मप्र में व्यवसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद का गठन

  • स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

भोपाल। बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार के अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध कराने आदि उद्देश्यों को लेकर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मध्यप्रदेश व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद का गठन किया गया है। यह परिषद तकनीकी शिक्षा एवं प्रशिक्षण विभाग के अंतर्गत एक स्वशासी संस्था के रूप में कार्य करेगी। परिषद का मुख्यालय भोपाल में होगा और इसका कार्य क्षेत्र संपूर्ण मध्यप्रदेश होगा।
व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद की साधारण सभा एवं संचालक मण्डल का भी गठन किया गया है। साधारण सभा के अध्यक्ष मुख्यमंत्री एवं उपाध्यक्ष तकनीकी शिक्षा एवं प्रशिक्षण विभाग के मंत्री एवं वाणिज्य, उद्योग एवं रोजगार विभाग के मंत्री होंगे। साधारण सभा में सदस्य के रूप में जिन विभागों के प्रमुख सचिवों को शामिल किया गया है उनमें तकनीकी शिक्षा एवं प्रशिक्षण विभाग, किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग, पिछड़ा वर्ग और अल्प संख्यक कल्याण विभाग, वाणिज्य, उद्योग एवं रोजगार विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, श्रम विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, ग्रामोद्योग विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग, पर्यटन विभाग, आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति कल्याण विभाग एवं प्रमुख सचिव महिला एवं बाल विकास विभाग को शामिल किया गया है। साधारण सभा में सदस्य के रूप में सीईओ क्रिस्प के साथ-साथ उद्योगों के मध्यप्रदेश चेप्टर के प्रतिनिधि इनमें सीआईआई, पीएचडी चेम्बर ऑफ कॉमर्स, फेडरेशन ऑफ इंडियन चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्रीज, अध्यक्ष मध्यप्रदेश लघु उद्योग संघ के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है। साधारण सभा के सदस्य सचिव एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रशिक्षण मध्यप्रदेश होंगे।
इसी तरह तकनीकी शिक्षा एवं प्रशिक्षण विभाग के मंत्री की अध्यक्षता में संचालक मण्डल का भी गठन किया गया है। परिषद को स्वतंत्र रूप से कार्य करने का अधिकार दिया गया है। यह परिषद उच्च डिप्लोमा एवं डिग्री प्रदान करने के लिए मान्य किये जाने की भी योजना तैयार कर सकेगी। परिषद जिला स्तर पर युवाओं को रोजगार एवं प्रशिक्षण के अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकेगी। स्कूल छोड़ चुके युवाओं, अकुशल कारीगरों एवं उद्योगों से जुड़ मजदूरों में दक्षता बढ़ाने के लिये परिषद पाठ्यक्रम तैयार करने, प्रशिक्षण देने एवं प्रमाणीकरण का कार्य, प्रदेश में उपलब्ध प्रशिक्षण संसाधनों को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के माध्यम से और अधिक विकसित भी कर सकेगी। परिषद के कार्य संचालन के लिये 15 पद निर्मित किये जाने को भी स्वीकृति दी गयी है। परिषद में अतिरिक्त संचालक एवं संयुक्त संचालक के एक-एक पद एवं उप संचालक के विषयवार दो पद निर्मित किये गये हैं। परिषद की कार्य संचालन के लिये तकनीकी शिक्षा विभाग ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिये हैं

 

