुद्री गश्त में कोई
चूक कि वह, उन पाकिस्तानी आतंकवादियों को नहीं पकड़ सकी जो
भारत के आर्थिक शहर मुंबई में तबाही मचाने के लिए पाकिस्तान
से समुद्री मार्ग से आए थे और आते रहे हैं। आतंकवादियों के इस
नए नेटवर्क से निपटने के लिए भारत को नौसेना की प्रतिरक्षा
रणनीतियों में बदलाव करते हुए उसके संसाधनों को बढ़ाना पड़ा
है।
मुंबई पर हमले के लिए पाकिस्तानी आतंकवादियों ने
समुद्र का ही रास्ता चुना था। शायद इसलिए कि उन्हें भारत आने
का यह मार्ग ज्यादा सुरक्षित लगा। उन्होने समुद्री नाव का
इस्तेमाल हथियार और विस्फोटकों को सुरक्षित पहुंचाने के लिए
किया, जिससे पता चलता है कि समुद्री मार्ग पर आतंकवादी गुटों
का एक बड़ा नेटवर्क कोई आज से नहीं बल्कि एक लंबे समय से काम
कर रहा है। समुद्री मार्ग पर सुरक्षा बलों का सख्त पहरा हुआ
होता तो यह नेटवर्क कभी का पकड़ में आ गया होता। मुंबई हमले के
दौरान पकड़े गये आतंकवादी अजमल कसाब ने इस समुद्री मार्ग के
इस्तेमाल के बारे में भी जानकारियां दी हैं जिसके बाद भारत
सरकार ने समुद्री मार्ग को सुरक्षित बनाने के लिए एक के बाद एक
सुरक्षात्मक कदम उठाये और एक अलग से सुरक्षा बल के साथ-साथ
नौसेना को और ताकतवर बनाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। समुद्र
में नौकाओं के अपहरण और उनको छोड़ने के एवज में फिरौती वसूली
का काम कोई नया नहीं है, यह कितने व्यापक स्तर पर हो रहा है,
भारत की जनता को यह तभी पता चला जब भारतीय नौसेना से समुद्री
लुटेरों का जमकर मुकाबल हुआ और भारतीय नाविकों का अपहरण हुआ।
इससे मालूम होता है कि इसमें कोई बड़ा जाल बट्टा है, जिसका इन
घटनाओं की जांच पड़ताल में भंडाफोड़ होना बाकी है। समुद्री
लुटेरों के खिलाफ भारतीय नौसेना ने जो यह कार्रवाई की वह
साहसिक रही।
समुद्री लुटेरों के खिलाफ अभियान में जुटे आईएनएस तबर
ने ओमान में सलाला के दक्षिण पश्चिम में 285 समुद्री मील दूर
लुटेरों के मदरशिप को दो स्पीड बोट के साथ देखा। बंदूकों,
रॉकेटों और ग्रेनेड लांचरों से लैस लुटेरों ने आईएनएस तबर को
उड़ाने की
कोशिश की। भारतीय कमांडो
ने जवाबी हमला बोलकर लुटेरों के पोत में रखे विस्फोटक उड़ा
दिए, जिससे अपने ही जहाज में धमाकों से घबराकर लुटेरे भाग खड़े
हुए। लुटेरे मदरशिप का इस्तेमाल ट्रालर आदि का अपहरण करने के
लिए करते हैं। इसी प्रकार आतंकवादी भी समुद्री रास्तों का
इस्तेमाल जिस प्रकार से करते आ रहे हैं उससे लगता है कि भारत
में विदेशों से लाए गए आग्नेयास्त्रों का एक बड़ा जखीरा है
जो कि विघटनकारियों और आतंकवादियों के छिपे नेटवर्क के पास है।
यह निष्कर्ष इसलिए सामने आया है क्योंकि भारत में
आतंकवादियों की तरफ से जितने भी हमले हुए हैं उनमें जो
आग्नेयास्त्र इस्तेमाल किए गए हैं वे सब विदेशी निर्मित हैं
