भोपाल ने कहा 'सब के लिए शिक्षा'

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भोपाल। भोपाल ने कहा 'सब के लिए शिक्षा' सुनिश्चित हो  'एक ही लक्ष्य-सब के लिए शिक्षा' इस अभियान का 'हम' हिस्सा हैं और मांग करते हैं कि सरकार इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पर्याप्त संसाधन जुटाए। भोपाल में ' नेशनल कोअलिशन फॉर एजुकेशन' के इस हस्ताक्षर अभियान का हिस्सा बने लगभग पांच हज़ार लोग। उन्नीस अप्रैल 2010 को कोलार रोड से आरम्भ होकर कमला नगर, अरेरा कालोनी, न्यू मार्केट, नेहरु नगर चौराहा के बाद सर्व धर्म पर सप्ताह भर बाद 26 अप्रैल की सुबह सबके लिए शिक्षा के लिए भोपाल की प्रतिबद्धता व्यक्त करने वाला हस्ताक्षर अभियान संपन्न हुआ।

'नेशनल कोअलिशन फॉर एजुकेशन' के इस अभियान में न सिर्फ स्कूल कॉलेज के विद्यार्थी, बल्कि महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों ने भी खुल कर भागीदारी की। जहां एक ओर सीएसपी न्यू मार्केट, एसएचओ कमला नगर थाना और थाना प्रभारी जवाहर चौक इस अभियान का हिस्सा बने, वहीं मध्य प्रदेश समाज कल्याण बोर्ड की अध्यक्ष उषा चतुर्वेदी ने जवाहर चौक क्षेत्र में पहला हस्ताक्षर कर अभियान को बल दिया। 'हालॉकि  राज्य सरकार भी सब को शिक्षा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है फिर भी इस अभियान से जागरूकता की जो अलख जगी है वो सराहनीय है' इन शब्दों के साथ उषा ने अभियान को अपना समर्थन दिया। इस अभियान को चलाने वाले संगठन 'नेशनल कोअलिशन फॉर एजुकेशन' के महासचिव रमाकांत राय ने कहा की, 'हमें  हर्ष है की आखिर एक अप्रैल को 'शिक्षा का अधिकार कानून में तब्दील हो गया, ये वाकई एक क्रांतिकारी कदम है, पर इसका सफल कार्यान्वयन तभी संभव है जब सभी सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की पर्याप्त भर्ती की जाए और जीडीपी का करीब 6 प्रतिशत शिक्षा के लिए खर्च किया जाए।
संसाधनों की कमी न हो पाए यह बात आगे बढ़ाते हुए प्रदेश में कार्यरत डीके चतुर्वेदी ने बताया कि इस वर्ष देश भर में इस अभियान से करीब 10 लाख लोग जुड़ चुके हैं जिनमें अब 5000 भोपाल से भी शामिल हैं। ज्ञातव्य है कि सन् 2000 से प्रत्येक वर्ष 19 अप्रैल से एक सप्ताह, 'नेशनल कोअलिशन फॉर एजुकेशन' सरकार को सब के लिए शिक्षा मुहैय्या  कराने के उसके वादे को याद दिलाने का काम करता रहा है। सारे विश्व में गैर सरकारी संगठन 'ग्लोबल एक्शन वीक' के नाम से सरकारों को उनके इस वादे की याद दिलाते हैं। भारत में इस अभियान को चलाने वाला यह संगठन यूनेस्को, बचपन बचाओ आन्दोलन, आल इंडिया प्राइमरी टीचर्स फेडरेशन, आल इंडिया फेडरेशन ऑफ़ टीचर्स ऑर्गनाइजेशन प्लान और सेव दी चिल्ड्रन जैसी बाल अधिकारों के लिए संघर्षरत संस्थाओं का सांझा मंच है।

 

सुलेखा बाई एक सफल डेयरी व्यवसायी बनी

भोपाल। देवनगर, गोटेगांव जिला नरसिंहपुर की सुलेखा बाई अब सफलतापूर्वक डेयरी चला रही हैं। सुलेखा बाई अब गर्व के साथ बताती हैं कि उन्होंने कभी भी नहीं सोचा था कि वे एक दिन स्वयं के व्यवसाय के रूप में डेयरी का संचालन करेंगी।
सुलेखा बाई और उनके पति द्वारका प्रसाद गांव में ही कृषि मजदूरी कर अपने परिवार का गुजर-बसर कर रहे थे। कभी-कभी तो उनके सामने मजदूरी न मिलने के कारण परिवार चलाने का संकट सामने खड़ा हो जाता था। दिन पर दिन बढ़ते आर्थिक संकट को देखते हुए वे अपना छोटा-मोटा व्यवसाय शुरू करना चाहते थे। इस संबंध में उन्होंने अपने परिचितों से भी चर्चा की।
अनुसूचित जाति वर्ग के द्वारका को एक दिन राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम द्वारा संचालित योजना की जानकारी मिली। इस संबंध में उन्होंने नरसिंहपुर में जिला अंत्यावसायी कार्यालय में सम्पर्क किया। सारी औपचारिकताओं के बाद उन्हें डेयरी व्यवसाय के लिये डेढ़ लाख रुपये के ऋण की मंजूरी मिली। इस राशि से उन्होंने चार अच्छी नस्ल की भैंस खरीदीं। इसके बाद सुलेखा बाई ने भी कंधे से कंधा मिलाकर भैंसों की देखभाल शुरू की। आज वे अपने घर में ही सफलतापूर्वक डेयरी चला रही हैं। उनके पति द्वारका प्रसाद दूध बेचने नजदीक के ही शहर गोटेगांव नियमित रूप से जाते हैं। आजकल उन्हें सब खर्च हटाकर 300 रुपये प्रतिदिन की आमदनी प्राप्त हो रही है। सुलेखा बाई बताती हैं कि वे अपने डेयरी व्यवसाय को और बढ़ाना चाहती हैं। इस संबंध में उन्होंने नजदीक के बैंक से दोबारा सम्पर्क किया है।

