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महिलाओं के
लंबे जीवन का रहस्य
अगर आप अमरीका के
पूरे नागरिकों का एक साथ एक विशाल सामूहिक फोटो ले सकें, तो उस
में महिलाओं की संख्या पुरुषों से 60 लाख अधिक होगी। गूढ़
अध्ययन बताता है कि इस देश में, महिलाएं पुरुषों से लगभग सात
वर्ष अधिक जीवित रहती हैं। आधुनिक विश्व में संस्कृतियां,
आहार, जीवन शैली और मृत्यु के कारण भिन्न हैं, लेकिन एक बात
समान है कि महिलाएं पुरुष से अधिक जीती हैं।
यह असाधारण प्रक्रिया
जन्म से पहले शुरू हो जाती है। गर्भ धारण पर नर भ्रूण संख्या
में मादा से लगभग 100 से 110 के अनुपात में अधिक होते हैं।
जन्म के समय में यह अनुपात 100 लड़कियों पर 105 तक गिर जाता
है। तीस वर्ष की आयु तक महिलाओं की संख्या की बराबरी के लिए
मात्र पर्याप्त पुरुष होते हैं। इसके बाद महिलाएं बढ़त शुरू कर
देती हैं। अस्सी वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं की संख्या
पुरुषों से लगभग दोगुनी है।
‘आप मृत्यु के दस या
बारह मुख्य कारणों पर विचार करें,’ संक्रामक रोग विज्ञानी
डेबोरा विंगार्ड कहती हैं-‘हर रोग पुरुषों को अधिक मारता है।’
वह धीरे-धीरे एक के बाद एक पुरुषों के लिए हृदय रोग, फेफड़ों
का कैंसर, वधोंमाद, यकृत का सूत्रण रोग तथा निमोनिया की दुःखद
नियति बताती है। ये सब महिलाओं की तुलना में अमरीकी पुरुषों को
ही लगभग दोगुनी दर पर अपना शिकार बनाते हैं।
एक शताब्दी पूर्व
अमरीकी पुरुष, महिलाओं से अधिक थे और अधिक समय तक जीवित रहते
थे। लेकिन बीसवीं सदी में महिलाओं ने अधिक समय तक जीवित रहना
शुरू कर दिया, क्योंकि मुख्यतः गर्भधारण व प्रसव कम खतरनाक हो
गए हैं। अंतर क्रमशः बढ़ा। अमरीका में 1946 में, पहली बार
महिलाएं पुरुषों से अधिक संख्या में थीं। इस स्थिति के
जिम्मेदार स्वयं पुरुष हैं। वे महिलाओं की तुलना में धूम्रपान,
मद्यपान और जीवन को खतरे में डालने वाले अधिक जोखिम उठाते हैं।
महिलाओं की तुलना में पुरुषों की अधिक हत्याएं होती हैं। उन की
आत्महत्या की दर एवं घातक कार दुर्घटनाओं की दर महिलाओं की
अपेक्षा अधिक होती है। पुरुष चालक अलकोहल से संबद्ध अकाल
मृत्यु के कहीं अधिक शिकार होते हैं।
लेकिन आयु के इस अंतर
को आचरण स्पष्ट नहीं करता और न ही तनाव इस का उत्तर है।
पचासादि में हृदय रोग ने अधिकाधिक पुरुषों को अपना शिकार
बनाया, तो निगमित क्षेत्र के बोर्ड रूम पर इसका आरोप लगाया
गया। महिलाओं को घर से बाहर श्रम शक्ति में आने दो, डॉक्टरों
ने कहा। वे भी पुरुष की सी दर पर मरने लगेंगी। लेकिन इस
शवयात्रा के उलटे ही परिणाम हुए। सन् 1950 और 1985 के बीच
कामकाजी महिलाओं की संख्या अमरीका में लगभग दोगुनी हुई है। कई
अध्ययनों ने सिद्ध किया है कि ये कामकाजी महिलाएं घरेलू
महिलाओं की तरह ही स्वस्थ हैं। लिंग भिन्नता का अध्ययन कर रहे
कुछ वैज्ञानिकों का विश्वास है कि शायद मां प्रकृति भी महिलाओं
का ही पक्ष लेती है।
प्रत्येक जीवित वस्तु
अपने गुणसूत्रों (क्रोमोसोमो) के निर्देशानुसार जुड़ी होती है,
और मानव में उनके 23 योग होते हैं। लेकिन नर में, इनमें से एक
नाजुक बेमेल योग होता है, जिसे ‘एक्स-वाई’ का नाम दिया जाता
है। मादाओं में अनुकूल जोड़ा ‘एक्स-एक्स’ होता है तथा इसकी
आनुवंशिक ‘प्रोत्साहक’ शक्ति, कभी-कभार महिलाओं के उत्कृष्ट
लचीलेपन के एक लक्षण के रूप में उद्धत होती है। अगर नर का
अकेला ‘एक्स’ गुणसूत्र में खराबी के कारण होती है। महिलाओं की
तुलना में ये रोग पुरुषों में आम है।
इस अकेले ‘एक्स’
सिद्धांत से भी समस्या हल नहीं होती। केवल आयु अंतर के अलावा
इसकी प्रामाणिकता को रेखांकित करने वाले इस भयावह आनुवंशिक
रोगों के मामले पर्याप्त नहीं है। कुछ अनुसंधानकर्ता ‘वाई’ नर
गुणसूत्र को इस अंतर के लिए दोषी मानते हैं। इस का उत्तर