जिन्हे किसी रेलगाड़ी से या किसी बार्डर को पार करके भारत में
नहीं लाया जा सकता। तस्कर और आतंकवादी, भारतीय बंदरगाहों पर
पसरी लापरवाहियों का भरपूर लाभ उठाते रहे हैं और यह समझने में
भी कोई संकोच नही लगता है कि इसमें भारतीय बंदरगाहों पर
निगरानी के लिए तैनात भारतीय एजेंसियों के कुछ लोगों की
संलिप्तता न हो।
सोमालिया और अन्य कुछ मुल्कों के समुद्री लुटेरों के
गिरोह अदन की खाड़ी में कोई आज से नहीं वरन लंबे समय से दूर
देशों के जहाजों को लूटते और डुबोते भी रहे हैं। इनकी चपेट में
भारतीय मालवाहक जहाज आया जोकि एक बड़ी रकम की फिरौती देकर आजाद
कराया जा सका। लुटेरों में और कहां-कहां के गैंग शामिल हैं
इसका खुलासा अभी भी नहीं हो पाया है। लेकिन इनमें पाकिस्तान
और अफगानिस्तान के तस्कर गिरोहों की संलिप्तता भी सामने आ
रही है। समुद्री लुटेरों के पास अत्याधुनिक हथियारों की खेप
से पता चलता है कि इन्हें सोमालिया और आसपास के विद्रोही
संगठनों के गुटों का भरपूर समर्थन मिला हुआ है जिनकी
अर्थव्यवस्था इस पर आधारित है। भारत फ्रांस और अमरीका सहित
कई देश इनसे त्रस्त हैं और इनके पोत इन लुटेरों के शिकार बने
हुए हैं। जाहिर सी बात है कि अदन की खाड़ी की यह एक बड़ी
समस्या बन चुकी है जिसमें कोई कमी आने के बजाए यह बढ़ती जा
रही है।
समुद्र के रास्ते माल ढोने और उनको गंतव्य तक
पहुंचाने के खतरे तो बहुत बढ़ ही गए हैं। भारतीय उपमहाद्वीप
में आतंकवादियों के समुद्री नेटवर्क का भी भयानक विस्तार हो
रहा है। जब तक संचार माध्यमों का विस्तार नहीं था तब तक ऐसी
घटनाएं पता ही नहीं चल पाती थीं। बहुत सी बड़ी-बड़ी घटनाएं
मीडिया की नजरों से बची जा रही थीं, मगर अब इस प्रकार की
घटनाएं खुलने लगी हैं। कुछ मालवाहक जहाज तो कभी खुद भी डुबो
दिए जाते रहे हैं। अभी तक जिन पोतो के डूबने के समाचार मिलते
रहे हैं, उनकी जांच रिपोर्टों को सार्वजनिक नहीं किया जाता है
जिससे पोत के डूबने या नौकाओं के लापता होने के कारण पता नहीं
चलते हैं।
पश्चिमी नौसेना कमान अदन की खाड़ी में समुद्री डाकुओं
के खिलाफ अभियान चला रही है। अदन की खाड़ी में
सोमालियाई जल क्षेत्र के आसपास समुद्री लुटेरों के बढ़ते खतरे
का सामना कर रही भारतीय नौसेना को इस अभियान में हिंद
महासागरीय नौसेनाओं-इंडियन ओशन नेवल सिम्पोजियम के बीच तालमेल
की जरूरत है। सोमालिया के आसपास के जोखिम भरे समुद्री क्षेत्र
में अमरीका की अगुवाई में नाटो देशों की नौसेना तथा यूरोपीय
नौसेनाएं भी मौजूद हैं, लेकिन हाल के वर्षों में लुटेरों के
खिलाफ ऐसी सीधी कार्रवाही जंगी पोत आईएनएस तबर से की गई।
अक्टूबर में अदन की खाड़ी में तैनाती के बाद से भारतीय नौसेना
के जंगी पोत ने देश के 35 जहाजों को समुद्री लुटेरों से बचाते