 

नेत्रहीन विद्यार्थियों की पढ़ाई आसान

भोपाल। सामान्य बच्चों के साथ जब विकलांग बच्चे पढ़ेगें तभी उनका सही विकास होगा। गंभीर रूप से मानसिक विकलांग बच्चों को छोड़कर अन्य विकलांग बच्चों के लिये पृथक से स्कूलों में पढ़ाना उचित नहीं है। भारत में केवल मध्यप्रदेश ही एकमात्र ऐसा राज्य है जहां स्कूलों में पढ़ने वाले नेत्रहीन बच्चों के लिये ब्रेल लिपि में पुस्तकों का प्रकाशन किया गया है। अरूषि संस्था के अनिल मुद्दगल ने यहां आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में 'समावेशी शिक्षा' विषयक कार्यशाला में ये बात कही। कार्यक्रम में प्रशासन अकादमी महानिदेशक डॉ संदीप खन्ना, सागर एवं भोपाल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एमएल जैन, भारतीय पुलिस सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी दामले, फेडरेशन ऑफ मप्र चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्रीज के सचिव प्रताप वर्मा, शासकीय नूतन महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ रोहित त्रिवेदी, परिवीक्षाधीन आईएएस एवं राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी, विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधि, स्कूलों के शिक्षक, प्रधानाध्यापक एवं प्राचार्य आदि उपस्थित थे।
मुद्दगल ने कहा कि स्कूल विकलांग बच्चों को एडमीशन देने में अनावश्यक परेशान न करें। नेत्रहीन बच्चों को कक्षा में आगे बैठाकर बोलकर पढ़ाएं। उन्होंने बताया कि अरूषि संस्था विकलांग बच्चों के सशक्तीकरण एवं शिक्षा देने के लिये प्रयासरत है। यह संस्था स्कूलों एवं अन्य सार्वजनिक भवनों में विकलांगों के रेम्प एवं शौचालय बनाने में अपना मार्गदर्शन नि:शुल्क प्रदान करती है। प्रारंभ में कार्यशाला में उपस्थित अतिथि वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए प्रशासन अकादमी महानिदेशक डॉ संदीप खन्ना ने कार्यशाला आयोजन के उद्देश्य की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मप्र में अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग और विकलांग बच्चों को पढ़नें के लिये 'सर्व शिक्षा अभियान कार्यक्रम' के बाद समावेशी अभियान चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम के क्रियान्वयन में आने वाली प्रशासनिक परेशानियों से प्रतिभागी अवगत कराएं ताकि उनके निराकरण के लिए शासन स्तर पर पहल की जा सके।
नूतन महाविद्यालय के प्राध्यापक (नेत्रहीन) डॉ रोहित त्रिवेदी ने कहा कि मप्र में सर्वशिक्षा अभियान के बाद 'समावेशी शिक्षा' पर जोर दिया जा रहा है। इससे विकलांग बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिलेगी जो कि विकलांग बच्चों के लिये संचालित होने वाले स्कूलों में मुश्किल कार्य था। उन्होंने कहा कि समावेशी शिक्षा की सही व्यवस्था स्कूल में की जाये और बच्चा भी इसको समझे। मप्र चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्रीज के सचिव प्रताप वर्मा ने बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर जोर देते हुये इटली के रेकियो शहर में मानसिक रूप से कमजोर बच्चों के लिये की गई अच्छी शिक्षा व्यवस्था की जानकारी दी। परिवीक्षाधीन आईएएस अधिकारी मण्डला किरण गोयल ने आदिवासी बहुल मण्डला जिले में स्कूलों में शिक्षा की व्यवस्था के लिए किये जा रहे प्रयासों से अवगत कराया। सागर एवं भोपाल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति जैन ने विकलांग बच्चों को पढ़ने में यथासंभव मदद का आह्वान उपस्थित सभी लोगों से किया। कार्यक्रम में अरूषि के पोलियोग्रस्त बालिका 'तारा' की लगन एवं दिनचर्या पर आधारित टेलीफिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। कक्षा दसवीं में अध्ययनरत नेत्रहीन छात्र राजेन्द्र धुर्वे ने अपने अनुभव सुनाये।

 

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