ये सड़क एनएच को कब हस्तांतरित हुई ?

  • लिमटी खरे

सिवनी। अटल बिहारी बाजपेयी के शासनकाल में स्वर्णिम चतुर्भज के अंग उत्तर दक्षिण गलियारे से सिवनी को मिटाने की कवायद 2008 में विधानसभा चुनावों के पहले ही आरंभ हो चुकी थी। मध्य प्रदेश के वाईल्ड लाईफ विभाग ने इस सड़क के निर्माण के लिए अपनी सहमति के साथ प्रस्ताव केंद्र सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजा था। इसी दौरान दक्षिण सिवनी सामान्य वन मण्डलाधिकारी ने अक्टूबर 2008 में ही इस मामले में पेंच फंसाने आरंभ कर दिए थे।
दक्षिण सिवनी सामान्य वन मण्डल के डीएफओ ने 25 अक्टूबर 2008 को जारी एक पत्र में इस बात का लेख साफ तौर पर किया है कि उनके कार्यालय में ऐसा कोई भी अभिलेख मौजूद ही नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि वन विभाग के आधिपत्य वाले भाग से गुजरने वाले राजमार्ग के निर्माण या चौड़ीकरण के लिए लोक निर्माण विभाग या राष्ट्रीय राजमार्ग को भूमि कभी हस्तांतरित की गई हो। साथ ही नेशनल हाईवे विभाग ने भी डीएफओ के समक्ष ऐसे कोई अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए हैं जिससे साबित हो सके कि आरक्षित वन भूमि एनएच विभाग या लोक कर्म विभाग को कभी हस्तांतरित की गई हो। इस सड़क के सालों साल रखरखाव और नवीनीकरण की जानकारी भी डीएफओ नार्थ टेरीटोरियल सिवनी के पास मौजूद नहीं है।
इन परिस्थितियों में यक्ष प्रश्न यह है कि अगर यह भूमि वन विभाग के आधिपत्य की है तो एनएच डिवीजन ने अब तक लोक निर्माण विभाग की इस सड़क का रखरखाव आखिर किस मद से किया है? पत्र में यह बात भी साफ तौर पर उल्लेख की गई है कि राष्ट्रीय राजमार्ग वन के 3 वनखण्ड के 6 कक्षों से गुजरता है। संरक्षित वन अधिसूचना को (असाधारण राजपत्र) नंबर 3060 - 404 - ग्यारह दिनांक 15 सितम्बर 55 को प्रकाशित होना बताया गया है।
राष्ट्रीय राजमार्ग के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने डीएफओ को पत्र लिखकर कहा था कि राईट ऑफ वे के तहत यह भूमि उनके स्वामित्व की है, और इस पर खड़े वृक्ष कंट्रोल ऑफ राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम वर्ष 2002 के तहत उनकी सम्पत्ति हैं, एवं सड़क के चौड़ीकरण के दौरान कार्य करने तथा उनकी कटाई करने हेतु वन सरंक्षण अधिनियम के प्रावधान इस पर लागू नहीं होते हैं, किंतु उन्होंने राजमार्ग के राइट ऑफ वे में खड़े समस्त वृक्षों की नीलामी कर कटाई का काम भी आरंभ करवा दिया था। वन विभाग ने इस कटाई को अवैध मानते हुए पीपरखुंटा वन खण्ड के कक्ष नंबर पी- 266 में राष्ट्रीय राजमार्ग के अनाधिकृत ठेकेदार के 26 पलाश और 47 सागौन के वृक्ष काटने पर दिनांक 15 अक्टूबर 2008 को वन अपराध नंबर 1897/22 के तहत मामला दर्ज कर लिया था।
माना जा रहा है कि ऊपर के निर्देशों पर वन विभाग चूंकि इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न बना चुका था अतः वह इस मामले को हर तरह से रोकने पर ही आमदा नजर आ रहा था। डीएफओ नार्थ टीटी ने मुख्य वन संरक्षक सिवनी सहित जिला कलेक्टर सिवनी को यह भी सूचित किया था कि राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग ने मार्ग में खड़े वृक्षों को राईट ऑफ वे के तहत राष्ट्रीय प्रजाति के वृक्षों को निजी क्रेताओं को सीधे सीधे ही बेच दिया है, जिससे मध्य प्रदेश वनोपज व्यापार अधिनियम 1969 की की धारा 5 का उल्लंघन हो रहा है। वन विभाग ने मामले को प्रदेश सरकार के माध्यम से केंद्र सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को अग्रिम आदेश और मार्गदर्शन के लिए प्रेषित कर दिया गया था। इस तरह देखा जाए तो नवंबर 2008 में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव और 2009 मई में संपन्न लोकसभा चुनावों के पहले ही सिवनी जिले को एनएचएआई के उत्तर दक्षिण गलियारे के नक्शे से गायब करने का ताना बाना बुन लिया गया था।