हुए आवागमन सुरक्षित कराया है, लेकिन ऐसे खतरनाक जल क्षेत्र
में भारत का अकेले अपने दम पर काम करना और लंबे समय तक टिके
रहना आसान नहीं है, जब तक कि संयुक्त राष्ट्र के बैनर तले यह
अभियान नहीं चलता। भारतीय जंगी पोत, चेतक हेलीकॉप्टर के साथ
इस खतरनाक इलाके में सलाला से अदन की खाड़ी तक गश्त कर रहा
है। उसके लिए केवल रसद का इंतजाम मित्र देशों से किया जा रहा
है।
सोमालिया के आइल से लेकर होबियों बंदरगाह का इलाका
लुटेरों का गढ़ माना जाता है जहां जहाजों को अपहरण करके ले
जाया जाता है। लुटेरे ग्रेनेडों, भारी मशीन गनों और राकेट
लांचरों से लैस होते हैं। बंधकों की जान को खतरा देखते हुए
दुनिया की नौसेनाएं अगुवा हुए जहाज पर कार्रवाई करने से बचती
हैं। इन वाणिज्यिक जहाजों के मालिक लुटेरों से बातचीत करके
बंधकों को छुड़ाते रहे हैं। लुटेरों ने सऊदी अरब के सुपर तेल
टैंकर साइरस को कब्जे में लिया था, जिस पर करीब दस करोड़ डॉलर
मूल्य का बीस लाख बैरल तेल लदा था। ईरान के लिए अनाज से लदे
पोत को भी लुटेरों ने अपने कब्जे में लिया। सोमालिया तट के
पास समुद्री लुटेरों ने 16 लोगों को ले जा रही थाइलैंड की एक
बड़ी नौका का अपहरण किया। सामोलिया के समुद्री डाकुओं ने सऊदी अरब के
तेलवाहक पोत सिरियस स्टार को मुक्त करने के लिए फिरौती की
मांग की। भारतीय नौसेना का कहना है कि लंबे समय तक निरंतर
कार्रवाई के लिए तैनात रहना आसान नहीं है और ऐसे में दूसरे
देशों की नौसेनाओं के साथ तालमेल से गश्त करने की जरूरत है।
समुद्री लुटेरों ने पिछले साल 92 जहाजों को अगवा किया। आईएनएस तबर हर तरह के हथियारों से लैस है
जिनमें बराक मिसाइल भी शामिल है। करीब 30 समुद्री मील प्रति
घंटा की रफ्तार से चलने वाला यह जंगी पोत जबर्दस्त प्रहार
क्षमता रखता है।
देश की साढ़े सात हजार किलोमीटर की तटीय सीमा को बाहरी
हमलों से बचाने के लिए केंद्र सरकार समुद्री सलाहकार की अगुवाई
में नया जलीय सुरक्षा तंत्र स्थापित कर रही है। नया समुद्री
सुरक्षा तंत्र भारतीय नौसेना के तहत काम करेगा। समुद्री
सुरक्षा सलाहकार की नियुक्ति नौसेना की सिफारिश पर रक्षा
मंत्रालय करेगा और नौसेना के वायस एडमिरल रैंक के अधिकारी को
इस पद की जिम्मेदारी दी जाएगी। उनके तहत सलाहकार बोर्ड के गठन
की भी व्यवस्था की जा रही है जो विभिन्न मंत्रालयों के साथ
मिलकर काम करेगा। इस बोर्ड में नौसेना के पचास से अधिक अधिकारी
होंगे। इस नए सुरक्षा तंत्र का जिम्मा, देश की समूची 7516
किलोमीटर लंबी समुद्री सीमा पर तटरक्षक बल कार्य क्षेत्र से
12
समुद्री मील दूर तक समुद्री सुरक्षा पुलिस, 12 से 200 मील तक
तटरक्षक बल और उसके आगे नौसेना के समुद्री जल क्षेत्र के बीच
की विभिन्न सुरक्षा परतों में तालमेल बैठाने का होगा।
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