बिजली उत्पादन बढ़ाने में केंद्र सहयोग करे

भोपाल। ऊर्जा और खनिज साधन राज्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वह मध्यप्रदेश में विद्युत उत्पादन बढ़ाने और ऊर्जा सुधार लागू करने के प्रयासों में विभिन्न संस्थाओं से धनराशि उपलब्ध कराने में सहयोग करे। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में सतपुड़ा ताप विद्युत गृह की 4 इकाईयों के नवीनीकरण एवं आधुनिकीकरण की योजना तैयार है, जिसे विश्व बैंक से ऋण के लिये प्रस्ताव विद्युत मंत्रालय को भेजा गया है। विश्व बैंक से इस ऋण की स्वीकृति में विलंब होने के कारण विगत दिनों इस कार्य के लिये पावर फायनेंस कार्पोरेशन से ऋण स्वीकृत कराया गया है। उन्होंने राज्य की विद्युत वितरण कम्पनियों को कम ब्याज दर पर ऋण की व्यवस्था करने को भी कहा। राजेन्द्र शुक्ल ने यह बात देश के ऊर्जा मंत्रियों की बैठक में कही जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय ऊर्जा मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने की।
राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि नई विद्युत उत्पादन परियोजनाओं की नई ट्रांसमिशन लाइनों और ट्रांसमिशन प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिये आने वाले तीन वर्षों में लगभग 5 हजार 816 करोड़ रूपये के पूंजी निवेश की जरूरत है। ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना और सतपुड़ा ताप विद्युत गृह में विस्तार इकाईयों से विद्युत निकासी के लिये विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक 2 हजार 600 करोड़ रूपये ऋण के प्रस्ताव केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय को भेजे गये। इसके अलावा विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में अगले पांच वर्षों में 7 हजार 340 करोड़ और उप-पारेषण एवं वितरण के क्षेत्र में लगभग 9 हजार 71 करोड़ रूपये के पूँजी निवेश की आवश्यकता है।
वर्तमान स्थिति को देखते हुये विद्युत कम्पनियों का 200 से 300 करोड़ रूपये प्रतिवर्ष खर्च की व्यवस्था अपने स्त्रोतों से किया जाना संभव नहीं है। एशियाई विकास बैंक और विश्व बैंक से प्राप्त किये जाने वाले ऋण पर ब्याज की दर लगभग 5 से 7 प्रतिशत है जबकि आरईसी/पावर फायनेंस कार्पोरेशन के ऋण पर 10 से 12 प्रतिशत ब्याज लगता है। इसे देखते हुये केंद्र सरकार का बहुपक्षीय संस्थाओं से राज्यों के लिये वित्तीय व्यवस्था करवाना राज्यों के हित में होगा। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत की पर्याप्त एवं गुणवत्तापूर्ण उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये अगले तीन वर्षों में लगभग 5 हजार करोड़ रूपये की आवश्यकता होगी। वितरण क्षेत्र में पूंजीगत कार्यों के लिये अगले 3 से 5 वर्षों में करीब 10 हजार करोड़ रूपये की आवश्यकता है। इस महत्वपूर्ण कार्य के लिये भारत सरकार कम ब्याज दरों पर वित्तीय संस्थाओं से ऋण की व्यवस्था कराए।
शुक्ल ने अपेक्षा की कि केंद्र सरकार शहरी क्षेत्रों के लिये आरएपीडीआरपी के माध्यम से उपलब्ध कराये जा रहे धन के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत विकास के लिये विशेष ऋण और धन उपलब्ध कराए। इस वर्ष पीएलएफ का लक्ष्य 74.7 प्रतिशत निर्धारित है जिसके लिये प्रदेश को करीब 170 लाख टन कोयले की आवश्यकता होगी। अगले पांच वर्षों के लिये प्रतिवर्ष मात्र 150 लाख टन कोयले का आवंटन किया गया है। कोयले की उपलब्धता में कमी के कारण इस वर्ष का निर्धारित पीएलएफ प्राप्त किया जाना संभव नहीं हो सकेगा। उन्होंने इस वर्ष प्रदेश के ताप विद्युत संयंत्रों को आवश्यकता के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण कोयला उपलब्ध कराने को कहा। कोयले के परिवहन में अनावश्यक व्यय कम करने के लिए कोयला मंत्रालय के साथ युक्तियुक्त पहल करने की अपेक्षा की।
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में बहुतायत मात्रा में कोयले के भंडार उपलब्ध हैं। निजी कम्पनियां और सार्वजनिक उपक्रम ऊर्जा उत्पादन के लिये प्रदेश में थर्मल पावर स्थापित करने के प्रयास कर रहे हैं, परंतु कोल ब्लॉक के आवंटन के पश्चात भी वन संरक्षण अधिनियम के तहत वन भूमि का व्यपवर्तन न हो पाने से कोयला उत्पादन संभव नहीं हो रहा है और प्रस्तावित ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना में भी विलंब हो रहा है। उन्होंने पर्यावरण मंत्रालय में ऐसे लंबित प्रकरणों का जिक्र करते हुये कहा कि भारत सरकार के कोयला, ऊर्जा मंत्रालय और पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के साथ समन्वय स्थापित कर एक स्पष्ट नीति बनाई जाए ताकि आवंटित किये गये कोल ब्लॉक का खनन एवं विकास शीघ्र-अतिशीघ्र हो सके।
उन्होंने बताया कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते दुष्प्रभाव पर रोक लगाने के उद्देश्य से प्रदेश में अपारम्परिक ऊर्जा स्रोतों के माध्यम से विद्युत उत्पादन क्षमता वृद्धि के लिये भी राज्य सरकार विशेष प्रयास कर रही है। इस बावत राज्य सरकार ने एक प्रोत्साहन नीति भी जारी की है। अपारम्परिक स्रोतों को प्रोत्साहित करने और उसके क्रियान्वयन के लिये प्रदेश में एक नये विभाग के गठन की स्वीकृति दी गई है। प्रदेश के पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी अंतर्गत 50 कृषि पम्पों को ऊर्जा दक्ष पम्पों से परिवर्तित किया गया था, जिसके परिणामस्वरूप विद्युत खपत में लगभग 30 से 40 प्रतिशत कमी होने के साथ-साथ विद्युत की मांग में भी करीब 40 प्रतिशत की कमी आई है। केंद्र सरकार जिस तरह डीजल एवं खाद आदि पर सब्सिडी देती है उसी तरह ऊर्जादक्ष पम्पों के क्रय के लिये किसानों को सस्ती दरों पर ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जा सकती है।
उन्होंने सुझाव दिया कि जिन राज्यों में विद्युत क्षेत्र में सुधार की ज्यादा संभावनाएं हैं और विद्युत हानियां आदि का प्रतिशत राष्ट्रीय स्तर से अधिक है, उन राज्यों में विद्युत क्षेत्र में पूंजी निवेश के लिये केंद्र सरकार विशेष सहायता दे ताकि वे राज्य विद्युत की हानियों में कमी लाने के लिये सार्थक प्रयास कर सकें साथ ही उन्होंने अनुरोध किया कि जिन राज्यों में प्रति उपभोक्ता विद्युत खपत कम है उन राज्यों को प्रगतिशील राज्यों के समक्ष लाने के लिये विद्युत क्षेत्र हेतु केंद्र सरकार अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराए।