 

फोरलेन बचाने के लिए बंद रहा सिवनी

सिवनी। केंद्र सरकार की महात्वाकांक्षी स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना के अंग उत्तर दक्षिण फोरलेन गलियारे के मानचित्र से सिवनी जिले का नामोनिशान मिटाने की कोशिश से सिवनी वासियों के माथे पर ठनका रोष अभी शांत नहीं हुआ है। मंगलवार को जिला मुख्यालय के निवासियों ने स्वप्रेरणा से आधे दिन का बंद कर जता दिया है कि वे फोरलेन के लिए कितने आतुर हैं।
गौरतलब है कि इसके पहले जब परिसीमन और पुर्नारक्षण के चलते सिवनी लोकसभा का विलोपन करने की खबरें आम हुईं थीं तब भी सिवनीवासी सडकों पर उतर आए थे। उस समय भी भगवान शिव की सिवनी के भोले भाले नागरिकों ने शांति, संयम और धैर्य के साथ सिवनी में जनता कर्फ्यू लगाया था, उसकी गूंज दिल्ली तक गई थी। यह अलहदा मामला है कि इतना सब कुछ होने के बाद भी सिवनी लोकसभा के अवसान को बचाया नहीं जा सका था।
इस बार जब फोरलेन बचाने वालों ने बंद का आव्हान किया तब तरह तरह के कायस लगाए जा रहे थे। सोमवार को बंद का आव्हान करने वालों ने भले ही बंद के लिए व्यापक स्तर पर अपील न की हो, किन्तु शहर के व्यवसाईयों ने स्वप्रेरणा से जिस तरह शांति पूर्वक बंद का आयोजन किया वह काबिल-ए-तारीफ ही कहा जा सकता है। सिवनी आज पुनः अपनी उसी बात पर कायम है कि इस फोरलेन के अवसान के प्रयासों के मामले में एक बार फिर सोचना होगा कि मामले मे कांटा कहां फंसा है। मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है, किन्तु नगर पंचायत, लखनादौन के पूर्व अध्यक्ष दिनेश राय और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता राजकुमार खुराना के सार्वजनिक वक्तव्यों से साफ हो जाता है कि सर्वोच्च न्यायालय ने न तो नागपुर रोड पर कुरई घाट और जबलपुर रोड पर बंजारी के पास का काम रोका है, और न ही इसे आरंभ करने में उन्हें कोई आपत्ति है।
अगर इन नेता द्वय की बात सच है तो फिर मामला तत्कालीन जिला कलेक्टर सिवनी पिरकीपण्डला नरहरि के 18 दिसंबर 2008 को जारी किन्तु 19 दिसंबर को पृष्ठांकित आदेश के तहत अवरूद्ध हुआ है। सवाल यह उठता है कि जब काम को सिवनी के जिला कलेक्टर ने ही रोका है, तब फोरलेन बचाने आगे आने वाले संगठनों से जिला कलेक्टर ने इस मामले में चर्चा कर इसका हल निकाल निकालने का जतन क्यों नहीं किया है? सर्वोच्च न्यायालय में मामला लंबित है, इस मामले के दो विशेष पक्षों के रूप में वन एवं पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश और भूतल परिवहन मंत्री कमल नाथ के नाम सामने आ रहे हैं जिन पर आरोप है कि उनके चलते इस सडक का निर्माण रूका हुआ है।
राजनैतिक प्रतिबद्धताओं के चलते एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप आम बात है, किन्तु जब मामला सार्वजनिक और विशेषकर सिवनी के हित का हो तो फिर इसमें राजनैतिक प्रतिबद्धताओं को गौड ही करना आवश्यक माना जाता है, वरना यह पूरा मामला राजनीति की बली ही चढ जाएगा और मूल मुद्दा अंत तक कायम रहेगा। इस मामले में चूंकि एक बात उभरकर सामने आ रही है कि मामले को जिला कलेक्टर के आदेश से रोका गया है, अतः जिला कलेक्टर से मिलकर मामले को सुलझाना ही पहली प्राथमिकता होनी चाहिए, वस्तुतः ऐसा होता अभी तक दिखा नहीं है। जब भी फोरलेन की बात सामने आ रही है, ले दे कर सभी इस मामले को सर्वोच्च न्यायालय पर लाकर छोड़े दे रहे हैं।
आंदोलन का नेतृत्व करने वालों से सिवनी वाले आग्रह कर रहे हैं कि चूंकि मामला जिला कलेक्टर सिवनी के आदेश का है, अतः इस मामले में जिले के विधायक सांसद और प्रभारी मंत्री के सहयोग से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित प्रदेश के मुख्य सचिव आदि को पहल के लिए बाध्य करना होगा, ताकि सिवनी से होकर गुजरने वाली शेरशाह सूरी के जमाने की ऐतिहासिक महत्व की इस सड़क के अस्तित्व को बचाया जा सके। पिछले साल 21 अगस्त को और आज जिला मुख्यालय की जनता ने यह जता दिया है कि वह फोरलेन के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त करने की स्थिति में कतई नहीं है।