हारमोन भी हो सकते हैं। 40 वर्ष की अवस्था तक सभी महिलाएं
लगातार एस्ट्रोजन का उत्पादन कर रही होती हैं, पर इस उम्र तक
प्रति महिला पर हृदय रोग से तीन पुरुष मरते हैं। लेकिन इस से
अधिक उम्र में महिलाओं की यह लाभकर स्थिति लगातार कम होती जाती
है। दोनों लिंगों के लिए अब हृदय रोग मृत्यु का मुख्य कारण है।
लेकिन पुरुषों की तुलना में महिलाओं को हृदय रोग से मृत्यु पर
एक अतिरिक्त दशक का लाभ मिल जाता है।
अब अगर एस्ट्रोजन ही
इस कहानी की नायिका है तो टेस्टोस्टेरोन यानी नर हारमोन शायद
खलनायक। वयःसंधि तक लड़कों तथा लड़कियों में कोलेस्टेरोल स्तर
समान होता है। लेकिन जब लड़के यौवनावस्था को छूते हैं,
टेस्टोस्टेरोन निर्मित होने लगता है और उन के एचडीएल
कोलेस्टेरोल यानी ‘अच्छे कोलेस्टेरोल’ का स्तर कम होने लगता
है। पर लड़कियों में एचडीएल का स्तर स्थिर बना रहता है। दोनों
लिंगों में बुरे कोलेस्टेरोल का स्तर यौवनावस्था के बाद बढ़ता
है, लेकिन पुरुषों में यह बढ़ोतरी कुछ तेज है।
टेस्टोस्टेरोन, अपने
बीते सुनहरे दिनों पर निर्वाह करता प्रतीत होता है। यह हारमोन,
जो आक्रामकता को जन्म देता है और जो बड़ी मांसपेशियां उत्पादित
करता है, संभवतः एक समय में उत्कृष्ट प्रक्रिया हो जब पुरुषों
का मुख्य दायित्व विरोधी कबीलों पर पतिर फेंकना होता था, लेकिन
टेस्टोस्टेरोन ने यह महत्व अब खो दिया है।
लिंगों में पाया गया
प्रत्येक अंतर महिलाओं का ही पक्ष नहीं लेता। महिलाएं, पुरुषों
की तुलना में, संघातक रोगों के प्रति कम संवेदनशील हैं जबकि वे
रोजमर्रा के रोग व दर्द के प्रति अधिक नाजुक हैं। 1976 में एक
डायरी लेखक ने लिया। ‘चिकित्सकों को मैंने यह कहते सुना है कि
उन के पास दो महिला रोगियों के अनुपात में एक पुरुष रोगी आता
है।’ महिलाएं पुरुषों की तुलना में डॉक्टर के पास अधिक चक्कर
लगाती है, अधिक निर्धारित व अनिर्धारित दवाइयां लेती हैं तथा
अधिक दिन बिस्तर पर व्यतीत करती हैं। वे गठिया, पैरों की सूजन,
मूत्राशय के संक्रमण, मस्सों, बवासीर, मासिक स्राव रोग,
सिरदर्द तथा स्फीत शिरा से परेशान रहती हैं।
इसी समय पुरुषों को
दिल का आघात व दौरा पड़ते हैं। अतः महिलाएं बीमार अवश्य पड़ती
है, लेकिन पुरुष मर जाते हैं। मानसिक स्वास्थ्य? अवसाद पुरुषों
की तुलना में महिलाओं में आम है। लेकिन खंडित मानसिकता
(स्कीजोफ्रेनिया) यानी अत्यधिक गंभीर मानसिक बीमारी, अकसर
पुरुषों को अधिक घातक रूप से प्रभावित करती है। पत्नी की
मृत्यु पर महिलाओं की तुलना में पुरुष कठिनाई से बसर करते
प्रतीत होते हैं। वे अधिक उदास रहते हैं, अधिक बीमार रहते हैं
तथा संभवतः अधिक मरते हैं। पुरुष इस अवस्था का सामना नहीं कर
पाते, क्योंकि कई मामलों में उन की पत्नियां ही एकमात्र अंतरंग
होती हैं। बिना पत्नी के नये-नये विधुर हुए लोग टूट जाते हैं
तथा मर जाते हैं। इसके विपरीत व महिलाएं, जो अपना पति खो देती
हैं, अकसर अपने निकट मित्रों का एक समूह रखती हैं, जिन पर वे
विश्वास कर सकती हैं।
लेकिन व्यवहार बदल
रहा है, अतः पुरुषों और महिलाओं के बीच स्वास्थ्य का अंतर किसी
स्थान विशेष तक सीमित नहीं है। हाल के दशकों में महिलाओं तथा
पुरुषों की जीवन अवधि के बीच का अंतर कम हुआ है। अर्थ यह नहीं
है कि महिलाओं का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है। महिलाओं का
स्वास्थ्य सुधर रहा है, लेकिन पुरुषों का स्वास्थ्य भी तेजी से
सुधर रहा है।
पुरुष कम धूम्रपान कर
रहे हैं, कम मद्यपान कर रहे हैं, तथा अच्छा खा रहे हैं। ‘अंतर
इस लिए नहीं सिकुड़ रहा है कि महिलाएं आज पुरुषों की तरह
व्यवहार कर रही हैं,’ संक्रामक रोग विज्ञानी विगार्ड कहती हैं।
‘यह
इसलिए सिकुड़ रहा है क्योंकि पुरुष ही महिलाओं की तरह आचरण कर
रहे हैं।’

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