सूखा प्रभावित क्षेत्रों में छुट्टियों में भी बच्चों को भोजन
भोपाल। प्रदेश के सूखाग्रस्त 48 जिलों की 292 तहसीलों में गर्मियों की छुट्टियों में भी बच्चों को मध्यान्ह भोजन योजना के तहत दोपहर का भोजन दिया जायेगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास और सामाजिक न्याय मंत्री गोपाल भार्गव ने बताया कि राज्य शासन ने प्रदेश के 48 जिलों की उन 292 तहसीलों में प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं के बच्चों को दोपहर का भोजन देने का निर्णय लिया है जो सूखा प्रभावित हैं। इसके लिये जिला स्तर पर विस्तृत दिशा-निर्देश भेजे गये हैं, जिसके तहत दोपहर का भोजन देना सुनिश्चित करने को कहा गया है।
सूखा घोषित क्षेत्रों की शालाओं में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में बैठक होगी, जिसमें संबंधित क्षेत्रों के पालक-शिक्षक संघ, महिला स्व-सहायता समूहों के प्रतिनिधि, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत, शिक्षक, जनशिक्षा प्रभारी, जनशिक्षक, विकासखण्ड स्रोत समन्वयक और संबंधित ग्राम पंचायत के सरपंच एवं सचिव उपस्थित रहेंगे। बैठक में गर्मी की छुट्टियों के दौरान मध्यान्ह भोजन वितरण की कार्ययोजना बनाई जायेगी। जिला पंचायत का यह दायित्व होगा कि वह मध्यान्ह भोजन के लिये खाद्यान्न की उपलब्धता, भोजन पकाने की लागत राशि आदि का प्रबंध करे। इसके साथ ही आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध रहे यह व्यवस्था की जाये।
गर्मी की छुट्टी में शालाओं के बंद रहने के कारण संबंधित शालाओं के बच्चों को भोजन वितरण का दिन और नियत समय बताया जायेगा ताकि वे उस वक्त आकर भोजन प्राप्त कर सकें। इसके लिये बच्चों के पालकों को भी विधिवत सूचना दी जायेगी। प्रचार माध्यमों जैसे दीवार लेखन, स्थानीय रेडियो एवं समाचार पत्र में सूचना आदि का प्रकाशन किया जायेगा। ग्रीष्माकालीन अवधि में सूखाग्रस्त तहसीलों की शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में मध्यान्ह भोजन के लिये राज्य सरकार ने 16 करोड़ 36 लाख रुपये की प्रथम किस्त का आवंटन भी कर दिया है। राज्य सरकार की इस योजना से लगभग 60 लाख बच्चे लाभान्वित होंगे।

 

आगे और

Bookmark and Share