 

इनका सिवनी से क्या बैर है?

सिवनी। सिवनी से होकर गुजरने वाले उत्तर दक्षिण गलियारे के फोरलेन मार्ग को पेंच और कान्हा नेशनल पार्क के बीच के अघोषित काल्पनिक वन्य प्राणी गलियारे के कारण वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री जयराम रमेश ने लाल बत्ती दिखाई है, लेकिन इसी गलियारे के बीच से होकर गुजरने वाली बालाघाट जबलपुर नेरोगेज के अमान परिवर्तन कर ब्राडगेज में तब्दील करने के मामले में न केवल वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को ही कोई आपत्ति है और ना ही सिवनी में पदस्थ मुख्य वन संरक्षक को।
फोरलेन के मामले में मुख्य पेंच की ओर किसी का ध्यान शायद नहीं जा रहा है और अगर जा भी रहा है तो वे जान बूझकर इस मुद्दे को छूना ही नहीं चाह रहे हैं। गौरतलब है कि अनेक नेताओं के वक्तव्यों से साफ हो गया है कि सर्वोच्च न्यायालय ने न तो इसका काम रोका है और ना ही चालू होने पर उसे कोई आपत्ति है। अगर यह सच है तो निश्चित तौर पर इस सड़क का काम तत्कालीन जिलाधिकारी सिवनी पिरकीपण्डला नरहरि के 18 दिसंबर 2008 के पत्र क्रमांक 3266 / फोले / 2008 के तहत ही रोका गया है।
पिछले साल जून से सिवनी में अस्तित्व में आए इस पत्र के बारे में न तो जनता के अधिकारों के लिए लड़ने वाले गैर राजनैतिक संगठन ने ही कोई प्रयास किए और न ही राजनैतिक दलों के नुमाईंदों ने। इस बात से साफ जाहिर होता है कि ये नुमाईंदे लोगों को सर्वोच्च न्यायालय के इर्द गिर्द ही घुमाकर भटकाने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं। साफ तौर पर जिला कलेक्टर के इस आदेश से काम रूका होना प्रतीत होता है और सर्वोच्च न्यायालय के बारे में नेताओं के वक्तव्यों से साफ हो जाता है कि सर्वोच्च न्यायालय में भले ही प्रकरण लंबित हो पर इस मामले में काम रूका है तो सिर्फ और सिर्फ तत्कालीन जिला कलेक्टर के 18 दिसंबर 2008 के आदेश से।
मामले में पड़ोसी जिले बालाघाट की ब्राडगेज संघर्ष समिति के एक वक्तव्य ने और रोचक मोड़ ला दिया है। बकौल समिति, उनके बालाघाट से जबलपुर के रेल अमान परिवर्तन के काम में मण्डला और सिवनी के मुख्य वन संरक्षकों ने तो वनों की कटाई की अनुमति प्रदान कर दी है, पर बालाघाट के मुख्य वन संरक्षक इस मामले में हीला हवाला कर रहे हैं। यहां गौरतलब है कि बालाघाट से जबलपुर ब्राडगेज का मार्ग इसी पेंच और कान्हा के अघोषित काल्पनिक कॉरीडोर से होकर गुजर रहा है। पच्चीस अक्टूबर 2008 को वन मण्डलाधिकारी दक्षिण सिवनी सामान्य वन मण्डल ने मुख्य वन संरक्षक सिवनी को लिखे पत्र में साफ तौर पर इस बात को रेखांकित किया गया है कि राजस्व विभाग के नक्शों में आरक्षित वन सीमा में राजमार्ग को नहीं दर्शाया गया है। इस पत्र में वन मण्डलाधिकारी लिखते हैं कि वन विभाग के पास ऐसे कोई दस्तावेज न तो हैं और न ही उपलब्ध कराए गए हैं जिससे स्पष्ट हो सके कि वन विभाग ने लोकनिर्माण विभाग या महामार्ग विभाग को कोई भूमि हस्तांतरित की गई हो।
अगर ऐसा है तो लोक निर्माण विभाग और महामार्ग (राष्ट्रीय राजमार्ग) विभाग से यह पूछना चाहिए कि सालों साल तक इस सड़क का रख रखाव विभाग ने किस मद से किया? इस पत्र में डीएफओ साउथ टेरीटोरियल ने वृक्षों की कटाई करने पर कानूनी कार्यवाही की बाध्यता की बात कही है। वहीं दूसरी ओर इसी काल्पनिक और अघोषित कारीडोर को संवारने की बात करने वाले वन विभाग को बालाघाट से जबलपुर के रेल लाईन अमान परिवर्तन में कोई आपत्ति न होना आश्चर्य जनक ही माना जाएगा। हालाता देखकर यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि केंद्र में बैठी कांग्रेसनीत संयुक्त प्रगतिशील सरकार सहित प्रदेश की भाजपा सरकार और विशेषकर वन विभाग ने अपना मानस बना लिया है कि जतन ऐसे हों कि चाहे कुछ भी हो जाए पर सिवनी के निवासियों को उनका वाजिब हक नहीं मिलने पाए।
आश्चर्य तो तब होता है जब राजनैतिक दलों के साथ जनता के हक के लिए लड़ने वाले संगठन भी उनके साथ ही तुकबंदी मिलाने लगते हैं। आज आवश्यकता इस बात की है कि जनता के हक के लिए लड़ने वाले सर्वोच्च न्यायायल के प्रकरण के साथ ही साथ जिला कलेक्टर के 18 दिसंबर 2008 के आदेश को निरस्त करने की दिशा में संजीदगी से प्रयास करें साथ ही साथ मुख्य वन संरक्षक से यह भी पूछें कि अगर बालाघाट जबलपुर अमान परिवर्तन में झाड़ काटने की अनुमति दी जा सकती है तो फिर ककुरई घाटी में क्या आपत्ति है? यहां इस बात का उल्लेख करना आवश्यक होगा कि यह मामला अक्टूबर 2008 के पहले से ही रोका हुआ है, जब प्रकरण सर्वोच्च न्यायालय की दहलीज पर नहीं पहुंचा था।

 

पीआर सोल्यूशन फाउन्डेशन डे

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

भोपाल। पब्लिक रिलेशन में एक अलग पहचान बना चुकी पीआर सोल्यूशन ने अपनी कामयाबी के तीन साल पूरे कर लिए हैं। पीआरसोल्यूशन ने अपने कामयाबी के सफ़र में कितने ही क्लाइंटों को उनके बिजनेस डवलपमेंट और मीडिया प्लानिंग में सहयोग किया और उन्हें नई ऊंचाईयों तक पहुंचाया है।
पीआर सोल्यूशन की तीसरी वर्षगांठ पर एक समारोह का आयोजन किया गया जिसमे कंपनी के चीफ कंसल्टेंट विजय कुमार और कंपनी के एडवाइज़र वीएन खन्ना ने कंपनी के ब्रोशर का उदघाटन किया। उन्होंने कहा कि इन तीन साल में पीआरसोल्यूशन को हर तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा लेकिन यहां के कर्मचारियों ने अपनी काबिलियत को साबित करते हुए कठिनाइयों को सामना करते हुए बड़ी आसानी से अपनी जिम्मेदारियों को निभाया।
समारोह में बीडीए के अध्यक्ष सुरेन्द्र नाथ भी मौजूद थे। उन्होंने पीआर सोल्यूशन के सभी कर्मचारियों को तीन साल पूरे करने पर बधाई दी। एडवाइज़र वीएन खन्ना ने कंपनी को अपने तीन साल पूरे करने पर बधाई दी। चीफ कंसल्टेंट विजय कुमार ने सभी अतिथियों का कंपनी की तीसरी वर्षगांठ पर स्वागत किया और कहा कि पीआर सोल्यूशन की सफलता में मीडिया का पूर्ण सहयोग रहा है। समारोह के दौरान रमित, राहुल और हिबा ने भी कंपनी के साथ अपने अनुभवों को बांटा।

 

जर्नलिस्ट यूनियन का अगस्त में सम्मेलन

Hindi News Portalधार, मध्य प्रदेश। वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक उज्जैन की हरसिद्धि धर्मशाला में हुई जिसमें पत्रकारों के उत्पीड़न पर चिंता जाहिर करते हुए इसे रोकने के लिए सरकार से प्रभावी कदम उठाने की मांग की गई। यूनियन ने प्रांतीय कार्यसमिति की बैठक और सम्मेलन, सोनकच्छ (जिला देवास) में 28 और 29 अगस्त को आयोजित करने का निश्चय भी किया है। बैठक में विभिन्न पदाधिकारियों की भी नियुक्ति की गई।
यूनियन के प्रांतीय अध्यक्ष राधावल्लभ शारदा, कार्यक्रम आयोजक और वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ अरूण जैन और महासचिव ज्ञानेन्द्र त्रिपाठी ने मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्जवलित कर बैठक का शुभारंभ किया। राधावल्लभ शारदा ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रदेश में वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन, पत्रकारों के हितों के संरक्षण हेतु कार्य कर रही है, जिले की सभी इकाईयां अपने-अपने जिलों में हो रहे पत्रकार उत्पीडन के प्रति सजग रहकर कार्य करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पत्रकारों के विरूद्ध जो भी प्रकरण दर्ज हो रहे हैं उसमें शासन के निर्देशों का पालन अभी भी नहीं हो रहा है। सूचना के अधिकार के तहत पत्रकारों पर दर्ज प्रकरणों की जानकारी ली गई तो आज भी कई पत्रकारों के नाम उस सूची में छिपाए गए प्रतीत होते हैं। यूनियन ने प्रदेश के पत्रकारों की जानकारी चाही तो वह भी उपलब्ध नहीं है, प्रदेश से प्रकाशित समाचार पत्रों की सूची मांगी गई तो वह भी बाबा आदम के जमाने की निकली। इस संबंध में श्रमायुक्त, मुख्यमंत्री और जनसंपर्क मंत्री को भी पत्र लिखने का निर्णय लिया गया है।
यूनियन के प्रदेश महासचिव ज्ञानेन्द्र त्रिपाठी ने बताया कि इस अवसर पर बैठक में सर्वानुमति से 11 अगस्त तक प्रदेशभर में सदस्यता अभियान चलाकर नए पत्रकारों को जोड़ने और आगामी प्रांतीय कार्यसमिति बैठक और सम्मेलन सोनकच्छ (जिला देवास) में 28 और 29 अगस्त को आयोजित करने का निश्चय किया गया। निष्क्रिय जिला इकाईयों को भंग कर उनका पुनर्गठन किया जाएगा। यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष शारदा ने प्रांतीय कार्यसमिति में होशंगाबाद की भावना विष्ट को प्रांतीय संगठन सचिव, ओमप्रकाश सोनी शाजापुर को प्रांतीय कोषाध्यक्ष, प्रकाश अग्रवाल शहडोल को शहडोल और रिवा संभाग अध्यक्ष, तुषार कोठारी को कार्यसमिति सदस्य, राजेन्द्रसिंह पंवार सोनकच्छ को उज्जैन संभाग का अध्यक्ष मनोनीत किया। इसी प्रकार निष्क्रिय इकाई में फेरबदल करते हुए इंदौर के दिलीप मिश्रा को इंदौर संभाग के जिलों के लिए नियुक्त किया गया।
बैठक में प्रमुख रूप से प्रांतीय उपाध्यक्ष सुनील पलेरिया (बैतूल), दिग्विजयसिंह (उपाध्यक्ष) जबलपुर, मनोज मेहता (झाबुआ) उपाध्यक्ष, प्रांतीय सचिव दौलत भावसार, दिलीप मिश्रा, संजय जोशी सचिव, जगदीश जोशी संगठन सचिव, गेंदालाल तिवारी और एसके भारद्वाज भोपाल प्रांतीय कार्यसमिति सदस्य सहित प्रदेश कार्यसमिति सदस्य, संभागीय कार्यसमिति सदस्य एवं शहडोल, भोपाल, होशंगाबाद, हरदा, धार, इंदौर, देवास, झाबुआ, रायसेन, विदिशा, अशोक नगर, गुना, जबलपुर सहित अन्य जिलों के पदाधिकारियों ने हिस्सा लेकर यूनियन को मजबूत बनाने का संकल्प लिया।

 

शिक्षक विद्यार्थियों के सम्पूर्ण विकास पर ध्यान दें-राज्यपाल

भोपाल। राज्यपाल एवं कुलाधिपति रामेश्वर ठाकुर ने रीवा में अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शिक्षकों से कहा कि वे विद्यार्थियों के सम्पूर्ण विकास पर ध्यान केन्द्रित करें। जब प्रत्येक विद्यार्थी की तरक्की सुनिश्चित होगी, तभी देश और समाज की तरक्की होगी। राज्यपाल ने इस अवसर पर उपाधियां प्रदान करते हुए विद्यार्थियों के उज्जवल भविष्य की कामना की।
कुलाधिपति ने शिक्षकों को गुरुकुल परम्परा की याद दिलाते हुए कहा कि वे शिक्षा के क्षेत्र में गुरुकुल परम्परा की अच्छाईयों को समावेशित करें। साथ ही, शिक्षक स्वयं को गुरुकुल के महर्षि प्रमाणित करने का भी प्रयास करें। उन्होंने गुरुकुल परम्परा के अनुरूप विश्वविद्यालयों की गरिमा और विश्वसनीयता को चिरस्थाई बनाने की दिशा में कार्य करने पर बल दिया और विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय का कीर्तिवाहक और देश का कर्णधार निरूपित करते हुए परामर्श दिया कि अनुशासन में रहकर शिक्षा के उपलब्ध संसाधनों का समुचित दोहन करें। राज्यपाल ने अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय को विंध्य क्षेत्र के ग्रामीण परिवेश का गौरव बताते हुए कहा कि यहां समाज के सभी वर्ग के बच्चों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिये प्रेरित करने के विशेष प्रयास किये जाएं।
राज्यपाल ने दीक्षांत समारोह के आयोजन को विश्वविद्यालय का स्वर्णिम दिवस प्रतिपादित करते हुए शिक्षकों एवं विद्यार्थियों से कहा कि वे इस अवसर पर मिल-जुलकर विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का गहन विश्लेषण करें। तदनुसार भविष्य की योजनाएं संचालित करें। विशिष्ट अतिथि के रूप में देश के भूतपूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जेएस वर्मा ने दीक्षांत भाषण दिया और विद्यार्थियों से कहा कि ज्ञान का उपयोग सामाजिक न्याय और जरूरतमंदों के कल्याण के लिये भी किया जाना चाहिये। समारोह की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो शिवनारायण यादव ने प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस गरिमामय समारोह में विश्वविद्यालय परिवार के सभी सदस्य और विंध्य क्षेत्र के गणमान्य नागरिक शामिल हुए।

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भोपाल ने कहा 'सब के लिए शिक्षा'

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